जिलाधिकारी ने ज़रूरतमन्द को प्रदान की आर्थिक मदद

भास्कर समाचार सेवा

अलीगढ़। ज़िलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने शुक्रवार को एक बार फिर ज़रूरतमंद की मदद कर मानवता की मिसाल पेश करते हुए सक्षम एवं धनाढ्य परिवारों को मदद के लिए आगे आने को प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि परोपकार से बढ़कर कुछ नहीं। सही मायने में व्यक्ति का जन्म ही एक दूसरे की मदद करने के लिए हुआ है। यदि हम सक्षम हैं तो पात्र और जरूरतमंद व्यक्ति की हर संभव मदद करनी ही चाहिए। खुदगर्ज दुनिया में ये इंसान की पहचान है, जो पराई आग में जल जाए वही इंसान है। 1966 की बनी फिल्म बादल के गीत को वास्तविक रूप देते हुए जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने 16 वर्षीय दुखियारी लड़की की पीड़ा को समझ रेडक्रॉस सोसाइटी से 10000 का चेक प्रदान कर आर्थिक मदद की। दयालुता के सागर जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने इससे भी कहीं आगे जाकर मदद किये जाने का भी भरोसा दिलाया।
दरअसल मामला दो दिन पुराना है, डॉली वार्ष्णेय उम्र 16 वर्ष, की मां अनीता वार्ष्णेय, जिनके पति की दो वर्ष पूर्व आकस्मिक मृत्यु हो चुकी है, को कुत्ते ने काट लिया। ज़ख्म गहरा हो गया। एक निजी अस्पताल में इलाज के चलते कर्ज भी हो गया। डॉली वार्ष्णेय ने जब जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह से मिलकर अपनी आपबीती सुनाई, तो जिलाधिकारी का दयालु हृदय पसीज गया। सारी हकीकत जान कर उन्होंने रेडक्रॉस सोसायटी से 10,000 का चेक प्रदान करते हुए उनकी मां को एंटी रेबीज का इंजेक्शन लगवाया, इलाज के साथ भविष्य में आगे भरण पोषण का भी भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि इंसान होने का फायदा समाज को भी मिलना चाहिए। मानिक चौक निवासी अनीता वार्ष्णेय के पति की मृत्यु होने के बाद अब घर में कोई कमाऊ सदस्य नहीं बचा है। बड़ी बेटी डोली के साथ ही एक छोटा बेटा और बेटी भी है। राशन कार्ड पर मिलने वाले खाद्यान्न से परिवार का भरण-पोषण होता है। बड़ी बेटी डोली ने बताया कि ट्यूशन से 1500-2000 प्रति माह की आर्थिक मदद मिल जाती है। आय का कोई और साधन नही है। उन्होंने गूलर रोड निवासी व्यवसाई हर्ष वार्ष्णेय को भी धन्यवाद दिया कि वह समय-समय पर उनकी मदद करते रहते हैं।

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