तेजस लड़ाकू विमान 65 फीसदी होंगे स्वदेशी : अब इजरायली रडार के बजाय लगाये जाएंगे देशी इलेक्ट्रॉनिक एईएस रडार

नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना को मिलने वाले एलसीए तेजस लड़ाकू विमान 65 फीसदी स्वदेशी होंगे। स्वदेशी रक्षा तकनीक को बढ़ावा देने के लिए देशी उत्तम रडार लगाये जायेंगे। यानी वायुसेना को मिलने वाले विमानों का पहला जत्था इजरायल के रडार की जगह देशी उत्तम रडार से लैस होगा। एयरो इंडिया में दिए गए 83 एलसीए एमके-1ए में से 63 विमानों में इलेक्ट्रॉनिक एईएस रडार लगेंगे, जिसके लिए डीआरडीओ और एचएएल में करार हुआ है। वायुसेना के पहले वाले ऑर्डर के 40 एमके-1 विमानों में मैकेनिकल इजराइली रडार लगाये जायेंगे। एचएएल ने तेजस में स्वदेशी सामग्री 62% से बढ़ाकर 65% करने का लक्ष्य बनाया है।

स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय वायु सेना में शामिल किए जाने वाले 123 एलसीए तेजस विमानों में से 51% में देसी उत्तम रडार लगाये जायेंगे, जो इजरायली रडार की जगह लेंगे। वायुसेना के पहले वाले ऑर्डर के 40 एलसीए तेजस एमके-1 विमानों में एलसीए एमके-1ए के मुकाबले 43 तरह के सुधार किये जाने हैं। इनमें हवा से हवा में ईंधन भरने, लंबी दूरी की बियांड विजुअल रेंज मिसाइल लगाने, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के लिए दुश्मन के रडार और मिसाइलों को जाम करने के लिए सिस्टम लगाया जाना है। इन सभी 40 एलसीए एमके-1 विमानों में मैकेनिकल इजराइली रडार लगाये जायेंगे। इन 40 एमके-1 विमानों को पहले ही वायुसेना में शामिल किये जाने की प्रारंभिक और अंतिम परिचालन मंजूरी मिल चुकी है, जिनका ऑर्डर पहले ही एचएएल को दिया जा चुका है। इनमें से 18 विमान मिल चुके हैं और वायुसेना की सेवा में हैं।

एयरो इंडिया में 3 फरवरी को 83 तेजस मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर एचएएल को दिया गया था। इन सभी में इलेक्ट्रॉनिक एईएस रडार लगेंगे, जिसके लिए डीआरडीओ और एचएएल में करार हुआ है। समझौते के मुताबिक 21वां तेजस विमान एमके-1ए स्वदेशी उत्तम रडार से लैस होगा। उत्तम रडार ने अब तक के परीक्षणों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। इसका मतलब है कि 83 में से 63 विमानों में डीआरडीओ की लैब इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (एलआरडीई) द्वारा विकसित स्वदेशी उत्तम रडार लगाये जाने हैं। इससे पहले इन विमानों में इजरायल की फर्म ईएलटीए के एईएसए रडार ईएल/एम 2052 लगाये जाने की योजना थी।एलसीए तेजस के एमके-1ए संस्करण में फिलहाल स्वदेशी सामग्री 50% है लेकिन स्वदेशी उत्तम रडार लगने से तेजस 52% तक स्वदेशी हो जायेगा, जिसे आगे धीरे-धीरे 62% तक ले जाया जायेगा।

एचएएल के सीएमडी आर माधवन का कहना है कि हम तेजस में स्वदेशी सामग्री को 62% से बढ़ाकर 65% करने का लक्ष्य बना रहे हैं। उत्तम एक अत्याधुनिक एईएसए रडार है जो कई लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और टोही में सहायता के लिए उच्च-रिज़ॉल्यूशन के चित्र ले सकता है। उत्तम रडार के परियोजना निदेशक शेषगिरी पी ने कहा कि इसका परीक्षण दो एलसीए एलएसपी-2, एलएसपी-3 और एक अन्य जेट पर किया जा रहा है। यह परीक्षण वर्तमान में एयर-टू-एयर मोड के लिए है। एक्जीक्यूटिव जेट में उत्तम रडार का परीक्षण एयर-टू-एयर, एयर-टू-सी और एयर-टू-ग्राउंड यानी तीन बुनियादी मोड में किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और रडार विकास प्रतिष्ठान (एलआरडीई) के अनुसार उत्तम रडार प्रणाली में ऐसी विशेषताएं हैं जो युद्ध परिदृश्य के लिए बेहतर है। यह प्रणाली मिसाइलों, हवा से हवा, हवा से जमीन और हवा से समुद्र मोड के लिए उच्च सटीकता के साथ कई लक्ष्यों पर नजर रखने में सक्षम है।

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