शिव शोभा यात्रा के संस्थापक की अंतिम यात्रा पर उमड़ा जन सैलाब


उन्नाव (भास्कर)। जीते जी किए कर्मो का पता आंखे बंद होने के बाद साथियों ओर चाहने वालो की भीगी आंखों से लगाया जा सकता है। जनपद ही नही बल्कि प्रदेश या ये भी कहना गलत नही होगा कि देह की सबसे विशाल शिव शोभा यात्रा के सूत्रधार व हिंदुत्व पुरोधा कहे जाने वाले राजकुमार निगम की अंतिम यात्रा का दृश्य ऐसा ही रहा।  हजारों लोगों की अश्रुपूरित आंखों के साथ जब उनकी अंतिम यात्रा की अर्थी उठी तो फूल बरसाने और कंधा देने की होड़ लग गयी। हिंदुत्व के पोषक राजे निगम को हनुमंत जीवाश्रय के अनंत यात्रा रथ पर सवार कर गंगाघाट ले जाया गया। बैकुठ धाम में उनके पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी गयी और इस तरह मकर संक्रांति पर अस्त हुआ एक हिंदूवादी सूर्य पंचतत्व में विलीन हो गया। 

बता दें कि हिंदुत्व की सेवा और रक्षा में पूरा जीवन समर्पित करने वाले 72 वर्षीय राजीव निगम का बीते दिन दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। जिले में शिवरात्रि पर शिव शोभायात्रा की नींव उन्होंने 1982 में रखी थी। यह राजकुमार निगम की ही देन थी साल दर साल लोग जुड़ते गए और कारवां बनता गया। वर्तमान में आलम यह है कि इस शोभा यात्रा में सैंकड़ों की संख्या में रथ शामिल होते हैं। इस शोभायात्रा के सूत्रपात से लेकर इसे ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान करने का श्रेय भी उन्हीं को जता है। ऐतिहासिक शोभायात्रा की नींव रखने वाले स्व. निगम की अंतिम यात्रा भी ऐतिहासिक ही रही। तमाम हिंदू संगठनों व राजनैतिक लोगों के हजारों जन सामान्य की नम आंखे यह ऐहसास कराने के लिए काफी थी कि राजे निगम के रूप में जिले को अपूर्णनीय क्षति हुई है। जब राजकुमार निगम की अर्थी उठी तो पूरे मार्ग पर उनके पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाने की मानों लोगों में प्रतिपर्धा चल रही थी।

यही नहीं अर्थी को कंधा देने के लिए लोगों में होड़ मची रही। हनुमंत्र जीवाश्रय सेवा संस्थान के फूलों से सजे अनंत यात्रा रथ में स्व. निगम का पार्थिव शरीर शुक्लागंज स्थित बैकुंठ धाम पहुंचाया गया। जहां उनके पुत्र पिंकू निगम ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम यात्रा में प्रमुख रूप सदर विधायक पंकज गुप्ता, हिंदू जागरण मंच के प्रांतीय प्रभारी विमल द्विवेदी, अखिल भारतीय ब्राहम्ण महासभा के जिलाध्यक्ष विजय त्रिपाठी, बजरंग दल के बाबूलाल यादव, हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष विनोद शर्मा, चंद्र प्रकाश गुप्ता आदि लोग शामिल रहें। 

Back to top button
E-Paper