7वें चरण की वोटिंग में भी बंगाल में बवाल, गाड़ियां फूंकी और चले बम

कोलकाता । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता और उपनगरीय क्षेत्रों की 9 संसदीय सीटों पर होने वाले मतदान से पहले  राजधानी कोलकाता और आसपास के इलाके में व्यापक हिंसा की शुरुआत हो गई है। सबसे अधिक हिंसक परिस्थिति राजधानी कोलकाता से सटे उत्तर 24 परगना जिले के भाटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में है।

 

यहां 19 मई को अंतिम चरण लोकसभा मतदान के साथ विधानसभा का उपचुनाव होना है। भारतीय जनता पार्टी में अर्जुन सिंह के शामिल हो जाने के बाद यह सीट खाली हुई थी। यहां तृणमूल कांग्रेस ने पूर्व मंत्री मदन मित्रा को मैदान में उतारा है। हालांकि उनके खिलाफ अर्जुन सिंह के बेटे पवन सिंह चुनावी मैदान में खड़े हैं।

 

शनिवार रात 10:00 बजे से पूरे इलाके में तृणमूल-भाजपा के बीच व्यापक हिंसा की शुरुआत हो गई है। आर्य समाज मोड़ पर दोनों पक्षों के लोग एक दूसरे से भिड़ गए। आरोप है कि इस दौरान जमकर गोलीबारी हुई है। यहां खड़ी कुछ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया है। बमबाजी भी हुई है। सूचना मिलने के बाद जिला पुलिस और केंद्रीय बालों की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची है लेकिन हालात को संभाला नहीं जा सका है। उत्तर 24 परगना जिले के तृणमूल अध्यक्ष और राज्य के खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने इस हिंसा के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अर्जुन सिंह को दोषी ठहराया है। साथ ही यहां से तृणमूल के उम्मीदवार मदन मित्रा ने कहा कि अर्जुन सिंह ने खुद  इलाके में गोली चलाई हैं और तृणमूल कार्यकर्ताओं को मारा पीटा है।

 

उधर अर्जुन सिंह ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में तृणमूल ने बाहरी अपराधियों के जरिए हिंसा कराया है। बम और गोली चलाने का काम तृणमूल के भाड़े पर लाए गए गुंडों ने किया है। उन्होंने विशेष पुलिस पर्यवेक्षक विवेक दुबे की कार्यशैली पर भी सवाल उठाया और कहा कि लगातार हिंसा हो रही है लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद ना तो चुनाव आयोग और ना ही प्रशासन इसे रोकने की कोशिश कर रहा है। रात 12:00 बजे खबर लिखे जाने तक हालात काफी तनावपूर्ण थे। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त संख्या में पुलिस और केंद्रीय बलों के जवानों की तैनाती की गई है। इसी तरह की स्थिति राजधानी कोलकाता के  लेदर कंपलेक्स थाना क्षेत्र में पड़ने वाले भंगड़ इलाके की है। यह क्षेत्र जादवपुर संसदीय सीट के अंतर्गत पड़ता है।

 

शनिवार रात 10:00 बजे के करीब इस पूरे इलाके में जमकर बम बाजी हुई है। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के नेता आराबुल इस्लाम के नेतृत्व में पूरे क्षेत्र में बम बाजी की गई है ताकि आम मतदाता डर जाएं और रविवार को अंतिम चरण के मतदान के लिए घरों से बाहर ही नहीं निकलें। यही परिस्थिति जादवपुर संसदीय क्षेत्र की भी हैं। रात 10:00 बजे के करीब यहां के रायपुर इलाके में सैकड़ों की संख्या में एकत्रित हुए तृणमूल के लोगों ने भारतीय जनता पार्टी और अन्य विपक्षी कार्यकर्ताओं के घरों को घेर कर तोड़फोड़ शुरू की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सांसद नतीजे अभिषेक बनर्जी के संसदीय क्षेत्र डायमंड हार्बर में भी तनाव की स्थिति है। आरोप है कि यहां अनगिनत संख्या में बाहरी अपराधियों को लाया गया  है।

 

ये लोग रात से ही विपक्षी कार्यकर्ताओं को डराना धमकाना शुरू कर चुके हैं। प्रत्येक क्षेत्र में हिंसा की सूचना मिलने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस और केंद्रीय बलों के जवान पहुंचे हैं लेकिन हालात संभालने में  उनके पसीने छूट रहे  हैं। विपक्ष का आरोप है कि राज्य पुलिस सत्तारूढ़ तृणमूल के साथ मिलकर हिंसक माहौल बनाने में मदद कर रही है।

 

बताते चले पश्चिम बंगाल के भाटपाड़ा विधानसभा क्षेत्र में आज चुनाव से पहले ही हिंसा भड़क गई है।  यहां गाड़ियों में आग लगा दी गई है और बम फेंकने की खबर है।

 

बीजेपी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कार्यकर्ताओं ने आगजनी की घटना को अंजाम दिया है. वहीं बारासात संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले न्यूटाउन इलाके के कदम्पुकुर में भी हिंसा की खबर है। कोलकाता में टीएमसी के पार्षद सुभाष बोस को हिरासत में लिया गया है जबकि बिधाननगर में बीजेपी नेता अनुपम दत्ता को भी नजरबंद किया गया है।  बंगाल में पहले दौर के मतदान से लेकर आखिरी दौर तक हर बार टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं में जमकर झड़प हुई है।

mos-image_051919065903.jpgगाड़ी में लगाई आग

बता दें कि लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण बंगाल की 9 लोकसभा सीटों पर मतदान हो रहा है। जिसमें कोलकाता उत्तर, कोलकाता दक्षिण, दमदम, बारासात, बशीरहाट, जादवपुर, डायमंड हार्बर, जयनगर (एससी) और मथुरापुर (एससी) लोकसभा सीटों पर वोटिंग हो रही है।. हालांकि मतदान के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए गए हैं, पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बलों की 710 कंपनियां और राज्य पुलिस की तैनाती की गई है।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण के मतदान से पहले कोलकाता में हुई हिंसा के मद्देनजर प्रचार अभियान भी तय समय से 20 घंटे पहले ही रोक दिया गया था।

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