मेडिकल इंस्टिट्यूट पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया जुर्माना

सोहरामऊ(भास्कर)। सरस्वती मेडिकल कॉलेज पर नियमों की अनदेखी के मामले में 5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही कोर्ट ने छात्रों की परीक्षा कराने और नियमानुसार एडमिशन देने का भी आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने एमबीबीएस के 132 छात्रों की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्रों से जुर्माने की कोई राशि नहीं वसूली जाएगी। बता दे किं 2017 मे मेडिकल कालेज मे 150 छात्रो ने एमबीबीएस मे दाखिले के लिए आवेदन किया था।

इस दौरान 18 छात्रो का डीजीएमई (महीनिदेशक चिकित्सा शिक्षा) ने नियमता एमबीबीएस पढ़ाई के लिए स्वीकृति दी थी। वही शेष 132 छात्रो ने नीट इंटरेंस की परीक्षा तो क्वालीफाई की थीं,मगर तारीख निकल जाने के चलते डीजीएमई से इन छात्रो का दाखिला नही हो पाया था। लेकिन उनकी मेडिकल की पढ़ाई अनावरत जारी थी। इधर एसमीआई ने भी 132 छात्रो के एडमिशन को निरस्त करने के लिए डीजीएमई को पत्र भेजा था। इधर 132 छात्रो का मेडिकल कालेज से संबद्ध कानपुर के छात्रपति साहूजी महराज युनिवर्सिटी मे परीक्षा तो हुई लेकिन रिजल्ट घोषित नही किया गया। जिसके बाद कालेज प्रबंधन समेत सभी 132 छात्र 2018 मे सर्वोच्य न्यायलय की शरण मे पहुचे। यहां पर मामला विचाराधीन चल रहा था। एक सुनवाई के दौरान 2019 मे सर्वोच्य न्यायलय ने छात्रपति साहूजी महराज युनिवर्सिटी को प्रथम वर्ष का रिजल्ट घोछित करने के निर्देश दिए थे।कोर्ट से निर्देश मिलने के बाद युनिवर्सिटी ने 2019 मे प्रथम वर्, का छात्रो का रिजल्ट घोषित कर दिया था।

सरस्वती मेडिकल कालेज के महाप्रबंधक मनोज सिसौंदिया ने बताया कि रिजल्ट घोषित होने के बाद छात्र द्वितीय वर्ष की कक्षाएं लेते रहे,मगर कोविड-19 के चलते उनकी परीक्षाए फिर से प्रभावित हो गई। द्वितीय वर्ष के छात्रो का फरवरी21 मे परीक्षा होनी थी। लेकिन कालेज ने मामला सुप्रीम कोर्ट मे विचाराधीन होने के चलते द्वितीय वर्ष की परीक्षा नही कराई,और कोर्ट के आदेश पर परीक्षा कराने की बात कही। जिसके बाद जनवरी21 मे मेडिकल कालेज प्रबंधन व छात्रो ने दोबारा कोर्ट मे अपील की।

जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश नागेश्वर राव व रविद्र भट्ट की पीठ ने एमबीबीएस के 132 छात्रों की याचिका पर बुधवार को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में छात्रो को राहत देते हुए कहा कि छात्रों से जुर्माने की कोई राशि नहीं वसूली जाएगी,साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा 132 एमबीबीएस छात्रों को नियमित किया जाने के साथ ही छात्रपति साहूजी महराज युनिवर्सिटी को द्वितीय वर्ष की परीक्षा शीघ्र कराए जाने के निर्देश दिए है। इसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मेडिकल कालेज को मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआई) के नियमों के तहत ही परीक्षा आयोजित कराना अनिवार्य है।

सरस्वती मेडिकल कालेज को एमसीआई नियमों के उल्‍लंघन का दोषी पाया गया है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कालेज पर भी 5 करोड़ के जुर्माने की कार्यवाई की है।जिसे आठ सप्ताह मे जमा करना है।

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