खीरमोहन में हो रहा था कैंसर जनित रंगों का उपयोग

-नामी गिरामी प्रतिष्ठानों के सैंपल फेल होने के बाद लिया गया प्रतिबंधित का निर्णय

भास्कर समाचार सेवा

मथुरा। ब्रज खास कर महावन और आसपास के क्षेत्रों की प्रसिद्ध मिठाई खीर मोहन में कैंसर जनित रंगों का उपयोग हो रहा था। खीरमोहन के नामी गिरामी प्रतिष्ठानों के सैंपल फेल होने पर रंगीन खीर मोहन की बिक्री पर खाद्य विभाग की ओर से 23 जून को अगले आदेश तक के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि खाद्य विभाग के प्रतिबंध के बावजूद जनपद भर में रंगीन खीर मोहन की बिक्री बदस्तूर जारी है। दुकानदारों का कहना कि वह पहले खरीदे गए खीर मोहन को ही बेच रहे हैं। नया रंगीन खीर मोहन नहीं ला रहे हैं। अभिहित अधिकारी, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन मथुरा डा. गौरी शंकर ने बताया कि रंगीन खीर मोहन में प्रतिबंधित और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रंगों का प्रयोग किया जा रहा था। कई बार पूर्व में चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद छापामार कार्यवाही कर रंगीन खीर मोहन के सैंपल जांच को भेजे गए। मदन का लाला खीर मोहन वाला महावन बस स्टैण्ड पर, कृष्णपुरी महावन में स्थित मित्तल सेनी पुत्र चंद्रपाल सैनी की दुकान थी। तीसरी दुकान महावन में अवैध रूप से चल रही थी इस का लाइसेंस खेजा जा रहा है। चौथी दुकान भैया जी खीरमोहन वालों की थी इसका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। इसके खिलाफ एसीजीएम कोर्ट में वाद दायर किया गया है। बाकी के लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। रंगीन खीर मोहन में ऑरेंज द्वितीय नामक रंग का उपयोग पाया गया है। इस रंग का उपयोग खाद्य वस्तुओं में प्रतिबंधित है। सूडान रंग का भी उपयोग मिला है। इसके उपयोग पर प्रतिबंध नहीं है लेकिन इसकी मात्रा ज्यादा पाई गई थी। यह रंग कैंसर जनित होते हैं। चार सैंपल के जांच में फेल आए थे।

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