मासिक के दौरान यहां महिलाओं पर होता है ऐसा पाप, जानकर यकीन न करेंगे आप

आज जहां विज्ञान दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की करता जा रहा है वही दूसरी ओर आज भी लोग अंधविश्वास के साये में जीने को मजबूर है। लोगो की इसी मानसिकता और अंधविश्वास का खामियाजा हमारे समाज मे मौजूद स्त्रियों को भुगतना पड़ रहा है। अंधविश्वास की आड़ में महिलाओ को एक से बढ़कर एक बेहद ही पीड़ादायक यातनाओं का सामना करना पड़ता है। आज हम आपको ऐसे ही एक जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां महिलाओ के साथ ऐसे व्यवहार किये है जिन्हें सुनकर ही आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे…

महिलाओ के साथ ऐसा सुलूक

महिलाओ के साथ यातनाओं का यह सिलसिला हमारे देश के जन्नत के रूप में जाने जाने वाले राज्य “हिमाचल प्रदेश” स्तिथ एक कस्बे कुल्लू का है। जहाँ आज भी महिलाओ के साथ वर्षो से होती आ रही एक प्रथा को जिंदा रखा गया है जिसमे की महिलाओं को उनके मासिक धर्म के दिनों में काफी यातनाएं दी जाती है। मासिक धर्म के दौरान इन महिलाओं को नरक से भी बदतर जिंदगी जीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। उनके साथ कि जाने वाली यातनाओं को सुनकर आपके भी रोंगटे खड़े हो जायेंगे।

रहती है जानवरों के बीच

लोगो के मुताबिक आज भी यह प्रथा कुल्लू के 82 पंचायतों के लोगो के बीच चलन में है। जिसके मुताबिक महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान इतनी पीड़ा में होने के बावजूद पशुशाला में गायों और बकरियों के साथ सोने को मजबूर किया जाता है। चाहे मौसम कोई भी क्यों न हो उन्हें इन यातनाओं से गुजरना जरूरी होता है। महिलाओ के मुताबिक उन्हें इन सभी परेशानियों का सबसे ज्यादा सामना ठंडे के दिनों में करना पड़ता है जब उन्हें ठंड के बावजूद बिना कपड़े गौशाला में गुजारना पड़ता है।

जबरन बनाया गया कानून

इतनी सारी परेशानियो का सामना करने का कारण जब वहां मौजूद महिलाओं से पूछा गया तो यह बात सामने आई कि वहाँ के लोगो के बीच इस काम को लेकर एक ऐसा भ्रम फैला हुआ है जिसके मुताबिक वह मासिक धर्म को एक शारीरिक प्रक्रिया न मानकर यातनाओं का एक दौर मानती है और उसे हर हाल में सहती भी है। आज की महिलाएं इस प्रक्रिया की आदि भी हो चुकी है जिस वजह से उन्हें किसी खास परेशानी का सामना भी नही करना पड़त। बचपन के दिनों से उन्हें ऐसी कार्य करने लायक बना दिया जाता है जिससे कि उन्हें आने वाले वक्त में कोई दिक्कत का सामना न करना पड़े।

लोगो के द्वारा बनाये गए प्रथा को तोड़ने की हिमाकत काफी वर्षो से वहाँ का कानून भी नही करता तह पर हाल के ही दिनों में वहाँ का प्रसाशन इस मुद्दे की गंभीरता को भाँपकर इसके प्रति अपने कदम आगे बढ़ा रहा है और समाज मे रहने वाले पुरुषों को इसके प्रति जागरूक कर रहा है। अंधविश्वास की इस प्रथा को खत्म करने की की जाने वाली इस पहल को लेकर वहाँ के महिलाओ के बीच आशा की एक किरण जागृत हुई है और महिलाएं आने वाले वक्त में इस बात का उम्मीद कर रही है कि उनके आने वाले पीढ़ी को ऐसी यातनाओं का सामना नही करना पड़ेगा।

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