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	<title>लाइफस्टाइल &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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	<title>लाइफस्टाइल &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>अचानक आ जाएं मेहमान तो न हों परेशान: सिर्फ 15 मिनट में बनाएं होटल जैसी &#8216;शाही मखाना करी&#8217;, उंगलियां चाटते रह जाएंगे लोग</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/dont-panic-if-unexpected-guests-arrive-prepare-a-hotel-style-shahi-makhana-curry-in-just-15-minutes-its-so-delicious-people-will-be-left-licking-their-fingers/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 25 Mar 2026 08:47:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[रेसिपी]]></category>
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					<description><![CDATA[लाइफस्टाइल डेस्क: घर पर अचानक मेहमानों का आ जाना खुशियों का पैगाम होता है, लेकिन अक्सर गृहिणियों के सामने यह बड़ी चुनौती होती है कि इतनी जल्दी क्या खास बनाया जाए। अगर आप वही पुरानी पनीर और मशरूम की सब्जियां खिलाकर बोर हो चुके हैं और कुछ नया व &#8216;रॉयल&#8217; ट्राई करना चाहते हैं, तो ... <a title="अचानक आ जाएं मेहमान तो न हों परेशान: सिर्फ 15 मिनट में बनाएं होटल जैसी &#8216;शाही मखाना करी&#8217;, उंगलियां चाटते रह जाएंगे लोग" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/dont-panic-if-unexpected-guests-arrive-prepare-a-hotel-style-shahi-makhana-curry-in-just-15-minutes-its-so-delicious-people-will-be-left-licking-their-fingers/" aria-label="Read more about अचानक आ जाएं मेहमान तो न हों परेशान: सिर्फ 15 मिनट में बनाएं होटल जैसी &#8216;शाही मखाना करी&#8217;, उंगलियां चाटते रह जाएंगे लोग">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-512380" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/mixcollage-07-dec-2025-06-02-pm-7960-1765110709.jpg" alt="" width="1200" height="675" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/mixcollage-07-dec-2025-06-02-pm-7960-1765110709.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/mixcollage-07-dec-2025-06-02-pm-7960-1765110709-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/mixcollage-07-dec-2025-06-02-pm-7960-1765110709-1024x576.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/mixcollage-07-dec-2025-06-02-pm-7960-1765110709-768x432.jpg 768w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></p>
<p data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">लाइफस्टाइल डेस्क:</b> घर पर अचानक मेहमानों का आ जाना खुशियों का पैगाम होता है, लेकिन अक्सर गृहिणियों के सामने यह बड़ी चुनौती होती है कि इतनी जल्दी क्या खास बनाया जाए। अगर आप वही पुरानी पनीर और मशरूम की सब्जियां खिलाकर बोर हो चुके हैं और कुछ नया व &#8216;रॉयल&#8217; ट्राई करना चाहते हैं, तो &#8216;मखाना करी&#8217; (Makhana Ki Sabzi) एक बेहतरीन विकल्प है। यह डिश न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि सेहत से भरपूर और बनाने में बेहद आसान भी है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं मखाने की ऐसी ग्रेवी वाली सब्जी, जिसका स्वाद किसी फाइव स्टार होटल की डिश को मात दे देगा।</p>
<h3 data-path-to-node="3">शाही मखाना सब्जी बनाने के लिए जरूरी सामग्री</h3>
<p data-path-to-node="4">इस डिश को तैयार करने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है। अपनी रसोई से ये चीजें निकाल लें:</p>
<ul data-path-to-node="5">
<li>
<p data-path-to-node="5,0,0"><b data-path-to-node="5,0,0" data-index-in-node="0">मुख्य सामग्री:</b> 2 कप मखाने, 2 मध्यम टमाटर (प्यूरी), 2 बारीक कटे प्याज।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="5,1,0"><b data-path-to-node="5,1,0" data-index-in-node="0">पेस्ट और रिचनेस:</b> 10-12 काजू का पेस्ट, आधा कप फेंटा हुआ दही।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="5,2,0"><b data-path-to-node="5,2,0" data-index-in-node="0">मसाले:</b> अदरक-लहसुन का पेस्ट, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला और कसूरी मेथी।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="5,3,0"><b data-path-to-node="5,3,0" data-index-in-node="0">तड़का:</b> घी या तेल, जीरा, तेज पत्ता, छोटी इलायची और दालचीनी का टुकड़ा।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="5,4,0"><b data-path-to-node="5,4,0" data-index-in-node="0">गार्निशिंग:</b> ताजा हरा धनिया।</p>
</li>
</ul>
<h3 data-path-to-node="6">स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी: ऐसे तैयार करें ढाबा स्टाइल ग्रेवी</h3>
<p data-path-to-node="7">मखाने की सब्जी बनाने की विधि बेहद सरल है, बस इन स्टेप्स को फॉलो करें:</p>
<p data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">1. मखानों की भुनाई:</b> सबसे पहले एक कड़ाही में थोड़ा सा घी डालें और मखानों को हल्का सुनहरा और कुरकुरा होने तक भून लें। भूनने के बाद इन्हें एक अलग प्लेट में निकाल लें। इससे सब्जी में मखानों का क्रंच बना रहता है।</p>
<p data-path-to-node="9"><b data-path-to-node="9" data-index-in-node="0">2. खुशबूदार तड़का और मसाला:</b> उसी कड़ाही में फिर से तेल या घी गरम करें। इसमें जीरा, तेज पत्ता, इलायची और दालचीनी डालें। जब जीरा चटकने लगे, तो बारीक कटा प्याज डालकर गुलाबी होने तक भूनें। अब अदरक-लहसुन का पेस्ट डालें और उसका कच्चापन निकलने तक पकाएं।</p>
<p data-path-to-node="10"><b data-path-to-node="10" data-index-in-node="0">3. ग्रेवी को दें शाही अंदाज:</b> अब इसमें टमाटर की प्यूरी डालें। साथ ही हल्दी, मिर्च और धनिया पाउडर मिलाकर तब तक पकाएं जब तक मसाला तेल न छोड़ने लगे। इसके बाद इसमें काजू का पेस्ट और फेंटा हुआ दही डालें। ध्यान रहे, दही डालते समय आंच बिल्कुल धीमी रखें ताकि ग्रेवी फटे नहीं।</p>
<p data-path-to-node="11"><b data-path-to-node="11" data-index-in-node="0">4. फाइनल टच:</b> जब ग्रेवी अच्छी तरह पक जाए, तो इसमें एक कप पानी और स्वादानुसार नमक डालकर उबाल आने दें। अंत में गरम मसाला और कसूरी मेथी को हाथों से क्रश करके डालें। अब तैयार ग्रेवी में भुने हुए मखाने मिलाएं और सिर्फ 2 मिनट के लिए ढंक दें ताकि मखाने मसालों को सोख लें।</p>
<h3 data-path-to-node="12">एक्सपर्ट टिप: स्वाद बढ़ाने का सीक्रेट तरीका</h3>
<p data-path-to-node="13">अगर आप इस सब्जी को और ज्यादा &#8216;रिच&#8217; और कलरफुल बनाना चाहते हैं, तो ग्रेवी में थोड़े से भुने हुए हरे मटर भी डाल सकते हैं। इसे गरमा-गरम लच्छा पराठा, नान या जीरा राइस के साथ सर्व करें। यकीन मानिए, मेहमान आपकी कुकिंग स्किल्स की तारीफ करते नहीं थकेंगे।</p>
<p data-path-to-node="13">
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		<title>फ्रेंच हेल्थ एजेंसी के अनुसार वेपिंग सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदायक &#8211; भारत में सिगरेट से होने वाले नुकसान को कम करने की रणनीति के लिए अध्ययन महत्वपूर्ण</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 08:37:05 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[वेपिंग सिगरेट]]></category>
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					<description><![CDATA[फ्रांस की एजेंसी फॉर फूड, एनवायरनमेंटल एंड ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (ए.एन.एस.ई.एस) ने हाल ही में एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के परिणाम जारी किए जिसमें कहा गया है कि वेपिंग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम पारंपरिक सिगरेट की तुलना में काफी कम हैं। हालाँकि ऐसा नहीं है कि इससे स्वास्थ्य को कोई भी नुकसान न ... <a title="फ्रेंच हेल्थ एजेंसी के अनुसार वेपिंग सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदायक &#8211; भारत में सिगरेट से होने वाले नुकसान को कम करने की रणनीति के लिए अध्ययन महत्वपूर्ण" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/according-to-a-french-health-agency-vaping-is-less-harmful-than-cigarettes-a-study-significant-for-strategies-to-reduce-the-harm-caused-by-cigarettes-in-india/" aria-label="Read more about फ्रेंच हेल्थ एजेंसी के अनुसार वेपिंग सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदायक &#8211; भारत में सिगरेट से होने वाले नुकसान को कम करने की रणनीति के लिए अध्ययन महत्वपूर्ण">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-512043" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-17-at-13.22.33.jpeg" alt="" width="1024" height="1024" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-17-at-13.22.33.jpeg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-17-at-13.22.33-300x300.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-17-at-13.22.33-150x150.jpeg 150w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-17-at-13.22.33-768x768.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p>फ्रांस की एजेंसी फॉर फूड, एनवायरनमेंटल एंड ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (ए.एन.एस.ई.एस) ने हाल ही में एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के परिणाम जारी किए जिसमें कहा गया है कि वेपिंग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम पारंपरिक सिगरेट की तुलना में काफी कम हैं। हालाँकि ऐसा नहीं है कि इससे स्वास्थ्य को कोई भी नुकसान न होता हो। ये नतीजे 2,500 से अधिक अध्ययनों की समीक्षा से मिले हैं, जिनमें वेपिंग के टॉक्सिकोलॉजिकल प्रभाव की जाँच की गई थी।</p>
<p>एजेंसी ने बताया कि वेपिंग और सिगरेट के बीच मुख्य अंतर यह है कि इसमें तंबाकू जलती नहीं है। पारंपरिक सिगरेट में तंबाकू जलता है, जिससे बहुत ज्यादा मात्रा में टॉक्सिक और कार्सिनोजेनिक कंपाउंड निकलते हैं। वहीं, ई-सिगरेट में एक लिक्विड गर्म होता है, जिससे एरोसोल बनता है इन एयरोसोल में बहुत कम नुकसानदायक पदार्थ होते हैं और वो भी बहुत थोड़ी मात्रा में होते हैं।</p>
<p>रिपोर्ट में सामने आया कि फ्रांस में वेपिंग करने वाले 98 प्रतिशत वयस्क वर्तमान में या पहले से सिगरेट पीते आए हैं। इनमें से 61 प्रतिशत लोग दोनों का एक साथ उपयोग करते हैं। दैनिक वेपिंग केवल 6.1 प्रतिशत है, तथा दैनिक सिगरेट का सेवन गिरकर 18.2 प्रतिशत पर पहुँच गया है, जो 1990 के दशक के बाद अब तक का सबसे निचला स्तर है। इन आँकड़ों से इस बात को बल मिलता है कि वेपिंग सिगरेट पीने वालों के लिए मुख्य तौर से नुकसान को कम करने का टूल रहा है, न कि सिगरेट न पीने वालों के लिए कोई मनोरंजन का सामान।</p>
<p>जोनाथन लिविंगस्टोन &#8211; बैंक्स, पीएचडी, लैक्चरर एवं सीनियर रिसर्चर, प्रमाण आधारित हेल्थकेयर, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने कहा, ‘‘हमारी रिसर्च में इस बात के काफी मजबूत प्रमाण मिले हैं कि ई-सिगरेट लोगों को सिगरेट छोड़ने में मदद करने का एक प्रभावशाली तरीका है। ई-सिगरेट पूरी तरह से सुरक्षित तो नहीं हैं, पर यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि वो सिगरेट के मुकाबले काफी ज्यादा सुरक्षित हैं।’’</p>
<p>भारत में, जहाँ सिगरेट पीने से होने वाली बीमारियाँ जन स्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं, वहाँ एजेंसी फॉर फूड, एनवायरनमेंटल एंड ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (ए.एन.एस.ई.एस) के अध्ययन से मिले ये नतीजे नीतिनिर्माताओं और हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी पेश करते हैं, जिसकी मदद से वैकल्पिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम की भूमिका का आकलन किया जा सकता है। हालाँकि, धूम्रपान पूरी तरह छोड़ देना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। लेकिन जो लोग सिगरेट छोड़ने में समर्थ नहीं हैं, उनके लिए प्रमाणों से प्रदर्शित होता है कि रैगुलेटेड ई-सिगरेट उन्हें पारंपरिक सिगरेट के मुकाबले कम हानिकारक रसायनों के संपर्क में लाता है। सिगरेट पीने वाले व्यस्कों को ई-सिगरेट टॉक्सिक पदार्थों का संपर्क कम करने का एक सीमित और अस्थायी तरीका प्रदान करता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि ई-सिगरेट का उपयोग पारंपरिक सिगरेट छोड़ने के उद्देश्य से जिम्मेदारीपूर्वक किया जाए।</p>
<p>एजेंसी फॉर फूड, एनवायरनमेंटल एंड ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (ए.एन.एस.ई.एस) ने इस बात पर भी जोर दिया कि जहाँ वेपिंग पारंपरिक सिगरेट के मुकाबले कम नुकसानदायक है, वहीं ई-सिगरेट के लगातार इस्तेमाल के दीर्घकालिक प्रभावों के प्रमाण बहुत कम हैं। इसलिए वेपिंग के जोखिमों को ‘‘संभव’’ या ‘‘संभावित’’ की श्रेणी में रखा गया है, जबकि पारंपरिक सिगरेट पीने के जोखिम बहुत ज्यादा हैं, यह पूरी तरह से साबित हो चुका है।</p>
<p>ए.एन.एस.ई.एस ने यह भी कहा कि जो लोग सिगरेट नहीं पीते हैं, उन्हें वेपिंग शुरू नहीं करना चाहिए। हालाँकि, जो लोग अपनी सिगरेट की आदत छोड़ नहीं पा रहे हैं, उनके लिए ई-सिगरेट नुकसान को कम करने का एक अस्थायी विकल्प प्रदान कर सकता है, जो सबसे अधिक कारगर तब होगा, जब इसका उपयोग सिगरेट और वेपिंग दोनों को छोड़ने के लिए योजनाबद्ध रूप से किया जाए। एजेंसी ने यह निर्देश भी दिया कि ये नतीजे केवल रैगुलेटेड डिवाईस और लिक्विड पर लागू होते हैं, जिन्हें अधिकृत चैनलों द्वारा बेचा जाता है। अनरैगुलेटेड या अवैध उत्पादों में छिपे हुए एडिटिव्स, ज्यादा मात्रा में निकोटीन या नुकसानदायक तत्व मिले हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम काफी बढ़ सकता है।</p>
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		<title>सावधान पैरेंट्स! आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य व भविष्य को बिगाड़ रहा इंस्टाग्राम और फेसबुक, जानें सोशल मीडिया के छिपे खतरे और बचाव के तरीके</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/parents-beware-instagram-and-facebook-are-jeopardizing-your-childs-mental-health-and-future-discover-the-hidden-dangers-of-social-media-and-ways-to-protect-them/</link>
					<comments>https://dainikbhaskarup.com/parents-beware-instagram-and-facebook-are-jeopardizing-your-childs-mental-health-and-future-discover-the-hidden-dangers-of-social-media-and-ways-to-protect-them/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 16 Mar 2026 01:36:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भास्कर +]]></category>
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					<description><![CDATA[&#8211; यू-ट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अश्लील इन्फ्लूएंसर्स की भरमार &#8211; अश्लीलता की सुनामी की जद में देश का भविष्य, ठोस नीति की जरूरत लखनऊ। यू-ट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म देश में खुलेआम जहर परोसने का माध्यम बन रहे हैं, जी हां इन तमाम सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर कई इन्फ्लूएंसर्स अश्लील कंटेंट ... <a title="सावधान पैरेंट्स! आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य व भविष्य को बिगाड़ रहा इंस्टाग्राम और फेसबुक, जानें सोशल मीडिया के छिपे खतरे और बचाव के तरीके" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/parents-beware-instagram-and-facebook-are-jeopardizing-your-childs-mental-health-and-future-discover-the-hidden-dangers-of-social-media-and-ways-to-protect-them/" aria-label="Read more about सावधान पैरेंट्स! आपके बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य व भविष्य को बिगाड़ रहा इंस्टाग्राम और फेसबुक, जानें सोशल मीडिया के छिपे खतरे और बचाव के तरीके">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://c.ndtvimg.com/2026-03/6omd3n24_dfvsd_625x300_10_March_26.jpeg?im=FitAndFill,algorithm=dnn,width=773,height=435" alt="क्या सोशल मीडिया बदल रहा है बच्चों का दिमाग? एक्सपर्ट्स ने बताया 16 साल से पहले क्यों जरूरी है दूरी" /></p>
<p>&#8211; यू-ट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर अश्लील इन्फ्लूएंसर्स की भरमार<br />
&#8211; अश्लीलता की सुनामी की जद में देश का भविष्य, ठोस नीति की जरूरत</p>
<p>लखनऊ। यू-ट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम समेत कई सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म देश में खुलेआम जहर परोसने का माध्यम बन रहे हैं, जी हां इन तमाम सोशल मीडिया प्लैटफार्म पर कई इन्फ्लूएंसर्स अश्लील कंटेंट परोस रहे हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी घातक साबित हो रहा है, और हैरानी की बात ये है कि सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। हर माता-पिता का सपना होता है कि उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो और बच्चा चरित्रवान बने। लेकिन फेसबुक, यू-ट्यूब और इंस्टाग्राम द्वारा परोसा हुआ अश्लील जहर आपके बच्चे के भविष्य को बर्बादी की ओर ले जा रहा है।</p>
<p>अश्लील कंटेंट और रील्स की लत बच्चों की एकाग्रता, मानसिक स्वास्थ्य, चरित्र निर्माण और शैक्षणिक भविष्य को बिगाड़ रहा है, और यह मामला केवल अभिभावकों की चिंता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और नीति-निर्माताओं के लिए भी गंभीर विषय बन चुका है। अत्यधिक स्क्रीन टाइम, एल्गोरिदम आधारित आकर्षण और अश्लील कंटेंट बच्चों को साइबर बुलिंग, दुरुपयोग और असामाजिक प्रभावों की ओर धकेल रही है। इससे उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।</p>
<p>ताज्जुब की बात तो ये है कि अश्लील कंटेट परोसने वाले इन्फ्लूएंसर्स को फेसबुक, यू-ट्यूब, इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म प्रमोट भी करते हैं, इन सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म का एल्गोरिदम इस तरह से तैयार किया जाता है कि बच्चे इस जाल में फंसे रहते हैं, और तब तक फंसे रहते हैं जब तक वे एडिक्ट नहीं हो जाते। जो भारत अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए जाना जाता है, उस भारत के भविष्य को इन सोशल मीडिया प्लैटफार्म के द्वारा बड़ी शातिराना ढंग से बर्बाद किया जा रहा है। ‘पब्लिक-डीसेन्सी’ बनाए रखने के लिए कानून तो बनाए गए हैं जिसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर अश्लीलता फैलाना अपराध बताया गया है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि सोशल मीडिया के अश्लील इन्फ्लूएंसर्स पर आखिर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती।</p>
<blockquote><p><strong>क्या बोले एक्सपर्ट- </strong><br />
<strong>डॉ. प्रसाद कन्नेकांति, डिपार्टमेंट ऑफ साइकेट्री, केजीएमयू </strong></p>
<p><strong> ‘यह बहुत गंभीर विषय है, अश्लील कंटेंट बच्चे के लिए काफी घातक साबित होता है। सोशल मीडिया के एल्गोरिदम में बच्चे फंस जाते हैं और स्क्रीन टाइम भी बढ़ जाता है। अश्लील कंटेंट बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ता है, बच्चा समाज से कटकर अकेला रहना पसंद करने लगता है, एकाग्रता की कमी होने लगती है, पढ़ाई में मन नहीं लगता है, स्लीप डिसआर्डर की समस्या उत्पन्न हो जाती है। हैरानी की बात तो ये है कि बच्चा ऐसे इन्फ्लूएंसर्स के प्रभावित होकर खुद भी ऐसे कंटेंट बना सकता है क्योंकि ऐसे कंटेंट को ज्यादा लाइक्स मिलते हैं और फोलोवर्स भी बढ़ जाते हैं। सरकार को इस ओर ठोस कदम उठाने की जरूरत है’। </strong></p></blockquote>
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		<title>कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इंडक्शन चूल्हा इस्तेमाल करते समय ये 8 बड़ी गलतियां? जानें वरना होगा नुकसान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 15 Mar 2026 01:36:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों और किचन को स्मार्ट बनाने की होड़ में आज लगभग हर घर में इंडक्शन चूल्हा (Induction Cooktop) अपनी जगह बना चुका है। यह खाना बनाने में तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक तो है, लेकिन एक छोटी सी लापरवाही इसे कबाड़ में बदल सकती है। अगर आप भी चाहते हैं ... <a title="कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इंडक्शन चूल्हा इस्तेमाल करते समय ये 8 बड़ी गलतियां? जानें वरना होगा नुकसान" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/are-you-making-these-8-major-mistakes-while-using-an-induction-cooktop-find-out-now-otherwise-you-could-face-damage/" aria-label="Read more about कहीं आप भी तो नहीं कर रहे इंडक्शन चूल्हा इस्तेमाल करते समय ये 8 बड़ी गलतियां? जानें वरना होगा नुकसान">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="1"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-511761" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/top-3-induction-cooktop-344563_mobile.webp" alt="" width="640" height="360" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/top-3-induction-cooktop-344563_mobile.webp 640w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/03/top-3-induction-cooktop-344563_mobile-300x169.webp 300w" sizes="(max-width: 640px) 100vw, 640px" /></p>
<p data-path-to-node="1"><b data-path-to-node="1" data-index-in-node="0">नई दिल्ली।</b> एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों और किचन को स्मार्ट बनाने की होड़ में आज लगभग हर घर में इंडक्शन चूल्हा (Induction Cooktop) अपनी जगह बना चुका है। यह खाना बनाने में तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक तो है, लेकिन एक छोटी सी लापरवाही इसे कबाड़ में बदल सकती है। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका इंडक्शन सालों-साल चले और बिजली का बिल भी कम आए, तो आपको कुछ अनजानी गलतियों से बचना होगा। अक्सर लोग अनजाने में ऐसी भूल कर बैठते हैं जिससे न केवल डिवाइस खराब होता है, बल्कि शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ जाता है।</p>
<h3 data-path-to-node="2"><b data-path-to-node="2" data-index-in-node="0">गलत बर्तन और सफाई में लापरवाही पड़ेगी भारी</b></h3>
<p data-path-to-node="3">इंडक्शन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसका ऊपरी सिरामिक ग्लास होता है। इस पर हमेशा फ्लैट बॉटम (सपाट तल) वाले और &#8216;इंडक्शन फ्रेंडली&#8217; बर्तनों का ही उपयोग करना चाहिए। भूलकर भी एल्युमिनियम या तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल न करें, क्योंकि ये इसकी सतह को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, खाना बनाने के बाद कांच पर गिरे दाग-धब्बों को तुरंत साफ करना जरूरी है। ध्यान रहे, सफाई के लिए कभी भी लोहे के जूने या किसी नुकीली चीज का प्रयोग न करें, वरना कांच पर पड़े स्क्रैच इसकी कार्यक्षमता को खत्म कर देंगे।</p>
<h3 data-path-to-node="4"><b data-path-to-node="4" data-index-in-node="0">गीले हाथ और ओवरलोडिंग: शॉर्ट सर्किट को दावत</b></h3>
<p data-path-to-node="5">इंडक्शन एक संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। इसे कभी भी गीले हाथों से न छुएं और न ही इसके बटनों को दबाएं, क्योंकि इससे शॉर्ट सर्किट या करंट लगने का डर रहता है। हर इंडक्शन की अपनी एक भार क्षमता (Weight Capacity) होती है। इस पर बहुत भारी बर्तन या झटके से कुकर रखने से इसका ऊपरी ग्लास चटक सकता है। इंडक्शन पर निर्धारित वजन से ज्यादा बोझ रखना इसकी उम्र को आधा कर देता है।</p>
<h3 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">वेंटिलेशन की कमी और &#8216;खाली&#8217; चलाना है खतरनाक</b></h3>
<p data-path-to-node="7">इंडक्शन के अंदर एक पंखा लगा होता है जो इसकी इंटरनल कॉइल्स को ठंडा रखता है। इसे कभी भी ऐसी जगह न रखें जहां हवा का रास्ता बंद हो, क्योंकि ओवरहीटिंग की वजह से मशीन के अंदरूनी हिस्से जल सकते हैं। एक और बड़ी गलती है—बिना बर्तन रखे इंडक्शन को चालू छोड़ देना। इससे इसकी कॉइल्स अत्यधिक गर्म हो जाती हैं और मदरबोर्ड जलने का खतरा रहता है।</p>
<h3 data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">प्लग निकालने की जल्दी और वोल्टेज का उतार-चढ़ाव</b></h3>
<p data-path-to-node="9">अक्सर लोग खाना पकते ही तुरंत मेन स्विच बंद कर देते हैं, जो कि सबसे बड़ी गलती है। खाना पकने के बाद भी इंडक्शन का पंखा कुछ देर तक चलता है ताकि अंदर की गर्मी बाहर निकल सके। पंखा पूरी तरह बंद होने के बाद ही प्लग निकालें। साथ ही, वोल्टेज के उतार-चढ़ाव के समय इसका उपयोग करने से बचें, क्योंकि हाई वोल्टेज सीधा इसके कीमती मदरबोर्ड को फूंक सकता है।</p>
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		<title>Homemade Hair Conditioner: अब पार्लर जैसा ग्लो घर पर! एलोवेरा से बनाएं केमिकल-फ्री कंडीशनर, बाल बनेंगे रेशमी और चमकदार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 01:36:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: धूल, प्रदूषण और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से आजकल बालों का बेजान और रूखा होना एक आम समस्या बन गई है। महंगे पार्लर ट्रीटमेंट के बजाय अब आप अपने घर के आंगन में लगे एलोवेरा (Aloe Vera) से बालों की खोई हुई चमक वापस पा सकते हैं। आयुर्वेद में एलोवेरा को बालों ... <a title="Homemade Hair Conditioner: अब पार्लर जैसा ग्लो घर पर! एलोवेरा से बनाएं केमिकल-फ्री कंडीशनर, बाल बनेंगे रेशमी और चमकदार" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/homemade-hair-conditioner-now-get-parlor-like-glow-at-home-make-a-chemical-free-conditioner-with-aloe-vera-for-silky-and-shiny-hair/" aria-label="Read more about Homemade Hair Conditioner: अब पार्लर जैसा ग्लो घर पर! एलोवेरा से बनाएं केमिकल-फ्री कंडीशनर, बाल बनेंगे रेशमी और चमकदार">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/aloe-vera-gel-hair-11-09-2024-1-1726054563-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-510567" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/aloe-vera-gel-hair-11-09-2024-1-1726054563-1024x576.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/aloe-vera-gel-hair-11-09-2024-1-1726054563-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/aloe-vera-gel-hair-11-09-2024-1-1726054563-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/aloe-vera-gel-hair-11-09-2024-1-1726054563.jpg 1200w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading"></h2>



<p><strong>नई दिल्ली:</strong> धूल, प्रदूषण और केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से आजकल बालों का बेजान और रूखा होना एक आम समस्या बन गई है। महंगे पार्लर ट्रीटमेंट के बजाय अब आप अपने घर के आंगन में लगे <strong>एलोवेरा (Aloe Vera)</strong> से बालों की खोई हुई चमक वापस पा सकते हैं। आयुर्वेद में एलोवेरा को बालों के लिए &#8216;अमृत&#8217; माना गया है। यह न केवल बालों को पोषण देता है, बल्कि स्कैल्प को स्वस्थ रखकर उन्हें जड़ों से मजबूत बनाता है। आइए जानते हैं घर पर एलोवेरा कंडीशनर बनाने के कुछ आसान और जादुई तरीके।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>एलोवेरा कंडीशनर ही क्यों? जानें इसके फायदे</strong></h3>



<p>एलोवेरा जेल विटामिन्स, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना है। बाजार में मिलने वाले कंडीशनर में सिलिकॉन और पैराबेंस जैसे केमिकल होते हैं, जो लंबे समय में बालों को कमजोर कर देते हैं। वहीं, एलोवेरा कंडीशनर:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बालों की नमी (Moisture) को लॉक करता है।</li>



<li>स्कैल्प को हाइड्रेटेड रखता है और डैंड्रफ कम करता है।</li>



<li>&#8216;फ्रिज&#8217; (Frizz) को खत्म कर बालों को सॉफ्ट और सुलझा हुआ बनाता है।</li>



<li>पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण हर उम्र के व्यक्ति के लिए सुरक्षित है।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>1. इंस्टेंट एलोवेरा और शहद कंडीशनर (बनाने की विधि)</strong></h3>



<p>यह मिश्रण बालों को डीप कंडीशनिंग देने के लिए बेस्ट है। इसे बनाने के लिए:</p>



<ol start="1" class="wp-block-list">
<li>एक कटोरी में <strong>2 चम्मच ताजा एलोवेरा जेल</strong> लें।</li>



<li>इसमें <strong>1 चम्मच नारियल तेल</strong> और <strong>आधा चम्मच शहद</strong> मिलाएं।</li>



<li>मिश्रण को थोड़ा पतला करने के लिए हल्का गुनगुना पानी डालें और अच्छे से फेंट लें।</li>



<li><strong>कैसे लगाएं:</strong> बालों को शैंपू करने के बाद इस पेस्ट को स्कैल्प और बालों की लंबाई पर लगाएं। 5-10 मिनट बाद सादे पानी से धो लें। इसे तुरंत बनाकर इस्तेमाल करना सबसे अधिक प्रभावी होता है।</li>
</ol>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>2. एलोवेरा और गुलाब जल: खुशबू के साथ सॉफ्टनेस</strong></h3>



<p>अगर आप चाहते हैं कि आपके बाल मुलायम होने के साथ-साथ महकें भी, तो यह नुस्खा आजमाएं। 2 चम्मच एलोवेरा जेल में 1 चम्मच गुलाब जल और थोड़ा सा नारियल तेल मिलाकर मिश्रण तैयार करें। माइल्ड शैंपू के बाद इसे लगाने से बाल रेशमी हो जाते हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>प्रो-टिप्स: किचन के इन सामानों से भी चमकेगी जुल्फें</strong></h3>



<p>एलोवेरा के अलावा आप कुछ और घरेलू चीजें भी ट्राई कर सकते हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>दही और शहद:</strong> यह मिश्रण बालों को प्रोटीन पोषण देता है।</li>



<li><strong>केला और ऑलिव ऑयल:</strong> पके हुए केले को मैश करके जैतून का तेल मिलाने से बालों की शाइन बढ़ती है।</li>



<li><strong>अलसी का जेल (Flaxseed Gel):</strong> अलसी के बीजों को उबालकर बना जेल प्राकृतिक कंडीशनर का बेहतरीन विकल्प है।</li>
</ul>



<p><strong>सावधानी:</strong> केमिकल वाले प्रोडक्ट्स बालों को अंदर से खोखला कर देते हैं। भारतीय मौसम और जीवनशैली को देखते हुए ये नेचुरल उपाय न केवल सस्ते हैं, बल्कि इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है। इस बदलते मौसम में अपने बालों को प्रकृति का साथ दें।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>
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		<item>
		<title>अलर्ट : भारतीय महिलाओं में लगातार बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले&#8230;जानिए क्या है इसके पीछे का कारण</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/alert-breast-cancer-cases-are-continuously-increasing-among-indian-women-know-the-reason-behind-it/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 13 Feb 2026 01:36:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[Breast Cancer Prevention Tips for Women]]></category>
		<category><![CDATA[Breast Cancer Symptoms in Hindi]]></category>
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		<category><![CDATA[Link between Sleep Deprivation and Cancer]]></category>
		<category><![CDATA[Obesity and Estrogen Level]]></category>
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					<description><![CDATA[&#160; नई दिल्ली: भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। आईसीएमआर (ICMR) की हालिया स्टडी और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, देश में ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) के मामलों में हर साल करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जो ... <a title="अलर्ट : भारतीय महिलाओं में लगातार बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले&#8230;जानिए क्या है इसके पीछे का कारण" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/alert-breast-cancer-cases-are-continuously-increasing-among-indian-women-know-the-reason-behind-it/" aria-label="Read more about अलर्ट : भारतीय महिलाओं में लगातार बढ़ रहे ब्रेस्ट कैंसर के मामले&#8230;जानिए क्या है इसके पीछे का कारण">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/breast-cancer-recurrence-09-05-2025-1746861327-1024x576.jpg" alt="" class="wp-image-510570" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/breast-cancer-recurrence-09-05-2025-1746861327-1024x576.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/breast-cancer-recurrence-09-05-2025-1746861327-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/breast-cancer-recurrence-09-05-2025-1746861327-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/breast-cancer-recurrence-09-05-2025-1746861327.jpg 1200w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading">&nbsp;</h2>



<p><strong>नई दिल्ली:</strong> भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक ट्रेंड सामने आया है। आईसीएमआर (ICMR) की हालिया स्टडी और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, देश में <strong>ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर)</strong> के मामलों में हर साल करीब 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जो बीमारी पहले 50 साल की उम्र के बाद देखी जाती थी, अब वह 35 से 50 वर्ष की महिलाओं को अपनी चपेट में ले रही है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज इंफॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और शहरीकरण इस बीमारी के सबसे बड़े वाहक बन गए हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>नींद की कमी और हार्मोनल असंतुलन: एक साइलेंट किलर</strong></h3>



<p>वैज्ञानिकों ने इस खतरे के पीछे नींद की कमी को एक मुख्य कारण माना है। कम नींद लेने से शरीर में <strong>मेलाटोनिन हार्मोन</strong> का स्तर गिर जाता है, जो सीधे तौर पर एस्ट्रोजन के संतुलन को बिगाड़ देता है।</p>



<blockquote class="wp-block-quote is-layout-flow wp-block-quote-is-layout-flow">
<p><strong>विशेषज्ञों की राय:</strong> गहरी नींद के दौरान हमारा शरीर कोशिकाओं (Cells) और डीएनए (DNA) की मरम्मत करता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो यह मरम्मत प्रक्रिया बाधित हो जाती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को पनपने का मौका मिलता है।</p>
</blockquote>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>मोटापा और मेनोपॉज के बाद का जोखिम</strong></h3>



<p>बढ़ता वजन और पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कई गुना बढ़ा देती है। दरअसल, मोटापा शरीर में सूजन (Inflammation) और इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है। मेनोपॉज के बाद शरीर में मौजूद फैट ही एस्ट्रोजन का प्रमुख स्रोत बन जाता है। शरीर में एस्ट्रोजन का उच्च स्तर स्तन कोशिकाओं में कैंसर बनने की संभावना को तेजी से बढ़ाता है, इसलिए संतुलित वजन बनाए रखना अब केवल खूबसूरती नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की जरूरत है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>देर से शादी और बदलती दिनचर्या का असर</strong></h3>



<p>ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई सामाजिक और व्यक्तिगत कारण भी जुड़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>देर से शादी होना और पहले बच्चे के जन्म में देरी।</li>



<li>स्तनपान (Breastfeeding) न कराना या कम समय तक कराना।</li>



<li>शारीरिक गतिविधियों (Physical Activity) की भारी कमी और जंक फूड का सेवन।</li>



<li>लगातार बना रहने वाला मानसिक तनाव।</li>
</ul>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>बचाव के तरीके: केवल मैमोग्राफी काफी नहीं</strong></h3>



<p>डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ जांच या मैमोग्राफी पर निर्भर रहना समाधान नहीं है। महिलाओं को अपनी दिनचर्या में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे। रोजाना कम से कम <strong>30 मिनट व्यायाम</strong>, पर्याप्त <strong>7-8 घंटे की नींद</strong>, और तनाव कम करने के लिए <strong>योग व ध्यान</strong> को जीवन का हिस्सा बनाना अनिवार्य है। समय-समय पर खुद से स्तन परीक्षण (Self-Examination) करना और किसी भी गांठ या बदलाव को नजरअंदाज न करना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।&nbsp;</p>
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		<title>वो शहर जहाँ पहला कदम लड़कियाँ आगे बढ़ाती हैं&#8230;.</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Feb 2026 22:14:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[हमारे देश में शादी की बातचीत में पारंपरिक नियमों का दबदबा रहा है, लेकिन अब इसमें धीरे-धीरे परिवर्तन हो रहा है । शादी.कॉम की नई रिपोर्ट, शादी ट्रेंडिंग के मुताबिक भारत में ऐसी लड़कियों की संख्या बढ़ रही है, जो खुद कदम बढ़ाकर बातचीत की शुरुआत करती हैं, और ये लड़कियाँ आत्मविश्वास के साथ बात ... <a title="वो शहर जहाँ पहला कदम लड़कियाँ आगे बढ़ाती हैं&#8230;." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/the-city-where-girls-take-their-first-steps-forward/" aria-label="Read more about वो शहर जहाँ पहला कदम लड़कियाँ आगे बढ़ाती हैं&#8230;.">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="361" height="131" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-14-at-03.38.27.jpeg" alt="" class="wp-image-510643" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-14-at-03.38.27.jpeg 361w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-14-at-03.38.27-300x109.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 361px) 100vw, 361px" /></figure>



<p>हमारे देश में शादी की बातचीत में पारंपरिक नियमों का दबदबा रहा है, लेकिन अब इसमें धीरे-धीरे परिवर्तन हो रहा है । शादी.कॉम की नई रिपोर्ट, शादी ट्रेंडिंग के मुताबिक भारत में ऐसी लड़कियों की संख्या बढ़ रही है, जो खुद कदम बढ़ाकर बातचीत की शुरुआत करती हैं, और ये लड़कियाँ आत्मविश्वास के साथ बात शुरू करती हैं ।</p>



<p>अपने प्लेटफॉर्म से मिले डेटा के आधार पर इस रिपोर्ट में सामने आया है कि आधुनिक समय में भारत में मैचमेकिंग की शुरुआत करने का तरीका बदल रहा है । अब लड़कियाँ यह इंतजार नहीं कर रही हैं कि कोई उनसे आगे बढ़कर संपर्क करेगा, बल्कि वो बातचीत की शुरुआत खुद कर रही हैं । वो सक्रिय रहकर अपनी रुचि जाहिर कर रही हैं और संबंधों की शुरुआत पर अपना नियंत्रण स्थापित कर रही हैं ।</p>



<p>दिलचस्प बात यह है कि यह परिवर्तन केवल बड़े मेट्रो शहरों में नहीं हो रहा है, बल्कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी देखने को मिल रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर शादी की बातचीत शुरू करने में लखनऊ, पटना, मदुरई, विशाखापट्नम और नागपुर की लड़कियाँ सबसे आगे हैं । छोटे शहरों में हो रहा यह परिवर्तन इस धारणा को कमजोर कर रहा है कि डेटिंग के व्यवहार में परिवर्तन आमतौर से मेट्रो शहरों से शुरू होता है।</p>



<p>इसके विपरीत, चेन्नई, हैदराबाद और दिल्ली जैसे टियर 1 शहरों में लड़कियों द्वारा बातचीत की शुरुआत कम देखने को मिल रही है, वहीं मुंबई और बैंगलुरू में यह रूझान बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता ।</p>



<p>ये नतीजे संस्कृति में एक बड़ा बदलाव प्रदर्शित करते हैं । विकसित होते हुए भारत में लड़कियाँ पारंपरिक नियमों को बदल रही हैं और दिल के मामलों में अपना ज्यादा नियंत्रण स्थापित कर रही हैं ।</p>



<p>स्बसे ज्यादा मैच वाले शहरः<br>भारत में मैचमेकिंग के नियम फिर से बन रहे हैं । इसमें मेट्रो शहरों पर केंद्रित पुरानी मान्यता बदल रही है । शादी.कॉम की नई रिपोर्ट, शादी ट्रेंडिंग के अनुसार, जिन शहरों में सबसे अधिक संख्या में मैच बने हैं, उनमें संबंधों के विकास में एक जबरदस्त परिवर्तन प्रदर्शित होता है ।</p>



<p>उत्तर भारत मैचमेकिंग में आई तेजी का स्पष्ट केंद्र बनकर उभरा है । गुरुग्राम, नोएडा, दिल्ली, लखनऊ और पंचकुला में सबसे अधिक मैचमेकिंग हुई हैं। वहीं एनसीआर और उत्तर भारत भी मैचमेकिंग के केंद्र बन गए हैं । अकेले गुड़गाँव में मुंबई के मुकाबले 36 प्रतिशत अधिक मैच बने, जिससे प्रदर्शित होता है कि यहाँ पर बातचीत किस प्रकार आगे बढ़कर मजबूत रिश्तों में तब्दील होती है। गुड़गाँव के यूज़र्स में मुंबई के यूज़र्स के मुकाबले 48 प्रतिशत अधिक दिलचस्पी दर्ज होती है, जिससे इस बढ़त का अनुमान मिलता है ।<br>लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती ।</p>



<p>इस रूझान में दक्षिण भारत के शहर केवल शामिल ही नहीं हो रहे हैं, बल्कि तेजी से रफ्तार भी पकड़ रहे हैं । चेन्नई, बैंगलुरू, सिकंदराबाद और कोयम्बटूर में सबसे अधिक संख्या में मैच बन रहे हैं, वहीं मैसुरू, मदुरई और कोच्चि में मैच बनने की दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। यह तेजी केवल एक मेट्रो शहर तक सीमित नहीं है । यह बड़े शहरों और टियर 2 शहरों में भी देखने को मिल रही है ।</p>



<p>असल में, यूज़र्स को 16 से अधिक मैच मिलने वाले हर पाँच में से दो शहर टियर 2 शहर थे। इससे लंबे समय से चली आ रही यह मान्यता कमजोर होती है कि मैचमेकिंग केवल मेट्रो शहरों की आबादी में सफल होती है ।<br>इन नतीजों से उत्तर और दक्षिण भारत में हो रहा व्यवहार का एक बड़ा परिवर्तन प्रदर्शित होता है कि उत्साह और सहभागिता उन जगहों को आकार दे रहे हैं, जहाँ सबसे अधिक संबंध बनते हैं ।</p>
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		<title>Rose Day Special: प्यार जताने का नया अंदाज, एक गुलाब से कहीं ज्यादा कहें दिल की बात 💖</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Feb 2026 01:36:38 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[couple tips]]></category>
		<category><![CDATA[Happy Rose Day]]></category>
		<category><![CDATA[how to make your partner feel special]]></category>
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		<category><![CDATA[रोज डे]]></category>
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					<description><![CDATA[How To Make Your Partner Feel Special:&#160;वैलेंटाइन वीक की शुरुआत &#8216;रोज डे&#8217; से होती है और यही दिन प्यार जताने का सबसे खूबसूरत मौका भी होता है। में रोज डे आते ही हर तरफ गुलाब, प्यार भरे मैसेज और मुस्कानें नजर आएंगी। बता दें कि 7 फरवरी को &#8216;रोज डे&#8217; मनाया जाएगा। लेकिन अगर आप ... <a title="Rose Day Special: प्यार जताने का नया अंदाज, एक गुलाब से कहीं ज्यादा कहें दिल की बात 💖" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/rose-day-special-a-new-way-to-express-your-love-say-more-than-just-i-love-you-with-a-single-rose/" aria-label="Read more about Rose Day Special: प्यार जताने का नया अंदाज, एक गुलाब से कहीं ज्यादा कहें दिल की बात 💖">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="597" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/Clipboard-2026-02-03T170116.994-1024x597.webp" alt="" class="wp-image-510174" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/Clipboard-2026-02-03T170116.994-1024x597.webp 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/Clipboard-2026-02-03T170116.994-300x175.webp 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/Clipboard-2026-02-03T170116.994-768x448.webp 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/Clipboard-2026-02-03T170116.994.webp 1200w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>How To Make Your Partner Feel Special:</strong>&nbsp;वैलेंटाइन वीक की शुरुआत &#8216;रोज डे&#8217; से होती है और यही दिन प्यार जताने का सबसे खूबसूरत मौका भी होता है। में रोज डे आते ही हर तरफ गुलाब, प्यार भरे मैसेज और मुस्कानें नजर आएंगी। बता दें कि 7 फरवरी को &#8216;रोज डे&#8217; मनाया जाएगा। लेकिन अगर आप सच में अपने पार्टनर का दिल जीतना चाहते हैं, तो सिर्फ गुलाब देना ही काफी नहीं है। इस दिन आप उन्हें कुछ खास तरीकों से स्पेशल फील करा सकते हैं। तो चलिए जानते हैं कुछ आसान आइडियाज, जिनकी मदद से आप आसानी से अपने पार्टनर को स्पेशल फील करवा पाएंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">Rose Day 2026 कब है?</h2>



<p>हर साल रोज डे 7 फरवरी को मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने पार्टनर, क्रश या खास दोस्त को गुलाब देकर अपने दिल की बात कहते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading">पार्टनर को स्पेशल महसूस करवाने के लिए क्या करें?</h2>



<p><strong>दिल से लिखा छोटा सा मैसेज</strong></p>



<p>गुलाब के साथ अगर आपने अपने मन की बात एक छोटे से नोट में लिख दी, तो उसका असर कई गुना बढ़ जाएगा। सच्चे शब्द सीधे दिल तक पहुंचते हैं।</p>



<h6 class="wp-block-heading">&nbsp;</h6>



<p><strong>पार्टनर के साथ प्यार से करें व्यवहार</strong></p>



<p>पार्टनर की पसंद के हिसाब से गुलाब चुनना उन्हें और भी खास महसूस कराएगा। इसके अलावा पार्टनर के साथ प्यार से बात करें। साथ ही, गले लगाएं या माथे पर किस करके अपने प्यार का एहसास करवाएं।</p>



<h6 class="wp-block-heading">&nbsp;<strong>थोड़ा सा समय दें</strong></h6>



<p>महंगे गिफ्ट से ज्यादा जरूरी है आपका समय। साथ में कॉफी पीना, वॉक पर जाना या पुरानी यादें शेयर करना यही पल रिश्ते को मजबूत बनाते हैं। इससे आपके पार्टनर को भी लगेगा कि वह आपके लिए जरूरी है और खास महत्व रखता है।</p>



<p><strong>सरप्राइज से बनाएं दिन यादगार</strong></p>



<p>अगर आप आमने-सामने नहीं मिल सकते, तो वीडियो कॉल, वॉयस मैसेज या ऑनलाइन फूल भेजकर भी सरप्राइज दिया जा सकता है। छोटी-छोटी कोशिशें बड़ा असर करती हैं।</p>



<p><strong>उनकी तारीफ करना न भूलें</strong></p>



<p>&#8216;रोज डे&#8217; पर अपने पार्टनर को यह जरूर बताएं कि वे आपकी जिंदगी में कितने खास हैं। सच्ची तारीफ हर किसी को खुश कर देती है। इसके लिए आप उन्हें मैसेज में शायरी भी लिखकर भेज सकते हैं। ऐसा करने से आपके रिलेशनशिप की अच्छी यादें बनेंगी और वह भी बेहद खास महसूस करेंगे।</p>



<h2 class="wp-block-heading">&#8216;रोज डे&#8217; का असली मतलब</h2>



<p>रोज़ डे सिर्फ गुलाब देने का दिन नहीं है, बल्कि अपने प्यार, केयर और इमोशंस को जाहिर करने का मौका है। जब आप दिल से कुछ करते हैं, तो वही चीज पार्टनर को सबसे ज्यादा छूती है।</p>



<p>इस Rose Day 2026 पर गुलाब के साथ अपने प्यार की खुशबू भी रिश्ते में भर दें, ताकि यह दिन हमेशा के लिए यादगार बन जाए। इसके लिए आप बताई गई इन टिप्स की मदद से अपने पार्टनर को खास महसूस करवा सकते हैं।&nbsp;</p>
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		<title>रुकिए ज़रा! शादी से पहले जान लें 3-6-9 फॉर्मूला, वरना बाद में हो सकता है पछतावा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 31 Jan 2026 00:35:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
		<category><![CDATA[3-6-9 rule relationship]]></category>
		<category><![CDATA[3-6-9 नियम]]></category>
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		<category><![CDATA[लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप]]></category>
		<category><![CDATA[शादी से पहले]]></category>
		<category><![CDATA[सही पार्टनर कैसे चुनें]]></category>
		<category><![CDATA[हनीमून फेज]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। हर रिश्ते की शुरुआत किसी खूबसूरत सपने या बॉलीवुड फिल्म की तरह होती है। घंटों तक चलने वाली मीठी बातें, बेवजह चेहरे पर रहने वाली मुस्कान और हर अगली मुलाकात का बेसब्री से इंतजार। इसी शुरुआती जोश और दीवानगी में लोग अक्सर साथ रहने, सगाई करने या फिर शादी जैसे जिंदगी के सबसे ... <a title="रुकिए ज़रा! शादी से पहले जान लें 3-6-9 फॉर्मूला, वरना बाद में हो सकता है पछतावा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/wait-a-minute-learn-the-3-6-9-formula-before-getting-married-otherwise-you-might-regret-it-later/" aria-label="Read more about रुकिए ज़रा! शादी से पहले जान लें 3-6-9 फॉर्मूला, वरना बाद में हो सकता है पछतावा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/partners_1733129963100_1733129972045-1024x768.jpg" alt="" class="wp-image-509866" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/partners_1733129963100_1733129972045-1024x768.jpg 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/partners_1733129963100_1733129972045-300x225.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/partners_1733129963100_1733129972045-768x576.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/partners_1733129963100_1733129972045.jpg 1200w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p><strong>नई दिल्ली।</strong> हर रिश्ते की शुरुआत किसी खूबसूरत सपने या बॉलीवुड फिल्म की तरह होती है। घंटों तक चलने वाली मीठी बातें, बेवजह चेहरे पर रहने वाली मुस्कान और हर अगली मुलाकात का बेसब्री से इंतजार। इसी शुरुआती जोश और दीवानगी में लोग अक्सर साथ रहने, सगाई करने या फिर शादी जैसे जिंदगी के सबसे बड़े फैसले ले बैठते हैं। लेकिन कुछ ही महीनों बाद जब प्यार का खुमार उतरता है और एक-दूसरे की असली आदतें, सोच और व्यवहार सामने आते हैं, तो वही सपनों सा रिश्ता एक बोझ लगने लगता है।</p>



<p>ऐसी ही उलझनों और भविष्य के पछतावे से बचाने के लिए एक दिलचस्प फॉर्मूला है- <strong>3-6-9 नियम</strong>। यह कोई ज्योतिष की गणना नहीं, बल्कि एक प्रैक्टिकल &#8216;पेसिंग गाइड&#8217; है, जो किसी भी रिश्ते को जल्दबाजी के बजाय समझदारी से परखने और आगे बढ़ाने में मदद करती है। अगर आप भी शादी के बंधन में बंधने की सोच रहे हैं, तो यह नियम आपके लिए जानना बेहद जरूरी है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>3 महीने: गुलाबी चश्मे वाला &#8216;हनीमून फेज&#8217;</strong></h3>



<p>किसी भी रिश्ते के शुरुआती तीन महीने &#8220;हनीमून फेज&#8221; कहलाते हैं। इस दौरान पार्टनर की हर बात अच्छी लगती है, यहां तक कि उसकी खामियां भीน่ารัก लगती हैं। दिमाग में प्यार का केमिकल (डोपामिन) इतना हावी होता है कि सबकुछ परफेक्ट नजर आता है। लेकिन तीसरे महीने के खत्म होते-होते यह खुमार उतरने लगता है। अब आप अपने पार्टनर को उसके असल रूप में देखना शुरू करते हैं। उसकी छोटी-छोटी आदतें, सोचने का तरीका और व्यवहार, जो पहले नजर नहीं आता था, अब साफ दिखने लगता है। यही वो पहला मोड़ है, जहां आपको खुद से यह सवाल पूछना चाहिए- &#8220;क्या मैं इस इंसान को उसकी असलियत और कमियों के साथ अपना सकता/सकती हूं?&#8221;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>6 महीने: फन नहीं, अब है &#8216;रियल&#8217; रिलेशन का टेस्ट</strong></h3>



<p>छह महीने पूरे होते-होते आपका रिश्ता सिर्फ डेटिंग, मूवी और घूमने-फिरने वाले &#8216;फन मोड&#8217; से निकलकर &#8216;रियल मोड&#8217; में एंट्री कर लेता है। अब तक आप दोनों के बीच छोटे-मोटे झगड़े, किसी बात पर असहमति या तनाव की स्थिति जरूर आ चुकी होती है। यह फेज इस बात का असली टेस्ट है कि आपका रिश्ता सिर्फ अच्छे वक्त का साथी है या आप दोनों मिलकर मुश्किल हालात भी संभाल सकते हैं। यहां सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि &#8220;क्या हम बहस और झगड़े के बाद एक-दूसरे की बात समझ पा रहे हैं, या सिर्फ अपनी बात मनवाने की जिद कर रहे हैं?&#8221; अगर समझदारी जीत रही है, तो आपका रिश्ता सही ट्रैक पर है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>9 महीने: अब है &#8216;बड़ा फैसला&#8217; लेने का सही समय</strong></h3>



<p>नौ महीने का समय इतना होता है कि आप अपने पार्टनर का लगभग हर रंग देख चुके होते हैं- उसका गुस्सा, उसकी खुशी, दुख में उसका व्यवहार, उसकी प्राथमिकताएं और जिंदगी को लेकर उसके असली लक्ष्य। अब रिश्ता सिर्फ इमोशनल एक्साइटमेंट पर नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल समझ पर टिकने लगता है। यही वो निर्णायक पड़ाव है, जहां आपको यह तय करना होता है कि क्या आप दोनों की जिंदगी की वैल्यूज और भविष्य की सोच एक जैसी है? क्या आप दोनों एक-दूसरे के लक्ष्यों का सम्मान करते हैं? क्या यह रिश्ता लंबे समय तक चलने के लिए बना है? अगर इन सभी सवालों का जवाब &#8216;हां&#8217; में है, तो आप अपने रिश्ते को अगले लेवल पर ले जाने के लिए तैयार हैं। और अगर नहीं, तो जल्दबाजी में जिंदगी बर्बाद करने से बेहतर है कि समय रहते एक सही फैसला ले लिया जाए।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>क्या है इस नियम का असली मकसद?</strong></h3>



<p>3-6-9 नियम का सीधा मकसद आपको जल्दबाजी में लिए गए गलत फैसलों से बचाना है। यह नियम कहता है कि रिश्ता भले ही दिल से शुरू हो, लेकिन उसे दिमाग लगाकर ही आगे बढ़ाना चाहिए। यह आपको अपने पार्टनर को हर कसौटी पर परखने का पूरा समय देता है, ताकि बाद में &#8220;मैंने तुम्हें ठीक से समझा ही नहीं&#8221; जैसे बहाने न बनाने पड़ें। बेशक हर रिश्ता अलग होता है, लेकिन यह नियम एक शानदार गाइड है जो आपको याद दिलाता है कि जिंदगी के सबसे बड़े फैसले के लिए वक्त लेना कितना जरूरी है।</p>
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		<title>मेंटल हेल्थ के लिए किताबें क्यों हैं असरदार? जानिए बिब्लियो थेरेपी का विज्ञान</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/why-are-books-effective-for-mental-health-learn-about-the-science-of-bibliotherapy/</link>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 13 Jan 2026 02:36:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लाइफस्टाइल]]></category>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली । विशेषज्ञ मानते हैं कि मानसिक सुकून पाने के लिए दवाओं के अलावा कुछ प्राकृतिक और सरल उपाय भी बेहद प्रभावी हो सकते हैं। इन्हीं में से एक है किताबें पढ़ना, जिसे बिब्लियो थेरेपी कहा जाता है। पढ़ना न केवल ज्ञान बढ़ाता है, बल्कि भावनाओं को समझने, तनाव घटाने और आत्मविश्वास मजबूत करने ... <a title="मेंटल हेल्थ के लिए किताबें क्यों हैं असरदार? जानिए बिब्लियो थेरेपी का विज्ञान" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/why-are-books-effective-for-mental-health-learn-about-the-science-of-bibliotherapy/" aria-label="Read more about मेंटल हेल्थ के लिए किताबें क्यों हैं असरदार? जानिए बिब्लियो थेरेपी का विज्ञान">Read more</a>]]></description>
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<p>नई दिल्ली । विशेषज्ञ मानते हैं कि मानसिक सुकून पाने के लिए दवाओं के अलावा कुछ प्राकृतिक और सरल उपाय भी बेहद प्रभावी हो सकते हैं। इन्हीं में से एक है किताबें पढ़ना, जिसे बिब्लियो थेरेपी कहा जाता है। पढ़ना न केवल ज्ञान बढ़ाता है, बल्कि भावनाओं को समझने, तनाव घटाने और आत्मविश्वास मजबूत करने में भी मदद करता है। बिब्लियो थेरेपी का मतलब है पढ़ने के जरिए मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना।</p>



<p>अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, इस थेरेपी में स्व-सहायता वर्कबुक, उपन्यास, कहानियां, पंफलेट और ऑडियो बुक्स जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। व्यक्ति अपनी समस्या और मानसिक स्थिति के अनुसार किताबें पढ़ता है, जिससे उसे अपनी भावनाओं को समझने और उनसे निपटने का रास्ता मिलता है। यह पूरी तरह गैर-औषधीय और प्राकृतिक तरीका है, जिसे कोई भी व्यक्ति घर बैठे आसानी से अपना सकता है।</p>



<p>कई शोधों में यह सामने आया है कि किताबें पढ़ने से मानसिक तनाव में उल्लेखनीय कमी आती है। खासतौर पर सर्जरी या किसी बड़े ऑपरेशन से पहले मरीजों में चिंता का स्तर काफी बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में बिब्लियो थेरेपी का उपयोग करने पर मरीजों की घबराहट कम होती है और मानसिक रूप से वे खुद को अधिक संतुलित महसूस करते हैं। शोध यह भी बताते हैं कि ऑपरेशन से पहले चिंता कम होने पर सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं का खतरा भी घट जाता है। नर्स और स्वास्थ्यकर्मी इस पद्धति को अपनाकर मरीजों को मानसिक रूप से मजबूत बना सकते हैं। यह थेरेपी सिर्फ अस्पतालों तक सीमित नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में भी जो लोग तनाव, अवसाद या चिंता से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह बेहद कारगर साबित हो सकती है। किताबों के माध्यम से व्यक्ति दूसरों के अनुभवों से जुड़ता है, अपने हालात को समझता है और समाधान की दिशा में सोचने लगता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और मन को शांति मिलती है।</p>



<p>विशेषज्ञों का मानना है कि बिब्लियो थेरेपी की सबसे बड़ी खूबी इसकी सादगी और सुलभता है। यह सस्ती है, कहीं भी और कभी भी अपनाई जा सकती है। नियमित रूप से अपनी पसंद की किताबें पढ़ना न केवल दिमाग को मजबूत बनाता है, बल्कि भावनात्मक संतुलन भी बनाए रखता है और व्यक्ति को अधिक सकारात्मक व रचनात्मक बनने में मदद करता है। बता दें कि तेज रफ्तार जिंदगी, काम का दबाव और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच आज तनाव, चिंता और एंग्जाइटी आम समस्या बन चुकी है। ऐसे समय में मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल उतनी ही जरूरी हो गई है, जितनी शारीरिक सेहत की।</p>
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