Rajasthan Weather Update: प्रदेश के इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, जानिए मौसम का हाल 

जयपुर. राजस्थान में मॉनसून सक्रिय हो गया है. ऐसे में अब इंद्रदेव प्रदेश पर मेहरबान नजर आ रहे हैं. ज्यादा बारिश की वजह से प्रदेश के कई इलाकों में जलभराव की भी समस्या देखी जा रही है, जिससे लोग परेशान नजर आ रहे हैं.

बता दें, बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के कारण मानसून पश्चिम दिशा में आगे की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते पूरे राजस्थान के कई जिलों में मानसून को लेकर मौसम विभाग की ओर से चेतावनी भी जारी की गई है. मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार 2 अगस्त तक एक दर्जन जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. विभाग ने अजमेर, सीकर, नागौर में 30 जुलाई के लिए रेड अलर्ट जारी किया था . इसके साथ ही इन जिलों में 200 मिलीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना भी जताई है. 

इसके अलावा मौसम विभाग ने झुंझुनू, जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा, बारां, झालावाड़ जिलों के साथ साथ अलवर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़ सहित कई जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है. मौसम विभाग ने सरकार और प्रशासन को अलर्ट रहने की चेतावनी भी जारी की है.

प्रदेश में औसत से 16 फीसदी तक कम हुई बारिश

मौसम विभाग की ओर से प्रदेश में अभी तक सभी जिलों में हुई बारिश को लेकर आंकड़े भी जारी किए गए हैं, जिसके अनुसार अभी तक प्रदेश में औसत से 16 फीसदी तक कम बारिश दर्ज की गई है.

विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 198.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जानी थी, लेकिन अभी तक प्रदेश में 166.4 मिलीमीटर ही बारिश दर्ज की गई है, जोकि औसत से करीब 16 फीसदी तक कम है. 

वहीं, राजधानी जयपुर की बात की जाए तो जयपुर में अभी तक 249.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जानी थी. इसके विपरीत अभी तक जयपुर में 164 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो औसत से 34 फीसदी तक कम है.

इसके साथ ही प्रदेश में सर्वाधिक बारिश की बात की जाए तो सर्वाधिक बारिश प्रतापगढ़ जिले में दर्ज की गई है. प्रतापगढ़ में 370. 3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जानी थी, इसके विपरीत प्रतापगढ़ जिले में 505. 4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जोकि औसत से 36 फिसदी ज्यादा है.

सावन में अच्छी बारिश की उम्मीद

जानकारी के अनुसार आषाढ़ महीने के अंत तक प्रदेश की के ज्यादातर हिस्सों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई थी और पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आषाढ़ का महीना सूखा भी रहा था.

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