गोवर्धन में बंद संस्कृत विश्व विद्यालय को खुलवाने की मांग

संतों ने कहा संस्कृत नहीं तो संस्कृति नहीं

भास्कर समाचार सेवा

गोवर्धन – बरसो से बंद पड़ा संस्कृत विश्व विद्यालय को स्थानीय लोगों व संतों ने प्रशासन से खुलवाने की मांग की। संतों ने कहा की अगर संस्कृत नहीं होगी तो संस्कृति अपना अस्तित्व खोती चली जायेगी।
सनातन धर्म ग्रंथ संस्कृत में उल्लेखनीय है मगर संस्कृत भाषा आज एक सब्जेक्ट बनकर रह गई है।जिसे मात्र बच्चे सब्जेक्ट के रूप में लेते है जबकि संस्कृत का अध्यन करना चाहिए।लेकिन वर्षों से बंद पड़ा गोवर्धन का संस्कृत विश्वविद्यालय स्थानीय व संत महंतों ने खुलवाने व संस्कृत पढ़ाई प्रारम्भ कराने की मांग की है।गोवर्धन के मानसी गंगा पर स्थित संस्कृत विश्वविद्यालय अर्द्ध सरकारी था।यहां संस्कृत की कक्षाएं चलती थी आधा दर्जन से अधिक अध्यापक विद्यार्थियों को संस्कृत पढ़ाया करते थे।संस्कृत विश्वविद्यालय सन 1941 में बनाया गया था।जहां उत्तर प्रदेश के ही नहीं बल्कि राजस्थान मध्य प्रदेश हरियाणा दिल्ली पंजाब इत्यादि प्रदेशों के छात्र संस्कृत अध्ययन के लिए आया करते थे तथा इसमें छात्रावास होने के कारण यहां पर रुका करते थे।आज की स्थिति यह है कि एक भी एडमिशन नहीं है और दरवाजे पर ताला लटका हुआ है।एक मात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इस महाविद्यालय में कार्यरत बताया जाता है।सनातन धर्म की रक्षा के लिए मुड़िया महंत रामकृष्ण दास महाराज ने शिक्षा मंत्री गुलाब देवी से वार्ता कर इस विद्यालय को जल्द से जल्द प्रारंभ कराने की मांग की उन्होंने यह भी कहा कि इस विश्वविद्यालय से हजारों की संख्या में विद्यार्थी विद्या ग्रहण करके शिक्षक बनकर शिक्षा देते हुए नजर आ रहे हैं। लेकिन आज यह इमारत जर्जर अवस्था में खड़ी हुई नजर आ रही है।सरकार व जिम्मेदारों को संस्कृत व संस्कृति को बचाने को आगे आना चाहिए और फिर से इस संस्कृत विश्वविद्यालय को खुलवाकर शिक्षा प्रारम्भ कराया जाना चाहिए।

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