मेरठ में शादी के नाम पर ठगी, पूरा गिरोह दबोचा

सर्विलांस टीम, थाना मेडिकल, महिला थाना व थाना एएचटीयू की संयुक्त पुलिस टीम ने की कार्रवाई

भास्कर समाचार सेवा

मेरठ। सर्विलांस टीम, थाना मेडिकल, महिला थाना व थाना एएचटीयू की संयुक्त पुलिस टीम ने शादी कराने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी गिरोह का पर्दाफाश किया है। थाना मेडिकल पर अमित शर्मा पुत्र मुरलीघर शर्मा निवासी परम नगर करावल नगर दिल्ली, मनोज श्रीवास्तव पुत्र अशोक श्रीवास्तव निवासी जगदीश नगर शाहदरा दिल्ली तथा लवकेश गुप्ता पुत्र चन्द्रमोहन गुप्ता निवासी राया जिला मथुरा द्वारा नीरज गर्ग व डिम्पल आदि के विरुद्ध विवाह पंजीकरण केन्द्र खोलकर उनका विवाह कराने के नाम पर फर्जी तरीके से पैसा हड़प किए जाने के सम्बन्ध में शिकायत की थी, जिस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया था। उक्त अभियोग की विवेचना के दौरान प्रभारी एएचटीयू, प्रभारी सर्विलांस सैल, प्रभारी महिला थाना व प्रभारी निरीक्षक थाना मेडिकल पुलिस की संयुक्त कार्यवाही के दौरान नामजदों को गिरफ्तार कर लिया गया। जिन्होंने पूछताछ में अपने नाम जितेन्द्र पुत्र स्व. सेवाराम निवासी कैलाशपुरी थाना नौचन्दी, प्रमोद मित्तल पुत्र सुरेशचन्द मित्तल निवासी पुलिस एन्क्लेव एल. ब्लॉक शास्त्रीनगर थाना खरखौदा, अंकित कुमार पुत्र सुरेन्द्र कुमार निवासी हसनपुर कदीम थाना भावनपुर, हिमांशू पुत्र प्रेमचन्द निवासी पॉण्डव नगर थाना सिविल लाईन, रोहित पुत्र ओमवीर सिंह निवासी जे. ब्लॉक पॉण्डव नगर थाना सिविल लाईन, स्वीटी पुत्री कालीचरन निवासी पंचगांव थाना भावनपुर, शिल्पी पत्नी सागर निवासी जागृति विहार थाना मेडिकल, रितिका पुत्र अशोक कुमार निवासी रामगढ़ी यूनिवर्सिटी रोड थाना मेडिकल, ज्योति पुत्री नरेश कुमार निवासी ग्राम माछरा थाना किठौर, दिपांशी पुत्र जितेन्द्र कुमार निवासी भोपाल विहार थाना भावनपुर, शिवानी पुत्री मुकेश कुमार निवासी मानपुर थाना भावनपुर, ममता पत्नी नेपाल सिंह निवासी माछरा थाना किठौर, सोनी पत्नी मोन्टी निवासी रजबन लालकुर्ती थाना लालकुर्ती, पूजा पुत्र हरिओम निवासी मलियाना थाना टीपीनगर व रितू पुत्र वेदपाल सिंह निवासी ऋद्धापुरी कंकरखेड़ा बताया।

पंजीकरण के लेते थे 8500 रुपये
पूछताछ पर बताया, फरार नीरज गर्ग व उसके सहयोगी डिम्पल ने मिलकर गोपाल प्लाजा मेंडीकल में विवाह पंजीकरण केन्द्र नाम से कार्यालय खोल रखा है, जिसमें वे नौकरी करते हैं। नीरज गर्ग ने विवाह पंजीकरण केन्द्र का प्रचार अखबार तथा सोशल मीडिया पर किया हुआ है, जिसको पढ़कर स्थानीय व अन्य जनपद व राज्य के विवाह हेतु इच्छुक लोग फोन पर वार्ता करते थे, जिनको कार्यालय में बुलवाया जाता था, जिनसे पंजीकरण के नाम पर 8500 रुपये जाते थे। उसके उपरान्त लड़की दिखाने तथा उसके परिजनों से मिलाने के लिये कोई दिनांक नियत की जाती थी, नियत दिनांक पर कार्यालय में काम करने वाली किसी एक लड़की को तैयार कर मिलवाया जाता था।

ऑफिस में काम करने वाली लड़की को मिलवाते थे
लड़की के साथ कार्यालय के ही महिला/पुरुष को अभिभावक के रुप में लड़के पक्ष से मिलवाया जाता था। दोनों पक्ष एक दूसरे का नम्बर आदान प्रदान करते थे, कुछ समय बाद पूर्व योजना के तहत लड़की विवाह हेतु इच्छुक आवेदन किए गए पुरुष से फोन पर बात करने लग जाती थी और उसको अपनी आवश्यकता या बीमारी का हवाला देकर पैसे प्राप्त करती थी। कुछ समय बाद धीरे-धीरे फोन पर बात करना बन्द कर देती थी। फिर किसी अन्य ग्राहक को इसी तरह फंसाकर धोखाधड़ी से पैसे हड़प करते थे।

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