इमाम हुसैन की याद में अलम का जुलूस बरामद हुआ, छौलस की अंजुमन ने किया मातम, पढ़े नोहे

शाह ने सर कटा के सज्दे में, दर्से हक़ दे दिया ज़माने को

भास्कर समाचार सेवा

सिकंदराबाद । इस्लामी मोहर्रम माह की 6 तारीख़, शुक्रवार को प्राचीन परंपरानुसार मौहल्ला क़ाज़ी वाड़े से पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सलo के नवासे हज़रत इमाम हुसैन की याद में अलम का जुलूस बरामद हुआ। जिसमें छौलस की अंजुमन ने नोहा ख़्वानी और ज़ंजीर का मातम किया।
जुलूस के आयोजक रज़ा अब्बास, मादाम अब्बास ने बताया कि आज से लगभग चौदह सौ वर्ष पूर्व इस्लामी हुकूमत की बाग़डोर यज़ीद के हाथों में आ गई थी जो एक तानाशाह और ज़ालिम ख़लीफा था। वो बहुत महत्वाकांक्षी था। यज़ीद पैग़म्बरे इस्लाम के नवासे हज़रत इमाम हुसैन और उनके कबीले के 72 अफ़राद, जिन में महिलाएं और बच्चे भी थे, सबको मौत के घाट उतार कर इस्लाम को ख़त्म कर दे और नया अपना नया मज़हब चलाये। उसने सब से अपने हाथों पर वफ़ादारी का प्रण ( बैयत ) ले लिया और हज़रत इमाम हुसैन से भी बैयत लेले, मगर नवासे ए रसूल सलo ने करबला में अपनी और अपने कुनबे के सभी अफ़राद की क़ुर्बानी पेश कर दी और अपने नाना हज़रत मुहम्मद सलo के दीन ए इस्लाम को बचा लिया।
इस मौक़े पर शाह अब्बास, मादाम अब्बास, रज़ा अब्बास, गुलाम अस्करी नक़वी, इंo इमाम ज़ैदी, सैयद शाह हुसैन मिस्कीनी, सैयद सज्जाद मिस्कीनी, आतिफ़ मिस्कीनी, रेहान मिस्कीनी, मुतीब खाँ, सूफ़ी शरीफ़ अहमद, शाकिर ग़ाज़ी,यूसुफ पटेल, जन्नेल ग़ाज़ी, अम्बर अब्बास, मेंबर मोईन, उमा शंकर जाटव, अजय पिपिल, संजय, आसिफ़ अख़तर आदि मौजूद रहे।
जुलूस में छोलस की अंजुमन ने नौहा ख़्वानी और मातम करके हज़रत सैय्यदा को पुरसा दिया।
जुलूस के दौरान सफाई और सुरक्षा के उचित प्रबंध थे।

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