मिशन पर डायपर पहन कर जाते हैं फाइटर पायलट, बेहद दिलचस्प है कारण

30,000 फुट पर एक विमान कैसे उड़ान भरता होगा? एक परिंदे की तरह हवा में लगातार उड़ान भरते रहना लड़ाकू विमानों के पायलटों के लिए कैसा अनुभव होता होगा? एक लड़ाकू विमान उडाना फाइटर पायलट के लिए बेहद ही चुनौतीपूर्ण है। ये एक ऐसा अनुभव है जिसकी आप कल्पना भी नहीं कर सकते ? बॉम्बिंग मिशन के दौरान हवा में अन्य परिस्थितियां वैसी नहीं होती जैसी जमीन पर होती हैं। पायलट्स को अपनी अपना सारा ध्यान अपने मिशन पर केन्द्रित करना होता है। ऐसे मिशन के दौरान पायलट्स डायपर भी पहनते हैं।

पायलट्स को छह से आठ घंटों तक हवा में रहना होता है

भारतीय वायुसेना में भी हवा से हवा में ईंधन भरने की क्षमता वाले आईएल—78 टैंकर विमानों के आने के बाद से लड़ाकू विमानों की उड़ानों का समय काफी बढ़ गया है। पहले जहां विमान की क्षमता के मुताबिक उड़ानें आधे घंटे से डेढ़ घंटे के बीच हुआ करती थीं, उन्हीं विमानों को जमीन पर उतारे बिना अब लगातार छह से आठ घंटों तक उड़ाए रखा जा सकता है। इससे विमान उड़ा रहे पायलट को कई तरह की दिक्कतें आती हैं। इन दिक्कतों में सबसे बड़ी है उड़ान के दौरान लघुशंका से निवृत होना। आमतौर पर इंसान चार घंटे तक तो लघुशंका का निवारण किए बगैर रह सकता है, लेकिन इससे ज्यादा समय रुकना कठिन हो जाता है। ऐसे में पायलट क्या करे? बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्य़ूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन (आईएएम) ने इस समस्या से निपटने के लिए अध्ययन किया और रास्ता दिखाया।

इसलिए पहनना पड़ता है डायपर

वायुसेना के मिराज, जगुआर तथा सुखोई विमानों में उड़ान के दौरान ईंधन लेने की सुविधा है। लघुशंका की समस्या से पार पाने के लिए वायुसेना के सुखोई—30 एमकेआई विमान में तो पायलट की वर्दी के साथ एक पाइप लगाया गया है ताकि जरूरत पड़ने पर पायलट परेशान न हो। लेकिन मिराज और जगुआर विमान पायलटों के लिए ऐसी सुविधा नहीं है। इन विमानों के लिए दो तरीके निकाले गए हैं। मिराज विमान में ऑटो पायलट की व्यवस्था है, लिहाजा पायलट उड़ान के दौरान विमान को ऑटो पायलट पर रखते हुए नियंत्रण से हाथ हटा सकता है। ऐसे विमान के पायलटों के लिए यूरीन बैग उपलब्ध कराई गई है। जिसका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर किया जा सकता है। जगुआर में ऑटो पायलट की सुविधा नहीं है। लंबी उड़ान के दौरान इस विमान के पायलट के लिए डायपर की व्यवस्था की गई है। पायलट अपनी पैंट के नीचे रूई का डायपर बांध कर विमान में बैठता है।

खाने पीने की मात्रा भी होती है बेहद सीमित

लंबी उड़ान भरने वाले पायलटों के लिए विशेष भोजन तथा पानी पीने की मात्रा भी निर्धारित की गई है ताकि पायलट को बार-बार लघुशंका न हो। इसके अलावा लम्बी उड़ान के दौरान पायलटों को लगातार एक ही मुद्रा में बैठने से रक्त प्रवाह में बाधा आने की परेशानी होती है। हमारे जांबाज पायलट इन परेशानियों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते। रात में कार्रवाई के लिए नाइट विजन डिवाइस या रात के चश्मे का भी हेलीकॉप्टर पायलटों को इस्तेमाल करना होता है। इससे परेशानी यह होती है कि यदि अचानक बम विस्फोट या धमाके के कारण तेज रोशनी पैदा हो तो आंखें चुंधिया जाती हैं।

भविष्य के मिशनों के लिए बेहतर साबित होंगे डायपर

सैन्य अधिकारियों के मुताबिक भविष्य के मिशन पायलट्स के लिए और भी अधिक जटिल होंगे, उन्हें 12 से 15 घंटे तक हवा में रहना होगा। और ऐसे में रिफ्युलर्स यानी हवा में ईंधन भरने वाले विमान एक गेम चेंजर साबित होंगे, ‘पायलट्स को लम्बे समय तक हवा में विमानों को उड़ाना होगा। इसलिए वायु सेना ने पायलटों को एक ‘स्टेंडर्ड क्लॉथ’ (मानक कपड़े) के रूप में डायपर प्रदान करना शुरू कर दिया है।

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