बड़ा खुलासा : नेपाल की सरजमीं से भारत के खिलाफ साजिश रच रहा पाक

चीन भी पीछे से रच रहा चक्रव्यूह, काठमांडू में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की इसी महीने आखिरी सप्ताह में होने वाली है बैठक

काठमांडू। पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी अब भारत के खिलाफ नेपाल में सक्रिय है। अपनी साजिशों में नेपाल की भारत विरोधी माओवादी शिक्तयों को भी शामिल कर रहा हैं। राजधानी काठमांडू में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की बैठक इसी महीने आखिरी सप्ताह में होने वाली है।

पाकिस्तान पहले भी भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नेपाल की जमीन का इस्तेमाल करता रहा है, लेकिन बाद में उसे बंद करना पड़ा। एक बार फिर वह भारत के खिलाफ नेपाल की राजधानी काठमांडू से साजिश रचने की तैयारी कर रहा हैं । एक दशक पहले भी काठमांडू स्थित पाकिस्तानी दूतावास द्वारा भारत विरोधी कई गतिविधियां संचालित होती रही, जिसका नेतृत्व पाकिस्तानी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी अरशद चीमा द्वारा होता था। भारत के हस्तक्षेप के बाद उसे भारत विरोधी गतिविधियां संचालित किए जाने के मामलों मे निष्कासित कर दिया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब इस महीने के आखिरी हफ्ते में काठमांडू में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की बैठक होने वाली है। आईएसआई की यह बैठक काठमांडू स्थित पाकिस्तानी दूतावास में होनी हैं, पाकिस्तानी दूतावास में होने वाली आईएसआई की बैठक में भारत विरोधी एजेंडे पर बात होगी। बैठक में नेपाल के एक रिटायर्ड डीआईजी और नेपाल की सैन्य खुफिया निदेशालय के पूर्व मेजर जनरल शामिल हो सकते हैं, जोकि चीन प्रेरित माअोवाद से प्रभावित हैं। इस आयोजन के मुख्य समन्वयक आईएसआई कर्ताधर्ता मोहम्मद रक्साना नूर्ति हैं।

भारत की खुफिया एजेंसी सतर्क

बैठक को लेकर भारतीय खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं। बताते चलें कि बीते वर्षों में नेपाल के पूर्व मंत्री व सांसद मिर्जा दिलशाद बेग और मौलाना खुर्शीद के मारे जाने के बाद पाक खुफिया एजेंसी आई एस आई को भारत विरोधी काम के लिए कोई मजबूत एजेंट नहीं मिला । आई एस आई की इस बैठक में संभवतः नये एजेंट के बारे में भी बात होगी , जो नेपाल में भारत विरोधी गतिविधि चलाने में सक्षम होगा?

नेपाल की वर्तमान सरकार भी परेशान

इस समय नेपाल की सरकार चारो तरफ से परेशान है। जिसके मूल में चीन की बढ़ती दखल है। भले ही सरकार से माओवादियों की छुट्टी जनता ने कर दी हो लेकिन कम्युनिस्ट चीन नेपाल में अपने तंत्र को बहुत मजबूत बना चुका हैं। ऐसे में वर्तमान राष्ट्रवादी सरकार के संबंध पूर्ववर्ती सरकार के बजाय भारत में मोदी सरकार से बेहतर हैं। लेकिन यह पाकिस्तान के दूतावास में होने वाली बैठक को लेकर भी वह सतर्क हो गई हैं।

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