कैसे पढ़े गरीब बच्चियां, नहीं बन पाया डिग्री कॉलेज

भास्कर समाचार सेवा

मुरादनगर। दीए तले अंधेरा क्षेत्र कॉलेजों का गढ़ है। लेकिन स्थानीय छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के लिए कोई प्रबंध आज तक नहीं हो पाए हैं। जबकि हर चुनाव में उम्मीदवार सांसद, विधायक, ब्लाक प्रमुख, पालिका अध्यक्ष, क्षेत्र पंचायत सदस्य, यहां उच्च शिक्षा के लिए विशेषकर छात्राओं को शिक्षित कराने के लिए डिग्री कॉलेज निर्माण की मांग करते हैं, तथा कई जनप्रतिनिधि लोगों को उच्च शिक्षा संस्थान उपलब्ध कराने का वादा कर चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन शायद यहां कन्या डिग्री कॉलेज की कितनी आवश्यकता है, वह उनकी समझ में नहीं आ रहा। जिसके कारण प्रतिवर्ष हजारों प्रतिभाशाली छात्राएं इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं, क्योंकि सभी परिवारों की की आर्थिक स्थिति निजी डिग्री कॉलेजों में नहीं जाने देती। जमाना कितना ही बदल गया हो लेकिन अभिभावक अभी भी बेटियों को अपनी देखरेख में ही शिक्षित कराना चाहते हैं। मेरठ दिल्ली हाईवे गंग नहर मार्ग तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में भी निजी डिग्री कॉलेज चल रहे हैं। जिनमें दूर-दूर से आकर युवा इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, मास्टर ,आदि बन रहे हैं। लेकिन उनमें मध्यमवर्ग की भी पहुंच नहीं है, गरीबों की बात दूर है। यहां के इंटर कॉलेजों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पास होते हैं, लेकिन आगे की शिक्षा के लिए गाजियाबाद, मेरठ, मोदीनगर, आदि जाना पड़ता है। वहां भी वहां के छात्रों को प्राथमिकता देने के कारण यहां के छात्र छात्राओं को वहां प्रवेश लेने में भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है। उसमें भी सभी को स्थान नहीं मिल पाता। और शिक्षा की लो रोशनी फैलाने से पहले ही दम तोड़ देती है। मुरादनगर, शहर, तथा ग्रामीण, क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के लिए लंबे समय से डिग्री कॉलेज की मांग लोग करते आ रहे हैं, जनप्रतिनिधि भी अभी तक आश्वासनों के सहारे हैं। सरकार बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ के लिए लोगों को जागरूक कर रही है, लेकिन यहां बेटियों की ही शिक्षा के प्रबंध नहीं है। इस बारे में लोगों ने बताया कि ऐसा कोई दर ,बाकी नहीं बचा, होगा जहां, डिग्री कॉलेज निर्माण का आग्रह क्षेत्रवासियों ने न पहुंचाया हो। लेकिन इस ज्वलंत समस्या को लेकर कोई गंभीर नहीं है। लीलावती रामगोपाल विद्या मंदिर के प्रबंधक विनोद जिंदल, पूर्णज्ञांनाजली ग्रुप स्कूल के डायरेक्टर चौधरी योगेंद्र सिंह, के ,सी, एम, पब्लिक स्कूल के प्रबंधक रामकिशन बंधु पत्रकार, पाइपलाइन रोड स्थित एकलव्य पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष चौधरी सतपाल सिंह व दिल्ली मेरठ रोड स्थित ओमसन पब्लिक स्कूल प्रबंधक अशोक गुप्ता, आदि का कहना है। यहां के स्कूलों में स्कूल संचालक आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं को भी शिक्षित करने के हर संभव प्रयास किए जाते हैं। परिवारिक सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखकर यहां स्कूलों में फीस आदि ली जाती है। यहां से बाहर जाते ही वही, शिक्षा कई गुना महंगी हो जाती है।

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