हाथ में लेकर चला पत्नी की अस्थियां, रास्ते में हुआ कुछ ऐसा, किसी को न हुआ भरोसा

इस दुनिया में सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब अपना कोई हमें छोड़कर इस दुनिया से चला जाता है। ऐसे में कलयुग के जो दो साथी सबसे ज्यादा एक दूसरे का साथ देते हैं वह है पति और पत्नी। ऐसे में अगर पति-पत्नी का साथ छोड़ दे या पत्नी पति का साथ छोड़कर इस दुनिया से चला जाए तो यह दर्द दुनिया का सबसे बड़ा दर्द उनके लिए बन जाता है। ऐसे ही एक खबर सामने आई है जिसमें पंजाब के दीनानगर का एक व्यक्ति अपनी पत्नी की अस्थियां लेकर उन्हें प्रवाहित करने जा रहा था। तभी अचानक से एक ट्रैक्टर के नीचे आ जाने से उसकी दर्दनाक मौत हो गई। इस व्यक्ति के साथ चार और भी व्यक्ति थे जो कि हादसे में घायल हो गए हैं।

जब इनकी पहचान की गई तो पता चला कि यह व्यक्ति झांककर पिंडी का रहने वाला है और इनके पिता का नाम सुरेश कुमार है। और पुत्र जिनकी मृत्यु हुई है उनका नाम करण सिंह है। उनकी उम्र महज 47 साल की है इसके अलावा इस हादसे में और चार लोग घायल हुए हैं उनका नाम राजकुमार, उसका चचेरा भाई दिलावर सिंह, भतीजा रमन सिंह और दामाद प्राण सिंह जो इस हादसे में बुरी तरह से घायल हो गए हैं।

जब इस मामले की पूरी तरह से जांच पड़ताल की गई तो पता चला है कि जिस ड्राइवर के ट्रक के नीचे यह लोग घायल और मौत के घाट उतारे गए हैं। वह ट्रैक्टर ट्रॉली यह ड्राइवर चुरा कर भाग रहा था और जब वह यह ट्रैक्टर चला रहा था, उस समय वह पूरी तरह से नशे में धुत था। जब इस ड्राइवर का पता लगाया गया तो पता चला कि यह ड्राइवर मजीठा का रहने वाला है। और उसका नाम बलजिंदर सिंह है और यह व्यक्ति ट्रैक्टर चोरी करके भाग रहा था।

जैसे ही इस ड्राइवर ने सुरेश को ट्रैक्टर के नीचे कुचला। तभी लोगों ने इस ट्रैक्टर को रोका और इस ड्राइवर को रंगे हाथों पकड़ लिया और उसके बाद पुलिस थाने में रिपोर्ट करके इसे पुलिस के हवाले कर दिया। जब इस ड्राइवर से पूछा गया कि यह ट्रैक्टर आखिर में कहां का है, तो उसने बताया कि मेरा नाम बलजिंदर है और मैंने यह ट्रैक्टर थाना सुजानपुर के तहत आने वाले गांव गोसाईपुर से चुराया था।

फ़िलहाल दुख की बात तो यह है कि जो पत्नी अभी इस दुनिया से चली गई थी, उसकी अस्थियां बहाने के लिए उसका पति जा रहा था। उसकी भी मृत्यु उसी समय हो गई। उसे शायद पता भी नहीं था कि जिस गम से उभरने में अभी उसको टाइम लगेगा, वह गम इतनी जल्दी उसका पीछा छोड़ने वाला नहीं था।

सुरेश ने कभी सोचा भी नहीं था। कि जिस बीवी की अस्थियां वह बहाने जा रहा है और उसके गम को भुलाने के लिए उसे थोड़ी मेहनत जरूर करनी पड़ेगी। परंतु हुआ कुछ ऐसा, कि ना ही वह अपनी बीवियों की अस्थि वहां पाया और ना ही गम को भुलाने के लिए उसे मेहनत करनी पड़ी क्योंकि वह भी सीधा अपनी बीवी के पास चला गया।

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