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	<title>भास्कर + &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>भास्कर + &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>सावधान पैरेंट्स! आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य व भविष्य को बिगाड़ रहा इंस्टाग्राम और फेसबुक, जानें सोशल मीडिया के छिपे खतरे और बचाव के तरीके</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/parents-beware-instagram-and-facebook-are-jeopardizing-your-childs-mental-health-and-future-discover-the-hidden-dangers-of-social-media-and-ways-to-protect-them/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 01:36:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#8211; यू-ट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अश्लील इन्फ्लूएंसर्स की भरमार &#8211; अश्लीलता की सुनामी की जद में देश का भविष्य, ठोस नीति की जरूरत लखनऊ। यू-ट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म देश में खुलेआम जहर परोसने का माध्यम बन रहे हैं, जी हां इन तमाम सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर कई इन्फ्लूएंसर्स अश्लील कंटेंट ... <a title="सावधान पैरेंट्स! आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य व भविष्य को बिगाड़ रहा इंस्टाग्राम और फेसबुक, जानें सोशल मीडिया के छिपे खतरे और बचाव के तरीके" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/parents-beware-instagram-and-facebook-are-jeopardizing-your-childs-mental-health-and-future-discover-the-hidden-dangers-of-social-media-and-ways-to-protect-them/" aria-label="Read more about सावधान पैरेंट्स! आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य व भविष्य को बिगाड़ रहा इंस्टाग्राम और फेसबुक, जानें सोशल मीडिया के छिपे खतरे और बचाव के तरीके">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://c.ndtvimg.com/2026-03/6omd3n24_dfvsd_625x300_10_March_26.jpeg?im=FitAndFill,algorithm=dnn,width=773,height=435" alt="क्या सोशल मीडिया बदल रहा है बच्चों का दिमाग? एक्सपर्ट्स ने बताया 16 साल से पहले क्यों जरूरी है दूरी" /></p>
<p>&#8211; यू-ट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अश्लील इन्फ्लूएंसर्स की भरमार<br />
&#8211; अश्लीलता की सुनामी की जद में देश का भविष्य, ठोस नीति की जरूरत</p>
<p>लखनऊ। यू-ट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म देश में खुलेआम जहर परोसने का माध्यम बन रहे हैं, जी हां इन तमाम सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर कई इन्फ्लूएंसर्स अश्लील कंटेंट परोस रहे हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी घातक साबित हो रहा है, और हैरानी की बात ये है कि सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो और बच्चा चरित्रवान बने। लेकिन फेसबुक, यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम द्वारा परोसा हुआ अश्लील जहर आपके बच्चे के भविष्य को बर्बादी की ओर ले जा रहा है।</p>
<p>अश्लील कंटेंट और रील्स की लत बच्चों की एकाग्रता, मानसिक स्वास्थ्य, चरित्र निर्माण और शैक्षणिक भविष्य को बिगाड़ रहा है, और यह मामला केवल अभिभावकों की चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और नीति-निर्माताओं के लिए भी गंभीर विषय बन चुका है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, एल्गोरिदम आधारित आकर्षण और अश्लील कंटेंट बच्चों को साइबर बुलिंग, दुरुपयोग और असामाजिक प्रभावों की ओर धकेल रही है। इससे उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।</p>
<p>ताज्जुब की बात तो ये है कि अश्लील कंटेट परोसने वाले इन्फ्लूएंसर्स को फेसबुक, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म प्रमोट भी करते हैं, इन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म का एल्गोरिदम इस तरह से तैयार किया जाता है कि बच्चे इस जाल में फंसे रहते हैं, और तब तक फंसे रहते हैं जब तक वे एडिक्ट नहीं हो जाते। जो भारत अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है, उस भारत के भविष्य को इन सोशल मीडिया प्लैटफार्म के द्वारा बड़ी शातिराना ढंग से बर्बाद किया जा रहा है। ‘पब्लिक-डीसेन्सी’ बनाए रखने के लिए कानून तो बनाए गए हैं जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर अश्लीलता फैलाना अपराध बताया गया है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि सोशल मीडिया के अश्लील इन्फ्लूएंसर्स पर आखिर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।</p>
<blockquote><p><strong>क्या बोले एक्सपर्ट- </strong><br />
<strong>डॉ. प्रसाद कन्नेकांति, डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री, केजीएमयू </strong></p>
<p><strong> ‘यह बहुत गंभीर विषय है, अश्लील कंटेंट बच्चे के लिए काफी घातक साबित होता है। सोशल मीडिया के एल्गोरिदम में बच्चे फंस जाते हैं और स्क्रीन टाइम भी बढ़ जाता है। अश्लील कंटेंट बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ता है, बच्चा समाज से कटकर अकेला रहना पसंद करने लगता है, एकाग्रता की कमी होने लगती है, पढ़ाई में मन नहीं लगता है, स्लीप डिसआर्डर की समस्या उत्पन्न हो जाती है। हैरानी की बात तो ये है कि बच्चा ऐसे इन्फ्लूएंसर्स के प्रभावित होकर खुद भी ऐसे कंटेंट बना सकता है क्योंकि ऐसे कंटेंट को ज्यादा लाइक्स मिलते हैं और फोलोवर्स भी बढ़ जाते हैं। सरकार को इस ओर ठोस कदम उठाने की जरूरत है’। </strong></p></blockquote>
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		<title>यूपी में ‘93’ की वापसी के संकेत? अखिलेश के नरम सुर और नसीमुद्दीन की एंट्री से तेज हुई सियासी चर्चा&#8230;क्या फिर साथ आएंगे ‘बुआ-बबुआ’?</title>
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		<pubDate>Mon, 16 Feb 2026 08:31:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#160; लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासी फिजाओं में एक बार फिर बड़े बदलाव की महक आने लगी है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा हाल ही में दिए गए संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में &#8216;हाथी&#8217; और &#8216;साइकिल&#8217; फिर से एक साथ ... <a title="यूपी में ‘93’ की वापसी के संकेत? अखिलेश के नरम सुर और नसीमुद्दीन की एंट्री से तेज हुई सियासी चर्चा&#8230;क्या फिर साथ आएंगे ‘बुआ-बबुआ’?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/signs-of-a-return-to-93-in-up-akhileshs-soft-tone-and-naseemuddins-entry-spark-political-debate-will-the-bua-babua-bua-and-babua-reunite/" aria-label="Read more about यूपी में ‘93’ की वापसी के संकेत? अखिलेश के नरम सुर और नसीमुद्दीन की एंट्री से तेज हुई सियासी चर्चा&#8230;क्या फिर साथ आएंगे ‘बुआ-बबुआ’?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="686" height="386" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/hq720.jpg" alt="" class="wp-image-510709" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/hq720.jpg 686w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/hq720-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 686px) 100vw, 686px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading">&nbsp;</h2>



<p><strong>लखनऊ:</strong> उत्तर प्रदेश की सियासी फिजाओं में एक बार फिर बड़े बदलाव की महक आने लगी है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा हाल ही में दिए गए संकेतों ने राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में &#8216;हाथी&#8217; और &#8216;साइकिल&#8217; फिर से एक साथ नजर आएंगे? पूर्व बसपा दिग्गज और कद्दावर नेता <strong>नसीमुद्दीन सिद्दीकी</strong> के सपा में शामिल होने के बाद अखिलेश यादव का यह कहना कि <em>&#8220;बहुजन समाज और सपा का रिश्ता बहुत गहरा है&#8221;</em>, महज एक बयान नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">अखिलेश यादव का <strong>&#8216;PDA&#8217; </strong>फॉर्मूला</h3>



<p>अखिलेश यादव का <strong>&#8216;PDA&#8217; (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक)</strong> फॉर्मूला अब चुनावी नारों से आगे बढ़कर जमीन पर उतरता दिख रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसपा के दिग्गज नेताओं को पार्टी में शामिल कर अखिलेश दलित समुदाय के बीच यह संदेश देना चाहते हैं कि सपा ही अब उनके हकों की असल लड़ाई लड़ रही है। मायावती के प्रति अखिलेश के बदले हुए सुर और नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे &#8216;बहुजन राजनीति&#8217; के पुराने चेहरों का साथ आना, बसपा के पारंपरिक वोट बैंक में सेंधमारी और विश्वास बहाली की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>इतिहास के उतार-चढ़ाव और 2027 की चुनौती</strong></h3>



<p>सपा और बसपा का गठबंधन हमेशा से &#8216;सत्ता परिवर्तक&#8217; रहा है। 1993 में <strong>मुलायम सिंह यादव और कांशीराम</strong> की जोड़ी ने भाजपा के बढ़ते रथ को रोका था, लेकिन 1995 के गेस्ट हाउस कांड ने ऐसी दूरियां पैदा कीं जो दशकों तक नहीं भरीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में &#8216;बुआ-बबुआ&#8217; का प्रयोग सफल तो हुआ लेकिन चुनाव के तुरंत बाद गठबंधन टूट गया। अब 2026-27 के मुहाने पर खड़ी यूपी की राजनीति में अखिलेश यादव एक बार फिर <strong>&#8216;समावेशी राजनीति&#8217;</strong> का कार्ड खेल रहे हैं, ताकि भाजपा के अजेय किले को सामाजिक न्याय के बड़े मोर्चे से घेरा जा सके।</p>



<p>फिलहाल बसपा प्रमुख मायावती की ओर से इस दिशा में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सपा में बढ़ती &#8216;नीली हलचल&#8217; उनके लिए बड़ी चुनौती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता न खुलना और 2026 के अंत तक संसद के दोनों सदनों में बसपा का प्रतिनिधित्व &#8216;शून्य&#8217; होने की संभावना ने पार्टी को अस्तित्व के संकट में डाल दिया है। ऐसे में क्या मायावती 2027 के लिए सपा के इस &#8216;सॉफ्ट संदेश&#8217; को स्वीकार करेंगी या अपनी अलग राह चुनेंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सियासी बिसात: सीधा मुकाबला या त्रिकोणीय संघर्ष?</strong></h3>



<p>उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के खिलाफ विपक्ष अब एकजुट होने की फिराक में है। परंपरा, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान के मुद्दों को उछालकर सपा खुद को इस गठबंधन के केंद्र में रख रही है। यदि सपा-बसपा और कांग्रेस का यह सामाजिक समीकरण फिट बैठता है, तो 2027 की चुनावी जंग बेहद रोमांचक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच जाएगी। फिलहाल औपचारिक गठबंधन दूर की कौड़ी है, लेकिन बदली हुई जुबान और नए चेहरों की एंट्री ने 2027 का माहौल अभी से गर्म कर दिया है।&nbsp;</p>
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		<title>शर्मनाक नाम का दंश झेल रहा यूपी का यह गांव, लड़कियों की नहीं हो रही शादी, पढ़ें हैरान करने वाली कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Feb 2026 01:36:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[Tawaif Village: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक ऐसा गांव है, जिसका नाम यहां के निवासियों के लिए अभिशाप बन गया है. &#8216;रूपवार तवायफ&#8217; नाम का यह कलंक आज भी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है, आलम यह है कि इस नाम की वजह से गांव की बेटियों के रिश्ते टूट जाते ... <a title="शर्मनाक नाम का दंश झेल रहा यूपी का यह गांव, लड़कियों की नहीं हो रही शादी, पढ़ें हैरान करने वाली कहानी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/this-village-in-uttar-pradesh-is-suffering-the-stigma-of-a-shameful-name-and-girls-are-unable-to-get-married-read-this-shocking-story/" aria-label="Read more about शर्मनाक नाम का दंश झेल रहा यूपी का यह गांव, लड़कियों की नहीं हो रही शादी, पढ़ें हैरान करने वाली कहानी">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="576" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/village-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-510014" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/village-1024x576.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/village-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/village-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/village.jpg 1280w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>Tawaif Village:</strong> उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में एक ऐसा गांव है, जिसका नाम यहां के निवासियों के लिए अभिशाप बन गया है. &#8216;रूपवार तवायफ&#8217; नाम का यह कलंक आज भी लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है, आलम यह है कि इस नाम की वजह से गांव की बेटियों के रिश्ते टूट जाते हैं और युवाओं को शहरों में नौकरी ढूंढने से लेकर होटल में कमरा लेने तक में शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है. अब ग्रामीण इस नाम से छुटकारा पाने के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं.</p>



<p><strong>अंग्रेजों के जमाने का कलंक</strong></p>



<p>विलियम शेक्सपियर ने भले ही कहा हो कि &#8216;नाम में क्या रखा है?&#8217;, लेकिन बलिया का यह गांव इस कहावत को झुठलाता नजर आता है. अंग्रेजों के शासनकाल में इस गांव को शाही महफिलों और मनोरंजन के लिए बसाया गया था, जहां करीब 400 तवायफों को रखा गया था. उस दौर में यह गांव संगीत, गजल और नृत्य का केंद्र हुआ करता था, लेकिन देश आजाद होने और अंग्रेजों के चले जाने के बाद भी यह नाम सरकारी दस्तावेजों में दर्ज रह गया और आज तक यहां के लोगों के लिए नासूर बना हुआ है.</p>



<p><strong>बेटियों की जिंदगी पर सबसे बुरा असर</strong></p>



<p>गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस नाम का सबसे बुरा असर बेटियों की जिंदगी पर पड़ रहा है. कई बार लड़कियों की शादी तय हो जाती है, लेकिन जैसे ही लड़के वालों को गांव के नाम का पता चलता है, वे रिश्ता तोड़ देते हैं. यह दर्दनाक हकीकत गांव के हर परिवार को परेशान कर रही है. गांव की महिलाएं अपना पता बताने में हिचकिचाती हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि लोग उनके चरित्र पर सवाल उठाएंगे.</p>



<p><strong>युवा पीढ़ी झेल रही शर्मिंदगी</strong></p>



<p>गांव की युवा पीढ़ी भी इस कलंक से अछूती नहीं है. शहर में नौकरी करने वाले युवा जब अपना पता बताते हैं तो लोग उनका मजाक उड़ाते हैं. कई युवाओं ने बताया कि जब वे होटल में कमरा लेने जाते हैं तो रिसेप्शनिस्ट उनके आईडी कार्ड पर गांव का नाम देखकर हंसते हैं. इस शर्मिंदगी से बचने के लिए कई युवा अपने पते में शहर का नाम लिखवा देते हैं.</p>



<p><strong>&#8220;देवपुर&#8221; नाम की उठी मांग</strong></p>



<p>अब गांव के लोग इस शर्मनाक पहचान से मुक्ति चाहते हैं. ग्रामीणों ने एकजुट होकर गांव का नाम बदलकर &#8220;देवपुर&#8221; रखने की मांग की है. पिछले दो सालों से ग्रामीण लगातार प्रशासन और सरकार को पत्र लिखकर गुहार लगा रहे हैं. उनका कहना है कि जब बड़े-बड़े शहरों के नाम बदले जा सकते हैं तो उनके गांव का क्यों नहीं? वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियों को इस कलंक के साथ न जीना पड़े और उन्हें समाज में सम्मान की नजर से देखा जाए.</p>
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		<title>उत्तर प्रदेश के 66 जिलों तक पहुंची आवास क्रांति, बाकी जल्द होंगे शामिल : डॉ. बलकार</title>
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		<pubDate>Fri, 08 Aug 2025 04:58:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[(हेमेंद्र तोमर ) लखनऊ। बाजार से भी कम दाम पर घर चाहिए तो उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद आइए। आवास विकास परिषद सूबे के 66 जिलों तक पहुंच गया है, बाकी नौ जिलों में भी जल्द पहुंचेगा। साथ ही, आवास विकास की आगामी योजनाओं में निराश्रित गोवंशीय जीवों के लिए भी आश्रय स्थली या ... <a title="उत्तर प्रदेश के 66 जिलों तक पहुंची आवास क्रांति, बाकी जल्द होंगे शामिल : डॉ. बलकार" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%89%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%87-66-%e0%a4%9c%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a4%e0%a4%95-%e0%a4%aa/" aria-label="Read more about उत्तर प्रदेश के 66 जिलों तक पहुंची आवास क्रांति, बाकी जल्द होंगे शामिल : डॉ. बलकार">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="780" height="470" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/balkar-singh-780x470-1.jpg" alt="" class="wp-image-499457" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/balkar-singh-780x470-1.jpg 780w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/balkar-singh-780x470-1-300x181.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/balkar-singh-780x470-1-768x463.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/balkar-singh-780x470-1-150x90.jpg 150w" sizes="(max-width: 780px) 100vw, 780px" /></figure>



<p>(<strong>हेमेंद्र तोमर</strong> ) लखनऊ। बाजार से भी कम दाम पर घर चाहिए तो उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद आइए। आवास विकास परिषद सूबे के 66 जिलों तक पहुंच गया है, बाकी नौ जिलों में भी जल्द पहुंचेगा। साथ ही, आवास विकास की आगामी योजनाओं में निराश्रित गोवंशीय जीवों के लिए भी आश्रय स्थली या गौशाला का प्रावधान रखने पर विचार हो सकता है। ऐसे ही कुछ बातें उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी सरकारी कॉलोनाइजर संस्था अर्थात उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के आयुक्त डॉ बलकार सिंह ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में कहीं।</p>



<p>उन्होंने कहा कि परिषद संपूर्ण उत्तर प्रदेश में आवासीय योजनाओं को चलाने के लिए अधिकृत सबसे बड़ी सरकारी व भरोसेमंद संस्था है। हमारी हर योजना में स्कूल, अस्पताल, कमर्शियल सेंटर्स, बेहतर पार्क, चौड़ी सड़कें, स्वच्छ पर्यावरण की व्यवस्था, सामुदायिक केंद्र, पर्याप्त पेयजल सुविधा, सुरक्षा, संसाधनों का अनुरक्षण, उत्तम सीवरेज आदि की व्यवस्थाएं मिलती हैं। यह सब तो हम देते ही हैं और सच कहूं तो कई बार हम अपनी संपत्ति के मूल्य को इतना कम रखते हैं कि मार्केट रेट को भी सस्ता कर देते हैं और इसका लाभ अंत में नागरिक को ही मिलता है। प्राइवेट कॉलोनाइजर से ही नहीं बल्कि हम सरकारी संस्थानों में भी सर्वश्रेष्ठ हैं क्योंकि प्राइवेट कॉलोनाइजर भी प्रायः हमसे जमीन लेना इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि हम अविवादित भूखंड उन्हें उपलब्ध जो कराते हैं।</p>



<p>डॉ बलकार सिंह ने कहा कि 1966 में परिषद की स्थापना हुई, जबकि 1975 में एक्ट के आधार पर विकास प्राधिकरणों की स्थापना हुई, लेकिन हमारे परिषद की उपलब्धियां एक मानक के रूप में हैं। गाजियाबाद की वसुंधरा व सिद्धार्थ विहार योजनाएं तो ऐसी हैं कि आप उसे परिषद द्वारा एक शहर बसा देने जैसा समझ सकते हैं। परिषद ने हमेशा से समाज के हर आय वर्ग के लिए आवश्यक संपत्ति उपलब्ध कराने का कार्य किया। ईडब्ल्यूएस, एलआईजी, एमआईजी, एचआईजी आदि सभी के लिए हमने आवासीय व भूखंड संपत्ति उपलब्ध कराए हैं और कराते रहेंगे। हमारे कार्य को ही मानक मानकर प्रायः विकास प्राधिकरणों ने काफी कुछ सीखा और अपनाया। हालांकि आम नागरिकों को बहुत फायदा इससे मिला क्योंकि विकास प्राधिकरणों व प्राइवेट बिल्डर्स तथा कॉलोनाइजर्स के साथ परिषद की संपत्तियों का विकल्प उनके सामने आ गया।</p>



<p>एक अन्य सवाल के जवाब में डॉ सिंह ने कहा कि अयोध्या में परिषद की फ्लैगशिप योजना बहुत शानदार है। जहां मल्टी लेवल पार्किंग, होटल आदि के भूखंड हम को दे रहे हैं और मठों व आश्रमों को भी भूखंड अलॉट कर रहे ताकि सांस्कृतिक व धार्मिक विरासतों के लिए भी हम जनहित में अपना योगदान कर सकें। अभी दिवाली के दौरान हम लखनऊ के न्यू जेल रोड पर सौमित्र विहार योजना ला रहे हैं, जो प्रदेश की पहली ऐसी योजना है जिसमें 80 फ़ीसदी लैंड पूलिंग मोड से ली गई है। यह तेजी से परिणाम तक पहुंचने वाली प्रक्रिया है, जिसमें जमीन अधिग्रहण के समय हम मुआवजा नहीं देते बल्कि जमीनों को लेकर विकसित करके उसका कुछ भाग हम उन्हें अलॉट कर देते हैं। इसके अलावा प्रयागराज में भी 2000 एकड़ की नई टाउनशिप योजना गंगा जी के निकट लाने की है। वाराणसी में भी दो-तीन योजनाएं जल्दी ला रहे और हां, प्रदेश में जिस तरह एक्सप्रेस वे का अब एक बहुत बड़ा नेटवर्क है, उसके किनारे किनारे की भूमि पर भी परिषद आवासीय कॉलोनी बनाने के बारे में विचार कर रहा है। विशेष बात यह है कि प्रदेश के 75 जिलों में से 66 जिलों तक हमारी योजनाएं पहुंच चुकी हैं और बाकी के नौ जिलों में भी हम जल्द ही कॉलोनी विकसित करके कर ले जाएंगे। छोटे जिलों के लोगों को भी अपने जिलों में अच्छी कॉलोनी, बेहतर अवस्थापना सुविधाएं और स्कूल-अस्पताल भी चाहिए इसलिए हम यह सब करने जा रहे हैं।</p>



<p>लैंड बैंक बढ़ाने की होड़ में कृषि योग्य भूमि और दुधारू गोवंशीय जीवों के चारागाह को खत्म करते जाने के सवाल पर आवास आयुक्त ने कहा कि हमारा ध्यान हमेशा इस पर रहता है कि कृषकों की जमीन लेने के बाद हम उन्हें उनके कृषि जन्य व्यवसायों के लिए और पशुधन रखने के स्थान को, जिसको लाल डोरा कहते हैं, उसे तनिक भी डिस्टर्ब ना करें। वैसे भी मुख्यमंत्री जी के निर्देश के क्रम में और हमारे यूपी के अपने बाई लॉज के अनुरूप हम हाई राइज यानी ऊंचाई वाले ऊर्ध्व दिशा को उन्मुख बिल्डिंग निर्माण को प्राथमिकता देते हैं, न की क्षैतिज विस्तार को। रही बात हमारी अगली नई कॉलोनियों के विकास के लिए, तो हम विचार कर रहे हैं कि सीमित क्षेत्र में देसी दुधारू गोवंशीय जीवों के लिए गौआश्रय स्थल या गौशाला स्थापित की जाए, जिसका लाभ वहां के नागरिकों को मिले। एक समय के बाद हम कॉलोनी नगर निकायों को हस्तांतरित कर देते हैं तो उसको भी देखना है कि वह निर्बाध रूप से स्थापित रहे। यह भी परिषद का एक अभिनव प्रयास होगा।</p>
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		<item>
		<title>केदारनाथ यात्रा पर ब्रेक, मौसम की मार से फंसे हजारों श्रद्धालु&#8230;पहाड़ों पर भूस्खलन का बढ़ा खतरा</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/kedarnath-yatra-on-hold-thousands-of-devotees-stranded-due-to-bad-weather-increased-risk-of-landslides-in-the-mountains/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Aug 2025 07:50:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[increased risk of landslides in the mountains]]></category>
		<category><![CDATA[Kedarnath Yatra on hold]]></category>
		<category><![CDATA[thousands of devotees stranded due to bad weather]]></category>
		<category><![CDATA[uttar pradesh news]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। केदारनाथ धाम की ओर जाने वाला राजमार्ग सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मलबे और पत्थरों के गिरने से पूरी तरह बाधित हो गया है। मंदाकिनी और अलकनंदा नदियां खतरे के निशान को पार कर उफान पर हैं, जिससे नदी किनारे के घाट और रास्ते ... <a title="केदारनाथ यात्रा पर ब्रेक, मौसम की मार से फंसे हजारों श्रद्धालु&#8230;पहाड़ों पर भूस्खलन का बढ़ा खतरा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/kedarnath-yatra-on-hold-thousands-of-devotees-stranded-due-to-bad-weather-increased-risk-of-landslides-in-the-mountains/" aria-label="Read more about केदारनाथ यात्रा पर ब्रेक, मौसम की मार से फंसे हजारों श्रद्धालु&#8230;पहाड़ों पर भूस्खलन का बढ़ा खतरा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="947" height="461" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/Capture.jpg" alt="" class="wp-image-498926" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/Capture.jpg 947w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/Capture-300x146.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/Capture-768x374.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/Capture-150x73.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 947px) 100vw, 947px" /></figure>



<p>उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5_%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0" target="_blank" rel="noopener">केदारनाथ धाम</a> की ओर जाने वाला राजमार्ग सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच मलबे और पत्थरों के गिरने से पूरी तरह बाधित हो गया है। मंदाकिनी और अलकनंदा नदियां खतरे के निशान को पार कर उफान पर हैं, जिससे नदी किनारे के घाट और रास्ते जलमग्न हो गए हैं। रुद्रप्रयाग में भगवान शिव की 15 फीट ऊंची मूर्ति भी अलकनंदा के बढ़ते जलस्तर में डूब गई है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">यात्रा स्थगित, सुरक्षा पहली प्राथमिकता</h2>



<p>रुद्रप्रयाग के एसपी अक्षय प्रह्लाद कोंडे ने बताया कि श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केदारनाथ धाम यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। पैदल मार्ग पर कई स्थानों पर पत्थर गिरने की आशंका और मार्ग के अवरुद्ध होने के कारण आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। यात्रा पर आए श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे जहां हैं, वहीं सुरक्षित ठहरें। पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है, और नदी किनारे जाने पर सख्त पाबंदी लगाई गई है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">मौसम विभाग का रेड अलर्ट</h2>



<p>मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों के लिए भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। नदियों के बढ़ते जलस्तर और भूस्खलन की आशंका को देखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। रुद्रप्रयाग पुलिस ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">उत्तराखंड में बारिश की तबाही</h2>



<p>भारी बारिश ने उत्तराखंड में व्यापक तबाही मचाई है। गढ़वाल मंडल के उत्तरकाशी में धराली क्षेत्र में हाल ही में आई भीषण आपदा ने पूरे देश को झकझोर दिया है। कई संपर्क मार्ग बाधित होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राहत और बचाव कार्य जोर-शोर से जारी हैं, लेकिन मौसम की मार ने चुनौतियों को और जटिल कर दिया है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">एकजुटता और सावधानी की जरूरत</h2>



<p>यह कठिन समय उत्तराखंड के लोगों और केदारनाथ धाम के श्रद्धालुओं के लिए चुनौतीपूर्ण है। प्रशासन और राहत टीमें स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दिन-रात काम कर रही हैं। हम सभी से धैर्य और सहयोग की अपेक्षा करते हैं। प्रकृति के इस प्रकोप के बीच एकजुटता और सावधानी ही हमें सुरक्षित रख सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>उत्तरकाशी में क्यों कहर बरसा रही कुदरत! 12 साल बाद फिर तबाही, तीन जगह फटे बादल, जानिए आसमानी आपदाओं की वजह</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/why-is-nature-wreaking-havoc-in-uttarkashi-clouds-burst-at-three-places/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 Aug 2025 07:35:56 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
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		<category><![CDATA[Chamoli disaster 2021]]></category>
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		<category><![CDATA[Dharali cloudburst]]></category>
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		<category><![CDATA[Early Warning System Uttarakhand]]></category>
		<category><![CDATA[Flood warning system]]></category>
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					<description><![CDATA[Uttarkashi Cloudburst : कहते हैं कुदरत की मार से कोई नहीं बच पाता है। 12 साल पहले उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ में आसमान से कुदरती तबाही बरसी थी। जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। अब एक बार फिर उत्तरकाशी में कुदरत ने आसमान से कहर बरसाया, जिसमें चार लोगों की मौत ... <a title="उत्तरकाशी में क्यों कहर बरसा रही कुदरत! 12 साल बाद फिर तबाही, तीन जगह फटे बादल, जानिए आसमानी आपदाओं की वजह" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/why-is-nature-wreaking-havoc-in-uttarkashi-clouds-burst-at-three-places/" aria-label="Read more about उत्तरकाशी में क्यों कहर बरसा रही कुदरत! 12 साल बाद फिर तबाही, तीन जगह फटे बादल, जानिए आसमानी आपदाओं की वजह">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="545" height="307" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-06T113625.751.jpg" alt="" class="wp-image-498916" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-06T113625.751.jpg 545w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-06T113625.751-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-06T113625.751-150x84.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 545px) 100vw, 545px" /></figure>



<p>Uttarkashi Cloudburst : कहते हैं कुदरत की मार से कोई नहीं बच पाता है। 12 साल पहले उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ में आसमान से कुदरती तबाही बरसी थी। जिसमें कई लोगों की जान चली गई थी। अब एक बार फिर उत्तरकाशी में कुदरत ने आसमान से कहर बरसाया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। हर्षिल घाटी में तीन जगह बादल फटने से धराली में तबारी का मंजर देखा गया, जिसमें कई होटल, घर, आर्मी कैंप बह गए। पहाड़ों से ढेर सारा मलबा लेकर पानी का एक सैलाब आया महज 34 सेकेंड के अंदर पूरा गांव बहा ले गया। पानी तेज बहाव में बहने से और मलबे में दबने से 50 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिसमें आर्मी कैंप के सैनिक भी शामिल हैं। आपदा के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जो हृदय विदारक घटना के खौफनाक मंजर को बयां कर रहे हैं। </p>



<h2 class="wp-block-heading">उत्तरकाशी में क्यों बरसी आसमानी आपदा?</h2>



<p>अब सवाल ये उठता है कि आखिर उत्तरकाशी में बादल क्यों फटे? दरअसल, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव में लगातार कई दिनों से बारी बारिश हो रही है। इस बीच पहाड़ों के बीच नालों में पानी ऊफान पर आ गया था। इसी बीच हर्षिल घाटी में तीन जगह बादल फटने से पानी का सैलाब उमड़ पड़ा और पूरे गांव को बहा ले गया। लेकिन क्या सच में बादल फटते हैं? इस सवाल का वैज्ञानिक जवाब है &#8211; नहीं। बादल भाप के गुबार होते हैं, जो सूरज की गर्मी के चलते समुद्र के ऊपर बनने वाली भाप से निर्मित होते हैं। बादल नम हवा का गुबार होता है जो अधिक भारी होने पर अचानक नीचे आते हैं और पहाड़ों से टकराकर  तूफान बनकर बरसते हैं। इसे ही बादल फटना कहते हैं। इनकी गति 20 से 30 वर्ग किलोमीटर से अधिक होती है। यह घटना तब होती है जब एक घंटे या उससे अधिक समय तक 100mm से ज्यादा बारिश हो, तब आपदा आने की स्थित उत्पन्न हो जाती है।</p>



<p>उत्तरकाशी के हर्षिल घाटी में भी यही हुआ। जब घाटी में तीन जगह बादल पहाड़ों से टकाराएं तो बारी बारिश हुई और पानी चट्टानों से टकारते हुए नीचे आता रहा। पानी के तेज बहाव चट्टानें टूटकर मलबा भी पानी के साथ बहा। इससे धराली गांव में नाले में पानी ऊफान पर बहने लगा और पूरा गांव बहा ले गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://bhaskardigital.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-06T110208.035.jpg" alt="" class="wp-image-577176" /></figure>



<p>मगर, सवाल ये उठता है कि जब उत्तराखंड में 12 साल पहले इससे बड़ी तबाही का मंजर पूरा देश देख चुका था, तब ऐसी घटनाओं के पुनरावृत्ति की आशंका पहले से ही बनी हुई थी। फिर राज्य प्रशासन से चूक कहां हुई? </p>



<p>बता दें कि बीते 28 जून को यमुनाघाटी के सिलाई बैंड क्षेत्र में बादल फटने सहित कुपड़ा गाड अतिवृष्टि के कारण उफान पर आ गई आई थी।&nbsp;इससे पहले उत्तराखंड में 12 साल पहले केदरानाथ में भयानक आपदा आई थी। यह सिलसिला हर साल प्राकृतिक आपदा के रूप में चलता आ रहा है। इसके बाद भी राज्य में अर्ली वार्निंग सिस्टम का विकास नहीं हो पाया है। उत्तरकाशी में पहाड़ों के किनारे रह रहें लोगों की जान-माल का खतरा बना हुआ है। हालांकि, केदारनाथ में आपदा आने के बाद इस मसले पर लंबी बहस भी हुई थी, लेकिन कोई भी हल नहीं निकल पाया था। वहीं, अब एक बार फिर यह मुद्दा गरमा गया है। क्या उत्तरकाशी के धराली व आसपास इलाकों लोगों का रहना सुरक्षित है?  प्रसाशन द्वारा आपदाओं के निपटने के लिए पहले से कोई व्यवस्था विकसित की जाएगी?</p>



<p>यह भी पढ़े :<a href="https://bhaskardigital.com/uttarakhand-relief-and-rescue-operation-continues-in-dharali-government-releases-rs-20-crore-orange-and-yellow-alert-for-rain-in-the-state/" target="_blank" rel="noopener"><strong> Uttarakhand :&nbsp;धराली में राहत और बचाव अभियान जारी, शासन ने जारी किए 20 करोड़, राज्य में बारिश का ऑरेंज व यलो अलर्ट जारी</strong></a><br><br></p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>खरगे ने नियम-267 का जिक्र कर पूछा- सदन के वेल में CISF क्यों? जानिए क्या है यह रूल…</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/kharge-referred-to-rule-267-and-asked-why-is-cisf-in-the-well-of-house/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Aug 2025 10:19:59 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[सीआईएसएफ]]></category>
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					<description><![CDATA[CISF Rajya Sabha Deployment : आज मंगलवार को राज्यसभा के अंदर काफी हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। आज राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और जेपी नड्डा के बीच नोंकझोंक हो गई। कहासुनी की वजह थी राज्यसभा के बाहर सीआईएसएफ की तैनाती। विपक्षी सांसदों ने इसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई और नियम-267 ... <a title="खरगे ने नियम-267 का जिक्र कर पूछा- सदन के वेल में CISF क्यों? जानिए क्या है यह रूल…" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/kharge-referred-to-rule-267-and-asked-why-is-cisf-in-the-well-of-house/" aria-label="Read more about खरगे ने नियम-267 का जिक्र कर पूछा- सदन के वेल में CISF क्यों? जानिए क्या है यह रूल…">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1600" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-05T153059.535.jpg" alt="" class="wp-image-498266" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-05T153059.535.jpg 1600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-05T153059.535-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-05T153059.535-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-05T153059.535-1536x864.jpg 1536w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/08/image-2025-08-05T153059.535-150x84.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /></figure>



<p>CISF Rajya Sabha Deployment : आज मंगलवार को राज्यसभा के अंदर काफी हंगामा और तीखी बहस देखने को मिली। आज राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और जेपी नड्डा के बीच नोंकझोंक हो गई। कहासुनी की वजह थी राज्यसभा के बाहर सीआईएसएफ की तैनाती। विपक्षी सांसदों ने इसको लेकर कड़ी आपत्ति जताई और नियम-267 के तहत इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। विपक्षी सांसदों का कहना है कि इस बात को स्वीकार नहीं किया जाएगा। लेकिन सवाल ये है कि आखिर राज्यसभा के बाहर सीआईएसएफ क्यों लगाई गई?</p>



<h2 class="wp-block-heading">खरगे ने पूछा- सदन के वेल में CISF क्यों?</h2>



<p>दरअसल, उपराष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद राज्यसभा में जगदीप धनखड़ की जगह उपसभापति हरिवंश ने कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई शुरू होते ही मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के बाहर सीआईएसएफ तैनात करने का मुद्दा उठा दिया। उन्होंने कहा कि सदन के बाहर विपक्षी नेता शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट कर सकते हैं। इस बात बल देने के लिए खरगे ने पुरानी बात भी याद दिलाई।</p>



<p>उन्होंने कहा, “आखिरी बार जब जेटली जी उच्च सदन में विपक्ष के नेता थे और सुषमा स्वराज लोकसभा में विपक्ष की नेता थीं। उन्होंने क्या कहा था? उन्होंने कहा था कि डिस्टर्ब करना (विरोध करना) भी एक तरह से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करता है और ये कोई बड़ी बात नहीं। लोकतांत्रिक तरीके से ही हम प्रोटेस्ट कर रहे हैं और हम करते रहेंगे। ये हमारा अधिकार है।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">खरगे ने कहा- सदन की गरिमा गिरा रही सरकार</h2>



<p>इसके बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन के वेल में सीआईएसएफ को बुलाने को लेकर सवाल खड़ा कर दिया। खरगे ने पूछा क्या अब सदन के सदस्य विरोध करने के लिए लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग नहीं कर सकते हैं। खरगे ने सत्ता पक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह संसद के स्तर को गिराने का काम है। भाजपा सरकार ने संसद के स्तर को गिरा दिया है। खरगे ने भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में CISF के जवान सदन के वेल में तब नहीं आएंगे जब सदस्य सार्वजनिक चिंता के महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हो।”</p>



<h2 class="wp-block-heading">क्या है सदस्य नियम-267 ?</h2>



<p>राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने जिस सदस्य नियम-267 का जिक्र किया है, वह राज्यसभा के प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों का हिस्सा है। नियम 267 सदस्यों को अत्यावश्यक मामलों पर चर्चा के लिए नियमों को स्थगित करने का प्रस्ताव रखने की अनुमति देता है।</p>



<p>हालाँकि, भाजपा सरकार में राज्यसभा की कार्रवाई के दौरान नियम-267 का इस्तेमाल विपक्ष और सभापित व उपसभापति के बीच का मुख्य विवाद का मुद्दा बन चुका है।</p>



<p>यह भी पढ़े : <a href="https://bhaskardigital.com/cisf-deployed-outside-rajya-sabha-kharge-temper-high-inside-nadda/" target="_blank" rel="noopener">राज्यसभा के बाहर CISF तैनात, अंदर खरगे का पारा हाई! नड्डा बोले- &#8216;मुझसे ट्यूशन ले ले&#8217;</a></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>शिव सबके हैं, कांवड़ किसी का मजहब नहीं देखती&#8230;फिर विवाद क्यों?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/shiva-belongs-to-everyone-kanwad-does-not-see-anyones-religion-then-why-the-controversy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 10 Jul 2025 09:59:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[देहरादून]]></category>
		<category><![CDATA[हरिद्वार]]></category>
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					<description><![CDATA[हरिद्वार… सावन का महीना… और कांवड़ यात्रा की शुरूआत। एक ऐसा धार्मिक पर्व जब उत्तर भारत के कोने-कोने से शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री, गंगानगर, गौमुख जैसे स्थानों से गंगाजल लेकर सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा करते हैं और अपने स्थानीय शिवालयों में अभिषेक करते हैं। लेकिन इस बार यह यात्रा धार्मिक एकता और आस्था से ज़्यादा, विवाद ... <a title="शिव सबके हैं, कांवड़ किसी का मजहब नहीं देखती&#8230;फिर विवाद क्यों?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/shiva-belongs-to-everyone-kanwad-does-not-see-anyones-religion-then-why-the-controversy/" aria-label="Read more about शिव सबके हैं, कांवड़ किसी का मजहब नहीं देखती&#8230;फिर विवाद क्यों?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://bhaskardigital.com/wp-content/uploads/2025/07/Untitled-2-copy.jpg" alt="क्या भक्ति भी अब धर्म देखेगी " class="wp-image-553586" /></figure>



<p>हरिद्वार… सावन का महीना… और <a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%A1%E0%A4%BC_%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE" target="_blank" rel="noopener">कांवड़ यात्रा</a> की शुरूआत। एक ऐसा धार्मिक पर्व जब उत्तर भारत के कोने-कोने से शिवभक्त हरिद्वार, गंगोत्री, गंगानगर, गौमुख जैसे स्थानों से गंगाजल लेकर सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा करते हैं और अपने स्थानीय शिवालयों में अभिषेक करते हैं। लेकिन इस बार यह यात्रा धार्मिक एकता और आस्था से ज़्यादा, विवाद और भेदभाव का कारण बनती जा रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कांवड़ पर सवाल &#8211; श्रद्धा पर नहीं, निर्माता के धर्म पर</h3>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://bhaskardigital.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-10-at-1.06.09-AM.jpeg" alt="" class="wp-image-553589" style="width:626px;height:auto" /></figure>



<p>इस बार हरिद्वार में उठे विवाद की जड़ में है एक सवाल &#8211; &#8220;कांवड़ को कौन बना रहा है?&#8221;<br>हर साल हरिद्वार की इंदिरा नगर बस्ती में लाखों कांवड़ें तैयार होती हैं। इन कांवड़ों को मुस्लिम कारीगर बनाते हैं, जिनका यह पारंपरिक काम है। तीन पीढ़ियों से यह परिवार सावन से पहले महीनों तक मेहनत करते हैं ताकि शिवभक्तों के लिए सुंदर, टिकाऊ और पवित्र कांवड़ें तैयार की जा सकें।</p>



<p>लेकिन इस बार हिंदू रक्षा सेना और संत समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने यह कहकर बवाल खड़ा कर दिया कि &#8220;मुस्लिम कारीगरों की बनाई कांवड़ें अपवित्र हैं&#8221; और &#8220;गैर हिंदू को तीर्थ क्षेत्र में प्रवेश नहीं करना चाहिए।&#8221; इसके लिए बाकायदा मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है और चेतावनी दी गई है कि यदि सरकार ने कदम नहीं उठाया, तो संत समाज खुद सड़कों पर उतर आएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://bhaskardigital.com/wp-content/uploads/2025/07/WhatsApp-Image-2025-07-10-at-1.05.59-AM.jpeg" alt="" class="wp-image-553590" style="width:635px;height:auto" /></figure>



<p>जिन मुस्लिम कारीगरों को अब आस्था के नाम पर कटघरे में खड़ा किया जा रहा है, उन्होंने न कभी इस काम को धर्म से जोड़ा और न ही इससे किसी की भावना को ठेस पहुंचाई।<br>सवाल सिर्फ कांवड़ का नहीं है। सवाल है उस सोच का, जो धर्म के नाम पर रोजगार, रोज़मर्रा की जिंदगी और सामाजिक ताने-बाने को बांटना चाहती है<strong>।</strong>क्या धार्मिक त्योहारों और आयोजनों में अब यह देखा जाएगा कि कौन सेवा दे रहा है, और उसका धर्म क्या है? क्या किसी की मेहनत और हुनर से ज़्यादा उसका मजहब मायने रखेगा? भारत का संविधान हर नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है — चाहे वो हिंदू हो, मुस्लिम हो या किसी भी धर्म का। अगर किसी को केवल उसके धर्म की वजह से काम करने से रोका जा रहा है, तो यह केवल संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन नहीं, सामाजिक ताने-बाने पर हमला है।</p>



<h6 class="wp-block-heading">कांवड़ यात्रा भगवान शिव के प्रति भक्ति का प्रतीक है। यह आस्था, समर्पण और सेवा का पर्व है।<br>कांवड़ की पवित्रता <strong>उ</strong>समें रखे गंगाजल, श्रद्धालु के तप, और भक्ति की भावना से तय होती है न कि उसे बनाने वाले के नाम से। धार्मिक एकता की धरती पर ऐसे विवाद न केवल निंदनीय हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी खतरनाक संकेत हैं। शिव ही शंभू हैं&#8230; वे सबके हैं। कांवड़ की आस्था को संकीर्ण सोच से न बांटें।</h6>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>बिहार में सियासी संग्राम, राहुल बोले – दोहराया जा रहा महाराष्ट्र मॉडल</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/political-battle-in-bihar-rahul-said-maharashtra-model-is-being-repeated/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 09 Jul 2025 09:55:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[DAINIK BHASKAR]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[Political battle in Bihar]]></category>
		<category><![CDATA[Rahul said – Maharashtra model is being repeated]]></category>
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					<description><![CDATA[लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद&#160;राहुल गांधी&#160;ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार और चुनाव आयोग को खुली चुनौती दी है। पटना में इंडिया गठबंधन के चक्काजाम प्रदर्शन में पहुंचे राहुल गांधी ने चुनावों में गड़बड़ी को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र में चुनाव ‘चोरी’ हुआ, वैसा ... <a title="बिहार में सियासी संग्राम, राहुल बोले – दोहराया जा रहा महाराष्ट्र मॉडल" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/political-battle-in-bihar-rahul-said-maharashtra-model-is-being-repeated/" aria-label="Read more about बिहार में सियासी संग्राम, राहुल बोले – दोहराया जा रहा महाराष्ट्र मॉडल">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="651" height="393" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture-2.jpg" alt="" class="wp-image-496116" style="width:629px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture-2.jpg 651w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture-2-300x181.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture-2-150x91.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 651px) 100vw, 651px" /></figure>



<p>लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद&nbsp;<a href="https://en.wikipedia.org/wiki/Rahul_Gandhi" target="_blank" rel="noreferrer noopener">राहुल गांधी&nbsp;</a>ने एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी की सरकार और चुनाव आयोग को खुली चुनौती दी है। पटना में इंडिया गठबंधन के चक्काजाम प्रदर्शन में पहुंचे राहुल गांधी ने चुनावों में गड़बड़ी को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह महाराष्ट्र में चुनाव ‘चोरी’ हुआ, वैसा ही खेल अब बिहार में भी दोहराया जा रहा है।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>क्या है राहुल गांधी के आरोप?</strong></h2>



<p>राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बिहार के चुनाव में भी महाराष्ट्र की तरह ‘चोरी’ करने कि कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में एक करोड़ अतिरिक्त वोट जुड़ गए, और गरीबों के वोटर लिस्ट से नाम काट दिए गए। जब कांग्रेस ने वोटर लिस्ट मांगी, तो चुनाव आयोग ने चुप्पी साध ली।</p>



<p>राहुल गांधी ने चुनाव आयोग को भाजपा और RSS का एजेंट बताते हुए कहा कि आयोग अपने संवैधानिक दायित्व को भूल चुका है। उनका आरोप था कि अब चुनाव आयुक्त का चयन भी निष्पक्ष नहीं रहा, जिसे पहले सभी दलों और चीफ जस्टिस की सहमति से चुना जाता था, अब उसे सिर्फ भाजपा तय कर रही है।</p>



<p>राहुल गांधी ने बिहार की जनता को सीधे संबोधित करते हुए कहा – ‘यह बिहार है, यहां गरीबों का वोट कोई नहीं छीन सकता। हम आपका वोट और भविष्य दोनों बचाएंगे।’ उन्होंने इंडिया गठबंधन की ओर से भरोसा दिलाया कि इस लड़ाई में वे अकेले नहीं हैं।</p>



<p>तो कुल मिलाकर राहुल गांधी के इन तीखे आरोपों से साफ है कि विपक्ष केंद्र की नीतियों और चुनावी पारदर्शिता को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में है। अब बड़ा सवाल ये है कि क्या चुनाव आयोग इन आरोपों का जवाब देगा? और क्या बिहार चुनाव में सचमुच कोई बड़ी साजिश रची जा रही है? इस पर देश की निगाहें टिकी हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बिहार में बढ़ेगा सियासी पारा, वोट कटवा पार्टियों की एंट्री से बढ़ेगी टेंशन</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/political-temperature-will-rise-in-bihar-tension-will-increase-with-the-entry-of-vote-cutter-parties/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 08 Jul 2025 11:23:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
		<category><![CDATA[बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[DAINIK BHASKAR]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[Political temperature will rise in Bihar]]></category>
		<category><![CDATA[tension will increase with the entry of vote-cutter parties]]></category>
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					<description><![CDATA[बिहार&#160;की सियासत में एक बार फिर से बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है. वो भी इसलिए क्योंकि चुनाव है. और इस बार मुकाबला सिर्फ बड़े दलों के बीच नही है, बल्कि छोटे – छोटे दलों के बीच&#160; भी है। जो अपने आप में बहुत ही दिलचस्प होने वाला है। दरअसल हम बात कर रहे ... <a title="बिहार में बढ़ेगा सियासी पारा, वोट कटवा पार्टियों की एंट्री से बढ़ेगी टेंशन" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/political-temperature-will-rise-in-bihar-tension-will-increase-with-the-entry-of-vote-cutter-parties/" aria-label="Read more about बिहार में बढ़ेगा सियासी पारा, वोट कटवा पार्टियों की एंट्री से बढ़ेगी टेंशन">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="886" height="496" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture.jpg" alt="" class="wp-image-496067" style="width:631px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture.jpg 886w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture-300x168.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture-768x430.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/07/Capture-150x84.jpg 150w" sizes="auto, (max-width: 886px) 100vw, 886px" /></figure>



<p><a href="https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0" target="_blank" rel="noreferrer noopener">बिहार</a>&nbsp;की सियासत में एक बार फिर से बड़ा उबाल देखने को मिल रहा है. वो भी इसलिए क्योंकि चुनाव है. और इस बार मुकाबला सिर्फ बड़े दलों के बीच नही है, बल्कि छोटे – छोटे दलों के बीच&nbsp; भी है। जो अपने आप में बहुत ही दिलचस्प होने वाला है। दरअसल हम बात कर रहे हैं उन पार्टियों की जिन्हें आमतौर पर वोट कटवा कहा जाता है।</p>



<p>बात करेंगे इस दल की तो ये वो दल हैं जो भले खुद सत्ता में न आएं लेकिन दूसरों की सत्ता की राह जरुर मुश्किल बना देते हैं तो यहां बेहद अहम हो जाता है ये जानना कि कौन हैं ये वोट कटवा पार्टियां और क्या हैं इनके एजेंडे और इस बार ये किस पार्टी के खेल को कर सकती है खराब।</p>



<p>तो यहां हम बात करेंगे सबसे पहले असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM की…जो 2020 में सीमांचल की 20 सीटों पर उतरे और 5 जीत लीं। हालांकि अब सिर्फ एक विधायक बचा है – अमौर से अख्तरुल इमान।<br>इस बार पार्टी 50 सीटों पर ताल ठोक रही है। मुस्लिम वोटों पर सीधा असर – और परेशानी खास तौर पर RJD और कांग्रेस के लिए।</p>



<p>वहीं अब बात करेंगे चुनावी रणनीतिकार से बने राजनेता प्रशांत किशोर की जिनकी पार्टी है जन सुराज. पदयात्रा से जनता के बीच पहुंचे पीके, अब पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं। हालांकि जनाधार अभी सीमित है, लेकिन कई सीटों पर RJD के वोट बैंक में सेंधमारी का खतरा बना हुआ है। वहीं बात करेंगे पार्टी के फोकस की तो – पलायन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास। और चुनाव चिन्ह है – स्कूल बैग।</p>



<p>वहीं इस चुनावी रेस में अगला नाम आता है मुकेश सहनी का जिनकी अगुवाई वाली पार्टी वीआईपी&nbsp;भी मैदान हैं. जिनका मुख्य फोकस मल्लाह और निषाद जैसे ओबीसी वर्गो पर है। जिन्होंने 2020 में NDA के साथ मिलकर 3 सीटें जीतीं, लेकिन बाद में तीनों लेकिन बाद में तीनों विधायक बीजेपी में चले गए। अब यें महागठबंधन के करीब हैं, पर सीटों को लेकर तस्वीर साफ नहीं।</p>



<p>वहीं अब बात करेंगे अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP की, जिसे अब तक बिहार में कोई चुनावी<br>सफलता नहीं मिली , लेकिन इस बार 243 में से सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है।<br>फिलहाल ज़मीनी पकड़ नहीं, लेकिन शहरी युवा वोटर को लुभाने की पूरी तैयारी है।</p>



<p><strong>इंडियन इंकलाब पार्टी</strong><br>अब बात &nbsp;इंजीनियर आईपी गुप्ता की, जिन्होंने कांग्रेस छोड़कर इंडियन इंकलाब पार्टी बनाई है।<br>पटना में बड़ी रैली के साथ शुरुआत की, और अब महागठबंधन व AIMIM दोनों से संपर्क में हैं।<br>फोकस जातीय न्याय और वंचित समुदायों पर।</p>



<p><strong>जय हिंद सेना</strong><br>शिवदीप लांडे, जो कभी बिहार के चर्चित IPS अफसर थे, अब जय हिंद सेना के नाम से अपनी राजनीतिक पारी शुरू कर चुके हैं।<br>कहते हैं, 243 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।<br>एजेंडा है – विकास की राजनीति, जातीय नहीं।</p>



<p><strong>विकास वंचित इंसान पार्टी (VVIP)</strong><br>और अब बात ‘हेलिकॉप्टर बाबा’ यानी प्रदीप निषाद की पार्टी VVIP की।<br>VIP से अलग होकर बनाई पार्टी, फोकस – दलित, महादलित, वंचित तबका।<br>संगठन अभी निर्माणाधीन है लेकिन भीम आर्मी जैसी सोच और युवा आधार बनाने की कोशिश जारी।</p>



<p>तो कुल मिलाकर बात साफ है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुकाबला सिर्फ महागठबंधन बनाम NDA का नहीं होगा…बल्कि इन ‘वोट कटवा’ पार्टियों का भी बड़ा रोल रहने वाला है।<br>ये खुद जीतें या न जीतें, लेकिन दूसरों को हराने का खेल जरूर बना सकती हैं।<br>अब देखना ये है कि ये पार्टियां किसके पाले में आग लगाती हैं और किसे चुनावी समुंदर में डुबो देती हैं।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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