परिवार के सात लोगों की हत्यारी शबनम की फांसी टली?

कहते हैं कि प्यार भगवान का रूप होता है लेकिन जब इस प्यार में खोट आ जाए तो यमराज बनने में देर नहीं लगती. 13 साल पहले शबनम का प्यार इतना जहरीला हुआ कि अपने ही 7 लोगों को मौत की नींद सुला गया. शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर जो किया उसकी सजा फांसी भी कम है लेकिन कानून के हिसाब से तो यही सजा सबसे बड़ी है और उसके गुनाहों के लिए मिली भी है लेकिन सवाल ये है कि आखिर वो दिन कब आयेगा जब ये क्रूर हत्यारिन फांसी के फंदे पर झूलेगी. क्योंकि आज मंगलवार (23 फरवरी) को उसके मृत्युदंड की तारीख तय होनी थी लेकिन एक बार फिर टल गई है. मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा के बावनखेड़ी का है. यहां सामूहिक हत्याकांड की दोषी शबनम की फांसी एक बार फिर टल गई है. अमरोहा में जनपद न्यायालय ने अभियोजन से कातिल शबनम का ब्यौरा मांगा था. लेकिन शबनम के अधिवक्ता की ओर से राज्यपाल को दया याचिका दाखिल कर दी गई. फिर से दया याचिका दाखिल होने के कारण फांसी की तारीख मुकर्रर नहीं हो सकी है. 

बता दें शबनम की फांसी को लेकर मंगलवार को जिला जज की अदालत में सुनवाई हुई. पहले ही माना जा रहा था कि जिला जज की अदालत में शबनम की रिपोर्ट सौंपी जाएगी और अगर इस रिपोर्ट में कोई याचिका लंबित नहीं पाई गई तो शबनम की फांसी की तारीख तय की जा सकती है. लेकिन शबनम के वकील ने कुछ दिन पहले ही फिर से दया याचिका के लिए राज्यपाल से गुहार लगाते हुए जिला जेल रामपुर प्रशासन को प्रार्थनापत्र सौंपा था. आज सुनवाई में इसी का जिक्र आया, जिसके कारण फांसी की तारीख मुकर्रर नहीं हो सकी.

क्या है पूरा मामला
बता दें कि 14/15 अप्रैल 2008 की दरम्‍यानी रात को शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के 7 लोगों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी. इस मामले में निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने दोनों की फांसी की सजा बरकरार रखी थी. दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उसकी पुनर्विचार याचिका भी ख़ारिज कर दी थी. इसके बाद राष्ट्रपति ने भी शबनम की दया याचिका को ख़ारिज कर दिया. हालांकि, नैनी जेल में बंद सलीम की दया याचिका पर अभी फैसला होना है.

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