सामूहिक नरसंहार में ड्राइवर को फांसी की सजा

भास्कर समाचार सेवा

गाजियबाद। उत्तर प्रदेश के सबसे हाईटेक शहरों में कहलाने वाले जनपद के घंटाघर नई बस्ती मोहल्ले में कारोबारी परिवार के 7 लोगों की हत्या करने के मामले में आरोपी घर के पुराने ड्राइवर को न्यायालय ने शनिवार को दोषी करार दिया है। इस मामले में कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाकर एक लाख का जुर्माना भी लगाया है। लूट के इरादे से किए गए इस चर्चित हत्याकांड में ड्राइवर राहुल को फांसी की सजा सुनायी गई है। सजा सुनते ही आरोपी जमीन पर बैठ गया और सुबक सुबक कर रोता हुआ दिखाई दिया। 9 साल चली सुनवाई में उसके खिलाफ 30 लोगों ने गवाही दी है। जानकारी के अनुसार बता दें कि 22 मई 2013 को जघन्य हत्या कांड हुआ था। जिसमें एक कारोबारी के पूरे परिवार को खत्म कर दिया गया था। इस हत्याकांड में 7 लोगों की हत्या की गई थी। गाजियाबाद के थाना कोतवाली इलाके के नई बस्ती में यह हत्याकांड अंजाम दिया गया था।

जिनकी हत्या हुई थी उसमें खल चुरी का कारोबार करने वाले सतीश गोयल उनकी पत्नी मंजू गोयल, बेटा सचिन गोयल, सचिन गोयल की पत्नी रेखा गोयल के अलावा सचिन के 3 बच्चे हनी गोयल, अमन गोयल और मेघा गोयल थे। पुलिस ने हत्याकांड का खुलासा करते हुए सतीश गोयल के पुराने ड्राइवर राहुल वर्मा को गिरफ्तार किया था। पुलिस की छानबीन में सामने आया था कि राहुल वर्मा पहले इनका ड्राइवर था और नशे का आदी था । राहुल को पैसे की आवश्यकता थी जिसके लिए वह चोरी करने के लिए इनके घर में घुसा था, लेकिन उसी दौरान तीन मंजिला इस मकान में एक हर मंजिल पर किसी न किसी ने उसको देख लिया था। जिसके चलते उसने इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया था। इस मामले में गाजियाबाद कोर्ट में राहुल वर्मा को शनिवार को दोषी ठहराया था। कोर्ट ने राहुल को IPC की धारा 302 मे फांसी की सजा, 50 हजार जुर्माना धारा- 394 सजा 10 साल 30 हजार जुर्माना धारा- 411 सजा 3 साल 10 हजार जुर्माना आर्म्स एक्ट में 3 साल की सजा 10 जुर्माना की सजा सुनाई है। मृतक परिवार के अधिवक्ता देवराज ने बताया 9 साल की कानूनी लडाई के बाद न्याय की जीत हुई है। वहीं मृतक सतीश के दामाद सचिन मित्तल ने बताया कि 9 साल 2 महीने की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद जीत हासिल हुई है उन्हें कानून पर पूरा भरोसा था। एसएसपी मुनिराज ने जानकारी देते हुए बताया कि इस जगन हत्याकांड में शहीद और सांसों के आधार पर पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि इन्वेस्टिगेशन में कोई भी पहलू कमजोर नहीं पढ़ना चाहिए जिसके चलते जांच पड़ताल के उपरांत सभी साक्ष्यों को इकट्ठा कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था आरोपी को फांसी की सजा मिलने पर पुलिस कर्मियों ने सही और अच्छा कार्य किया था।

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