सीमा विवाद : पांच घंटे चली भारत-चीन की बैठक, एक दूसरे के निर्माण कार्य पर अटकी बात, अब नरवणे और विदेश मंत्रालय तय करेंगे आगे की रणनीति

लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह चीन से हुई वार्ता की विस्तृत रिपोर्ट सेना मुख्यालय को भेजेंगे

सेना प्रमुख एमएम नरवणे और विदेश मंत्रालय तय करेंगे आगे की रणनीति
नई दिल्ली । लद्दाख की पूर्वी सीमा पर पिछले एक माह से भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडर शनिवार को आमने-सामने बैठे। सेना की ओर से दोनों देशों में हुई बातचीत का जिक्र किए बिना बताया गया कि ‘भारत-चीन सीमा पर मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत और चीन के अधिकारी तयशुदा सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से जुड़ना जारी रखेंगे।’


आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच यह पहली बड़ी कोशिश थी। दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का सिलसिला अभी जारी रहेगा। फिलहाल लेह लौटने के बाद कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह चीन से हुई वार्ता की विस्तृत रिपोर्ट सेना मुख्यालय को भेजेंगे। इस पर सेना प्रमुख एमएम नरवणे विदेश मंत्रालय और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक करके आगे की रणनीति तय करेंगे।


दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच लद्दाख के चशूल के सामने चीन की तरफ मोल्दो में शुरू हुई इस बैठक में भारतीय सेना का नेतृत्व लेह-स्थित 14 कॉर्प के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह ने किया, जबकि चीनी सेना का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य क्षेत्र के कमांडर मेजर जनरल लियू लिन ने किया। भारत-चीन के बीच कमांडर स्तर की यह वार्ता सुबह 9 बजे से होनी थी लेकिन खराब मौसम के चलते करीब 11.30 बजे शुरू हो पाई। भारत की तरफ से लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह वार्ता के लिए चीनी सीमा क्षेत्र में स्थित मीटिंग प्वाइंट मोलडो-चुशुल में हेलीकॉप्टर से पहुंचे। बैठक में उनके साथ ब्रिगेड कमांडर और दो कर्नल रैंक के अधिकारी और दुभाषिया सहित कुल आधा दर्जन लोग शामिल हुए।


पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों ने पैंगोंग झील के फिंगर-4 क्षेत्र में बड़ी संख्या में डेरा डाल रखा है। चीन के सैनिक भारतीय गश्ती दल को इससे आगे नहीं जाने देते हैं, जबकि भारत इसे अपनी सीमा क्षेत्र में मानता है। इसलिए बैठक में सबसे पहले भारत ने वहां से चीनी सैनिकों को हटाने के लिए कहा है। साथ ही वहां पर किए गए चीनी सेना के निर्माण को भी हटाने के लिए कहा गया है।

दूसरी तरफ चीन ने भी भारत से निर्माण कार्य रोकने को कहा है।पूर्वी लद्दाख के पैगोंग झील इलाके में एक माह पूर्व सीमा पर दोनों पक्षों में तनाव बढ़ने की शुरुआत यहीं से हुई थी, जब भारत ने अपनी सीमा में सड़क निर्माण शुरू किया। इस पर चीनी सेना ने विरोध किया, जिससे दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प भी हुई। इस झड़प में दोनों तरफ से सैनिक घायल हुए थे। उसके बाद से दोनों तरफ से बातचीत के कई दौर हुए लेकिन बात नहीं बनी।
इससे पहले दोनों देशों के मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों के बीच दो जून को वार्ता हुई थी, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला। फिलहाल, बैठक खत्म होने के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल वापस लेह लौट रहा है।

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