बहराइच : मौसम के जानकार घाघ की कहावत आज भी हो रही चरितार्थ

प्रयाप्त बारिश न होने से अन्नदाताओ के माथे पर पड़ रही सिलवट खरीफ की फसल चौपट

….तो क्या मौसम जानकारों की भविष्यवाणी भी ? कही उठ न जाए किसानों का विश्वास !

जरवल/बहराइच। प्रयाप्त बारिश न हो पाने की वजह से खरीफ की फसल भी चौपट ही समझो अन्नदाता खेतो को देख कर परेशान है कि बरसाती पानी के बगैर धान मक्का ज्वार बाजरा व गन्ना की फसलों का क्या होगा कैसे लोगो की देनदारी चुकायेगें कैसे बच्चों को पढायगे इस जटिल समस्याओं से खौफजदा अन्नदाताओं के माथे पर सिलवटे पड़ती दिख रही है।
मौजूदा हालात को देख कर घाघ की ये कहावत


पुष्यपुनर्वसु भरै न ताल
तौ समझो तुम लौटि आषाढ़
किसानों के लिए ये शुभ संकेत बिल्कुल नही है।
घाघ ने बहुत पहले कहा था।


सावन मे पुरवा चले भादौ मे पछियाव
हरा छोड़ दे हरवाहे बच्चन जाए जियाऊ
कुछ एसे ही संकेत देखने को भी मिल रहे हैं जिससे अन्नदाताओं का बुरा हाल है।
घाघ ने मौसम के बदले मिजाज पर एक कहावत और कही थी।
दिन मा बादर रात नि-बादर
चल पुरवैया झाबर-झाबर
घाघ कहै कुछ होनी होई
कुंआ कै पानी धोबी धोई
वैसे अब मौसम के जानकारों से तमाम किसानों की जुबानी बता रही है कि उन पर भरोसा करे तो कैसे उनकी भविष्य वाणी पर कब तक मन को तसल्ली दे।

बटाई की किसानी से अन्नदाताओं का क्या होगा ?
जरवल।अधिकांश किसानो ने बटाई पर खेत या ठरराई पर लेकर तमाम सपने संजो रखा था कि बिटिया के हाथ पीले करने के साथ बच्चों का अच्छे स्कूल मे दाखिला व तमाम घरेलू सामान की इस बार खरीददारी करूँगा पर मौसम के बदले मिजाज ने किसानों के सपनो को मुंगेरी लाल के सपनो मे ही गोते लगवा दिया।जिससे किसान पेट पकड़ कर न रो पाता है न ही हँस पा रहा है।दूसरी तरफ किसान कहा तक पंपिग सेट का सहारा ले।

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