माँ संतोषी का व्रत सुख , शांति और वैभव का प्रतीक

संतोषी माता के व्रत की हमारे जीवन में इतनी अद्भुत महत्वता है .जो हमारे जीवन को कष्टों से मुक्त कर सम्पन्नता की और ले जाता है. संतोषी माता को हिंदू धर्म में संतोष, सुख, शांति और वैभव की माता के रुप में पूजा जाता है.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता संतोषी भगवान श्रीगणेश की पुत्री हैं. मानव जीवन में संतोष होना जरूरी होता है .संतोष के ना होने से हम तृष्णा की अग्नि में जलते रहते है . संतोष ना हो तो इंसान मानसिक और शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर हो जाता है. संतोषी मां हमें संतोष दिला हमारे जीवन में खुशियों का प्रवाह करती हैं.

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माता संतोषी का व्रत पूजन करने से धन, विवाह संतान,आदि भौतिक सुखों में वृद्धि होती है. यह व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से शुरू किया जाता है . आपके जीवन में सुख-सौभाग्य की कामना से माता संतोषी के 16 शुक्रवार तक व्रत किए जाने का विधान है.

1.आपको चाहिए की आप सूर्योदय से पहले उठकर घर की सफ़ाई इत्यादि पूर्ण कर लें.

2.स्नानादि के पश्चात घर में किसी सुन्दर व पवित्र जगह पर माता संतोषी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.

3. माता संतोषी के संमुख एक कलश जल भर कर रखें. कलश के ऊपर एक कटोरा भर कर गुड़ व चना रखें.

4.माता के समक्ष एक घी का दीपक जलाएं.

5. माता को अक्षत, फ़ूल, सुगन्धित गंध, नारियल, लाल वस्त्र या चुनरी अर्पित करें.

6. माता संतोषी को गुड़ व चने का भोग लगाएँ.

8. संतोषी माता की जय बोलकर माता की कथा आरम्भ करें.

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