अंजुमन-ए-गुलामान-ए-हुसैन की ओर से हुआ जलसा ज़िक्रे शहीदे आज़म

ईमान की जान है मोहब्बते हुसैन – चिश्ती मियां

भास्कर समाचार सेवा

इटावा। मोहर्रम का महीना शुरू होते ही शहीदे आज़म हज़रत इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की याद में शहर में जगह-जगह कुरआन ख्वानी, मजलिस आदि करवा कर लोग अपनी-अपनी मोहब्ब पेश कर कर्बला के शहीदों को याद कर रहे है।
तीन मोहर्रम को अंजुमन-ए-ग़ुलामान-ए-हुसैन की ओर से मस्जिद शेख़ जलाल पक्की सराय पर जलसा ज़िक्रे शहीदे आज़म में मेहमाने ख़ुसूसी आस्ताने आलिया फफूंद शरीफ के हज़रत अल्लामा व मौलाना सैय्यद नवाज़ अख़्तर(चिश्ती मियाँ)ने कहा कि ईमान की जान है मोहब्बते हुसैन।हमे अहलेबैत और सहाबा से मोहब्बत करनी चाहिये।उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन अलै०ने कर्बला में दीन की वास्ते अपना कुनवा लुटा दिया। संचालन करते हुये इंतिखाब आलम अशरफी रौनक इटावी ने अपने कलाम में कुछ इस तरह कहा”दीने मुहम्मद पर कोई क्या बोलेगा, सिर्फ हुसैन पाक का सजदा बोलेगा।”वहा लिवासों से पहचान नहीं होगी, जो है हुसैनी उसका चेहरा बोलेगा। इस पर अंजुमन-ए-गुलामान-ए-हुसैन के सरपरस्त हाजी अज़ीम वारसी,सदारत कर रहे मौलाना वाजिद अशरफी,सदर हाजी रहीस अहमद चिश्ती,जनरल सेक्रेट्री वाई०के०शफी चिश्ती आदि लोगों ने कलाम पेश करने वालों को नज़राने देकर और नारों की सदाओं से उनकी हौसला अफजाई की। हाफिज़ कैफ़ ने कहा “हर ज़माना मेरे हुसैन का है,यह घराना मेरे हुसैन का है।”जलसे में आस्ताना आलिया नईमियां के सज्जादा नशीन डॉ शुएब अहमद नईमी,कारी सरफराज़ आलम निज़ामी, मौलाना ज़ाहिद रज़ा,हाफिज़ मुहम्मद अहमद, सूफी अब्दुल सत्तार,मशकूर आलम, मौलाना मेहदुल हसन कासिम बाबा, हाफिज़ कैफ,हाजी अब्दुल मजीद,हमीद अशरफी, मुज़म्मिल हुसैन, हन्नान मंसूरी, हाजी मुइनुद्दीन गुड्डू मंसूरी,वसीम चौधरी,कमालुद्दीन चिश्ती,शेख़ नबाव,अबरार अहमद, मु. अज़हर, अहमद, दिलशाद पहलवान, सलमान राइन,अमीन मंसूरी, असरार अहमद टिंकू,हाजी शेख़ शकील, कासिम फारूकी अशरफी, अब्दुल मन्नान,मुहम्मद मुस्तकीम आदि के अलावा शहर के उलमाए इकराम मस्जिदों के पेश इमाम साहिबान मौजूद रहे।

Back to top button