जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रसूताओं को मिलने वाले निशुल्क आहार में घोटाला

तीन वर्षों से नहीं हुआ है टेंडर, फिर भी फर्मों को किए गए भुगतान

भास्कर समाचार सेवा

मथुरा। स्वास्थ्य विभाग आए दिन घोटालों के कारण सुर्ख़ियों में रहता है । जहां एक तरफ प्रदेश की योगी सरकार जीरो टोलरेंस की बात करती है वही विभाग के आला अफसर जीरो टॉलरेंस की पलीता लगाते हुए नजर आ रहे हैं। ताजा मामला जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रसूताओं को दिए जाने वाले निशुल्क आहार में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए घोटाले को लेकर प्रकाश में आया है। जहां पर प्रसुताओ को दिए जाने वाले निशुल्क आहार में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है। जिसमें 2019 से आज तक कोई टेंडर नहीं हुआ है और पुराने टेंडरों पर ही कार्य कराया जा रहा है। जनपद में सात कांटेक्टर हैं जो राल ,गोवर्धन, कोसीकला बलदेव, फरह, नौहझील, मांट, बरसाना, राया,चौमुंहा और छाता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क आहार उपलब्ध करा रहे हैं। इनका भुगतान भी ब्लॉक स्तर से किया गया जबकि वास्तविकता यह है कि इन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर निशुल्क आहार प्रसूताओं को नहीं दिया जा रहा है। फिर भी ब्लॉक स्तर पर इनका भुगतान किया गया । जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत किसी फर्म का पिछले तीन वर्ष से टेंडर नहीं हुआ है। अरोड़ा कॉन्ट्रेक्टर,दीप्ति इंटर प्राइजेज, शैलेन्द्र प्रताप कॉन्ट्रेक्टर,राधा खादी ग्रामोद्योग कॉन्ट्रक्टर,श्री विनायक कॉन्ट्रक्टर,श्रीमती लक्ष्मी देवी कॉन्ट्रक्टर एवं सुरेश कुमार जैन कॉन्ट्रेक्टर कागजो में काम कर रहे हैं। आपको बता दें कि जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत प्रसव प्रसुताओं को कम से कम 90 रुपए और अधिकतम सौ रुपये प्रति डायट जिसमें सुबह का नाश्ता अनुमानित दर 20 रुपए से 30 रुपए एक गिलास दूध के साथ दलिया ,पोहा, ब्रेड (4 स्लाइस ), 10 ग्राम मक्खन, दोपहर का भोजन अनुमानित दर 35 रुपए से 40 रुपए चार रोटी ,दाल, मौसमी सब्जी, चावल एवं सलाद दही, रात्रि का भोजन अनुमानित लागत 35 रुपए से 40 रुपए चार रोटी ,मौसमी सब्जी, चावल एवं मौसमी फल एक गिलास दूध दिया जाना आवश्यक होता है लेकिन यह सिर्फ कागजों पर ही भुगतान कर दिया जाता है कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं जो प्रसव प्रसूता ओं को मात्र कुछ घंटे ही भर्ती कर डिस्चार्ज कर दिया जाता है जबकि नॉर्मल प्रसव को 48 घंटे और सिजेरियन प्रसव को 72 घंटे तक भर्ती करने का प्रावधान है। लेकिन सामुदायिक स्वास्थ केंद्र राल जैसे अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नॉर्मल प्रसव प्रसूता को मात्र कुछ घंटे के बाद ही डिस्चार्ज कर घर भेज दिया जाता है। जब इस बारे में सीएमओ डॉ अजय कुमार वर्मा से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया है कि मीटिंग में सभी चिकित्सा अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है । ब्लॉक स्तर पर सभी प्रसव प्रसूताओं को निशुल्क आहार उपलब्ध कराया जाए। यदि कोई ब्लॉक प्रसूताओं को भोजन उपलब्ध नही करा रहा तो उसकी स्वयं जिम्मेदारी होगी। बजट न होने के कारण इस वर्ष किसी ब्लॉक स्तर पर कोई भुगतान नहीं किया गया है। इस वर्ष टेंडर नही हुआ है फिलहाल जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत मिलने वाले निशुल्क आहार से संबंधित टेंडर प्रक्रिया जारी है।

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