सीतापुर : यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना होती है पूर्ण

चार सौ साल पहले जंगली नाथ शिव मंदिर का हुआ था निर्माण

मूड़ा गांव में त्रिलोचन सिंह ने शिव मंदिर का कराया था भव्य निर्माण 

शिव आराधना से उड़ा नागिन के प्रकोप का हुआ था अंत

महोली-सीतापुर। कहते हैं ब्रम्हांड के कण कण में भगवान शिव समाहित हैं। शिव से बड़ा योगी व वैरागी नही हुआ। सावन महीने में हर तरफ हरियाली और फल, फूल की बहार होती है। सावन के पवित्र महीने में आराधना से शिव शीघ्र ही प्रसन्न हो जाते हैं। सावन में शिवभक्त व कांवड़िए शिवलिंग पर कांवड़ अर्पित कर अपने आराध्य के प्रति आस्था का प्रदर्शन करते हैं। महोली से सात-आठ किमी की दूरी पर ग्राम पंचायत ब्रम्हावली के मूड़ा गांव में बाबा जंगली नाथ शिव मंदिर स्थित है। दूर-दराज से भक्त शिव उपासना के लिए यहां आते हैं। मान्यता है सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना की पूर्ति होती है।

इतिहासकार बताते हैं करीब चार सौ वर्ष पहले ब्रम्हावली गांव में विभिन्न समुदायों के लोग निवास करते थे। तत्कालीन समय में एक नागिन डस कर लोगों का शिकार करती थी। ये नागिन हवा में उड़कर लोगों को निशाना बनाती थी। नागिन के डसे जाने से लोगों की असमय मृत्यु होने लगी। पूरा गांव नागिन से भयभीत रहने लगा।

नागिन के डर से ग्रामीण व त्रिलोचन सिंह नाम का युवक गांव से पलायन कर गया और जंगल में जाकर बसेरा बना लिया। धीरे-धीरे गांव का विस्तार होने लगा। जिसे मूड़ा गांव से जाना जाने लगा। कुछ समय पश्चात त्रिलोचन सिंह कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गया और काफी परेशान था। त्रिलोचन सिंह ने जंगल मे शिवलिंग स्थापित कर पूजा-अर्चना करने लगा। उसकी भक्ति की शक्ति से भगवान शिव प्रसन्न हो गए और उसे दर्शन दिए।वरदान स्वरूप उसका कुष्ठ रोग ठीक हो गया और उड़ा नागिन का प्रकोप शांत हो गया। त्रिलोचन सिंह ने उसी स्थान पर भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया।

जिसे बाबा जंगलीनाथ के नाम से जाना गया। मान्यता है शिव मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई सभी मनोकामना पूर्ण होती हैं। गांव के बुजुर्गों ने बताया शिवलिंग की खुदाई कर स्थान परिवर्तन करने का प्रयास किया गया। खुदाई के दौरान शिवलिंग का अंतिम छोर नही मिला। इसलिए उसी स्थान पर शिव मंदिर का निर्माण करा दिया गया।

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