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	<title>अयोध्या केस &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>तीन सदस्यीय मध्यस्थ 8 हफ्ते में सुझाएंगे अयोध्या मामले का समाधान, जानें, कौन-कौन हैं शामिल</title>
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		<pubDate>Fri, 08 Mar 2019 06:58:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर मध्यस्थता का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता के लिए कोई कानूनी अड़चन नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एस एम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थों की नियुक्ति का आदेश दिया। बाकी दो मध्यस्थ श्री श्री रविशंकर और वकील ... <a title="तीन सदस्यीय मध्यस्थ 8 हफ्ते में सुझाएंगे अयोध्या मामले का समाधान, जानें, कौन-कौन हैं शामिल" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/a-three-member-intermediary-will-recommend-in-ayodhya-case-8-weeks/" aria-label="Read more about तीन सदस्यीय मध्यस्थ 8 हफ्ते में सुझाएंगे अयोध्या मामले का समाधान, जानें, कौन-कौन हैं शामिल">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले पर मध्यस्थता का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता के लिए कोई कानूनी अड़चन नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एस एम कलीफुल्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मध्यस्थों की नियुक्ति का आदेश दिया। बाकी दो मध्यस्थ श्री श्री रविशंकर और वकील श्रीराम पांचू होंगे।</p>
<p><img decoding="async" src="https://c.ndtvimg.com/2019-03/bcjm29p_ayodhya-mediators_625x300_08_March_19.jpg" alt="Ayodhya Dispute : à¤¯à¥ à¤¹à¥à¤ à¤µà¥ à¤¤à¥à¤¨ à¤®à¤§à¥à¤¯à¤¸à¥à¤¥, à¤à¥ à¤¸à¥à¤²à¤à¤¾à¤à¤à¤à¥ à¤à¤¯à¥à¤§à¥à¤¯à¤¾ à¤®à¥à¤ à¤®à¤à¤¦à¤¿à¤°-à¤®à¤¸à¥à¤à¤¿à¤¦ à¤µà¤¿à¤µà¤¾à¤¦, à¤à¤¾à¤¨à¤¿à¤ à¤à¤¨à¤à¥ à¤¬à¤¾à¤°à¥ à¤®à¥à¤ à¤¸à¤¬-à¤à¥à¤" /></p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस एस एम कलीफुल्ला अध्यक्ष, श्री श्री रविशंकर और वकील श्रीराम पांचू समिति के सदस्य</strong></p>
<p>कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता की प्रक्रिया गुप्त रहेगी। कोर्ट ने मध्यस्थता की प्रक्रिया 8 हफ्ते में पूरी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने मध्यस्थता की स्टेटस रिपोर्ट 4 हफ़्ते में दाखिल करने का निर्देश दिया। पिछले 6 मार्च को कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="en" dir="ltr">Respecting everyone, turning dreams to reality, ending long-standing conflicts happily and maintaining harmony in society &#8211; we must all move together towards these goals.<a href="https://twitter.com/hashtag/ayodhyamediation?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#ayodhyamediation</a></p>
<p>&mdash; Gurudev Sri Sri Ravi Shankar (@Gurudev) <a href="https://twitter.com/Gurudev/status/1103905207832829953?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">March 8, 2019</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से मध्यस्थता का विरोध किया गया था। हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि था हिंदू इस मामले को भावनात्मक और धार्मिक आधार पर देखते हैं। जबकि मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता का समर्थन किया था। निर्मोही अखाड़े ने मध्यस्थ के लिए जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस जीएस सिंघवी के नाम का प्रस्ताव रखा था। वहीं स्वामी चक्रपाणि के नेतृत्व वाले हिंदू महासभा ने जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एके पटनायक का मध्यस्थय के रुप में नाम सुझाया था। हिंदू पक्ष के वकील ने बाबर द्वारा मंदिर को गिराने का जिक्र किया था। इस पर जस्टिस एसए बोब्डे ने कहा कि इतिहास हमने भी पढ़ा है। इतिहास पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। हम जो भी कर सकते हैं वो वर्तमान के बारे में कर सकते हैं।</p>
<p>सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया था कि मध्यस्थता की कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग नहीं की जाए। तब मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने कहा था कि अगर मध्यस्थता की मीडिया रिपोर्टिंग की जाए तो उस पर अवमानना का मामला चलाया जाए।</p>
<p><strong>जानें इनके बारे में&#8230;</strong></p>
<p><strong>जस्टिस कलीफुल्ला :</strong> स्वर्गीय जस्टिस फकीर मोहम्मद के बेटे हैं. अप्रैल 2012 में वह सुप्रीम कोर्ट में जज बने थे। 2016 में वह सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए. सुप्रीम कोर्ट में जज बनने से पहले वहजम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट में कार्यरत रहे. जहां वह कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बने थे। पहली बार उन्होंने दो मार्च 2000 को न्यापालिका में बतौर जज कदम रखा, जब मद्रास हाईकोर्ट में स्थायी न्यायाधीश के तौर पर तैनाती मिली. जस्टिस कलीफुल्ला तमिलनाडु के शिवगंगा जिले के कराईकुडी के रहने वाले हैं। उनका जन्म 23 जुलाई 1951 को हुआ. 20 अगस्त 1975 से उन्होंने बतौर वकील प्रैक्टिस शुरू की थी. देश के पूर्व चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की उस पीठ का सदस्य रह चुके हैं, जिसने बीसीसीआई में सुधारों के लिए अहम आदेश जारी किए थे.</p>
<p><strong>श्री श्री रविशंकरः</strong> रविशंकर धर्म और अध्यात्म के प्रख्यात गुरु हैं. दुनिया भर में उनकी पहचान है. अनुयायी श्री श्री रविशंकर के नाम से अनुयायी पुकारते हैं. वे ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संस्थापक हैं. रविशंकर का जन्म तमिलनाडु में 13 मई 1956 को हुआ. उनके पिता का नाम वेंकट रत्न था जो भाषाविद थे. आदि शंकराचार्य से प्रेरणा लेते हुए पिता ने उनका नाम रविशंकर रखा. रविशंकर पहले महर्षि योगी के शिष्य थे. उन्होंने तब अपने नाम के आगे श्रीश्री लगाना शुरू किया, जब प्रख्यात सितार वादक रविशंकर ने आरोप लगाया था कि वे उनके नाम की प्रसिद्धि का लाभ उठा रहे हैं. 1982 में रविशंकर ने ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन की स्थापना की. सुदर्शन क्रिया ऑर्ट ऑफ लिविंग कोर्स का आधार है.</p>
<p><strong>श्रीराम पंचू</strong> : श्रीराम पंचू चेन्नई के रहने वाले हैं. वह मद्रास हाई कोर्ट के वकील होने के साथ मशहूर मध्यस्थ यानी मीडिएटर हैं. कई केस में बतौर मीडिएटर और आर्बिट्रेटर वह सुलह-समझौते करवा चुके हैं. वह मीडिएशन चैंबर्स के फाउंडर हैं. यह फाउंडेशन मध्यस्थता कराने के लिए जाना जाता है. वह इंडियन मीडिएटर्स एसोसिएशन के प्रेसीडेंट होने के साथ ही इंटरनेशनल मीडिएशन इंस्टीट्यूट(आईएमआई) के डायरेक्टर हैं. उन्होंने 2005 में उन्होंने भारत का पहला मध्यस्थता केंद्र स्थापित किया. उन्होंने मध्यस्थता को भारत की कानूनी प्रणाली का हिस्सा बनाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने कॉमर्शियल, कारपोरेट और कांट्रैक्चुअल झगड़ों का निपटारा किया. वह मध्यस्थता पर Mediation: Practice &amp; Law सहित दो किताबें लिख चुके हैं.</p>
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		<title>अयोध्या राममंदिर मामला : मध्यस्थता पर दलीलों में राम की जमीन, जानिए SC  ने क्या-क्या कहा&#8230;</title>
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		<pubDate>Wed, 06 Mar 2019 07:53:12 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[निर्मोही अखाड़े को छोड़कर हिंदू पक्ष ने मध्यस्थता का विरोध किया, मुस्लिम पक्षकार राजी नई दिल्ली । अयोध्या मामले में मध्यस्थता के मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से मध्यस्थता का विरोध किया गया। हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया ... <a title="अयोध्या राममंदिर मामला : मध्यस्थता पर दलीलों में राम की जमीन, जानिए SC  ने क्या-क्या कहा&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-reserves-order-on-the-issue-of-referring-ayodhya-case-for-mediation-news/" aria-label="Read more about अयोध्या राममंदिर मामला : मध्यस्थता पर दलीलों में राम की जमीन, जानिए SC  ने क्या-क्या कहा&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>निर्मोही अखाड़े को छोड़कर हिंदू पक्ष ने मध्यस्थता का विरोध किया, मुस्लिम पक्षकार राजी </strong></p>
<p>नई दिल्ली । अयोध्या मामले में मध्यस्थता के मामले पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से मध्यस्थता का विरोध किया गया। हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया कि हिंदू इस मामले को भावनात्मक और धार्मिक आधार पर देखते हैं। जबकि मुस्लिम पक्ष ने मध्यस्थता का समर्थन किया। हिंदू पक्ष के वकील ने बाबर द्वारा मंदिर को गिराने का जिक्र किया। इस पर जस्टिस एसए बोब्डे ने कहा कि इतिहास हमने भी पढ़ा है। इतिहास पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है।</p>
<p>हम जो भी कर सकते हैं वो वर्तमान के बारे में कर सकते हैं। हिंदू पक्ष में केवल निर्मोही अखाड़े ने मध्यस्थता का समर्थन किया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुझाव दिया कि मध्यस्थता की कार्यवाही की मीडिया रिपोर्टिंग नहीं की जाए। तब मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने कहा कि अगर मध्यस्थता की मीडिया रिपोर्टिंग की जाए तो उस पर अवमानना का मामला चलाया जाए। पिछले 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 8 सुनवाई 8 हफ़्ते के लिए टाल दी थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को दस्तावेजों का अनुवाद देखने के लिए 6 हफ्ते का वक्त दिया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की रिपोर्ट में बताया गया था कि अभी भी कोर्ट के ऑफिसियल ट्रांसलेटर द्वारा हजारों पेज का अनुवाद किया जाना बाकी है। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सभी पक्षकारों से पूछा था कि क्या वो उत्तरप्रदेश सरकार और दूसरे पक्षकारों की ओर से जमा कराई गई ट्रांसलेटेड कॉपी को स्वीकारने के लिए तैयार है?</p>
<p>चीफ जस्टिस ने कहा था कि जब सब पक्षकार दस्तावेजों के सही अनुवाद को लेकर निश्चिंत हो जाएंगे, तब हम सुनवाई शुरू कर सकते हैं। एक बार जब हम अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू कर देंगे, हम नहीं चाहते कि बाद में कोई भी पक्षकार अनुवाद में खामी का हवाला देकर सुनवाई टालने की मांग करे। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा था कि हम उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से दी गई ट्रांसलेटेड कॉपी का क्रास चेक करना चाहते हैं। रामलला की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा था कि इसके लिए अवसर पहले ही दिया गया था उस समय कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई थी। अब उसकी समय सीमा खत्म हो चुकी है। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि यही तो हम कहना चाह रहे हैं। अगर पक्षकार सहमत हैं तो हम आगे की सुनवाई शुरू कर सकते हैं। चीफ जस्टिस ने मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वकील राजीव धवन से पूछा था कि दस्तावेजों के अनुवाद को परखने में कितना वक्त लेंगे। तब राजीव धवन ने कहा कि 8 से 12 हफ्ते का वक्त लगेगा।</p>
<p>सुनवाई के दौरान जस्टिस बोब्डे ने मध्यस्थ बनने का ऑफर दिया था। उन्होंने कहा कि ये कोई निजी संपत्ति को लेकर विवाद नहीं है, मामला पूजा-अर्चना के अधिकार से जुड़ा है। अगर समझौते के जरिए 1 फीसदी भी इस मामले के सुलझने का चांस हो, तो इसकी कोशिश होनी चाहिए। इस संविधान बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोब्डे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। अयोध्या मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अविवादित जमीन से यथास्थिति का आदेश वापस लेने की मांग की है। केंद्र सरकार ने 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था और सिर्फ 0.313 एकड़ जमीन पर विवाद है। बाकी जमीन को रिलीज करने के लिए याचिका दायर की गई है।</p>
<p>इस्माइल फारुकी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा है कि जो जमीन बचेगी उसे उसके सही मालिक को वापस करने के लिए केंद्र सरकार बाध्य है। इसमें 40 एकड़ जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है। हम चाहते हैं कि इसे उन्हें वापस कर दी जाए साथ ही वापस करते समय यह देखा जा सकता है कि विवादित भूमि तक पहुंच का रास्ता बना रहे। उसके अलावा जमीन वापस कर दी जाए। केंद्र सरकार ने कहा है कि जमीन वापस करते समय यह देखा जा सकता है कि विवादित भूमि तक पहुंच का रास्ता बना रहे। उसके अलावा जमीन वापस कर दी जाए । केंद्र सरकार ने याचिका में कहा है कि 2003 में जब सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर में शिलापूजन की अनुमति नहीं दी थी तो विवादित भूमि और अधिगृहित की गई 67 एकड़ की जमीन पर यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने 1993 में इस जमीन का अधिग्रहण किया था। इस्माइल फारुकी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा है कि जो जमीन बचेगी उसे उसके सही मालिक को वापस करने के लिए केंद्र सरकार बाध्य है।</p>
<p>इसमें 40 एकड़ जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है। भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली अखिल भारतीय हिन्दू महासभा और 7 रामभक्तों की याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट 26 फरवरी को ही सुनवाई करेगा। 27 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले से अयोध्या मसले पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस्माइल फारुकी का मस्जिद संबंधी जजमेंट अधिग्रहण से जुड़ा हुआ था। इसलिए इस मसले को बड़ी बेंच को नहीं भेजा जाएगा। जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला सुनाया था जो उनके और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का फैसला था। जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने अपने फैसले में कहा कि इस्माईल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा जाए।</p>
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		<title>क्या इस लिए अयोध्या मामले से अलग हुए जस्टिस यूयू ललित&#8230;</title>
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		<pubDate>Thu, 10 Jan 2019 07:28:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि हम इस केस की सुनवाई से हटेंगे नई दिल्ली। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने अयोध्या मसले पर सुनवाई शुरू कर दी है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने साफ कर दिया कि आज केस की सुनवाई शुरू नहीं हो रही ... <a title="क्या इस लिए अयोध्या मामले से अलग हुए जस्टिस यूयू ललित&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/ayodhya-issue-constitution-bench-will-decide-the-schedule-for-hearing-today-news/" aria-label="Read more about क्या इस लिए अयोध्या मामले से अलग हुए जस्टिस यूयू ललित&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि हम इस केस की सुनवाई से हटेंगे</strong></p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://static.langimg.com/thumb/msid-38187202,width-400,resizemode-4/u-u-lalit.jpg" alt="Image result for à¤à¤¸à¥à¤à¤¿à¤¸ à¤¯à¥à¤¯à¥ à¤²à¤²à¤¿à¤¤" width="829" height="620" /></p>
<p>नई दिल्ली। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने अयोध्या मसले पर सुनवाई शुरू कर दी है। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने साफ कर दिया कि आज केस की सुनवाई शुरू नहीं हो रही है बल्कि आज सुनवाई का शेड्यूल बताएंगे।</p>
<p>चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि संविधान बेंच का गठन न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक फैसला है। मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि सुनवाई कर रही बेंच के सदस्य जस्टिस यूयू ललित बाबरी विध्वंस मामले में कल्याण सिंह के लिए पेश हो चुके हैं।</p>
<p>राजीव धवन ने जस्टिस यूयू ललित के बेंच का सदस्य होने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इस पर हिन्दू पक्ष की ओर से हरीश साल्वे ने कहा कि जस्टिस यूयू ललित को सुनवाई से हटने की जरूरत नहीं है।</p>
<p>तब जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि हम इस केस की सुनवाई से हटेंगे। हिंदू पक्ष की ओर से हरीश साल्वे, तुषार मेहता, रंजीत कुमार, सीएस वैद्यनाथन और पीएस नरसिम्हा शामिल हैं जबकि मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन, राजू रामचंद्रन, वृंदा ग्रोवर शामिल हैं। इस बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा, जस्टिस एसए बोब्डे. जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल हैं। इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आसपास जबरदस्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इस बेंच में पहले केस की सुनवाई कर रही बेंच का कोई भी सदस्य शामिल नहीं है।</p>
<p>तत्कालीन चीफ जस्टिस के नेतृत्व में जो बाकी जज थे उनमें जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल थे। लेकिन इस नयी बेंच में कोई शामिल नहीं है। 27 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले से अयोध्या मसले पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस्माइल फारुकी का मस्जिद संबंधी जजमेंट अधिग्रहण से जुड़ा हुआ था। इसलिए इस मसले को बड़ी बेंच को नहीं भेजा जाएगा। जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला सुनाया था जो उनके और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का फैसला था। जस्टिस एस अब्दुल नजीर ने अपने फैसले में कहा था कि इस्माईल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा जाए।</p>
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		<title>भागवत के बाद अब योगी शुरू करेंगे राम मंदिर की तैयारी..</title>
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		<pubDate>Fri, 19 Oct 2018 16:37:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[&#160; गोरखपुर :  राम मंदिर निर्माण एक बड़ा मुद्दा होता जा रहा है जिस पर सियासत भी गर्म आ चुकी है  बीजेपी की ओर से राम मंदिर निर्माण की बात ऐसे समय में की जा रही है जब कुछ दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस पर सुनवाई शुरू होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है ... <a title="भागवत के बाद अब योगी शुरू करेंगे राम मंदिर की तैयारी.." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/prepare-for-the-construction-of-ram-temple-says-up-cm-yogi-adityanath-news/" aria-label="Read more about भागवत के बाद अब योगी शुरू करेंगे राम मंदिर की तैयारी..">Read more</a>]]></description>
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<p><strong>गोरखपुर</strong> :  राम मंदिर निर्माण एक बड़ा मुद्दा होता जा रहा है जिस पर सियासत भी गर्म आ चुकी है  बीजेपी की ओर से राम मंदिर निर्माण की बात ऐसे समय में की जा रही है जब कुछ दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस पर सुनवाई शुरू होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मामला जमीन विवाद के तौर पर ही निपटाया जाएगा। बताते चले  इस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अब राम मंदिर बनाने की तैयारियां शुरू कर देनी चाहिए। एक दिन पहले RSS चीफ ने कहा था कि राम मंदिर बनाने के लिए मोदी सरकार को कानून बनाना चाहिए। शुक्रवार को गोरखपुर में एक कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम के बगैर जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त नहीं हो सकता है।</p>
<p>सीएम ने कहा, &#8216;मैं आप सबसे आग्रह करूंगा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की लीलाओं के साथ-साथ हम उनके आदर्शों को जीवन में उतारें। समाज में इसका प्रचार-प्रसार करें। रामलीलाओं की भव्यता के साथ-साथ समाज के इस भव्य मंदिर को भी उसी रूप में बनाने की तैयारी हमें करनी चाहिए जिस प्रकार से भव्य मंदिर के रूप में राम की लीलाओं का आयोजन हम करते हैं।&#8217;</p>
<p>आपको बता दें कि विजयादशमी से एक दिन पहले अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर बनाने का आह्वान किया था। भागवत ने कहा कि मंदिर पर चल रही राजनीति को खत्म कर इसे तुरंत बनाना चाहिए। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत हो तो सरकार इसके लिए कानून बनाए। 2019 के लोकसभा चुनावों में अब कुछ ही महीने बचे हैं, ऐसे में मंदिर की मांग जोर पकड़ने के राजनीतिक निहातार्थ भी निकाले जा रहे हैं।</p>
<p>मोहन भागवत ने राम मंदिर बनाने की मांग उठाते हुए परोक्ष रूप से मोदी सरकार को भी नसीहत दी है। मोहन भागवत ने कहा, &#8216;भगवान राम किसी एक संप्रदाय के नहीं हैं। वह भारत के प्रतीक हैं। सरकार किसी भी तरह से कानून लाए। लोग यह पूछ रहे हैं कि उनके द्वारा चुनी गई सरकार है फिर भी राम मंदिर क्यों नहीं बन रहा।&#8217;</p>
<p><strong>29 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई</strong><br />
खास बात यह है कि बीजेपी की ओर से राम मंदिर निर्माण की बात ऐसे समय में की जा रही है जब कुछ दिन बाद ही सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या केस पर सुनवाई शुरू होने वाली है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मामला जमीन विवाद के तौर पर ही निपटाया जाएगा। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनवाई 29 अक्टूबर से शुरू होगी। मुख्य पक्षकार राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और हिंदू महासभा हैं। इसके अलावा अन्य कई याची जैसे सुब्रमण्यन स्वामी आदि की अर्जी है जिन्होंने पूजा के अधिकार की मांग की है, लेकिन सबसे पहले चार मुख्य पक्षकारों की ओर से दलीलें पेश की जाएंगी।</p>
<p><strong>क्या है अयोध्या विवाद</strong><br />
6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों में बीच का हिस्सा हिंदुओं का होगा, जहां फिलहाल रामलला की मूर्ति है। निर्मोही अखाड़े को दूसरा हिस्सा दिया गया, इसी में सीता रसोई और राम चबूतरा शामिल है। बाकी एक तिहाई हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया गया। इस फैसले को तमाम पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा यथास्थिति बहाल कर दी थी।</p>
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