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	<title>आईपीएस &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>यूपी : 29 आईपीएस एवं 14 पीपीएस समेत 43 पुुलिस अधिकारियों का तबादले..</title>
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		<pubDate>Wed, 28 Nov 2018 04:31:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 29 और 14 प्रान्तीय पुलिस सेवा(पीपीएस) समेत 43 अधिकारियों का तबादला कर दिया। इन तबादलों में 14 जिलों के पुलिस कप्तान शामिल हैं । पुलिस प्रवक्ता के अनुसार मंगलवार देर रात किए गये तबादलों में ललितपुर के पुलिस ... <a title="यूपी : 29 आईपीएस एवं 14 पीपीएस समेत 43 पुुलिस अधिकारियों का तबादले.." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/up-43-police-officers-including-29-ips-and-14-pps-are-transferred-news/" aria-label="Read more about यूपी : 29 आईपीएस एवं 14 पीपीएस समेत 43 पुुलिस अधिकारियों का तबादले..">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span class="storydetails">लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के 29 और 14 प्रान्तीय पुलिस सेवा(पीपीएस) समेत 43 अधिकारियों का तबादला कर दिया। इन तबादलों में 14 जिलों के पुलिस कप्तान शामिल हैं ।<br />
पुलिस प्रवक्ता के अनुसार मंगलवार देर रात किए गये तबादलों में ललितपुर के पुलिस अधीक्षक डा.ओपी सिंह को झांसी का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बनाया गया है जबकि सीबीसीआईडी लखनऊ से में तैनात पुलिस अधीक्षक मिर्जामंजर बेग को इसी पद पर ललितपुर तैनात किया गया ,लखनऊ में तैनात पुलिस अधीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) डॉ. सुनील गुप्ता को गोरखपुर का वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। पीटीएस मेरठ में तैनात पुलिस अधीक्षक पूनम को लखीमपुर-खीरी भेजा गया जबकि जबकि देवरिया में तैनात पुलिस अधीक्षक (देहात) सुरेंद्र बहादुर को मऊ का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। प्रयाराज में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह को रायबरेली का पुलिस अधीक्षक जबकि बांदा में तैनात पुलिस अधीक्षक एस आनंद को इसी पद पर प्रतापगढ़ भेजा गया है।<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">झांसी में तैनात वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह एटीएस लखनऊ भेजा गया है । गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शलभ माथुर को और प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक देवरंजन वर्मा को पुलिस महानिदेशक कार्यालय से संबद्ध किया गया है। लखीमपुर-खीरी के पुलिस अधीक्षक रामलाल वर्मा को चतुर्थ वाहिनी पीएसी प्रयागराज में सेनानायक के पद पर भेजा गया है । बलरापुर के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार को क्षेत्रीय अभिसूचना बरेली, बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक वी पी श्रीवास्तव को इसी पद पर ईओडब्ल्यू लखनऊ, मऊ के पुलिस अधीक्षक ललित कुमार सिंह को इसी पद पर फायर सर्विस लखनऊ और रायबरेली की पुलिस अधीक्षक सुजाता सिंह को 32वीं पीएसी लखनऊ में सेनानायक के पद पर भेजा गया है।<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">इनके अलावा देवरिया के पुलिस अधीक्षक गणेश प्रसाद साहा को बांदा ,वाराणसी के अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अमित कुमार को पुलिस अधीक्षक बलरामपुर, बरेली से पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) सतीश कुमार को बाराबंकी, उत्तरी गोरखपुर के पुलिस अधीक्षक रोहित सिंह सजवान को पुलिस अधीक्षक महराजगंज जबकि महराजगंज के पुलिस अधीक्षक राकेश प्रकाश को गोण्डा भेजा गया है । गोण्डा के पुलिस अधीक्षक लल्लन सिंह को इसी पद पर लखनऊ अभिसूचना मुख्यालय में तैनात किया गया है ।</span></p>
<p>वक्ता के अनुसार अम्बेडकरनगर के पुलिस अधीक्षक विपिन्न कुमार मिश्र को इसी पद पर मिर्जापुर भेजा गया है जबकि मिर्जापुर की पुलिस अधीक्षक शालिनी को श्री मिश्र के स्थान पर अंबेडकरनगर भेजा गया है। बुलंदशहर में तैनात पुलिस अधीक्षक शहाब रशीद खां को लखनऊ में कंप्यूटर केंद्र भेजा गया है । झांसी में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक कुलदीप नारायण को 33वीं पीएसी झांसी में सेनानायक बनाया गया है जबकि आठवीं वाहिनी बरेली में तैनात सेनानायक अशोक कुमार वर्मा को इसी पद पर 30वीं गोण्डा भेजा गया है ।</p>
<p>कानपुर देहात में तैनात पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार श्रीवास्तव को वूमेन पावर लाइन लखनऊ में तैनात किया गया है जबकि वाराणसी से पुलिस अधीक्षक प्रोटोकाल विकास कुमार वैध्य को 26वीं पीएसी गोरखपुर भेजा गया है।<br />
सुल्तानपुर में तैनात पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत त्रिपाठी को एटीसी सीतापुर भेजा गया है ।<br />
प्रवक्ता के अनुसार पीपीएस अधिकारियों में 44वीं पीएसी मेरठ में तैनात उपसेनानायक शिष्य पाल को अपर पुलिस अधीक्षक दक्षिण देवरिया ,लखनऊ सचिवालय सुरक्षा में तैनात राहुल मिठास को अपर पुलिस अधीक्षक(ग्रामीण) झांसी , प्रशिक्षण मुख्यालय लखनऊ में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक शिवराम यादव को अपर पुलिस अधीक्षक (अपराध) बुलंदशहर ,लखनऊ अभिसूचना मुख्यालय में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार को इसी पद पर कानपुर देहात भेजा गया है।<br />
द्वितीय पीएसी सीतापुर में तैनात सुखराम भारती को अपर पुलिस अधीक्षक प्रोटोकाल वाराणसी, पुलिस कंट्रोलरूम प्रयागराज में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज को सुलतानपुर , पुलिस कंट्रोलरूम लखनऊ में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार पाण्डेय को इसी पद पर विधानसभा सुरक्षा जबकि बिजनौर में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक<br />
दिनेश सिंह को इसी पद एटीएस लखनऊ में तैनाती दी गई है।</p>
<h3>प्रवक्ता के अनुसार</h3>
<p>यूपी-100 में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक लक्ष्मी निवास मिश्र को अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) बिजनौर, अपर पुलिस अधीक्षक हाईकोर्ट सुरक्षा प्रयागराज नरेंद्र कुमार सिंह को इसी पद पर गंगापार प्रयागराज तैनात किया गया है। चतुर्थ वाहिनी पीएसी प्रयागराज में तैनात उपसेनानायक गिरजेश कुमार को हाईकोर्ट सुरक्षा प्रयागराज में ही तैनाती दी गई है । यूपीपीसीएल नोएडा में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक अरविंद कुमार पाण्डेय को इसी पद उत्तरी गोरखपुर यूपीपीसीएल लखनऊ में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक मरतंड प्रकाश सिंह अपर पुलिस अधीक्षक(ग्रामीण) वाराणसी तैनात किया गया है और क्षेत्रीय अभिसूचना बरेली में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक संसार सिंह की बरेली में अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के पद पर तैनाती की गई है।</p>
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		<title>शर्मनाक : नाम और इनाम के लिए पहले भी बहा निर्दोष लोगो का खून </title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Oct 2018 12:55:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[Embarrassing: Blood for innocent people]]></category>
		<category><![CDATA[even before the name and reward]]></category>
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		<category><![CDATA[कम्प्यूटर आपरेटर]]></category>
		<category><![CDATA[योगी आदित्यनाथ]]></category>
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					<description><![CDATA[योगेश श्रीवास्तव  लखनऊ।  प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद से कानून व्यवस्था सुधारने के नाम पर जहां पुलिस को अपराधियों पर कहर बनकर टूटने की खुली छूट है वहीं इस छूट के नाम पर खंूखार अपराधियों से ज्यादा निरीह निर्दोष और निहत्थे लोगों को अपनी गोलियों का निशाना बना रही है। ... <a title="शर्मनाक : नाम और इनाम के लिए पहले भी बहा निर्दोष लोगो का खून " class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/embarrassing-blood-for-innocent-people-even-before-the-name-and-reward-news/" aria-label="Read more about शर्मनाक : नाम और इनाम के लिए पहले भी बहा निर्दोष लोगो का खून ">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr"><strong>योगेश श्रीवास्तव </strong></div>
<div dir="ltr">लखनऊ।  प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्तारूढ़ होने के बाद से कानून व्यवस्था सुधारने के नाम पर जहां पुलिस को अपराधियों पर कहर बनकर टूटने की खुली छूट है वहीं इस छूट के नाम पर खंूखार अपराधियों से ज्यादा निरीह निर्दोष और निहत्थे लोगों को अपनी गोलियों का निशाना बना रही है। मुख्यमंत्री द्वारा सदन से सडक़ तक अपराधियों को ठोंक देने के  आदेश ने पुलिस को किसी को भी मार गिरानें की खुली छूट दे दी है। मुठभेड़ की आड़ में प्रमोशन और विभाग में अपना नंबर बढ़ाने की चाहत में पुलिस किसी का भी खून बहाने से गुरेज नहीं कर रही है। योगी सरकार के कार्यकाल में अब तक हुई कई मुठभेड़ों पर सवाल सडक़ से सदन तक उठ चुके है।</div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr">हाल में लखनऊ में गोमतीनगर में एप्पल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी को पुलिस ने गोलीमार कर मौत के घाट उतार दिया। इसी तरह नोएडा में पुलिस ने जिम ट्रेनर सुमित गुर्जर का मुठभेड़ में मार दिया था। पुलिस द्वारा गुडवर्क के नाम किए जा रहे अंधाधुंध मुठभेड़ों पर सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग ने सवाल उठाए है। प्रदेश में ऐसी फर्जी मुठभेड़े पहले भी हुई और सीबीआई जांच होने के बाद पुलिस कर्मियों को फांसी से लेकर उम्र कैद की सजायें हुयी।</div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr"><strong>एक दर्जन उतार दिए थे मौत के घाट </strong></div>
<div dir="ltr">वर्ष १९८२ में १२ मार्च को गोंडा के कटराबाजार में गोंडा के कटराबाजार में दो पक्षों की मारपीट में बीचबचाव करने पहुंचे तत्कालीन पुलिस उपाधीक्षक केपी सिंह की हत्या कर दी गयी। इस घटना के बाद गोंडा के कौडिय़ा थानें की पुलिस ने माधवपुर पहुंचकर एक दर्जन लोगों को मौत के घाट उतार किया। पुलिस ने इस मुठभेड़ का नाम दिया। मामलें की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने इस मुठभेड़ की सीबीआई जांच कराने के आदेश दिए। १९ पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुयी। सुनवाई के दौरान दस पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी। बाकी बचे लोगों में तीन को फांसी और पांच को उम्र कैद की सजा सुनाई गई।</div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr"><strong>चार मजदूरों को नहीं बक्शा</strong></div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr">इसी तरह वर्ष १९९६ में ८ नवंबर को गाजियाबाद के की भोजपुर पुलिस ने चार लोगों का इनकांउटर कर दिया। बाद में पता चला मारे गये चारों लोग मोदीनगर के विजय नगर के रहने वाले थे और एक कंपनी में मजूदरी करते थे। ७अप्रैल १९९७ में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। वर्ष २००१ में न्यायालय ने पांच को साक्ष्य छिपानें का आरोपी बनाया और सभी दोषियों का उम्रकैद की सजा सुनाई।</div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr"><strong>तीर्थयात्रियों को आतंकी बनाकर मार डाला</strong></div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr">वर्ष १९९१ में प्रदेश में पहली बार यूपी में भाजपा की सरकार बनी और उसके मुखिया बने कल्याण सिंह। सरकार गठन का एक महीना भी नहीं बीता था कि १२ जुलाई को पीलीभीत में पुलिसकर्मियों ने तीर्थयात्रियों से भरी बस में १० यात्रियों को आतंकवादी बताकर उन्हे जंगल में ले जाकर गोली मार दी। इनाम पाने की गरज से हुई इस हत्या में सर्वोच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच करायी। ५७ पुलिसकर्मियों को दोषी पाया गया। सुनवाई के दौरान १० पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी। ४७ लोगों को उम्र कैद की सुजा सुनायी गयी।</div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr"><strong>कम्प्यूटर आपरेटर को गोली मार दी</strong></div>
<div dir="ltr">१९९७ में ३०जून को बरेली में बदायूं के मुकुल गुप्ता को ढेर कर दिया। एक साधारण से कम्प्यूटर आपरेटर मुकुल की हत्या पर न्यायालय ने संज्ञान लिया और मामले की सीबीआई जांच करायी। मुठभेड़ मेें शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट हुई। मामला अभी न्यायालय में लंबित है। इस मामलें में सीबीआई ने तत्कालीन एसएसपी जे. रविन्द्र गौड़ को भी आरोपी बनाया है।</div>
<div dir="ltr"></div>
<div dir="ltr"><strong>आईपीएस ने ले ली थी जान </strong></div>
<div dir="ltr">१९९३ में १४/१५ अप्रैल की रात राजधानी लखनऊ में न्यू हैदराबाद क्षेत्र में सहायक पुलिस अधीक्षक चन्द्र प्रकाश ने पीछा करते हुए व्यवसायी सरवर को राइफल से गोलीमार दी थी जिसमें सरवर की मौके पर ही मौत हुयी थी। इस मामलें को लेकर पुलिस की बड़ी फजीहत भी हुयी और जांच भी हुयी लेेकिन नतीजा सिफर रहा।</div>
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		<title>SP आत्महत्या मामला: आखिर क्या लिखा था सुसाइड नोट में, जिसे पढ़ते ही पत्नी का हुआ ये हाल&#8230;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Sep 2018 08:52:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[लखनऊ]]></category>
		<category><![CDATA[death]]></category>
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					<description><![CDATA[कानपूर/ लखनऊ : कानपुर एसपी पूर्वी के पद पर तैनात आईपीएस सुरेंद्र कुमार दास ने बुधवार सुबह कैंट स्थित सरकारी आवास में जहर खा लिया था। सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी अस्पताल में मुंबई के आए डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। लेकिन अफसोस वे उन्हें बचा नहीं पाए और रविवार की दोपहर 12 बजकर ... <a title="SP आत्महत्या मामला: आखिर क्या लिखा था सुसाइड नोट में, जिसे पढ़ते ही पत्नी का हुआ ये हाल&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/sp-suicide-case-sp-surendra-das-writes-in-the-last-letter-dear-raveena-sorry-for-everything-news/" aria-label="Read more about SP आत्महत्या मामला: आखिर क्या लिखा था सुसाइड नोट में, जिसे पढ़ते ही पत्नी का हुआ ये हाल&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कानपूर/ लखनऊ : कानपुर एसपी पूर्वी के पद पर तैनात आईपीएस सुरेंद्र कुमार दास ने बुधवार सुबह कैंट स्थित सरकारी आवास में जहर खा लिया था। सर्वोदय नगर स्थित रीजेंसी अस्पताल में मुंबई के आए डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही थी। लेकिन अफसोस वे उन्हें बचा नहीं पाए और रविवार की दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। एसपी पश्चिम संजीव सुमन का कहना है कि सुरेंद्र कुमार ने पारिवारिक कलह के चलते यह कदम उठाया। एसपी की मौत के बाद पुलिस उन सभी कारणों को जानने में जुटी है जिसकी वजह से उन्हें ऐसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2018/09/06/16_9/16_9_1/Surendra_Das_1536250214.jpg" alt="Surendra Das" /></p>
<h3>क्या लिखा था सुसाइड नोट में</h3>
<p>डियर रवीना, आईएम नॉट लॉयर&#8230; जो रिकॉर्डिंग किया था वह आपकी मां को ही भेजने के लिए किया था, फिर बाद में लगा कि नहीं भेजना चाहिए। कुछ हाइड (छिपाना) होता तो मोबाइल ऐसे कभी नहीं छोड़ता। मैं साइलेंट&#8230; (चुप) इसलिए था क्यों कि मुझे सुसाइडल थॉट्स (आत्महत्या के विचार) आ रहे थे। आई रियली लव यू। तुम फॉलोवर विजय व चंद्रभान से पूछ सकती हो। मैंने उनसे सल्फास चूहे मारने के नाम पर लाने के लिए बोला। कुछ दिन पहले ब्लेड लाने के लिए भी बोला था। आई एम नॉट प्लानिंग अगेंस्ट यू (तुम्हारे खिलाफ कोई योजना नहीं बनाई)। आई डिड गूगल सर्च टू, नाऊ कमिट सुसाइड। जिस&#8230;से भी पूछ सकती हो। उसे भी मेरी इस प्लानिंग (सुसाइड) को लेकर संदेह था। आई लव यू, सॉरी फॉर एवरीथिंग&#8230;सुरेंद्र।</p>
<p>एसपी पूर्वी सुरेंद्र दास ने 5 सितंबर को तड़के यह सुसाइड नोट लिखने के बाद सल्फास खा लिया था। पांच दिन जिंदगी और मौत से जूझने के बाद रविवार दोपहर उनकी मौत हो गई। इस सुसाइड नोट से एक बात तो साफ झलक रही है कि पत्नी की हरकतें कुछ ऐसी थीं जिसे वह उनकी मां को बताना चाहते थे। उसकी रिकॉर्डिंग भी की लेकिन भेजा नहीं और यह बात डॉ. रवीना को पता चल गई जिसके बाद रवीना ने बखेड़ा खड़ा कर दिया। उन्होंने लिखा कि मैं चुप था&#8230; इसका मतलब रवीना ने जमकर हंगामा मचाया और लड़ाई-झगड़ा किया इसके बाद भी वह रिश्तों को बचाने के लिए चुप रहे। पूरे सुसाइड नोट से एक बात तो साफ है कि वह अपने दाम्पत्य जीवन को बचाने और पत्नी को खुद पर भरोसा दिलाने के लिए हर कोशिश में जुटे थे। खुद को सही साबित करने के लिए सुरेंद्र दास के मन में आत्महत्या जैसा विचार घर करता जा रहा था। हरसंभव प्रयास के बाद भी दाम्पत्य जीवन में सुधार नहीं हुआ तो भीतर से वह टूट गए और जहर खाकर जान दे दी। जहर खाने वाली रात भी झगड़ा हुआ था।</p>
<p><strong>पारिवारिक मित्र तो नहीं बनी आत्महत्या की वजह</strong></p>
<p>सुरेंद्र दास की ओर से लिखे गए सुसाइड नोट में एक पारिवारिक मित्र का नाम भी उन्होंने लिखा है। उनसे पूछने की बात कहीं थी। पुलिस अफसरों की मानें तो वह महिला मित्र उनकी पारिवारिक मित्र है। इससे सुरेंद्र व रवीना दोनों की बात होती थी। वह दोनों के बीच होने वाले किसी भी तरह के विवाद पर समझौता भी कराती थी। ऐसे में आत्महत्या की वजह पारिवारिक मित्र भी मानी जा रही है।</p>
<p><strong>सुरेंद्र दास ने अपने दोनों फोन क्यों तोड़े </strong></p>
<p>सुसाइड का प्रयास करने से पहले सुरेंद्र दास ने अपने दोनों फोन को तोड़ दिया था। ऐसे में अगर कोई बात नहीं थी तो उन्होंने सुसाइड नोट में  बार-बार मोबाइल फोन को लेकर सफाई क्यो दे रहे थे। मोबाइल में ऐसा क्या था, जो कि उन्होंने तोड़ दिया। किस क्लीपिंग की बात सुरेंद्र कर रहे है। यह भी जांच का अहम विषय है। इसको लेकर भी पुलिस जांच कर रही है।</p>
<p><strong>बार-बार  सफाई क्यों देते रहे सुरेंद्र </strong></p>
<p>सुसाइड नोट में बार-बार सुरेंद्र खुद की सफाई दे रहे हैं। अगर कुछ गड़बड़ नहीं था तो उन्होंने बार-बार सफाई क्यों दी। यह बात काफी अहम है। सुसाइड नोट में सुरेंद्र बार-बार खुद को पाक साफ बता रहे हैं। ऐसी क्या बात है, जिसकी सफाई सुरेंद्र को देनी पड़ी। यह सवाल सभी के जहन में उठ रहा है।</p>
<p><strong>मामले की जांच की जाएगी</strong></p>
<p>एसएसपी पूर्वी अनंत देव ने कहा कि सुसाइड नोट में अभी तक किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया है। उन्होंने सुसाइड के लिए खुद को जिम्मेदार बताया है। मामले की जांच की जाएगी।</p>
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