महर्षि बाल्मीकि सामाजिक समरसता के सबसे बड़े हस्ताक्षर : दिनेश

-श्री बालाजी मंदिर परिसर में महर्षि बाल्मीकि प्रकटोत्सव समारोह संपन्न

गाजियाबाद। विश्व के सबसे बड़े पवित्र ग्रंथ रामायण के रचयिता महर्षि बाल्मीकि सामाजिक समरसता के सबसे बड़े हस्ताक्षर थे,उनके आश्रम में ही माता सीता ने लव कुश को जन्म दिया और उनकी शिक्षा भी वहीं पर संपन्न हुई। महर्षि के जीवन दर्शन से ही देश में जात पात का भेदभाव समाप्त किया जा सकता है। यह विचार विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय संरक्षक दिनेश ने व्यक्त किए। वह हिंडन विहार स्थित श्री बालाजी मंदिर परिसर में विश्व हिंदू परिषद की गाजियाबाद महानगर इकाई के तत्वावधान में आयोजित महर्षि वाल्मीकि
प्रकटोत्सव समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन दर्शन आज के परिवेश में पूरी तरह से प्रसांगिक हो सकता है और हम उन्हीं के जीवन दर्शन से प्रेरित होकर जात पात के भेद को मिटा सकते हैं और सभी जातियों में समरसता का माहौल बना सकते हैं। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए हिंदू विचारक महेश वशिष्ट ने कहा कि महर्षि बाल्मीकि के जीवन और संघर्ष से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए और जात पात के भेद को खत्म करना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद के महानगर अध्यक्ष डॉक्टर आलोक गर्ग ने कहा कि हिंदुत्व की विचारधारा और दर्शन आज के परिवेश में पूरी तरह से प्रासंगिक है यही कारण है कि आज विश्व के 180 देशों में हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार चल रहा है। इस अवसर पर महंत गिरीश आनंद और महंत मछेद्र पुरी भी मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। उन्होंने भी हिंदुत्व की विचारधारा को पूरे विश्व में फैलाने का आह्वान करते हुए कहा कि आज हिंदुत्व की विचारधारा से ही भारत विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर हो रहा है। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद के विभाग अध्यक्ष विनय कक्कड़ प्रांतीय संपर्क प्रमुख पवन अग्रवाल तथा महानगर मंत्री रवि दत कौशिक सहित बड़ी संख्या में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता उपस्थित थे। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सुभाष बजरंगी,नवीन गौतम, डॉ सुरेंद्र गुप्ता, दीपेंद्र सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया।

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