परम भजनानंदी संत थे सुदामादास महाराज : श्रीहित अम्बरीष महाराज

भास्कर समाचार सेवा

मथुरा/वृन्दावन। वंशीवट क्षेत्र स्थित श्रीनाभापीठ सुदामाकुटी में चल रहे गोलोकवासी संत सुदामादास महाराज के 17 वें पंच दिवसीय वार्षिक पुण्यतिथि महोत्सव के अंतर्गत दूसरे दिन श्रीमद्भक्तमाल ग्रंथ की कथा श्रवण कराते हुए प्रख्यात संत श्रीहित अम्बरीष महाराज ने कहा कि भक्तमाल की कथाएं अमृतमयी होती हैं।प्रभु के प्रिय भक्तों का चरित्र श्रवण करने से श्रोताओं के हृदय में भक्ति की ज्योति उजागर होती है।
श्रीहित अम्बरीष महाराज ने कहा कि वैष्णव कुलभूषण गौ-संत सेवी साकेतवासी सुदामादास महाराज प्रभु के अनन्य भक्त व परम भजनानंदी संत थे।वह ऐसे दिव्य कृपा मूर्ति थे, जिनके दर्शन मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है।वह अत्यंत विरक्त,सहज,सरल,निस्पृह एवं परम वीतरागी थे।उन्हीं का प्रताप है कि आज श्रीनाभापीठ सुदामाकुटी आश्रम श्रीधाम वृन्दावन ही नहीं अपितु समूचे ब्रज का दैदीप्यमान ललाट बन कर शोभायमान हो रहा है।
इस अवसर पर महोत्सव के समन्वयक डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने श्रीनाभा पीठ सुदामा कुटी एवं श्रीरामानंदीय वैष्णव सेवा ट्रस्ट के द्वारा समूचे देश में चल रहे विभिन्न सेवा प्रकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि श्रीनाभाद्वाराचार्य सुतीक्ष्णदास महाराज की अध्यक्षता में चलाए जा रहे सेवा प्रकल्प संत सुदामादास महाराज की सदप्रेरणा व कृपा से ही संभव हो पा रहे हैं।साथ ही इनको और अधिक वृहद स्तर पर चलाने के लिए श्रीनाभा सुदामाकुटी एवं श्रीरामानंदीय वैष्णव सेवा ट्रस्ट पूर्ण समर्पण के साथ जुटा हुआ है।इससे पूर्व संतों के द्वारा श्रीमद्भक्तमाल ग्रंथ का सामूहिक गायन किया गया।साथ ही रासलीला का अत्यंत नयनाभिराम व चित्ताकर्षक मंचन किया गया।
महोत्सव में नाभाद्वाराचार्य सुतीक्ष्णदास महाराज, महंत अमरदास महाराज,महंत रामकृपाल दास भक्तमाली, संत रामसंजीवन दास महाराज, महंत जगन्नाथ दास शास्त्री,पंडित बिहारीलाल वशिष्ठ,हरिदासी संत किशोरीशरण मुखिया,महंत अवधेशदास महाराज,युवा साहित्यकार डॉ. राधाकांत शर्मा,निखिल शास्त्री, मोहन शर्मा, भरत शर्मा, नंदकिशोर अग्रवाल आदि की उपस्थिति विशेष रही।

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