ऑस्ट्रेलिया में लाखों मधुमक्खियों की ली जा रही जान, जानिए क्या है कारण

ऑस्ट्रेलिया से एक बड़ी खबर सामने देखने को मिली है जहां शहद को बचाने के खातिर मधुमक्खियों की जान ली जा रही है। ये चिंता की बात तो इसलिए है क्योंकि जिनसे हमें शहद मिलता है, उन्ही को जान से मार दिया जा रहा है। लेकिन शहद बचाने के लिये मधुमक्खियों की जान लेना ये तो बेहद ही गलत तरीका है। बता दें ये बात सुनने में बहुत अजीब लग रहा है , लेकिन ये वाक्या सचमुच सही है। जी, जिन मधुमक्खियों से शहद प्राप्त होता, ऑस्ट्रेलिया में उसी शहद इंडस्ट्री को बचाने के लिए लाखों मधुमक्खियों को मारा जा रहा है।

करोड़ों रुपए की शहद इंडस्ट्री पर खतरा मंडरा रहा है

इसके पीछे वेरोआ माइट नाम का परजीवी है। यह परजीवी देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में फैल गया है। अब इसकी वजह से करोड़ों रुपए की शहद इंडस्ट्री पर खतरा मंडरा रहा है। इसे देखते हुए ही मधुमक्खी पालकों के लिए अलर्ट जारी किया गया। जिसके बाद से हजारों हनीबी कॉलोनियों (जहां मधुमक्खी पालन किया जाता है) का नष्ट कर दिया गया है।

7 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है

न्यूसाउथ वेल्स राज्य के चीफ प्लांट प्रोटेक्शन ऑफिसर सतेंद्र कुमार ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया, “ऑस्ट्रेलिया एकमात्र प्रमुख शहद उत्पादक देश है जो अभी तक वेरोआ माइट से मुक्त है। अगर यह परजीवी फैल जाता है तो, शहद उद्योग को सालाना 7 करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है।

कितना खतरनाक है छत्ते में होने वाला संकमण

वेरोआ माइट के छत्ते में पहुंचने पर वायरस के फैलने का खतरा भी बढ़ता है। यह जीव छत्ते में पांच तरह के वायरस फैला सकता है जो मधुमक्खियों की पूरी कॉलोनी को तबाह कर सकता है। दुनियाभर में यह जीव मधुमक्खियों की कॉलोनी को तबाह करने के लिए जाना जाता है।

डांस के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता

यह जीव कितना खतरा फैलाता है इसे समझने के लिए अलग-अलग मधुमक्खियों के छत्तों की तुलना भी की गई। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन और इटली की ससारी यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि, मधुमक्खी दूसरी मधुमक्खियों को खाने का पता बताने के लिए खास तरह का डांस करके समझाती हैं। इसी डांस के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता है।

एक परजीवी भी पूरे छत्ते को खत्म कर सकता है

तिल के आकार का वेरोआ माइट का रंग हल्का लाल भूरा होता है। एक वेरोआ माइट ही मधुमक्खियों के पूरे छत्ते को खत्म कर सकता है। यह एक मधुमक्खी से चिपकने के बाद दूसरे तक पहुंचता है और इस तरह पूरे छत्ते को अपनी जद में ले लेता है। वेरोआ के छत्ते में पहुंचने पर मधुमक्खियां एक-दूसरे से अलग होना शुरू कर देती हैं। यह इंसानों की तरह ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करती हैं। बीमारी को रोकने के साथ उनके बिहेवियर में भी बदलाव लाती है। हालांकि, इसके बाद भी यह परजीवी बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।

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