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	<title>अमृत स्नान &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>छावनी प्रवेश और अमृत स्नान: महाकुंभ की नई पहचान को आगे भी बनाए रखने की अखाड़ों ने की मांग</title>
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		<pubDate>Fri, 28 Feb 2025 08:35:09 +0000</pubDate>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-484156" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/mahakumbh-new-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">तीर्थराज प्रयागराज में हुआ महाकुंभ तो समाप्त हो गया लेकिन इसकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है। आस्था के इस सबसे बड़े समागम में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई है। आस्था के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल यह महाकुंभ एक और वजह से भी चर्चा में रहा है। इस महाकुंभ में पेशवाई और शाही स्नान के नाम को बदलकर क्रमश: छावनी प्रवेश और अमृत स्नान कर दिया गया था। इन आयोजनों के नए नाम हिंदू संस्कृति से जुड़े होने पर साधु-संतों ने खुशी जाहिर की और आगे भी वे इन्हीं नामों को रखना चाहते हैं। सदियों से पेशवाई और शाही स्नान नाम चले आ रहे थे लेकिन इस महा आयोजन से पहले&nbsp;अखाड़ों की मांग पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पेशवाई और शाही स्नान का नाम बदलने का ऐतिहासिक काम किया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद व मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट हरिद्वार के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भी पेशवाई और शाही स्नान का नाम बदलने के लिए योगी आदित्यनाथ की तारीफ की है। अब कुंभ के अखाड़ों के साधु-संतों की ओर से मांग की जा रही है कि आने वाले कुंभ और अर्द्धकुंभ में भी ‘छावनी प्रवेश’ और ‘अमृत स्नान’ नामों का ही प्रयोग किया जाए। आने वाले वर्षों में देखें तो 2027 में नासिक (महाराष्ट्र) में कुंभ, 2027 में हरिद्वार (उत्तराखंड) में अर्द्धकुंभ और 2028 में उज्जैन (मध्य प्रदेश) का सिंहस्थ कुंभ होने जा रहा है। इन आयोजनों से पहले अखाड़ा परिषद का एक प्रतिनिधिमंडल तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलकर आगे भी इन्हीं नए नामों के इस्तेमाल की मांग करेगा। आने वाले कुंभ के अभिलेखों में नए नामों का इस्तेमाल किया जाए इसके लिए अखाड़ा परिषद की तरफ से कोशिश की जा रही&nbsp;<a href="https://www.jagran.com/uttar-pradesh/prayagraj-peshwai-became-cantonment-entry-in-mahakumbh-now-akharas-will-make-new-demands-in-three-states-23889456.html" target="_blank" rel="noreferrer noopener">है</a>।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जगद्गुरु वैदेही वल्लभ देवाचार्य ने मीडिया से बातचीत में सीएम योगी के फैसले को लेकर कहा कि सीएम योगी ने जो नाम दिए हैं वे सनातन की परंपरा से आते हैं और संस्कृत से युक्त शब्द हैं। उन्होंने कहा, “यही नाम आगे भी रहने चाहिए इसे लेकर विभिन्न धर्मगुरुओं ने अपनी सहमति जताई है।”</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या होते हैं अखाड़े?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कुंभ के दौरान जो शब्द सबसे अधिक सुनने में आता है वो अखाड़ा ही है। सीधे शब्दों में कहें तो अखाड़ा साधु-संतों का समूह है। अखाड़ों की शुरुआत प्राचीन काल में सनातन धर्म और संत परंपरा की रक्षा के उद्देश्य से की गई थी। माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने 8वीं शताब्दी में अखाड़ों की स्थापना की थी, ताकि सनातन धर्म की रक्षा की जा सके और संतों को एक संगठित व्यवस्था में लाया जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इनका गठन विशेष रूप से संतों और साधुओं को एकजुट करने, उन्हें आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने और धर्म प्रचार के लिए किया गया था। इन अखाड़ों में धार्मिक ज्ञान के साथ-साथ शस्त्र की भी शिक्षा दी जाती है। शुरुआत में 4 प्रमुख अखाड़े हुआ करते थे लेकिन समय के साथ इनकी संख्या बढ़कर 13 हो गई। इनमें से 7 अखाड़े शैव परंपरा के आराधक हैं, 3 अखाड़े वैष्णव संप्रदाय से जुड़े हुए हैं और 3 अखाड़े गुरु नानक देव की परंपरा से हैं जिन्हें उदासीन संप्रदाय कहा जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या होती है पेशवाई?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">कुंभ में अखाड़ों की पारंपरिक और भव्य शोभायात्रा को पेशवाई कहा जाता है, इस यात्रा के दौरान संत-महंत अपने अनुयायियों और अखाड़ों के साधुओं के साथ सजे-धजे हाथियों, घोड़ों, ऊंटों और बैंड-बाजों के साथ मेले में प्रवेश करते हैं। पेशवाई को कुंभ मेले की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है और यह अखाड़ों की परंपरा और भव्यता को दिखाती है। पेशवा एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘अगुआ या सरदार’। मराठा साम्राज्य में मराठों के प्रधानमंत्रियों की उपाधि भी ‘पेशवा’ होती थी। इस शब्द के फारसी मूल का होने के चलते ही इसे बदलने की मांग शुरू हुई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ के दौरान इसे बदलकर ‘छावनी प्रवेश’ कर दिया गया है। यहां यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि अखाड़ों के प्रवेश को छावनी प्रवेश कहा जाना दिखाता है कि किस तरह अखाड़ों में शस्त्र की परंपरा रही है। मौजूदा परिदृश्य में छावनी का इस्तेमाल सेना के क्षेत्र के लिए किया जाता है। सनातन की रक्षा के लिए अखाड़ों में भी उच्च स्तरीय शस्त्र ज्ञान देने की परंपरा रही है। वहीं, अखाड़े के कुछ प्रमुख साधु जिन्हें महामंडलेश्वर भी कहा जाता है वो सामान्यत: ‘छावनी प्रवेश’ के दौरान रथ पर सवार होते हैं जबकि अन्य साधु-संत नाचते-गाते रथ के साथ पैदल यात्रा करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैदेही वल्लभ देवाचार्य कहते हैं कि छावनी की परंपरा रामायण काल से चली आ रही है और अब इस नाम की पुनरावृत्ति कर उसी संस्कृति को वापस लाने की कोशिश की जा रही है। वल्लभ देवाचार्य ने इस पहल को सकारात्मक बताया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">क्या होता है शाही स्नान?</h3>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ में शाही स्नान एक महत्वपूर्ण और भव्य अनुष्ठान होता है। इसमें अखाड़ों के साधु-संत पारंपरिक रूप से गंगा, यमुना और विलुप्त सरस्वती नदी के संगम में स्नान करते हैं। शाही स्नान हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है और यह मान्यता है कि इस दिन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। शाही स्नान का नेतृत्व विभिन्न अखाड़ों के प्रमुख साधु, नागा साधु और महामंडलेश्वर करते हैं। यह आयोजन कुंभ मेले की सबसे खास और आकर्षक परंपराओं में से एक होता है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शाही स्नान को लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में जब राजा-महाराजा कुंभ में स्नान करते थे, तो उनके साथ संत-महात्मा और राजगुरु भी स्नान करते थे। इस परंपरा को तब से शाही स्नान कहा जाता रहा है। लेकिन अब इसका नाम भी बदलकर अमृत स्नान किया गया है। यह भी हिंदू संस्कृति को पुन: जागृत करने की कोशिश है। कुंभ के आयोजनों के स्थलों का इतिहास भी अमृत कलश से गिरी बूंदों से ही जुड़ा हुआ है, ऐसे में शाही स्नान को अमृत स्नान किया जाना पूरी तरह तर्कसंगत भी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महाकुंभ&nbsp;में इन आयोजनों के नामों को बदलने की यह पहल न केवल सनातन परंपराओं को पुनर्जीवित करने का प्रयास है बल्कि हिंदू संस्कृति की गहरी जड़ों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। ‘छावनी प्रवेश’ और ‘अमृत स्नान’ जैसे नए नामों को अपनाने से कुंभ की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान और अधिक मजबूत होगी। साधु-संतों और श्रद्धालुओं की सहमति से किए गए ये बदलाव और इन्हें आगे भी जारी रखने से सनातन धर्म की समृद्ध परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे।</p>
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		<title>सीएम योगी की अपील, संगम नोज पर जाने से बचें, नजदीकी घाट पर ही श्रद्धालु करें स्नान, यहाँ लीजिये पूरा अपडेट</title>
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		<pubDate>Wed, 29 Jan 2025 04:51:30 +0000</pubDate>
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महाकुम्भनगर ।  मौनी अमावस्या के पावन स्नान पर्व पर प्रयागराज सनातनियों का महासागर बन चुका है। संगम में पवित्र डुबकी की आस लिये महाकुम्भ नगर पहुंचे श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रमुख संतों ने अपील जारी की है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा है कि श्रद्धालुगण मां गंगा के जिस भी घाट के समीप हैं, वहीं स्नान करें, संगम नोज की ओर जाने का प्रयास न करें। स्नानार्थियों के लिए कई घाट बनाए गये हैं, जहां सुविधाजनक रूप से स्नान किया जा सकता है। उन्होंने सभी से मेला प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। सीएम योगी ने सभी से अपील की है कि वह किसी भाी प्रकार के अफवाहों पर ध्यान न दें।

संगम में स्नान का आग्रह छोड़ दें

सीएम योगी के साथ ही धर्म गुरुओं ने भी श्रद्धालुओं से अपील की है। स्वामी रामभद्राचार्य ने महाकुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की कि वे सभी संगम में स्नान का आग्रह छोड़ दें और निकटतम घाट पर स्नान करें। लोग अपने शिविर से बाहर न निकलें। अपनी और एक दूसरे की सुरक्षा करें। उन्होंने वैष्णव सम्प्रदाय के प्रमुख संत की हैसियत से सभी अखाड़ों और श्रद्धालुओं से अफवाहों से बचने का आह्वान किया।

आत्म अनुशासन का पालन करते हुए सावधानी पूर्वक स्नान करें

बाबा रामदेव ने कहा है कि करोड़ों श्रद्धालुओं के इस हुजूम को देखते हुए हमने फिलहाल केवल सांकेतिक स्नान किया है। इसके साथ ही समूचे राष्ट्र और विश्व के कल्याण की कामनाा की गई है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हम भक्ति के अतिरेक में न बहें और आत्म अनुशासन का पालन करते हुए सावधानी पूर्वक स्नान करें। वहीं जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी ने भी कहा कि हमने फिलहाल सांकेतिक स्नान किया है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने बताया कि इस वक्त 12 करोड़ से अधिक श्रद्धालु प्रयागराज में हैं। इतनी बड़ी तादाद में भीड़ को कंट्रोल करना मुश्किल होता है। हमारे साथ लाखों की संख्या में संतों का हुजूम है। हमारे लिए श्रद्धालुओं की सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है।

महाकुंभ हादसे पर प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह ने की मुख्यमंत्री योगी से बात

-प्रयागराज पहुंचे तीर्थयात्रियों और कल्पवासियों से मां गंगा का जो घाट पास हो, वहीं आस्था की डुबकी लगाने की अपील

लखनऊ। प्रयागराज महाकुंभ हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पूरी शिद्दत से राहत कार्य में जुटी हुई है। स्थिति लगभग पूरी तरीके से नियंत्रण में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री से बात करके और पूरी घटना की जानकारी ली है। केंद्र सरकार ने हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।

इस दुखद हादसे पर प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरी बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बात की है। मुख्यमंत्री मेला क्षेत्र के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है। उन्हें दिशा निर्देश दे रहे हैं। पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज पहुंचे श्रद्धालुओं से अपील की है। उन्होंने कहा कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज क्षेत्र में मां गंगा के हर घाट की हर बूंद अमृत है। इसलिए प्रयागराज पहुंच रहे तीर्थयात्री और कल्पवास कर रहे श्रद्धालु अपने नजदीक किसी भी घाट पर डुबकी लगाकर महाकुंभ का पुण्य अर्जित करें।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि संगम नोज पर वैसे ही भारी भीड़ है। इसलिए असुविधा से बचने के लिए अपने पास के गंगा घाटों पर डुबकी लगाना धर्म सम्मत है। साथ ही श्रद्धालु मेलाक्षेत्र प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। अफवाहों पर भरोसा न करें।

महाकुम्भ : भगदड़ की वजह से अखाड़ों ने रद्द किया अमृत स्नान, संतों ने घटना पर जताया दुख

महाकुम्भ में मंगलवार की रात को हुए दुखद हादसे के बाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने आज अमृत स्नान में भाग नहीं लेने का निर्णय किया है।

गौरतलब है, संगम नोज पर मंगलवार की रात करीब 2 बजे मची भगदड़ में 25 से अधिक श्रद्धालुओं की कुचलने से मौत हो गई। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं, राहत और बचाव कार्य जारी है। मेला क्षेत्र में भगदड़ संगम नोज पर अचानक भीड़ बढ़ने से मची। फिलहाल घायलों को मेला क्षेत्र के सेक्टर-2 में बने केंद्रीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मेला प्रशासन ने मृतकों की संख्या की पुष्टि नहीं की है। श्रद्धालुओं के स्नान में कोई रोक नहीं है।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा, “जो घटना हुई उससे हम बहुत दु:खी हैं। हमारे साथ हजारों श्रद्धालु थे। जनहित में हमने फैसला किया कि अखाड़े आज स्नान में भाग नहीं लेंगे। मैं लोगों से अपील करता हूं कि वे आज के बजाय वसंत पंचमी पर स्नान के लिए आएं। यह घटना इसलिए हुई क्योंकि श्रद्धालु संगम घाट पहुंचना चाहते थे, इसके बजाय उन्हें जहां भी पवित्र गंगा दिखे, वहीं डुबकी लगा लेनी चाहिए। “

जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज ने संगम में हुए हादसे पर दुख जताते हुए श्रद्वालुओं से अपने निकट की नदियों में मौनी अमावस्या का स्नान करने की अपील की है। उन्होंने अखाड़ों से अमृत स्नान निरस्त करने की अपील भी की है।

श्री शंभु पंच अग्नि अखाड़ा के महामण्डलेश्वर स्वामी रामकृष्ण नंद महाराज ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि, मृत आत्माओं को परमात्मा शांति दे। और उनके वारिसों को सांत्वाना दे। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपने निकट की नदियों में स्नान करने की भी अपील की है।

अखाड़ा परिषद के सचिव श्रीमहंत हरि गिरी जी महाराज ने हादसे पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने श्रद्धालुओं से संयम बरतने और अपने निकट की ​नदियों में मौनी अमावस्या का स्नान करने की अपील की है।

साध्वी निरंजन ज्योति ने महाकुंभ क्षेत्र में हुई भगदड़ की घटना पर कहा, “यह दुखद घटना है। जो भी हुआ वो ठीक नहीं हुआ। अखाड़ा परिषद ने जनहित को ध्यान में रखते हुए अमृत स्नान को रद्द करने का फैसला लिया है।“

आध्यात्मिक गुरु एवं प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा, “मौनी अमावस्या का स्नान चल रहा है। आज मैं संगम घाट पर नहीं गया क्योंकि वहां भीड़ बहुत ज़्यादा है। पूरी गंगा और यमुना की धारा में ’अमृत’ बह रहा है। अगर आप कहीं भी गंगा या यमुना में स्नान करेंगे तो ’अमृत’ आपको प्राप्त होगा। ये आवश्यक नहीं है कि संगम में ही आपको डुबकी लगानी है।“

प्रयागराज महाकुंभ में हुई भगदड़ पर सपा ने जताया दुख

महाकुम्भनगर। मौनी अमावस्या पर्व पर प्रयागराज महाकुम्भ में हुई भगदड़ पर समाजवादी पार्टी ने दु:ख जताया है। सपा ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट एक्स पर लिखा, &#8220;भगदड़ अत्यंत दुखद और श्रद्धालुओं के हताहत होने की खबर हृदय विदारक है। ईश्वर मृतकों की आत्मा को शांति दे और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना। शोकाकुल परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। सरकार से राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाने की अपील।&#8221;

अयोध्या से सांसद व सपा के राष्ट्रीय महासचिव अवधेश प्रसाद ने भी घटना पर दु:ख जताया है।

महाकुंभ में मौनी अमावस्या के मौके पर मची भगदड़ के बाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने लोगों से संयम बनाए रखने का अनुरोध किया है।

निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने घटना पर दु:ख जताते हुए अन्य घाटाें पर स्नान क अपील की है।

अखिल भारतीय संत समिति एवं गंगा महासभा के महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि प्रशासन के निर्देशन का अनुपालन करें, व्यवस्था बनाने में सहयोग करें, किसी भी अफवाह पर ध्यान ना दें अफवाहों पर ध्यान नहीं दें। सभी श्रद्धालु जहां साथ मिले उसी जगह स्नान कर लें। अत्यधिक, अपरिमित भीड़ है। पूरे संगम क्षेत्र में हर घाट पर स्नान की व्यवस्था है। वहीं महाकुम्भ में भगदड़ होने से अखाड़ों ने अमृत स्नान रद्द कर दिया है।

अखिलेश यादव ने की श्रद्धालुओं से अपील, शांतिपूर्वक अपनी तीर्थयात्रा संपन्न करें

महाकुम्भनग । उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महाकुंभ में हादसे में श्रद्धालुओं के हताहत होने पर दु:ख जताया है। अखिलेश यादव ने सरकार से अपील की है कि गंभीर रूप से घायलों को एअर एंबुलेंस की मदद से निकटतम सर्वश्रेष्ठ हॉस्पिटलों तक पहुंचाकर तुरंत चिकित्सा व्यवस्था की जाए। मृतकों के शवों को चिन्हित करके उनके परिजनों को सौंपने और उन्हें उनके निवास स्थान तक भेजने का प्रबंध किया जाए। ⁠जो लोग बिछड़ गये हैं, उन्हें मिलाने के लिए त्वरित प्रयास किये जाएं।

सपा अध्यक्ष ने कहा कि हेलीकाप्टर का सदुपयोग करते हुए निगरानी बढ़ाई जाए। सतयुग से चली आ रही ‘शाही स्नान’ की अखण्ड-अमृत परंपरा को निरंतर रखते हुए, राहत कार्यों के समानांतर सुरक्षित प्रबंधन के बीच ‘मौनी अमावस्या के शाही स्नान’ को संपन्न कराने की व्यवस्था की जाए। अखिलेश यादव ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि इस कठिन समय में संयम और धैर्य से काम लें और शांतिपूर्वक अपनी तीर्थयात्रा संपन्न करें। सरकार आज की घटना से सबक लेते हुए श्रद्धालुओं के रुकने, ठहरने, भोजन-पानी व अन्य सुविधाओं के लिए अतिरिक्त प्रबंध करें।

प्रयागराज संगम तट पर भगदड़ के बाद काशी में अफसरों ने भीड़ प्रबंधन में झोंकी ताकत

मौनी अमावस्या पर्व के अमृत स्नान के पूर्व ​ही प्रयागराज महाकुम्भ में संगम तट पर भीड़ के दबाब से हुए भगदड़ को देख वाराणसी जिला प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मंगलवार आधी रात के बाद से तड़के मौनी अमावस्या स्नान के शुरू होने के पहले ही अफसर भारी फोर्स के साथ गंगाघाटों, दशाश्वमेध, गोदौलिया, बांसफाटक, चौक, ज्ञानवापी क्रासिंग और काशी विश्वनाथ धाम में डट गए। पूरी रात अफसरों ने भीड़ प्रबंधन करने के साथ श्रद्धालुओं के साथ संवाद भी बनाए रखा।

उधर, महाकुम्भ के पलट प्रवाह को देख 30 जनवरी तक काशी में आने वाले श्रद्धालुओं की अत्यधिक संख्या को देख यातायात विभाग ने एडवाइजरी जारी की है। इसमें भदऊ चुंगी से गोलगड्डा, कैण्ट रेलवे स्टेशन, लहरतारा, मण्डुवाडीह, भिखारीपुर, सुन्दरपुर होकर जाने वाले मार्ग का प्रयोग और इसी मार्ग से श्रद्धालुओं को लौटाया जा रहा है। शहर के अन्दर के हिस्सों में (भेलूपुर, चेतगंज, कोतवाली, लक्सा, सिगरा थाना क्षेत्र) ऑटो व ई-रिक्शा के आवागमन पर पूर्णत: प्रतिबन्ध लगाया गया है। जिला प्रशासन ने काशीवासियों से अपील है कि शहर के अन्दर (भेलूपुर, चेतगंज, कोतवाली, लक्सा, सिगरा थाना क्षेत्र) अति आवश्यक होने पर ही अपने चार पहिया वाहनों का उपयोग करें, जिससे यातायात व्यवस्थित रूप से चलाया जा सके। आपातकालीन सेवाओं से सम्बन्धित वाहनों को प्रतिबन्धों से बाहर रखा गया है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों से निवेदन किया गया है कि यातायात पुलिस की ओर से जारी ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन कर सहयोग करें।]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>प्रयागराज कुम्भ में दु:खद हादसा, कुम्भ के वो दो हादसे जो बढ़ा देते हैं पीड़ा, जो भुलाएं नहीं भूलते</title>
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		<pubDate>Wed, 29 Jan 2025 04:42:56 +0000</pubDate>
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<p class="wp-block-paragraph">महाकुम्भ नगर, । प्रयागराज में चल रहे महाकुम्भ में मंगलवार की रात को अमंगल हो गया। रात दो बजे के लगभग संगम में स्नान के दौरान मची भगदड़ में 25 से अधिक श्रद्धालुओं के मरने की खबर है। कई श्रद्धालु घायल हैं। घायलों का इलाज महाकुम्भ नगर के केंद्रीय अस्पताल में चल रहा है। गौरतलब है, मेला प्रशासन ने अभी मरने वालों की संख्या की पुष्टि नहीं की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मौनी अमावस्या स्नान के लिये उमड़ा श्रद्धालुओं का रेला</p>



<p class="wp-block-paragraph">144 वर्षों बाद आयोजित हो रहे इस महाकुम्भ का साक्षी बनने के लिए लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। मौनी अमावस्या के दिन दूसरे अमृत स्नान के लिये मंगलवार को श्रद्धालुओं का रेला उमड़ा। मेला प्रशासन के पुख्ता प्रबन्ध के बावजूद मंगलवार की रात करीब दो बजे भगदड़ मचने से दुःखद घटना घट गई। प्रयागराज कुम्भ की ऐसी घटनाएं है, जो शायद कभी दिलोदिमाग से मिटती नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वो दो हादसे जो भुलाएं नहीं भूलते</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रयागराज के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां पर हर साल आयोजित होने वाले माघ मेले और छह व बारह साल पर लगने वाले कुम्भ मेला में लाखों-करोड़ों की भीड़ एक स्थान पर जुटने के बावजूद कोई दुःखद घटना नहीं घटती, इसके पीछे भगवान और गंगा मैया की कृपा है। मगर यह भी सच है कि प्रयागराज के दो कुम्भ की तमाम सुखद यादों के बीच भगदड़ की दो घटनाएं ऐसी रहीं जिन्होंने बहुत से परिवारों को जीवन भर का गम दे दिया था। घटना 1954 और 2013 में हुए कुंभ मेलों की है, जो बहुत ही दर्दनाक थी। इन दोनों घटनाओं में सैकड़ों लोगों ने जान गंवाई थी। इस हादसे ने शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">1954 का कुम्भ मेला छोड़ गया दुखद यादें</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वतन्त्र भारत में 1954 में कुम्भ मेला हुआ था। 3 फरवरी की तारीख थी, मौनी अमावस्या का दिन था। इस दिन त्रिवेणी बांध पर भगदड़ मच गई, जिसके परिणामस्वरूप सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि इस घटना के समय वहां पंडित जवाहरलाल नेहरू भी उपस्थित थे और एक हाथी के नियंत्रण से बाहर होने के कारण भगदड़ का माहौल बना। जिसमें करीब 800 लोगों की जान चली गई थी और करीब 2000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे के बाद पं. नेहरू ने न्यायमूर्ति कमलाकांत वर्मा की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई। इस घटना को प्रशासन ने छिपाने का पूरा प्रयास किया था किंतु एक प्रेस फोटोग्राफर ने शासन के इस मंसूबे को पूरा नहीं होने दिया। उस समय एक बड़े अखबार में छायाकार रहे एनएन मुखर्जी के पास ही थी जो दुर्घटनास्थल पर मौजूद थे और अपनी जान की परवाह न कर छायांकन किया था हालांकि उनके इस काम से तत्कालीन प्रदेश सरकार काफी नाराज थी। दुर्घटना व बाद में शवों को जलाए जाने की सचित्र खबर छपने से सरकार की काफी किरकिरी हो रही थी जिससे मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत छायाकार एनएन मुखर्जी से काफी नाराज थे। हादसे के बाद पंडित नेहरू ने नेताओं और अतिविशिष्ट लोगों से स्नान पर्वों पर कुम्भ न जाने की अपील की थी। उस घटना के बाद से कुम्भ में कभी भगदड़ नहीं मची थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2013 में स्टेशन पर भगदड़ में 36 लोगों की मौत ऐसी ही एक दुखद दुर्घटना 2013 भी हुई थी। कुंभ मेला के दौरान 10 फरवरी दिन रविवार को मौनी अमावस्या का स्नान था। स्नान-दान करने के बाद श्रद्धालु अपने घर जाने के लिए रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर पहुंच रहे थे। प्रयागराज जंक्शन (इलाहाबाद) पर बड़ी संख्या में यात्री पहुंच चुके थे। सभी प्लेटफार्म ठसाठस भरे हुए थे। ओवरब्रिजों पर भी भारी भीड़ थी। शाम के सात बज रहे थे तभी प्लेटफार्म छह की ओर जाने वाली फुट ओवरब्रिज की सीढिय़ों पर अचानक भगदड़ मची। धक्का-मुक्की में कई लोग ओवरब्रिज से नीचे जा गिरे जबकि कई लोगों को भीड़ ने कुचल दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस हादसे की वजह एक अनाउंसमेंट बनी थी। दरअसल, यात्री संगम से वापस घर लौट रहे थे। सभी प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर थे। जिस प्लेटफॉर्म में ट्रेन आनी थी वहां सभी इंतजार कर रहे थे। लेकिन अचानक अनाउंसमेंट हुई कि ट्रेन दूससे प्लेटफॉर्म पर खड़ी है और खुलने वाली है। फिर क्या था, लोग दूसरे प्लेटफॉर्म की ओर दौड़े। फुट ओवरब्रिज से होते हुए लोग जा रहे थे। इतने में ब्रिज पर लोड इतना ज्यादा बढ़ गया कि पुल नीचे गिर गया और 36 लोग इस हादसे में मारे गए। जबकि 50 गंभीर रूप से घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दुर्घटना में मरने वालों में उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि के यात्री थे। रेलवे ने उस हादसे से सबक लेकर भीड़ प्रबंधन पर काफी ध्यान दिया है।</p>
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