मोहर्रम की चांद रात पर शरीफ मंज़िल में हुआ मजलिसों का आयोजन

भास्कर समाचार सेवा

इटावा। स्थानीय शरीफ मंज़िल सैदबाड़ा स्थित इमाम बारगाह में हर साल की तरह इस साल भी राहत अक़ील की ओर से मोहर्रम की चांद रात पर मजलिसों का आयोजन किया गया।
मजलिस में तकरीर करते हुए मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी इमामे जुमा इटावा ने कहा मोहर्रम का महीना गम का महीना है इसलिए मोहर्रम में गमगीन रहें, हुसैनी होने का संकल्प लें और इमाम हुसैन के पैगाम को लोगों तक पहुंचाएं। कर्बला में इमाम हुसैन पर हुए जुल्म की खिलाफत करना हर हुसैनी की जिम्मेदारी है। इमाम हुसैन कर्बला में जंग करने नहीं बल्कि रसूल अल्लाह के दीन को बचाने के लिए गए थे। इमाम हुसैन ने कर्बला में जो इंसनियत का पैगाम दिया हमे उस पर अमल करना चाहिए। कर्बला इंसनियत की दर्सगाह है। श्री जैदी ने कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन की लाश को कफ़न तक नहीं मिला बल्कि दुशमने इस्लाम ने उनकी लाश पर घोड़े दौड़ाए। मजलिस में तस्लीम रजा ने सोजख्वानी की और तनवीर हसन ने नोहाख्वानी की। अंजुमन हैदरी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष शावेज़ नक़वी ने बताया पहली मोहर्रम 31जुलाई को सुबह 8 बजे इमाम बारगाह घटिया अज़मत अली पर आदिल अख्तर गुड्डू, इसके फौरन बाद मिश्री टोला में रज़ी हैदर के मकान पर तथा दरगाह हज़रत अब्बास महेरे पर नफ़ीसुल जैदी की से दोपहर 12 बजे मजलिस होगी। श्री नक़वी ने मजलिसों में समय की पाबंदी के साथ भाग लेकर इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला को श्रद्धा सुमन अर्पित करने की अपील की है।

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