दिव्य बीज मंत्रों व गुरुदेव की कृपा से जीवन में आया नया सबेरा

ब्रह्मा जी की तपोस्थली में महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि कुमार स्वामी के सानिध्य में लगा समागम हुआ मिनी कुभ में तब्दील

आज भी लाखों की संख्या में देश-विदेश से आयेंगे श्रद्धालु

भास्कर समाचार सेवा

चौमुहां। ब्रह्मा जी की तपोस्थली में ब्रह्मर्षि महामंडलेश्वर कुमार स्वामी के सानिध्य में शनिवार को 629 वां प्रभु कृपा दुख: निवारण समागम का भव्य आयोजन मिनी कुंभ के रुप में तब्दील दिखाई दिया। समागम में शनिवार की सुबह से लेकर देर रात श्रद्धालुओं के सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा था। समागम में लाखों की संख्या में देश-विदेश से अनुयायिओं ने आकर गुरु पूर्णिमा महोत्सव में सहभागिता कर अपने को धन्य समझा।
श्रद्धालुओं का सैलाब सांय चार बजे से उमडना शुरु हुआ जो रात्रि 12 बजे तक थमा नहीं था। 108 एकड में लगाए गए विशाल पंडाल में श्रद्धालुओं को बैठने के लिए जगह नहीं मिल पा रही थी। मगर हर किसी के कदम समागम स्थल की ओर ही बढते जा रहे थे।
जो भी श्रद्धालु जहां से भी आ रहा था हर कोई गुरुदेव की शरण में आकर अपने आप को धन्य समझ रहा था। वह सबसे पहले ब्रजभूमि को नतमस्तक कर रहा था, फिर मेन गेट पर स्थित पंचमुखी हनुमान जी के चरणों मे माथा टेक रहा था। फिर पंडाल में स्थित भगवान गणेश जी की पूजा अर्चना करके समागम स्थल की ओर अग्रसर हो रहा था। समागम में गुरुदेव कुमार स्वामी के दर्शनों के लिए हर कोई लालयित हो रहा था। पीडितों, रोगियों की लालसा, आंकाक्षा, अपेक्षा और भरोसा ऐसा था कि वे आत्म विश्वास से पूर्णतया लबरेज दिखाई दे रहे थे। उनके
अंदर उम्मीद की किरण इतनी प्रबल दिखाई दे रही थी, जैसे कि उनके अब हर संकट का निदान हो जायेगा।
उनकी आंखे, चेहरे के हावभाव देखकर भी सभी गदगद हो रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे कि उनके आधे संकट तो इस तपोस्थली को प्रणाम करते ही दूर हो गए हों। अधिकांश श्रद्धालु पंडाल में पाठ कर रहे थे। तो
कोई गुरुभक्ति में तल्लीन दिखाई दे रहा था। तो किसी की निगाहें गुरुदेव को ढूंढ रही थीं। सबकी आंखे
उम्मीद भरी निगाहों से गुरुदेव को देख रही थीं।
सभी हर क्षण गुरुदेव के दर्शनों के लिए निहार रहे थे। न्यू आगरा के सीपी सिंह ने बताया कि वे लगभग 80वीं बार समागम में आए हुए हैं, उन्होने बताया कि उनका जीवन परेशानियों से भरा हुआ था, वो जिंदगी की जंग से हार
मान चुके थे। मगर गुरुदेव की कृपा से आज उनके जीवन में एक नया सबेरा हुआ है। जिसका पूरा श्रेय गुरुकृपा ही है। वो जीवन की आखिरी सांस तक समागमों में जाते रहेंगे और गुरुदेव की कृपा के ऋणी रहेंगे।
हरिद्धार रुडकी निवासी वीके त्यागी ने बताया कि वो 19 सालों से गुरुदेव के समागमों में जाकर बराबर दिव्य बीज मंत्र लेकर उनका जाप कर रहे हैं, उन पर सदैव ही गुरुकृपा बनी रहती है। जीवन की बडी से बडी परेशानी पलभर में खत्म हुई है।
बल्लभनगर इंदौर निवासी एसएस जावला ने बताया कि 10 सालों से गुरु की शरण में हैं, उनके जीवन में एक नई भोर हुई है। दिव्य बीज मंत्रों में अपार शक्ति है। इसका उल्लेख वेद पुराणों में भी है। उनके जीवन में दिव्य बीज मंत्रों ने अनूठा चमत्कार किया है।
गुरुग्राम निवासी एमएम चोपडा ने गुरु की कृपा बताते-बताते उनकी आंखों से श्रद्धाभाव और खुशी अश्रुों की धार बहने लगी थी। उन्होंने बताया कि वे आज 82 साल की उम्र में किसी भी रोग बीमारी से ग्रस्त नहीं है। उनके जीवन में आया हर संकट गुरुदेव और गुरुमां की कृपा से आनंद और खुशियों में तब्दील हुआ है मेरा और मेरे परिवारीजनों का जीवन गुरुदेव के चरणों में तन मन और धन सबकुछ अर्पण है और हमेशा बना रहेगा। जब भी जीवन में जो संकट आया गरुदेव ने उनकी नैया को पार लगाया।

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