बहराइच में विश्व स्तनपान सप्ताह पर विशेष : शिशु जन्म संग पोषण का ककहरा पढ़ा रहीं स्वास्थ्य कार्यकर्ता

-“स्तनपान विकल्प नहीं संकल्प है” के नारे को कर रहीं साकार

-प्रसव कक्ष में नवजात को मिला जीवन का पहला टीका

बहराइच l साफ सूती कपड़े में सिर से पांव तक ढ़ककर उसने नवजात को मां के समीप लिटा दिया। उसे पता था यह पहला बच्चा है इसलिए स्तनपान को लेकर मां को संकोच होगा। उसने प्रसव कक्ष में मौजूद उसकी सास से स्तनपान में सहयोग के लिए कहा और बताया कि माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध शिशु को पोषण के साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है।

जनपद में विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। ऐसे में  बीते 27 जुलाई को चित्तौरा ब्लाक के मसीहाबाद निवासी सावित्री देवी ने सीएचसी चित्तौरा में पहले बच्चे को जन्म दिया। उनके साथ सास समय देवी भी मौजूद थीं। सास का मानना था कि माँ को तीन दिन बाद ही दूध आता है। इसीलिए उन्होने स्तनपान में सहयोग तो किया लेकिन उन्हे लगा कि माँ को दूध नहीं आ रहा है। यह बात उन्होने स्टाफ नर्स सरिता सागर को बतायी और कहा- शिशु को ऊपर से कुछ देना पड़ेगा। स्टाफ नर्स ने कहा- यह सब पुरानी मान्यताएं हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि छह माह तक शिशु को ऊपर से कुछ भी नहीं देना चाहिए ,पानी भी नहीं, इससे शिशु बीमार हो सकता है। लेकिन सिस्टर दूध आएगा तभी तो  शिशु स्तनपान करेगा, ऐसे में हमें क्या करना चाहिए ? स्टाफ नर्स ने कहा – जन्म के तुरंत बाद शिशु अधिक सक्रिय रहता है इसलिए वह बहुत तेजी से स्तनपान करना सीख लेता है। इसके लिए सबसे पहले शिशु को स्तन से ठीक प्रकार से लगाना होगा । इसके चार नियम होते हैं। शिशु की ठोडी माँ के स्तन को छू रही हो, शिशु का निचला होंठ नीचे की तरफ झुका हो और मुंह पूरा खुला हो, स्तन का अधिकतर भाग शिशु के मुंह के अंदर हो और दूध गटकने की आवाज सुनाई दे। ऐसा करने से शिशु को स्तनपान करने में कोई कठिनाई नहीं होती।  

दूर हुई भ्रांति शिशु को मिला पहला निवाला –

स्टाफ नर्स सरिता सागर ने शिशु को ठीक प्रकार से माँ के स्तन से लगाना सिखाया और बताया कि शिशु जैसे ही स्तन से लगता है वैसे ही माँ के शरीर में ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन्स निकालना शुरू हो जाता है । इसी हार्मोन्स की वजह से दूध बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और प्लेसेंटा यानि आंवल को बाहर आने में मदद मिलती है। इसके अलावा स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भविष्य में अंडाशय और स्तन कैंसर होने का खतरा भी कम रहता है । समय देवी ने कहा – अभी तो दूध बहुत कम मात्रा में आ रहा है….  हाँ यह एक शुरुआत है स्टाफ नर्स ने बताया, कहा – जैसे-जैसे शिशु की आवश्यकता बढ़ती जाएगी माँ के शरीर में दूध बनने की मात्रा बढ़ती जाएगी। बस एक बात का ध्यान रखना-शिशु दिन-रात जितनी बार स्तनपान करना चाहे यानि 24 घंटे में  8 बार से भी अधिक स्तनपान कराने में माँ का सहयोग करना ।

क्या कहते हैं आंकड़े –
लैन्सेट 2015 की रिपोर्ट के अनुसार मात्र स्तनपान के व्यवहारों को अपनाकर पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में होने वाली 13 प्रतिशत मृत्यु को कम किया जा सकता है।

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