सीतापुर : कांवडि़यों की अगाध शिवभक्ति, जख्मी कदम भी न डगमगाए

बीती मंगलवार को 300 से अधिक कांवड़ यात्री पहुंचे नगर के बैजनाथ धाम

राजघाट से गोला गोकरनाथ खीरी की पदयात्रा कर चढ़ाते हैं कांवड़

महोली-सीतापुर। तपती व पथरीली सड़क, छालों से जख्मी हो चुके पैर, उस पर करीब 400 किमी की पद यात्रा वह भी नंगे पैर, कुछ इस तरह शिवभक्त इलाके के गांवों से निकल पड़े कांवड़ लेने। रास्ते में बारिश हो या तेज धूप, आंधी आये या तूफान। कोई भी बाधा कांवडि़यों को उद्देश्य व मंजिल से विचलित न कर सकी। वह शिव भक्ति में मगन होकर अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए आगे बढ़ते गए। शूल की तरह चुभते कांटे व असहनीय गर्मी की तपन से पैरों में पड़ते छालों के बाद भी कांवडि़या न रास्ता छोड़ते हैं, न इरादा और न ही मंजिल। कांवड़ यात्री 400 किमी की पैदल यात्रा कर राजघाट से गंगाजल लाकर खीरी जिले के गोला गोकरनाथ शिव मंदिर में चढ़ाते हैं।

मंगलवार को कस्बे के बैजनाथ धाम से निकला करीब 300 कांवडि़यों का जत्था कांवड़ लाकर शनिवार को वापस बैजनाथ मंदिर पहुंचा। यहां पूजन-अर्चन के बाद गोला गोकरनाथ शिव मंदिर के लिए निकल पड़ा। कांवड़ यात्रियों के अलग-अलग नियम होते हैं। कुछ कांवडि़या पूरी दूरी अकेले तय करते हैं तो कुछ समूह के हिसाब से। एक समूह में चार कांवडि़या शामिल होते हैं। इस तरह लगातार चार वर्ष कांवड़ लाकर चढ़ाने से उनकी कांवड़ यात्रा पूरी हो जाती है। इसी तरह कुछ कांवडि़ए साइकिल या अन्य वाहनों से भी कांवड़ लाकर चढ़ाते हैं। इस बार तहसील क्षेत्र में कांवडि़यों की सुविधाओं के लिए प्रशासन मुस्तैद है।

कांवडि़यों की देखरेख के लिए एसडीएम पूनम भाष्कर मौके पे पहुंची और सुविधाओं का निरीक्षण किया। हरदोई-सीतापुर की सीमा से लेकर लखीमपुर-सीतापुर की सीमा तक कांवडि़यों की सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा गया है। रास्ते में जगह-जगह शौचालय, पानी के टैंक व मेडिकल टीम लगाई गई है। यहीं नही जिस पथ से कांवडि़ए गुजरते हैं वहां शिवभक्त फूल मालाओं से उनका स्वागत करते हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन के जिला अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने कांवडि़यों के पैर धुलकर उनके खानपान की व्यवस्था की।

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