‘मैं आपसे शादी के लिए तैयार हूं, 10 मिनट बाद आ रहा है स्टेशन, तुम तैयार हो तो साथ उतर जाना..’

आप लोगो ने प्यार की कई कहानियां सुनी होगी. इन सभी कहानियों में लड़का लड़की पहले कई दिनों, महीनो या सालो तक एक दुसरे के साथ दोस्ती करते हैं, नजदीकियां बढ़ाते हैं और उसके बाद शादी के लिए एक दुसरे को प्रपोज करते हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसी अनोखी प्रेम कहानी सुनाने जा रहे हैं जिसमे पहली मुलाकात में ही मात्र 10 मिनट की बातचीत से बात शादी तक पहुँच गई. ये कहानी हैं खंडवा के रहने वाले विनोद और आरती शर्मा की. इन दोनों की कहानी की शुरुआत ट्रेन में सफ़र करते हुए हुई थी. रेल की बोगी में शुरू हुई ये प्रेमकहानी कुछ ही मिनटों में कैसे शादी तक पहुँच गई आइए जानते हैं उन्ही लोगो की जुबानी…

बात 25 जुलाई साल 2005 की हैं. मैं (विनोद शर्मा) भुसावल गया हुआ था. शाम को जब मैं सचखंड एक्सप्रेस से खंडवा के लिए लौट रहा था तो महिला कोच में घुस गया था. मैंने सोचा था कि यहाँ मैं आराम से सफ़र करता हुआ जा सकूँगा. कोच के अन्दर आरती और एक अन्य महिला पहले से बैठी थी. उन्होंने मुझे महिला कोच होने के कारण बाहर जाने को कहा. मैंने उनसे विनती करी कि आगे अगले स्टेशन पर उतर जाऊँगा. इसके बाद ट्रेन आगे चल पड़ी. मेरी नज़र कोच में बैठी आरती पर गई. उसके बाल किसी संतो जैसे छोटे छोटे थे. वो कोच मैं बैठे ‘एक बनो नेक बनो’ पुस्तक पड़ रही थी. उसकी उम्र उस दौरान करीब 17 – 18 वर्ष रही होगी. ऐसे में इस तरह की पुस्तक पढ़ने की वजह से मेरा ध्यान उसकी ओर गया और हमारी बातचीत शुरू हो गई.

वो मुझे काफी निराश दिखाई दे रही थी. फिर मैंने उसके बारे में जानना शुरू किया. आरती ने मुझे बताया कि उसका घर नासिक के सटाणा के गांव जखोड़ में हैं. वो चंडीगढ़ में एक गुरूजी के मानव केंद्र में दीक्षा ले चुकी थी जिसके बाद वापस घर लौट आई. लेकिन घर पर परिवार वालो के साथ उसे अच्छा नहीं लग रहा था. वे लोग बात बात पर उसे रोकने टोकने लगे थे. इसलिए वो वापस चंडीगढ़ गुरूजी के मानव केंद्र जा रही थी.

उसके निराश मन को खुश करने के लिए मैंने शादी की बातें करना शुरू कर दी. बातो ही बातो में उसने कहा कि ‘मेरी सूरत देखी हैं? मुझ से कौन शादी करेगा?’ इस पर जवाब में मैंने फटाक से बोल दिया ‘मैं शादी करूँगा’ इस पर उसने बस एक प्यारी सी स्माइल दे दी.

इस बातचीत के 10 मिनट के बाद मेरा खंडवा स्टेशन आ गया. मैं ट्रेन से उतर गया. तभी आरती खिड़की पर आई और बोली ‘मेरा बैग नहीं उठाओगे तो उतरूंगी कैसे?’ बस आरती के इतना कहने पर मैं उसे अपने साथ खंडवा ले आया. फिर अगले दिन हमने कोई महूर्त ना होने के बावजूद कुंडलेश्वर शिव मंदिर में सात फेरे लेकर शादी कर ली. आज हमारी शादी को लगभग 12 साल हो चुके हैं और हम दोनों काफी खुश हैं.

उधर आरती शर्मा ने बताया कि ‘मुझे विनोद का मेरे विचारो को समझना, शादी का प्रपोजल रखना अच्छा लगा था. आज हम दोनों काफी खुश हैं. हमारे दो बच्चे भी हैं.’

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