माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिये अमृत समान है, बेजुबान भी समझते हैं यह जरूरी बात

भास्कर समाचार सेवा

इटावा। इस समय भारत सहित 120 देशों में विश्व स्तनपान सप्ताह (1-7 अगस्त) मनाया जा रहा है जिसका उद्देश्य नवजात बच्चों की माताओ को स्तनपान के लिये अधिक से अधिक जागरूक करना है । क्यों कि, कुछ माताएं अज्ञानता के कारण अपने नवजात बच्चों को उस (जन्मजात अधिकार) उस दिव्य अमृत (पीले गाढ़े पदार्थ कोलोस्ट्रम) से वंचित कर देती है जो जीवन भर उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों से लड़ता हुआ बच्चे को बचाता है। आजकल के हमारे आधुनिक समाज मे कुछ पढ़ी लिखी महिलाओं में यह भी भ्रांति बनी हुई है कि, नवजात बच्चे को स्तनपान करने से उनकी सुंदरता प्रभावित हो सकती है जिसके अज्ञात भय से कुछ महिलाएं अपने नवजात बच्चे को जन्म से ही उसे कृत्रिम दूध पिलाने लगती है जब कि, सुंदरता प्रभावित होने की बात बिल्कुल ही निराधार ही है। जब कि,असल मे स्तनपान से माँ की केवल सुंदरता ही नही बढ़ती बल्कि,प्रसव के बाद स्तनपान कराने से माताओं के स्तन में होने वाली कैंसर की खतरनाक गांठो से भी वे बच जाती है। कोलोस्ट्रम माँ का वह पहला गाढ़ा पीला दूध है जो रोगप्रतिकारकों से भरपूर होता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा भी अत्यधिक होती है जो नवजात शिशु के मांसपेशियोँ को बनाने में पूर्ण मदद करती है और नवजात की रोग प्रतिरोधक शक्ति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कोलोस्ट्रम में ऐसे विशेष गुण भी समाहित होते हैं, जिसकी वजह से शरीर का शुरुआती काल मल जिसे मिकोनियम भी कहते हैं बच्चे के शरीर से आसानी से बहार निकल जाता है।

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