गमगीन माहौल में संत विजय बाबा का हुआ अंतिम संस्कार

राजस्थान के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के लिए जनता ने लगाए नारे, राजा नहीं हत्यारा है

ब्रह्मांचल पर्वत एवं गो माता की शरण में ब्रजदास भैया ने विजय बाबा को दी मुखाग्नि

भास्कर समाचार सेवा

बरसाना। ब्रजक्षेत्र की पहाड़ियों में खनन रोकने के लिए संत विजय बाबा ने खुद को आग लगा ली। शनिवार को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में विजयदास बाबा ने जीवन की अंतिम सांस ली। बाबा को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने शनिवार को दम तोड़ दिया। कामां के विमल कुंड से होते हुए बरसाना स्थित माताजी गोशाला में विधि विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया। समूचा गोशाला परिसर विजय बाबा के जयकारों से गूंज उठा वहीं राजस्थान सरकार के मंत्री के खिलाफ राजा नहीं हत्यारा है के नारे लगे।
घटना के अनुसार, राजस्थान डीग के पासोपा गांव में 551 दिन से खनन माफियाओं के खिलाफ धरने पर बैठे संतों ने जब देखा कि सरकार श्रीराधाकृष्ण की लीलास्थलियों के स्वरूप को छिन्न-भिन्न करना चाहती है तो पशुपति नाथ मंदिर के महंत विजय दास बाबा ने 19 जुलाई को अपने शरीर पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। आग लगने के बाद विजय बाबा को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान शनिवार को मौत और जिंदगी के बीच संघर्ष करते हुए विजय बाबा ने अंतिम सांस ली। विजय बाबा के पार्थिव शरीर को दिल्ली से कामां, विमल कुंड, सुनहरा, बरसाना होते हुए बरसाना स्थित माताजी गोशाला लाया गया। जिस रास्ते से बाबा की एंबुलेंस निकल रही थी उनके अनुयायी विजय बाबा के जयकारों के साथ उनके ऊपर फूलों की वर्षा कर रहे थे। इस दौरान भाजपा–कांग्रेस के नेता एक दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप लगाते नजर आए। राजस्थान के पर्यटन मंत्री राजा विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि आंदोलन कर रहे सभी लोगों को कई बार सरकार द्वारा आश्वस्त किया गया कि ब्रजअंतर्गत पड़ने वाली पहाड़ियों से खनन जल्द ही बंद करवाया जायेगा मगर भाजपा ने आग पर घी डालने का काम किया। इस सबकी जिम्मेदार भाजपा है। इस दौरान राजा विश्वेंद्र सिंह के खिलाफ लोगों ने राजा नहीं हत्यारा है के नारे लगाए। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण एवं भरतपुर की सांसद रंजीता कौली ने कहा कि संत वंदनीय होते हैं इनकी कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। हमें उम्मीद है कि इस घटना से राजस्थान सरकार की कुंभकर्णी नींद टूटेगी और उनके अभिमान का मान मर्दन होगा। इस मौके पर राजस्थान की शिक्षा मंत्री बीड़ी कल्ला, संत समाज, ब्रजदास उर्फ सुनीला भैया, राधाकांत शास्त्री, भाजपा जिला महामंत्री प्रेम श्रोत्रिय, पीतम प्रधान, समाजसेवी जयप्रकाश त्यागी सहित सैंकड़ों लोगों ने संत को श्रद्धांजलि दी।

पद्मश्री संत रमेश बाबा की आंखें हो गईं नम
विजय दास बाबा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित करते समय संत रमेश बाबा की आंखों में आंसू छलछला उठे। उन्होंने कहा कि विजय बाबा मान मंदिर सेवा संस्थान से 15 वर्ष से जुड़े रहे हैं। वह उनके परिवार के सदस्य जैसे ही थे।

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