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	<title>आधार कार्ड &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>सावधान : जेब में रखा पर्स आपको बना रहा इस खतरनाक बीमारी का शिकार, जानिए कैसे..</title>
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		<pubDate>Sun, 23 Dec 2018 22:00:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[कुछ खबरें ऐसी होती हैं, जिन पर भरोसा करना नामुमकिन सा  होता है.मगर जब बात सेहत से जुडी हो तो एक बार सोचने पर इन्सान मजबूर हो जाता है. आजकल इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम लोग अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते जिसका खामियाजा हमे बाद में भुगतना पड़ता है. पर्स  या बटुआ ... <a title="सावधान : जेब में रखा पर्स आपको बना रहा इस खतरनाक बीमारी का शिकार, जानिए कैसे.." class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/never-put-your-wallet-in-your-back-pocket-know-the-reason-news/" aria-label="Read more about सावधान : जेब में रखा पर्स आपको बना रहा इस खतरनाक बीमारी का शिकार, जानिए कैसे..">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कुछ खबरें ऐसी होती हैं, जिन पर भरोसा करना नामुमकिन सा  होता है.मगर जब बात सेहत से जुडी हो तो एक बार सोचने पर इन्सान मजबूर हो जाता है. आजकल इस भागदौड़ भरी जिंदगी में हम लोग अपनी सेहत पर ध्यान नहीं दे पाते जिसका खामियाजा हमे बाद में भुगतना पड़ता है.</p>
<p>पर्स  या बटुआ रखने का चलन इन दिनों आम है। सबसे ज्यादा इसका इस्तेमाल युवा करता है। इसमें ना सिर्फ पैसे बल्कि लोग जरुरी कागजात, आधार कार्ड, पैन कार्ड , डेबिट कार्ड और क्रैडिट कार्ड जैसी चीजें भी रखते हैं। दरअसल कुछ लोगों का पर्स/वॉलेट इतना मोटा या भारी हो जाता है जो जींस या पैंट के बैक पॉकेट में रखने से काफी असुविधाजनक महसूस होता है। कुछ लोग वॉलेट में काफी पैसे रखते है और उसकी वजह से भी यह मोटा हो जाता है।</p>
<h3>ये आदत आपको कर रही है बीमार</h3>
<p>ये आदत आगे चलकर काफी शरीर की सेहत के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकती है।जानकारों का मानना है कि ये हैबिट बिल्कुल गलत है जिसे तुरंत बदल लेना चाहिए।  दरअसल इस तरीके से अगर आप लंबे वक्त तक बैठते हैं तो यह आगे चलकर आपके सेहत के लिए कई समस्याएं खड़ी करता है।</p>
<h3>जानिए कैसे हो रही ये बीमारी</h3>
<p>इस तरीके से बैठने से कुछ विशेष नसें दब जाती हैं जो आपके लिए कई तरह की शरीर संबंधी परेशानियों को जन्म देता है। बैक पॉकेट में पर्स रखने की बजाय पर्स आपको हमेशा आगे की जेब में रखना चाहिए।</p>
<p>ज्यादातर लोग वॉलेट को अपने पीछे के पॉकेट में रखते हैं। एक सर्वे के मुताबिक कार्ड, पैसों से भरा वॉलेट बैक पॉकेट में रखना बेहद खतरनाक होता है और इससे पायरी फोर्मिस सिंड्रोम नामक बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में साइटिका की नस दब जाती है। इस बीमारी में मरीज को काफी तेज दर्द होता है। दरअसल ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि पर्स को बैक पॉकेट में रखकर लोग घंटों ऑफिस में या फिर कही भी बैठे रहते है।</p>
<p>लिहाजा इससे पायरी फोर्मिस मसल्स दब जाती और पैरों में तेज दर्द होने लगता है। इस बीमारी के सबसे ज्यादा वैसे लोग शिकार होते हैं जो घंटों तक बैठने का काम करते है। दरअसल इस बीमारी में साइटिका नस दब जाती है जिससे असहनीय दर्द होता है।</p>
<p>बैक पॉकेट में पर्स रखना एक असहज स्थिति होती है लेकिन हम उसे दरकिनार कर देते हैं। दरअसल बैक पॉकेट में बटुआ या वॉलेट रखना आपके बॉडी बैलेंस को बिगाड़ता है जिससे आपके कमर पर दबाव पड़ता है। दरअसल कमर से ही कूल्हे की साइटिका नस गुजरती है इसलिए इस दबाव की वजह से आपके कूल्हे और कमर में दर्द हो सकता है।</p>
<p>घंटों तक ऐसे ही बैठे रहने से हिप ज्वाइंट्स में मौजूद पिरिफॉर्म मसल्स पर भी दबाव पड़ता है। पीछे की पॉकेट में पर्स रखकर लगातार बैठने से इन नसों पर काफी दबाव पड़ता है, जिससे कई बार ब्लड सर्कुलेशन रुक जाता है।</p>
<p>ऐसी स्थिति लंबे समय तक अगर बनी रहती है तो इससे नसों में सूजन भी बढ़ सकती है। कुल मिलाकर यह संदेश उन लोगों के लिए है जो अगर ऐसा करते है तो वह अपनी इस आदत को जल्द से जल्द बदल डालें।</p>
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		<title>SC का बड़ा फैसला, कहा-इन सेवाओं के लिए आधार से लिंक की जरुरत नहीं</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Sep 2018 07:05:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। लंबे समय तक चर्चा का विषय रहे आधार कार्ड की वैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड आम आदमी की पहचान है, इस पर हमला संविधान के खिलाफ है। कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को रद्द करते हुए निजता का अधिकार को ... <a title="SC का बड़ा फैसला, कहा-इन सेवाओं के लिए आधार से लिंक की जरुरत नहीं" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-aadhaar-not-mandatory-school-admissions-bank-accounts-mobile-connection-cbse-exams-news/" aria-label="Read more about SC का बड़ा फैसला, कहा-इन सेवाओं के लिए आधार से लिंक की जरुरत नहीं">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। लंबे समय तक चर्चा का विषय रहे आधार कार्ड की वैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड आम आदमी की पहचान है, इस पर हमला संविधान के खिलाफ है। कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को रद्द करते हुए निजता का अधिकार को ध्यान में रखते हुए साफ तौर पर कहा कि मोबाइल कंपनियों में आधार कार्ड को देना जरूरी नहीं होगा। वहीं स्कूल और कॉलेजों में एडमिशन के लिए भी आधार जरूरी नहीं होगा। अदालत ने बैंक एकाउंट से भी आधार को जोड़ना गैरसंविधानिक बताया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकतीं हैं। वहीं वेलफेयर स्कीम से इसे जोड़ा जा सकता है।</p>
<p>जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि ये जरूरी नहीं है कि हर चीज बेस्ट हो, कुछ अलग भी होना चाहिए। आधार कार्ड पिछले कुछ साल में चर्चा का विषय बना है। जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार कार्ड गरीबों की ताकत का जरिया बना है, इसमें डुप्लीकेसी की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड पर हमला करना लोगों के अधिकारों पर हमला करने के समान है। जस्टिस सीकरी ने कहा कि शिक्षा हमें अंगूठे से हस्ताक्षर की तरफ ले गई, लेकिन एक बार फिर तकनीक हमें अंगूठे की ओर ले जा रही है। आधार की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि आधार ने समाज के वंचित तबकों को सशक्त किया है और उन्हें एक पहचान दी है।</p>
<p>बता दें कि आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाली 27 याचिकाओं पर करीब चार महीने तक बहस चली थी। मैराथन बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मई में फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<h3>आइए 10 प्वाइंट्स में जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा-</h3>
<ol>
<li>आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा कि &#8216;सर्वोत्तम होने से अच्छा है कि आप अनूठे हो जाइए&#8217;।</li>
<li>जस्टिस सीकरी ने कहा-आधार समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों को सशक्त बनाता है। यह उन्हें एक पहचान देता है। यह अन्य आईडी प्रूफ से अलग है और इसकी दूसरी कॉपी नहीं बनाई जा सकती।</li>
<li>आधार नामांकन के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की तरफ से नागरिकों का थोड़ा डेमोग्राफिक एवं बॉयोमेट्रिक डाटा जुटाया गया। व्यक्ति को दिया गया आधार नंबर अनूठा है और यह किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह लोगों के आधार को सुरक्षित बनाने के लिए और कड़ा कानून बनाए। कोर्ट ने कहा कि &#8216;शिक्षा से हम अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर की तरफ बढ़े लेकिन तकनीक हमें फिर से हस्ताक्षर से अंगूठे के निशान की तरफ ले गई है।&#8217;</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूलों में दाखिले के लिए आधार जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल बच्चों के दाखिले के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। स्कूल में छह से 14 साल के बच्चों के दाखिले में आधार जरूरी नहीं होगा।</li>
<li>शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि अवैध प्रवासी आधार कार्ड न बनवा पाएं।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी मोबाइल कंपनी अपनी सेवा देने के लिए आधार की मांग नहीं कर सकती। यह एक बड़ा फैसला है क्योंकि ज्यादातर मोबाइल कंपनियां अपनी सेवा देने के लिए लोगों से आधार कार्ड की मांग करती हैं।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से आधार लिंक करना जरूरी नहीं है। जबकि पैन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट खोलने के लिए आधार जरूरी नहीं। कोर्ट की इजाजत के बिना बॉयोमेट्रिक डाटा किसी एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जा सकता।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट के सेक्शन 57 को निरस्त कर दिया है। यह सेक्शन रद्द हो जाने से अब निजी कंपनियां लोगों से उनका आधार कार्ड नहीं मांग सकेंगी।</li>
<li>आधार कार्ड यूजीसी, एनईईटी और सीबीएसई की परीक्षा के लिए अनिवार्य नहीं होगा। निजी कंपनियां आधार कार्ड नहीं मांग सकतीं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है।</li>
</ol>
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