सुल्तानपुर : झोलाछाप डाक्टरों के पास न डिग्री न रजिस्ट्रेशन, फिर भी धड़ाधड़ ऑपरेशन

सुल्तानपुर । जिले भर में मौत की दवा बांट रहे झोलाछाप डॉक्टरों की प्रतिदिन बढ़ती क्लीनिकों पर कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है । झोलाछाप डॉक्टरों का काकस मुख्यालय से लेकर कस्बे और ग्रामीण अंचल तक फैला हुआ है ।  झोलाछाप डॉक्टर मरीजों के जीवन से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं । यह सब हो पा रहा है स्वास्थ्य विभाग से मिलीभगत एवं उसकी सहभागिता से । 

स्वास्थ्य विभाग की सहभागिता से चल रहे झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से आधा दर्जन मरीज तोड़ चुके हैं दम

मरीजों को हर मर्ज ठीक करने की गारंटी और उन्हें लुभाने के लिए झोलाछाप डॉक्टर भी बड़े चिकित्सकों की तर्ज पर मरीजों से तमाम तरह की जांच करवाते हैं । झोलाछाप डॉक्टरों के इसी झांसे  में मरीज गच्चा खा जाते हैं । झोलाछाप डॉक्टरों के दलाल गांव -गांव में फैले हुए हैं । हालत यह है कि जिले व कस्बे से लेकर गांव तक हर गली ,नुक्कड़ पर दो-चार फर्जी क्लीनिक चल रहे हैं और दलालों के माध्यम से मरीज आकर लुटता रहता है और कभी कभी मौत के मुंह में समा जाता है । मरीज की हालत ज्यादा गंभीर होने पर ज्यादा कमीशन लेकर उन्हें निजी अस्पतालों को रेफर कर देते हैं  ।

 जिले में पिछले कुछ महीनों में झोलाछाप डाक्टरों के चक्कर में आकर कइयों की जान चली गई ।  गोसाईगंज के जासापारा गांव निवासी गुलाब सिंह की पत्नी दुर्गावती के पेट में दर्द था । परिवारीजन दुर्गावती को क्षेत्र के उघरपुर चौराहे पर स्थित एक झोलाछाप डॉक्टर शकील के पास पहुंचे । डॉक्टर ने दुर्गावती को दवा के साथ ही ग्लूकोज चढ़ाया । कुछ आराम दिखने पर दुर्गावती को घर भेज दिया गया । घर पहुंचते ही उनकी तबीयत बिगड़ गई । जिला अस्पताल ले जाते समय दुर्गावती की मौत हो गई । इसी तरह से दोस्तपुर के बिरईपुर भटपुरा निवासी लवकु

निवासी लवकुश की पत्नी 22 वर्ष ने पेट दर्द के इलाज के लिए राहुल नगर चौराहे के पास एक झोलाछाप डॉक्टर से दवा ली, आराम ना होने पर दोबारा उसके पास पहुंची , डॉक्टर ने तो फिर दवा दे दी । इसके बाद रीना के हाथ और पैर में फफोले पड़ गए और उसमें सिर्फ सेप्टिक हो गया । तबियत बिगड़ने के बाद जब उन्हें लेकर अस्पताल पहुंची तो चिकित्सक ने हाथ और पैर का कुछ हिस्सा काट कर उपचार किया ।

ऐसे ही बल्दीराय के अलवर गांव में स्थित मां शारदा जच्चा बच्चा केंद्र पर क्षेत्र के लोहारिया गांव की गर्भवती श्रीमती कृष्णा 23 वर्ष पुत्री तेज बहादुर का फरवरी में भर्ती करा ऑपरेशन किया गया था । ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गई । इसी तरह बल्दीराय के ही आशापुर गांव के राजाराम कोरी की पत्नी पूनम 35 वर्ष को प्रसव पीड़ा होने पर अरावली स्थित मां शारदा जच्चा बच्चा केंद्र में भर्ती कराया गया था । उसी रात में पूनम का ऑपरेशन किया गया । ऑपरेशन के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई थी ,जबकि पूनम को जिला अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई । 

इस संबंध में सीएमओ डॉ धर्मेंद्र त्रिपाठी और अपर सीएमओ डॉ राधावल्लभ ने बताया कि बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित क्लीनिक और अस्पतालों की जांच हो रही है । सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अधीक्षकों को टीम बनाकर निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं । अधीक्षकों को केस दर्ज कराने का भी आदेश दिया गया है ।

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