VIDEO : ‘मैंने गोली नहीं चलाई, बलिया कांड के मुख्य आरोपी ने खुद को बताया बेगुनाह, 50 हजार का इनाम घोषित

उत्तर प्रदेश में बलिया जिले के दुर्जनपुर में गुरुवार को हुए गोलीकांड का आरोपी धीरेंद्र अब तक फरार है। खुलेआम तांडव मचाने वाले आरोपी को पुलिस अबतक पकड़ नहीं पाई है। अब पुलिस ने आरोपी धीरेंद्र सिंह पर 50 हजार का इनाम घोषित किया है। इसके साथ ही डीआईजी आजमगढ़ सुभाष चंद दूबे ने 8 में से बाकी बचे 6 नामजद आरोपियों पर भी 50 हजार रुपए के इनाम का ऐलान घोषित कर दिया है।

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डीआईजी ने बताया की सभी आरोपियों पर गैंगेस्टर और एनएसए के तहत होगी कार्रवाई। वहीं बलिया कांड के आरोपी धीरेन्द्र सिंह ने खुद को बेकसूर बताया है और अपना वीडियो वायरल करते हुए पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है। आरोपी ने कहा, ‘अधिकारियों को पत्र देकर कहा था कि बिना सुरक्षा के बैठक करना ठीक नहीं, अधिकारियों ने प्रधान से पैसा लेकर बैठक कराई।’

आरोपी ने हिंसा के लिए प्रशासन को ही ठहराया जिम्मेदार

अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में गोली मारकर हत्या करने के आरोपी धीरेंद्र सिंह का एक वीडियो सामने आया। उसने आरोपों का खंडन किया और हिंसा के लिए प्रशासन को दोषी ठहराया। उसने कहा, “मुझे नहीं पता कि किसने गोली चलाई। मैं अपने परिवार को बचाने के लिए अधिकारियों से गुहार लगा रहा था। वे वहीं खड़े रहे और देखते रहे। मैं एक सैनिक हूं। मैंने हमेशा अपने देश की सेवा करने में विश्वास किया है। मैं मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच के लिए आग्रह करता हूं।”

धीरेंद्र सिंह ने बैठक के लिए पर्याप्त सुरक्षा तैनात करने के उनके अनुरोध की अनदेखी करने के लिए स्थानीय अधिकारियों और पुलिस को भी दोषी ठहराया। उसने कहा, ‘मेरे वृद्ध पिता कल हंगामे में गिर गए। मेरे परिवार को लाठियों से निशाना बनाया गया। मुझे वीडियो में पिटते हुए देखा गया। मैं एक राजपूत हूं, मैंने गर्व से 18 साल तक सेना की सेवा की। मैं खुद को मुक्त करने और भागने में कामयाब रहा। वे मुझे वहां पर पीट पीटकर मारना चाहते थे।’

विधायक सुरेंद्र सिंह ने किया आरोपी का बचाव

उनके बयान के कुछ ही घंटे बाद एक भाजपा विधायक ने उनका बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जिससे गांव दुरजनपुर में राशन की दुकानों के आवंटन पर एक 46 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। धीरेंद्र सिंह ने कहा, “कल बैठक के लिए बहुत सारे शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। मैंने पहले ही उन्हें आगाह कर दिया था कि हिंसा होने वाली हैं। लेकिन वे बैठक करते रहे। अधिकारी हिंसा में शामिल थे। उन्होंने पैसे ले लिए।”

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