आरईएल की एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन डॉ. रश्मि सलूजा के जवाब

1) भारत में कौन से सेक्टर इस समय अच्छा कर रहे हैं और इनमें से कौन से सेक्टर लंबी अवधि में वैल्यू के निर्माण के लिहाज से उचित सेक्टर साबित हो सकते हैं?

जवाबः मॉनसून काफी अच्छा रहा है. ऐसे में ऑटोमोबाइल, एग्रो, स्पेशियालिटी केमिकल्स और BFSI जैसे रूरल थीम काफी अच्छा कर रहे हैं. आने वाले समय में एनर्जी, बिजली और इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर में भी सुधार देखने को मिलेगा. ये ऐसे सेक्टर्स हैं जो भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने के लक्ष्य के करीब ले जाएंगे. काफी उच्च गुणवत्ता वाली कंपनियां वैश्विक परिस्थितियों के साथ जिन वैल्यूज के साथ आती हैं और जिस प्रकार उनके स्टॉक के भाव इस समय काफी अधिक डिस्काउंट के साथ अवेलेबल हैं, वे निवेशकों के लिए काफी आकर्षक नजर आते हैं. जब परिस्थितियां बदलेंगी और हालात में सुधार होंगे तो ये बिजनेसेज संभावित तौर पर मार्केट के अन्य सेक्टर्स की तुलना में जल्द और बेहतर प्रदर्शन करेंगे.

भारत की हेल्थकेयर इंडस्ट्री रोजगार और इनकम के लिहाज से काफी तेजी से अहम बनती जा रही है. मिडिल क्लास में बढ़ती उम्र वाले लोगों की आबादी और कम एक्टिव लाइफस्टाइल की वजह से जुड़ी बीमारियों के चलते हेल्थकेयर सेक्टर की जरूरत बढ़ी है.

हेल्थकेयर सेक्टर के कामकाज में डिजिटल और टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से हेल्थकेयर सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. भारत में पीपीपी और एफडीआई (फॉरेन डायरेक्ट इंवेस्टमेंट) की वजह से हेल्थकेयर इंडस्ट्री में निवेशकों को मुनाफा देने की संभावनाएं मौजूद हैं

2) अगर आपको उद्यमियों को इस साल एक सलाह देनी हो तो आप उन्हें किस चीज पर फोकस करने को कहेंगी? ग्रोथ पर या जोखिम कम करने को?

जवाबः 2001 में भारत यूनिकॉर्न की संख्या के लिहाज से ब्रिटेन को छोड़ते हुए अमेरिकी एवं चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी बन गया. पिछले छह साल में भारत में स्टार्टअप की संख्या में काफी अधिक वृद्धि देखने को मिली है. भारत में 2021-22 में मान्यता प्राप्त नए स्टार्टअप की तादाद  बढ़कर 14,000 तक पहुंच गई जो 2016-17 में केवल 733 थी. भारत सरकार मजबूत सपोर्ट उपलब्ध करा रही है और इसके साथ ही कंपनियों की वृद्धि के लिए तमाम ट्रिगर्स मौजूद हैं.

वैश्विक स्तर पर, दुनिया भारत को एक इंवेस्टमेंट हब के तौर पर देख रही है. उद्यमियों को जोखिम उठाना शुरू करना चाहिए और सरकार से मिलने वाले सपोर्ट का फायदा उठाना चाहिए. भारत इस समय नवाचार (इनोवेशन) और उद्यमिता को बढ़ावा देने की स्थिति में है. भारत वस्तु एवं सेवाओं के लिए दुनिया के सबसे बड़े कंज्यूमर मार्केट में से एक है और यह लगातार बढ़ रहा है. 

उद्यमियों को भारतीय उपभोक्ताओं और बिजनेसेज को फायदा पहुंचाने वाले और भारत की प्रगति और ग्रोथ को सुनिश्चित करने के लिए इनोवेटिव प्रोडक्ट्स और सर्विसेज विकसित करने वाले आइडिया में निवेश के जरिए इस मौके का अधिकतम फायदा उठाना चाहिए.

3) मार्केट में लोग इस तरह की बात कर रहे हैं कि आप नए सिरे से एक बड़े विविधतापूर्ण फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस को बनाने का प्रयास कर रहे हैं. आपका इस बारे में क्या कहना है?

जवाबः मौजूदा प्रबंधन REL में नई जान डालने और उसे सफल बनाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है. हम विरासत से जुड़े मुद्दों को सुलझाकर BFSI इंडस्ट्री में एक प्रमुख कंपनी के तौर पर अपनी पुरानी स्थिति को वापस हासिल करना चाहते हैं. संगठन नए वेंचर्स के साथ नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है और इसके लिए नई पूंजी हासिल करने की योजना बना रहा है.

4) भारत के वृद्धि के रास्ते को लेकर आपकी क्या राय है? एक तरफ आईएमएफ ने जहां ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है. वहीं अर्थशास्त्रियों को लगता है कि भारत आने वाले समय में दुनियाभर की इकोनॉमी की सुस्ती से अछूता रहने वाला नहीं है. आपकी क्या राय है?

जवाबः मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि आने वाले समय में भारत वृद्धि की राह पर आगे बढ़ते रहेगा. भारत की वित्तीय बुनियाद बहुत मजबूत है और यहां एक सपोर्टिव सरकार है जिसने इसे पिछले वैश्विक आर्थिक संकट के समय भी आगे की और बढ़ाया और इसे दुनिया की बड़ी आत्मनिर्भर इकोनॉमी बनाया.

कैलेंडर वर्ष 2022 की पहली तिमाही में ब्याज दरों में इजाफा नहीं करने को लेकर आरबीआई की काफी आलोचनाएं हुई हैं लेकिन मेरे ख्याल से ऐसे समय में ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी नहीं करना एक बुद्धिमानी भरा फैसला था क्योंकि तब महंगाई दर ऊंची तो थी लेकिन मांग पर आधारित नहीं थी. आरबीआई ने वैश्विक स्तर पर परिस्थितियों का सही आकलन करके और रुख को रक्षात्मक करके बिल्कुल सही फैसला लिया. भारत ने वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच तमाम चुनौतियों पर पार पाया और भविष्य में भी ऐसा करता रहेगा. समय के साथ भारत की वृद्धि दर उभरते हुए बाजार एवं वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार को पीछे छोड़ देगा.

वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में नरमी के साथ आरबीआई और सरकार एकसाथ मिलकर महंगाई दर को नीचे लाने का प्रयास कर रहे हैं जो इस समय सात फीसदी से थोड़ा ऊपर है. हालांकि, हालात अमेरिका की तुलना में काफी बेहतर हैं जहां महंगाई दर 9 फीसदी के आसपास पहुंच गई है और फेड रिजर्व के पास ब्याज दरों में इजाफे का मुश्किल विकल्प है क्योंकि इससे इकोनॉमी में मंदी आ सकती है.

5) भूराजनीतिक मुद्दों को देखते हुए ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट्स को लेकर आपकी क्या राय है? आपके हिसाब से भारतीय बाजार किस प्रकार आगे बढ़ेगा?

जवाब: महामारी और रूस-यूक्रेन विवाद का दुनिया की इकोनॉमी पर नकारात्मक असर देखने को मिला है. इससे दुनियाभर की जीडीपी में काफी अधिक गिरावट देखे को मिली है. इन भूराजनीतिक चुनौतियों की वजह से बढ़ी महंगाई और कुछ शक्तिशाली देशों द्वारा उनकी इकोनॉमी को मैनेज करने के लिए उठाए गए कदमों की वजह से दुनियाभर की इकोनॉमी एक तरह के रिसेट की स्थिति की ओर बढ़ रही हैं. इस टकराव का महंगाई दर और दुनिया की आर्थिक प्रगति पर उल्लेखनीय असर देखने को मिल सकता है और इससे ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क भी प्रभावित हो सकता है. रूस-यूक्रेन की जंग शुरू होने के बाद से फाइनेंशियल मार्केट में बहुत अधिक उथल-पुथल देखने को मिला है.

इसी तरह अमेरिका की इकोनॉमी में भी संकुचन देखने क मिल सकता है. उनकी महंगाई दर के आंकड़े अनुमान से काफी ऊपर हैं. हालांकि, इस तरह के भूराजनीतिक दबावों से निपटने की भारत के फाइनेंशियल मार्केट की क्षमता काफी अधिक है. निजी कंपनियां काफी अधिक पूंजीगत निवेश करने की योजना बन रही हैं और कुछ कंपनियों का मानना है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में इस तरह की बाधा पड़ने से भारतीय मार्केट्स को फायदा हो सकता है.

6) भारत में बिजनेस करने के लिहाज से फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंकिंग सेक्टर अट्रैक्टिव नजर आते हैं?

जवाबः फाइनेंशियल और बैंकिंग सर्विसेज आधुनिक भारत की इकोनॉमी के रीढ़ हैं क्योंकि वे क्रेडिट हासिल करने का जरिया प्रदान करते हैं. हर तरह की कॉमर्शियल और कंज्यूमर की जरूरत को पूरा करने के लिए क्रेडिट का इस्तेमाल किया जाता है और इसमें विश्वसनीय और लंबी अवधि के निवेश के मौके हैं.

इसलिए फाइनेंशियल और बैंकिंग सर्विसेज की हमेशा से डिमांड रही है जो इन सेक्टर्स में बिजनेस की संभावनाओं को बढ़ा देते हैं. इसके साथ ही बैंकिंग सेक्टर में लचीलापन है और वह वैश्विक अर्थव्यवस्था की उथल-पुथल को पीछे छोड़ने में सक्षम है. BFSI सेक्टर मांग में स्थितरता और विश्वसनीयता की वजह से भारत के आकर्षक बिजनेस डोमेन में से एक हैं. 

7) हाउसिंग फाइनेंस सेग्मेंट को लेकर आपकी क्या राय है? ब्याज दरों में इजाफे की स्थिति में क्या घरों की मांग में कमजोरी देखने को मिलेगी?

जवाबः आने वाले कुछ समय में हाउसिंग फाइनेंस इंडस्ट्री में बहुत अधिक विस्तार देखने को मिलेगा. भारत सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग की बहुत अधिक डिमांड को देखते हुए ऐसे आवासीय प्रोजेक्ट्स को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम विकसित किए हैं. सरकार ने नेशनल हाउसिंग बैंक में 10,000 करोड़ रुपये (1.43 बिलियन डॉलर) की शुरुआती पूंजी के साथ अफोर्डेबल हाउसिंग फंड (AHF) की स्थापना की है. 

बढ़ते शहरीकरण और परिवार की आय में इजाफे के बीच भारत में आवासीय रियल एस्टेट की मांग काफी अधिक है. भारत कीमतों में वृद्धि के मामले में दुनिया के 10 सबसे बड़े प्रोपर्टी मार्केट्स में से एक है. रियल एस्टेट इंडस्ट्री की मजबूत बिक्री और ग्राहकों की मांग से जुड़े आंकड़ों से ऐसा नहीं लग रहा है कि ब्याज दरों में इजाफा से कंज्यूमर डिमांड पर असर देखने को मिल रहा है.

8) भारतीय इंश्योरेंस इंडस्ट्री को लेकर आपकी क्या राय है? महामारी के बाद जहां इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ी है, वहीं अधिक क्लेम ने इंश्योरेंस कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित किया है. आप अगले दो-तीन साल में इसे किस तरफ बढ़ते हुए देख रही हैं?

जवाबः भारत के इंश्योरेंस मार्केट में ग्रोथ की बहुत अधिक संभावनाएं मौजूद हैं, खासकर महामारी की स्थिति में. हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की डिमांड बहुत अधिक है. भारतीय इंश्योरेंस मार्केट में अगले दो-तीन साल में भारत के इंश्योरेंस मार्केट में तेज रफ्तार वृद्धि का अनुमान है क्योंकि इस अवधि में देश की जीडीपी ग्रोथ और देश के आर्थिक हालात में बहुत अधिक सुधार का अनुमान है. जहां इंश्योरेंस की जरूरत लगातार बढ़ने का अनुमान जताया जा रहा है, वहीं इस बात का अनुमान है कि टेक्नोलॉजी के उन्नत होने, वैक्सीन के निर्माण, ट्रैफिक सेफ्टी और कड़े मानकों की वजह से इंश्योरेंस क्लेम में कमी आएगी. ये पहलू इस बात की गारंटी देते हैं कि भारतीय इंश्योरेंस मार्केट का विस्तार तेजी से होगा और इस सेक्टर में मुनाफा भी बढ़ेगा.

9) आपने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि रेलिगेयर 360-डिग्री फाइनेंशियल सर्विसेज से जुड़ा ग्रुप बनने वाला है. क्या आप हमें इस बात के बारे में कुछ बताएंगी कि रेलिगेयर मौजूदा बिजनेस के साथ नए बिजनेस के लिए किस तरह की तैयारी कर रही है?

जवाबः रेलिगेयर ने कंपनी के पूर्ववर्ती प्रमोटर्स और डायरेक्टर्स द्वारा पैदा की गई कई चुनौतियों को हैंडल किया है. इनमें सेबी के साथ सेटलमेंट और पूरी तरह कर्जमुक्त (एनबीएफसी) बनना शामिल है.

आने वाले समय में रेलिगेयर ग्रुप अपने बिजनेस के विस्तार एवं सभी तरह की वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देगा. हमारे मौजूदा ऑपरेशन्स के जरिए हम अपने क्लाइंट्स को कई तरह की वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराते हैं. हमारा कंज्यूमर बेस काफी बड़ा है और तेजी से आगे बढ़ रहा है. हम इंवेस्टमेंट बैंकिंग, प्राइवेट इक्विटी फाइनेंसिंग, पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज, एडवाइजरी जैसे क्षेत्रों में अपनी संभावनाओं को लेकर काफी अधिक आशान्वित हैं.

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