भारत में एसओपी राइटिंग, एलओआर, प्रवेश निबंध और रिज्यूमे लेखन सेवाओं की बढ़ती मांग

भारत एक युवा देश है, दूसरे देशों के मुक़ाबले यहां सबसे कम उम्र के लोग हैं, और इसीलिए भारत को पूरा विश्व एक युवा ताकत की तरह देख रहा है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा साझा की गई एक रिपोर्ट में, भारत की जनसंख्या की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। हालांकि भारत बहुत तेजी से विकसित हो रहा है, लेकिन भारत की शिक्षा प्रणाली अभी भी दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले बहुत पीछे है। इसी कारण यहां हमेशा से भारत में विदेशी शिक्षा की मांग रही है, और ये आज़ादी के पहले से ही प्रचलित है। महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे कई महान हस्तियों ने पहले विदेश जाकर शिक्षा ग्रहण की और फिर देश की आज़ादी के लिए काम आये। सन २००० से पहले विदेश में शिक्षा पाना सिर्फ बहोत अमीर लोगो में ही प्रचलित था पर अब ऐसा नहीं रहा। वैश्वीकरण और आसान ज्ञान के आदान-प्रदान के कारण बीते 2 दशकों के दौरान भारतीयों के बीच विदेशों में अध्ययन की प्रवृत्ति में काफी वृद्धि देखी गई है।


खास बात ये है कि जो छात्र कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उनके पास भारत में अधिक विकल्प नहीं हैं और इस प्रकार एक उपयुक्त वैश्विक कार्यक्रम उनके लिए सही फिट बन जाता है। उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले अधिकांश छात्र भी बेहतर जीवन स्तर और वैश्विक वातावरण की तलाश में वहां बसने का लक्ष्य रखते हैं। अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए अधिक से अधिक भारतीयों के आवेदन के साथ, इन देशों में भारतीयों के पलायन में वृद्धि देखी गई है, जो चिंता की बड़ी वजह बन गई है। इसी कारण , इनमें से अधिकांश देशों ने अपने आव्रजन कानूनों को सख्त बना दिया है और प्रवासन पर रोक लगाने के लिए अध्ययन या कार्य परमिट के लिए सीमित आवेदन स्वीकार कर रहे हैं। चूंकि मानदंड कठिन हो गए हैं, इसलिए कागजों का सही होना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
ऐसा ही एक सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज स्टेटमेंट ऑफ परपज (Statement of Purpose) याने ‘उद्देश्य का विवरण’ है। एसओपी (SOP) की आवश्यकता तब होती है जब कोई उम्मीदवार प्रतिष्ठित विदेशी कॉलेजों में पढ़ाई के लिए छात्र वीजा या विदेशों में नौकरी-कार्य वीजा के लिए आवेदन करता है।

एसओपी कई तरह के होते हैं और विश्वविद्यालय और कॉलेज कई तरह के अलग-अलग सवाल पूछते हैं जैसे – पर्सनल स्टेटमेंट (Personal Statement), लेटर ऑफ इंटेंट (Letter of Intent), मोटिवेशन लेटर (Motivation Letter) इत्यादि। इन सभी का एक ही महत्व है और यहां तक कि लेखन शैली भी लगभग समान है, सिवाए कुछ अपवादों के, जहां कॉलेज या विश्वविद्यालय एक विशेष दिशानिर्देश देते हैं। एसओपी (SOP) अलावा, कुछ अन्य दस्तावेज हैं जो अक्सर कॉलेजों या विश्वविद्यालयों द्वारा मांगे जाते हैं, जैसे – रिकमेंडेशन लेटर (Recommendation Letter / LOR), अपडेटेड रिज्यूम (Resume), स्कॉलरशिप के कागज (Scholarship Essay) ,जीमैट वेवर लेटर (GMAT Waiver Letter) या डायवर्सिटी स्टेटमेंट (Diversity Statement)। सुनीत कुमार सिंह (Suneet Kumar Singh) भारत की अग्रणी एसओपी राइटिंग एजेंसी ––SOP Writing agency Contenholic के संस्थापक हैं।


उन्होंने हमसे भारत में विदेशी शिक्षा उद्योग का अनुभव साझा किया, जो काफी हद तक असंगठित है। उनका कहना है कि 90% रिजेक्शन, चाहे वह कोर्स एप्लीकेशन हो या वीजा एप्लीकेशन (Visa Application) , नक़ल किए गए एसओपी के कारण होते हैं। सुनीत कुमार सिंह बताते हैं कि अपने स्वयं के एसओपी और अन्य दस्तावेज लिखने वाले मेधावी छात्रों को भी एसओपी नक़ल की जानकारी नहीं है।

सुनीत के मुताबिक अधिकांश वीजा एजेंटों या विदेश अध्ययन सलाहकारों के पास एसओपी ((SOP Writing) के अपने निश्चित टेम्पलेट होते हैं और वे बस उसी सामग्री की नकल करते हैं और नाम, पाठ्यक्रम और कॉलेज के विवरण को बदल देते हैं। इसी कारण भारतीय आवेदनों की अस्वीकृति दरों में भारी वृद्धि हुई है। सुनीत कुमार सिंह बताते हैं कि ये उद्योग तेजी से बदल रहा है और मानदंड भी बदल रहे हैं, इस प्रकार वीजा और पाठ्यक्रम आवेदनों में अस्वीकृति से बचने के लिए सभी मानदंडों और दिशानिर्देशों का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। कई संगठनों और वाणिज्य दूतावासों ने COVID 19 के प्रसार के बाद नियमों और विनियमों में बदलाव किया है और इस प्रकार अस्वीकृति से बचने के लिए सभी दिशानिर्देशों और निर्देशों को अच्छी तरह से फिर से जांचना उचित है।

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