OMG : इंसानों के प्यार में बदनाम हो गया टाइगर, वजह जानकर उड़ जायेंगे आपके होश

Bahraich News: प्रेमी-प्रमिका के भागने की कहानी सुना होगा। लेकिन बहराइच जिले में इंसानों के मोहब्बत में बेजुबान जानवर बाघ (टाइगर) बदनाम हो गया। यहां बाघ के उठा ले जाने की आड़ में प्रेमी ने एक किशोरी का अपहरण कर लिया। हमले को दर्शाने के लिए हाथ से बाघ के पंजे के निशान ही नहीं बनाए गए, बल्कि किशोरी के कपड़ों को फाड़कर कई जगह फेंके गए थे। लड़की के घर वालों को लगा कि उसे जंगल से आया बाघ उठा ले गया है। ग्रामीणों ने घटना की जानकारी वन विभाग को दी थी। डीएफओ की जांच में वन्यजीवों के निशान न होने के बाद पुलिस हरकत में आयी। गलती किसी की थी, लेकिन इल्जाम बाघ पर लगा। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। वन विभाग पर गुस्सा उतारने वालों को विभाग चिन्हित करके बडी कार्यवाही शुरू कर दी।

मामला यूपी के बहराइच जिले का है। सुजौली थाना क्षेत्र के एक गांव की 18 वर्षीय किशोरी 23 जुलाई शनिवार रात को करीब नौ बजे घर के बाहर हैंडपंप पर पानी पी रही थी, तभी वह लापता हो गई। परिवार के लोगों ने शोर मचाकर बाघ के किशोरी को उठा ले जाने की बात ग्रामीणों से बताई। जानकारी पाते वन विभाग की इक्सपर्ट टीम ने मौके पर जांच किया, लेकिन खेत में मिले निशान वन्यजीवों के पंजे के नहीं मिले। बावजूद ग्रामीण अड़े रहे तो हथिनी जयमाला व चंपाकली को लाया गया।

घटना के दूसरे दिन 24 जुलाई रविवार को सर्च ऑपरेशन चला लेकिन बाघ के हमले के तथ्य सामने नहीं आए। डीएफओ की रिपोर्ट के बाद पुलिस हरकत में आयी। पुलिस अधीक्षक केशव कुमार चौधरी ने सुजौली पुलिस को घटना का खुलासा किए जाने का निर्देश दिया।

थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस टीम ने तलाश की। बताया पिता की तहरीर पर अपहरण का मुकदमा दर्ज कर छापेमारी की। उन्होंने कहाकि कोतवाली नानपारा ताजपुर गांव निवासी सतीश के यहां से उसे बरामद किया गया। सतीश के साथ सुजौली थाना क्षेत्र के ही निवासी रिंकू मौर्य और पिंटू मौर्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

तलाश में लगी थी तीन थाने की पुलिस

किशोरी के गायब होने पर वन विभाग, वन एसटीपीएफ के साथ सुजौली, मोतीपुर और मूर्तिहा थाने की पुलिस लगी थी। इसके अलावा ड्रोन से भी निगरानी की गई थी,तब कही सफलता मिली।

आरोप लगाने वालों पर हो सकती कार्यवाही

पुलिस के खुलासे के बाद वन विभाग बार-बार ग्रामीणों को विरोध के लिए उकसाने में लगे लोगों को चिंहित किया है। इन लोगों पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी हो रही है। प्रशासन की सूझबूझ से लोगों का आक्रोश टल गया। कतर्नियाघाट के डीएफओ आकशदीप बधावन ने बताया, घटना स्थल से जुटाए गए साक्ष्य किसी भी वन्यजीव के हमले के नहीं मिले थे। वहां हाथ से पंजे बनाए गए थे। दूसरा रंग देने की पूरी सुनियोजित कोशिश की गई थी। ऐसे लोगों पर कार्रवाई होगी।

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