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	<title>केंद्र सरकार &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>जनगणना 2027: परिवार के मुखिया को देने होंगे 33 अहम सवालों के जवाब, नोटिफिकेशन जारी, पढ़ें पूरी डिटेल</title>
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		<pubDate>Fri, 23 Jan 2026 02:36:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[केंद्र सरकार ने गुरुवार को जनगणना 2027 से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें जनगणना में पूछे जाने वाले 33 सवालों की लिस्ट है, जिसमें मकान, परिवार, वाहन से जुड़े सवाल हैं। जनगणना के दौरान परिवार के मुखिया को ये जानकारियां देनी होंगी। इससे पहले सरकार ने बताया था कि जनगणना दो फेज में होगी। पहला ... <a title="जनगणना 2027: परिवार के मुखिया को देने होंगे 33 अहम सवालों के जवाब, नोटिफिकेशन जारी, पढ़ें पूरी डिटेल" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/census-2027-family-heads-will-have-to-answer-33-important-questions-notification-issued-read-full-details/" aria-label="Read more about जनगणना 2027: परिवार के मुखिया को देने होंगे 33 अहम सवालों के जवाब, नोटिफिकेशन जारी, पढ़ें पूरी डिटेल">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/census-2027-1765550343518-16_9-1024x576.webp" alt="" class="wp-image-509617" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/census-2027-1765550343518-16_9-1024x576.webp 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/census-2027-1765550343518-16_9-300x169.webp 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/census-2027-1765550343518-16_9-768x432.webp 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/01/census-2027-1765550343518-16_9.webp 1200w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><a href="http://dainikbhaskarup.com">केंद्र सरकार</a> ने गुरुवार को <a href="http://dainikbhaskarup.com">जनगणना 2027</a> से जुड़ा नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें जनगणना में पूछे जाने वाले 33 सवालों की लिस्ट है, जिसमें मकान, परिवार, वाहन से जुड़े सवाल हैं। जनगणना के दौरान परिवार के मुखिया को ये जानकारियां देनी होंगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले सरकार ने बताया था कि जनगणना दो फेज में होगी। पहला फेज अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें घरों की लिस्टिंग और घरों का डेटा जुटाया जाएगा। दूसरा फेज फरवरी 2027 से आबादी की गिनती से शुरू होगा।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://voiceofindia.online/wp-content/uploads/2026/01/jan1-435x1024.jpg" alt="Jan1" class="wp-image-8411"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पहला फेज 1 अप्रैल 2026 से</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने 8 जनवरी को बताया था कि देश में होने वाली जनगणना 2027 का पहला फेज 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच किया जाएगा। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने यहां 30 दिनों में यह काम पूरा करेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार ने यह भी कहा कि घरों की लिस्टिंग शुरू होने से 15 दिन पहले लोगों को खुद से जानकारी भरने (सेल्फ एन्यूमरेशन) का विकल्प भी दिया जाएगा। दरअसल जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से इसे टाल दिया गया था, जो अब 2027 में पूरी होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार ने बताया कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख कर्मचारी मोबाइल एप के जरिए जानकारी जुटाएंगे। मोबाइल एप, पोर्टल और रियल टाइम डेटा ट्रांसफर से जनगणना बहुत हद तक पेपरलेस होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये ऐप Android और iOS दोनों पर काम करेंगे। जाति से जुड़ा डेटा भी डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति की गिनती शामिल होगी। इससे पहले अंग्रेजों के समय 1931 तक जाति आधारित जनगणना हुई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने अप्रैल में लिया था। 2011 की पिछली जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी करीब 121 करोड़ थी, जिसमें लगभग 51.5% पुरुष और 48.5% महिलाएं थीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मैप पर हर घर ‘डिजी डॉट’ बनेगा, इसके 5 फायदे होंगे</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1. आपदा में सटीक राहत-</strong> जियो टैगिंग से बना डिजिटल लेआउट मैप बादल फटने, बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा के समय उपयोगी साबित होगा। सुदूर हिमालयी क्षेत्र में बसे किसी गांव में बादल फटने जैसी घटना के समय इस मैप से तुरंत पता चल जाएगा कि किस घर में कितने लोग रहते हैं। होटलों में क्षमता के हिसाब से कितने लोग रहे होंगे। इस ब्योरे से बचाव के लिए जरूरी तमाम नौका, हेलिकॉप्टर, फूड पैकेट आदि की व्यवस्था करने में मदद मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2. परिसीमन में मदद मिलेगी-</strong> राजनीतिक सीमाएं जैसे संसदीय या विधानसभा क्षेत्रों का युक्तिसंगत तरीके से निर्धारण करने में भी इससे मदद मिलेगी। जियो टैगिंग से तैयार मैप से यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि क्षेत्र में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र का संतुलित बंटवारा कैसे हो। समुदायों को ऐसे न बांट दिया जाए कि एक मोहल्ला एक क्षेत्र में और दूसरा मोहल्ला किसी अन्य क्षेत्र में शामिल हो जए। घरों के डिजी डॉट से डिलिमिटेशन की प्रक्रिया में आसानी होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>3. शहरी प्लानिंग में आसानी-</strong> शहरों में सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों या पार्कों की प्लानिंग करने में भी यह मैप उपयोगी साबित होगा। अगर किसी जगह के घरों के डिजिटल लेआउट में बच्चों की अधिकता होगी तो पार्क और स्कूल प्राथमिकता से बनाने की योजना तैयार की जा सकेंगी। यदि किसी बस्ती में कच्चे मकानों या खराब घरों की अधिकता दिखेगी तो वहां किसी मेडिकल इमरजेंसी के समय तत्काल मोबाइल राहत वैन भेजी जा सकेंगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>4. शहरीकरण और पलायन दर का डेटा मिलेगा-</strong> इस जनगणना के दस साल बाद होनी वाली जनगणना में डिजिटल मैप के परिवर्तन आसानी से दर्ज किए जा सकेंगे। देश के विभिन्न हिस्सों में शहरीकरण की दर और पलायन के क्षेत्रों की मैपिंग की तुलना सटीक ढंग से की जा सकेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>5. मतदाता सूची से डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे-</strong> आधार की पहचान के साथ जियो टैगिंग मतदाता सूची को सटीक और मजबूत बनाने में सहायक होगी। जब वोटर किसी भौगोलिक स्थान से डिजिटली जुड़ा होगा तो दोहरे पंजीकरण के समय उसके मूल निवास का पता भी सामने आएगा।</p>
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		<title>MGNREGA पर बड़ा बदलाव: मोदी सरकार नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में, जानिए क्या है प्लान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 15 Dec 2025 07:38:21 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) को खत्म कर नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में है। सरकार ने इससे जुड़ी बिल की कॉपी लोकसभा सांसदों के बीच सर्कुलेट की है। न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से ये खबर दी। इस बिल को संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र ... <a title="MGNREGA पर बड़ा बदलाव: मोदी सरकार नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में, जानिए क्या है प्लान" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/major-change-in-mgnrega-the-modi-government-is-preparing-to-introduce-a-new-rural-employment-law-heres-what-the-plan-is/" aria-label="Read more about MGNREGA पर बड़ा बदलाव: मोदी सरकार नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में, जानिए क्या है प्लान">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" width="400" height="225" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/12/mgnrega-name-changed.avif" alt="" class="wp-image-507598" style="aspect-ratio:1.7778317938745747;width:635px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/12/mgnrega-name-changed.avif 400w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/12/mgnrega-name-changed-300x169.avif 300w" sizes="(max-width: 400px) 100vw, 400px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मोदी सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (MGNREGA) को खत्म कर नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी में है। सरकार ने इससे जुड़ी बिल की कॉपी लोकसभा सांसदों के बीच सर्कुलेट की है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से ये खबर दी। इस बिल को संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है। बिल का नाम ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025’ रखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करना है। काम के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले 12 दिसंबर को खबर आई थी कि केंद्रीय कैबिनेट ने मनरेगा का नाम बदलकर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना रखा है। हालांकि, सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन सामने नहीं आया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रियंका बोली थीं- नाम बदलने का तर्क समझ नहीं आता</p>



<p class="wp-block-paragraph">जब मनरेगा के नाम बदलने की जानकारी सामने आई थी, तब वायनाड से कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा था कि उन्हें MGNREGA योजना का नाम बदलने के फैसले के पीछे का तर्क समझ नहीं आता। इससे फिजूल खर्च होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा- मुझे समझ नहीं आता कि इसके पीछे क्या मानसिकता है। सबसे पहले, यह महात्मा गांधी का नाम है और जब इसे बदला जाता है, तो सरकार के संसाधन फिर से इस पर खर्च होते हैं। ऑफिस से लेकर स्टेशनरी तक, सब कुछ का नाम बदलना पड़ता है, इसलिए यह एक बड़ी, महंगी प्रक्रिया है। तो ऐसा करने का क्या फायदा है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस ने कहा था- मोदी सरकार ने हमारी 32 योजनाओं के नाम बदले</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने मनरेगा का नाम बदले जाने पर एक वीडियो शेयर किया था। जिसमें उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने MGNREGA का नाम बदल कर पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार स्कीम रखा है। इसी मनरेगा को मोदी कांग्रेस की विफलताओं का पुलिंदा बताते थे लेकिन असलियत यह है कि यही मनरेगा ग्रामीण भारत के लिए संजीवनी साबित हुआ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस की स्कीमों का नाम बदल कर उनको अपना बना लेने की मोदी जी की यह लत बड़ी पुरानी है यही तो किया है उन्होंने 11 साल, UPA की स्कीमों का नाम बदल अपना ठप्पा लगा कर पब्लिसिटी करना।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुप्रिया ने X पर उन योजनाओं के नाम शेयर किए, जिन्हें कांग्रेस ने शुरू किया था। साथ ही दावा किया है कि इनके नाम बदले गए हैं।</p>
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		<title>अयोध्या विवादित भूमि लौटाने की अर्जी पर बोली माया, ये भाजपा का नया चुनावी हथकंडा है</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 30 Jan 2019 10:48:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली।  बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अयोध्या के राममंदिर विवाद में अधिग्रहीत भूमि का गैरविवादित भाग ‘रामजन्म भूमि न्यास’ को लौटाने की केंद्र सरकार की उच्चतम न्यायालय में अर्जी को राजनीतिक तथा चुनावी चाल करार देते हुए आज कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप है और आम चुनावों को प्रभावित ... <a title="अयोध्या विवादित भूमि लौटाने की अर्जी पर बोली माया, ये भाजपा का नया चुनावी हथकंडा है" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/attempts-to-influence-the-application-elections-to-return-the-disputed-land-mayawati/" aria-label="Read more about अयोध्या विवादित भूमि लौटाने की अर्जी पर बोली माया, ये भाजपा का नया चुनावी हथकंडा है">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली।</strong>  बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने अयोध्या के राममंदिर विवाद में अधिग्रहीत भूमि का गैरविवादित भाग ‘रामजन्म भूमि न्यास’ को लौटाने की केंद्र सरकार की उच्चतम न्यायालय में अर्जी को राजनीतिक तथा चुनावी चाल करार देते हुए आज कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप है और आम चुनावों को प्रभावित करने का प्रयास है।</p>
<p><strong>भाजपा का नया चुनावी हथकंडा</strong><br />
मायावती ने यहां कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार अयोध्या की वर्ष 1991 में अधिगृहित भूमि पर यथा-स्थिति को जबरदस्ती बिगाड़ने का प्रयास रही है। यह न्यायिक प्रक्रिया में अनुचित अड़चनें डालने वाला कदम हैं। उन्होंने कहा कि यह अर्जी अनुचित और भड़काऊ तथा भाजपा का नया चुनावी हथकंडा है। उन्होेंने कहा कि केन्द्र में भाजपा की मौजूदा सरकार जातिवादी, साम्प्रदायिक और धार्मिक उन्माद, तनाव तथा  हिंसा आदि के साथ-साथ संकीर्ण राष्ट्रवाद की नकारात्मक और घातक नीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकलापों के आधार पर संविधान मंशा-विरोधी तरीके से सरकार चला रही है।</p>
<p><strong>सत्ता में अब दोबारा वापस आने वाली नहीं BJP </strong><br />
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के बाद भाजपा को लग गया<br />
है कि वह केन्द्र की सत्ता में अब दोबारा वापस आने वाली नहीं है। इससे केन्द्र और उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकारें घबरा गयी हैं और सभी अनुचित हथकंडे अपना रही है।</p>
<p><strong>जनता का विश्वास खो चुकी है BJP </strong><br />
उन्होंने अयोध्या मामले पर केन्द्र सरकार की कल की ताजा कार्रवाई पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि देश में जबरदस्त गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी और अशिक्षा से संबंधित मुद्दे हैं जिनसे जनता परेशान है। राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान करने और विकास के मामले में केन्द्र सरकार विफल रही है और अपनी वादाखिलाफी के कारण देश की सवा सौ करोड़ जनता का विश्वास खो चुकी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>संसद शीतकालीन सत्र का लेखा-जोखा : राज्यसभा का 73 प्रतिशत, लोकसभा का 53 प्रतिशत समय हुआ बर्बाद</title>
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		<pubDate>Thu, 10 Jan 2019 10:02:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के हँगामे के कारण संसद के गत 11 दिसंबर को शुरू हुये शीतकालीन सत्र में राज्यसभा का 73 प्रतिशत और लोकसभा का 53 प्रतिशत समय बर्बाद हो गया। संसदीय कार्यमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज दोनों सदनों में हुई कार्यवाही का विवरण देते हुये आज यहाँ संवाददाताओं को ... <a title="संसद शीतकालीन सत्र का लेखा-जोखा : राज्यसभा का 73 प्रतिशत, लोकसभा का 53 प्रतिशत समय हुआ बर्बाद" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/73-percent-of-the-rajya-sabha-53-percent-of-the-lok-sabha-wasted/" aria-label="Read more about संसद शीतकालीन सत्र का लेखा-जोखा : राज्यसभा का 73 प्रतिशत, लोकसभा का 53 प्रतिशत समय हुआ बर्बाद">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नयी दिल्ली। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के हँगामे के कारण संसद के गत 11 दिसंबर को शुरू हुये शीतकालीन सत्र में राज्यसभा का 73 प्रतिशत और लोकसभा का 53 प्रतिशत समय बर्बाद हो गया। संसदीय कार्यमंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज दोनों सदनों में हुई कार्यवाही का विवरण देते हुये आज यहाँ संवाददाताओं को बताया कि लोकसभा में 29 दिन की अवधि में कुल 17 बैठकें हुईं और राज्यसभा में 30 दिन की अवधि में कुल 18 बैठकें हुईं। इस दौरान लोकसभा में 46 घंटे से ज्यादा और राज्यसभा में 27 घंटे से ज्यादा काम हुआ। उन्होंने बताया कि निचले सदन की उत्पादकता 47 फीसदी और ऊपरी सदन की 27 फीसदी रही। लोकसभा की कार्यवाही 08 जनवरी को और राज्यसभा की 09 जनवरी को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गयी थी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://d1u4oo4rb13yy8.cloudfront.net/article/86154-xcyeggbwti-1522899544.jpg" alt="Related image" /><br />
श्री तोमर ने बताया कि सत्र की विशेष उपलब्धि यह रही कि समान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को नौकरियों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश में 10 प्रतिशत तक आरक्षण का प्रावधान करने वाले संविधान के 124वें संशोधन विधेयक को दोनों सदनों ने पारित कर दिया। उन्होंने विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुये कहा कि देश के करोड़ों लोगों की लंबे समय से ऐसी इच्छा थी। यह सामान्य वर्ग के गरीबों को न्याय दिलाने वाला और उनके जीवन स्तर में बदलाव लाने वाला साबित होगा। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि दोनों सदनों में अधिकांश सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया।</p>
<p><img decoding="async" src="https://cdn-hindi.theprint.in/wp-content/uploads/2017/12/2017_12img22_Dec_2017_PTI12_22_2017_000052B-696x303-696x303.jpg" alt="Image result for à¤¶à¥à¤¤à¤à¤¾à¤²à¥à¤¨ à¤¸à¤¤à¥à¤°" /><br />
मंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी अनुदान माँगों से जुड़े विनियोग विधेयक समेत लोकसभा में कुल 12 विधेयक पेश किये गये और 14 विधेयक पारित किये गये। राज्यसभा में पाँच विधेयक पेश किये गये और चार विधेयक पारित किये गये। चार विधेयक दोनों सदनों से पारित से किये गये। इनमें संविधान का 124वाँ संशोधन विधेयक, ऑटिज्म न्यास से संबंधित विधेयक, नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार से जुड़ा संशोधन विधेयक और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद् (संशोधन) विधेयक शामिल हैं। इसके अलावा दूसरी अनुदान माँगों के विनियोग विधेयक धन विधेयक होने के कारण लोकसभा से पारित हो चुका है और 14 दिन बाद राज्य सभा से स्वत: पारित माना जायेगा।<br />
लोकसभा ने जिन अन्य महत्त्वपूर्ण विधेयकों को पारित किया उनमें तीन तलाक विधेयक, आधार एवं अन्य विधियाँ (संशोधन) विधेयक, सरोगेसी (विनियमन) विधेयक, कंपनी (संशोधन) विधेयक, उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, उभयलिंगी व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक, डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विधेयक और नागरिकता संशोधन विधेयक शामिल हैं।<br />
अ</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>CM योगी का बड़ा ऐलान, गंगा मइया को गंदा किया तो होगी जेल, सरकार ने बनाया नया कानून</title>
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		<pubDate>Thu, 01 Nov 2018 10:51:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[  नई दिल्ली। गंगा मइया को सभी नदियों में सबसे पवित्र माना गया है. वही इसकी सफाई पर केंद्र सरकार और यूपी सरकार पूर्ण जोर प्रयास में लगी है इ​सके लिए सरकार ने गंगा विधेयक 2018 प्रस्तावित किया है। इसमें गंगा नदी को प्रदूषित करने वालों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा। इस विधेयक में गंगा प्रोटेक्शन ... <a title="CM योगी का बड़ा ऐलान, गंगा मइया को गंदा किया तो होगी जेल, सरकार ने बनाया नया कानून" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/cm-yogi-the-ganga-miyaya-dirty-will-be-done-the-government-has-created-a-new-law-news/" aria-label="Read more about CM योगी का बड़ा ऐलान, गंगा मइया को गंदा किया तो होगी जेल, सरकार ने बनाया नया कानून">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h1 title="गंगा को गंदा किया तो होगी जेल, प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार ने बनाया नया कानून"> <img decoding="async" src="https://assets-news-bcdn.dailyhunt.in/cmd/resize/400x400_60/fetchdata13/images/60/ae/cb/60aecb6de77d4086dc845ba9dbc3b300.jpg" /></h1>
<p><strong>नई दिल्ली।</strong> गंगा मइया को सभी नदियों में सबसे पवित्र माना गया है. वही इसकी सफाई पर केंद्र सरकार और यूपी सरकार पूर्ण जोर प्रयास में लगी है इ​सके लिए सरकार ने गंगा विधेयक 2018 प्रस्तावित किया है। इसमें गंगा नदी को प्रदूषित करने वालों को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा।</p>
<p>इस विधेयक में गंगा प्रोटेक्शन कॉर्प्स की नियुक्ति का सुझाव दिया गया है। राष्ट्रीय गंगा काउंसिल की मांग पर इन पुलिसवालों का खर्च गृह मंत्रालय उठाएगा। काउंसिल में पांच विशेषज्ञों की एक टीम है जिनके पास किसी उद्योग, बांधों और अन्य ढांचों के निर्माण को बंद करने या उनका विनियमन करने का अधिकार है जिनसे कि नदी के सतत प्रवाह पर असर पड़ता हो। साथ ही वह उस गतिविधि पर रोक लगा सकते हैं जिससे कि नदी प्रदूषित होती है।</p>
<p>जल संसाधन मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने पुष्टि की कि मसौदे को मंत्रालयों के पास भेज दिया गया है। उन्होंने कहा, सभी मंत्रियों द्वारा देखे जाने के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। विधेयक के अनुसार पुलिसवालों के पास अपराधियों को गिरफ्तार करने, हिरासत में लेने, उसे पास के पुलिस थाने में ले जाने का अधिकार होगा।</p>
<p>गंगा अधिनियम के तहत दंडनीय अपराधों और जुर्माना की लंबी सूची है जिसमें घाट को खराब करना या सीढ़ियों को नुकसान पहुंचाना या नदी में कोई अपमानजनक चीज फेंकना शामिल है। दूसरे अपराधों में पत्थर खनन, अनुमति के बिना वाणिज्यिक मछली पकड़ना, पहाड़ी ढलानों या संवेदनवशील क्षेत्रों में वनों की कटाई करना, ट्यूबवेल या उद्योग की जरुरतों की संगठित खपत के लिए भूजल निकालना सहित दूसरे शामिल हैं। यह सभी अपराध दो साल तक कारावास या 50,000 रुपये तक के जुर्माना के साथ दंडनीय हैं।</p>
<p>यह अपराध और जुर्माना राष्ट्रीय नदी गंगा विधेयक 2018 के अंतर्गत आते हैं। विधेयक का कहना है कि केंद्र सरकार का गंगा के प्रबंधन, विनियमन और विकास पर नियंत्रण रहेगा और इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाएगा।</p>
<p>क्योंकि इस नदी का खास महत्व है। भौगोलिक, ऐतिहासिक, सामाजिक-सांस्कृतिक और आर्थिक और विश्वास के कारणों की वजह से इसे राष्ट्रीय नदी का दर्जा दिया जाना चाहिए। विधेयक की धारा 54 के अनुसार यदि कोई कंपनी अपराध करती है तो, अपराध के समय कंपनी में उस समय मौजूद रहे हर शख्स को दोषी माना जाएगा।</p>
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		<title>SC का बड़ा फैसला, कहा-इन सेवाओं के लिए आधार से लिंक की जरुरत नहीं</title>
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		<pubDate>Wed, 26 Sep 2018 07:05:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। लंबे समय तक चर्चा का विषय रहे आधार कार्ड की वैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड आम आदमी की पहचान है, इस पर हमला संविधान के खिलाफ है। कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को रद्द करते हुए निजता का अधिकार को ... <a title="SC का बड़ा फैसला, कहा-इन सेवाओं के लिए आधार से लिंक की जरुरत नहीं" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/supreme-court-aadhaar-not-mandatory-school-admissions-bank-accounts-mobile-connection-cbse-exams-news/" aria-label="Read more about SC का बड़ा फैसला, कहा-इन सेवाओं के लिए आधार से लिंक की जरुरत नहीं">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नई दिल्ली। लंबे समय तक चर्चा का विषय रहे आधार कार्ड की वैधानिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड आम आदमी की पहचान है, इस पर हमला संविधान के खिलाफ है। कोर्ट ने आधार ऐक्ट की धारा 57 को रद्द करते हुए निजता का अधिकार को ध्यान में रखते हुए साफ तौर पर कहा कि मोबाइल कंपनियों में आधार कार्ड को देना जरूरी नहीं होगा। वहीं स्कूल और कॉलेजों में एडमिशन के लिए भी आधार जरूरी नहीं होगा। अदालत ने बैंक एकाउंट से भी आधार को जोड़ना गैरसंविधानिक बताया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकतीं हैं। वहीं वेलफेयर स्कीम से इसे जोड़ा जा सकता है।</p>
<p>जस्टिस एके सीकरी ने कहा कि ये जरूरी नहीं है कि हर चीज बेस्ट हो, कुछ अलग भी होना चाहिए। आधार कार्ड पिछले कुछ साल में चर्चा का विषय बना है। जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार कार्ड गरीबों की ताकत का जरिया बना है, इसमें डुप्लीकेसी की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड पर हमला करना लोगों के अधिकारों पर हमला करने के समान है। जस्टिस सीकरी ने कहा कि शिक्षा हमें अंगूठे से हस्ताक्षर की तरफ ले गई, लेकिन एक बार फिर तकनीक हमें अंगूठे की ओर ले जा रही है। आधार की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है। अदालत ने कहा कि आधार ने समाज के वंचित तबकों को सशक्त किया है और उन्हें एक पहचान दी है।</p>
<p>बता दें कि आधार की वैधानिकता को चुनौती देने वाली 27 याचिकाओं पर करीब चार महीने तक बहस चली थी। मैराथन बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मई में फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<h3>आइए 10 प्वाइंट्स में जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा-</h3>
<ol>
<li>आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा कि &#8216;सर्वोत्तम होने से अच्छा है कि आप अनूठे हो जाइए&#8217;।</li>
<li>जस्टिस सीकरी ने कहा-आधार समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों को सशक्त बनाता है। यह उन्हें एक पहचान देता है। यह अन्य आईडी प्रूफ से अलग है और इसकी दूसरी कॉपी नहीं बनाई जा सकती।</li>
<li>आधार नामांकन के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की तरफ से नागरिकों का थोड़ा डेमोग्राफिक एवं बॉयोमेट्रिक डाटा जुटाया गया। व्यक्ति को दिया गया आधार नंबर अनूठा है और यह किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह लोगों के आधार को सुरक्षित बनाने के लिए और कड़ा कानून बनाए। कोर्ट ने कहा कि &#8216;शिक्षा से हम अंगूठे के निशान से हस्ताक्षर की तरफ बढ़े लेकिन तकनीक हमें फिर से हस्ताक्षर से अंगूठे के निशान की तरफ ले गई है।&#8217;</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि स्कूलों में दाखिले के लिए आधार जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल बच्चों के दाखिले के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता। स्कूल में छह से 14 साल के बच्चों के दाखिले में आधार जरूरी नहीं होगा।</li>
<li>शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि अवैध प्रवासी आधार कार्ड न बनवा पाएं।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी मोबाइल कंपनी अपनी सेवा देने के लिए आधार की मांग नहीं कर सकती। यह एक बड़ा फैसला है क्योंकि ज्यादातर मोबाइल कंपनियां अपनी सेवा देने के लिए लोगों से आधार कार्ड की मांग करती हैं।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट से आधार लिंक करना जरूरी नहीं है। जबकि पैन कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ना अनिवार्य होगा। कोर्ट ने कहा कि बैंक अकाउंट खोलने के लिए आधार जरूरी नहीं। कोर्ट की इजाजत के बिना बॉयोमेट्रिक डाटा किसी एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जा सकता।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट ने आधार एक्ट के सेक्शन 57 को निरस्त कर दिया है। यह सेक्शन रद्द हो जाने से अब निजी कंपनियां लोगों से उनका आधार कार्ड नहीं मांग सकेंगी।</li>
<li>आधार कार्ड यूजीसी, एनईईटी और सीबीएसई की परीक्षा के लिए अनिवार्य नहीं होगा। निजी कंपनियां आधार कार्ड नहीं मांग सकतीं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आधार निजता के अधिकार का उल्लंघन करता है।</li>
</ol>
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		<title>क्या दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर लग सकता है बैन ?</title>
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		<pubDate>Mon, 24 Sep 2018 16:22:22 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच गंभीर अपराध के मामलों में क्या आरोप तय हो जाने पर ही नेताओं के चुनाव लड़ने पर बैन लगा देना चाहिए, इस मामले पर कल यानि 25 सितंबर को फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान ने पिछले 28 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया ... <a title="क्या दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर लग सकता है बैन ?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/can-the-tainted-leaders-bend-on-fighting-the-elections-news/" aria-label="Read more about क्या दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर लग सकता है बैन ?">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://spiderimg.amarujala.com/assets/images/2018/05/03/750x506/supreme-court_1525366260.jpeg" alt="Image result for à¤¸à¥à¤ªà¥à¤°à¥à¤® à¤à¥à¤°à¥à¤" /></p>
<p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच गंभीर अपराध के मामलों में क्या आरोप तय हो जाने पर ही नेताओं के चुनाव लड़ने पर बैन लगा देना चाहिए, इस मामले पर कल यानि 25 सितंबर को फैसला सुनाएगा। सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान ने पिछले 28 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।</p>
<p>इस संविधान बेंच में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा शामिल हैं। सुनवाई के दौरान निर्वाचन आयोग ने याचिकाकर्ता की मांग का समर्थन किया था।</p>
<p>निर्वाचन आयोग ने कहा था कि हमने 1997 में और लॉ कमीशन 1999 में जनप्रतिनिधित्व कानून में बदलाव की सिफारिश कर चुके हैं लेकिन सरकार बदलाव नहीं करना चाहती। केंद्र सरकार ने कोर्ट में इस याचिका का विरोध किया था। सरकार का कहना था कि जब तक कोई दोषी साबित न हो जाये, तब तक किसी को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है।</p>
<p>पिछले 21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि जनप्रतिनिधियों के मुकदमों के निपटारे के लिए कितने स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट बने हैं? कोर्ट ने पूछा था कि सांसदों औऱ विधायकों के खिलाफ कितने केस लंबित है?</p>
<p>कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि स्पेशल कोर्ट में कितने केस ट्रांसफर हुए? सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दिनेश द्विवेदी ने कहा था कि अगर लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो सुप्रीम कोर्ट को आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा था कि जो उम्मीदवार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले होते हैं उनके जितने की उम्मीद बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों से ज्यादा होती है। उन्होंने कहा था कि कोर्ट संसद को परमादेश नहीं दे सकता है तो वो निर्वाचन आयोग को परमादेश जारी करे।</p>
<h3>
जस्टिस आरएफ नरीमन ने कहा था</h3>
<p>अयोग्यता भूल जाइए क्या हम आरोपियों पर रोक के लिए नियम बना सकते हैं। कोर्ट ने कहा था कि चुनाव लड़ने के लिए योग्यता को मजबूत किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा था कि चुनाव लड़ने की चाहत रखने वाले आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों की तस्वीर या होर्डिंग उसी तरह लगवा देनी चाहिए जैसे सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी जारी किए जाते हैं।</p>
<p>पिछले 9 अगस्त को केंद्र सरकार ने कहा था कि कानून बनाना संसद का काम है। कोर्ट के आदेश से कानून को नहीं बदला जा सकता है, जबकि याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राजनीतिक दल अपराधियों को बाहर करने पर गंभीर नहीं है।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील दिनेश द्विवेदी ने कहा था कि विधायिका के लिए यह संभव है कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को अयोग्य करार दे सकते हैं लेकिन अगर विधायिका इस पर मौन हो तो क्या न्यायपालिका को दिशानिर्देश जारी नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि सेलेक्ट कमेटी ने केवल इस न्यायशास्त्र पर इसे खारिज कर दिया कि जब तक दोषी न करार दिया जाए तब तक व्यक्ति निर्दोष है।</p>
<p>विधायिका के इसी मौन की वजह से 34 फीसदी विधायक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले हैं। राजनीति का अपराधिकरण लोकतंत्र का मजाक है। यह एक व्यक्ति एक वोट के सिद्धांत को खारिज करता है। द्विवेदी ने सांसदों और विधायकों द्वारा शपथ लेते समय बोले गए शब्द को पढ़ा था, जिसमें लिखा गया है कि भारत की एकता और संप्रभुता की रक्षा करेंगे। द्विवेदी ने कहा था कि 1950 में दोषी पाए जाने पर अयोग्य ठहराने का प्रावधान लागू किया गया लेकिन आज भी जीताऊ फैक्टर का खास ख्याल रखा जाता है</p>
<h3>लॉ कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है</h3>
<p>जीताऊ फैक्टर राजनीतिक दलों की वचनबद्धता खत्म करता है। तब जस्टिस आरएफ नरीमन ने कहा कि आपकी दलील के मुताबिक हमें सभी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। आप चाहते हैं कि हम संसद को ये समझाएं कि वे विधायिका में अपराधीकरण रोकने के लिए कानून बनाएं। उन्होंने कहा कि ये एक लक्ष्मण रेखा है कि हम संसद को कहें कि आप ऐसा कानून बनाइए। तब द्विवेदी ने कहा कि अगर विधायिका मौन हो तो ऐसा कर सकते हैं।</p>
<p>चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा था कि हम निर्वाचन आयोग को एक परमादेश जारी करें कि आपराधिक प्रक्रिया के सभी तीन चरणों के आधार पर उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकें लेकिन क्या हम इसे कर सकते हैं या संसद को इस पर कानून बनाना चाहिए। तब जस्टिस नरीमन ने कहा कि अयोग्यता का आधार तय करने के लिए किसी निकाय को निर्देश देना मुश्किल है। किसी व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होता है और वो नामांकन दाखिल करता है तो फास्ट ट्रैक प्रकिया अपनाए जने की जरुरत है।</p>
<h3>चीफ जस्टिस ने कहा</h3>
<p>ट्रायल पूरी हो और जैसे ही ये जजमेंट आता है कि वो व्यक्ति दोषी है तो वह अपने आप अयोग्य हो जाएगा है। वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि निर्वाचन आयोग यह निर्देश दे सकता है कि आरोप तय होना दोषी होने से अलग है। धारा 125ए धारा 125 से अलग है।</p>
<p>केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि अयोग्य ठहराने के लिए कुछ और जोड़ने की जरुरत नहीं है। हम अधिकारों के विभाजन पर बहस करना चाहते हैं कि धारा 122 इसमें लागू नहीं होती है। जस्टिस नरीमन ने कहा कि मान लें कि एक व्यक्ति पर हत्या का आरोप है और उसके खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं तो क्या वह शपथ लेने के योग्य है।</p>
<p>इस पर अटार्नी जनरल ने कहा था कि धारा 21 कहती है कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन तब तक नहीं होगा जब तक उसे कोर्ट द्वारा दोषी न करार दिया जाए। अटार्नी जनरल ने कहा था कि ऐसा देखने में आता है कि ट्रायल के दौरान कुछ गवाह नहीं आते हैं और ट्रायल में अनावश्यक देरी होती है। तब चीफ जस्टिस ने कहा था कि अपराध प्रक्रिया अलग मसला है इसलिए अटार्नी जनरल को इस मुद्दे पर दलीलें रखनी चाहिए।</p>
<p>अटार्नी जनरल ने चीफ जस्टिस के 2016 के एक फैसले को पढ़ते हुए कहा था कि भ्रष्टाचार एक संज्ञा है लेकिन ये तब क्रिया हो जाती है जब ये राजनीति में प्रवेश करती है। ये इंफेक्टिव होती है और इसका एंटीबॉयटिक से ही रोका जा सकता है। इसके बाद द्विवेदी ने कहा कि ये एंटीबॉयटिक कोर्ट ही हो सकती है।</p>
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		<title>अठावले का बेतुका बयान, कहा-मुझे फ़ोकट में मिलता है पेट्रोल-डीजल; चूंकि मैं मंत्री हूं</title>
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		<pubDate>Sun, 16 Sep 2018 03:07:49 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली: पेट्रोल और डीजलों की कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी से आम जनता त्रस्त है। वहीं केंद्र सरकार में समाज कल्याण और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले को इससे कोई दिक्कत नहीं है। अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले अठावले का कहना है कि मंत्री होने के नाते मुझे पेट्रोल-डीजल फ्री मिलता है ... <a title="अठावले का बेतुका बयान, कहा-मुझे फ़ोकट में मिलता है पेट्रोल-डीजल; चूंकि मैं मंत्री हूं" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/union-minister-ramdas-athawale-says-i-get-petrol-and-diesel-for-free-because-i-am-a-minister-news/" aria-label="Read more about अठावले का बेतुका बयान, कहा-मुझे फ़ोकट में मिलता है पेट्रोल-डीजल; चूंकि मैं मंत्री हूं">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p class="rtejustify"><strong>नई दिल्ली:</strong> पेट्रोल और डीजलों की कीमतों में हो रही बढ़ोत्तरी से आम जनता त्रस्त है। वहीं केंद्र सरकार में समाज कल्याण और अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले को इससे कोई दिक्कत नहीं है। अक्सर अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले अठावले का कहना है कि मंत्री होने के नाते मुझे पेट्रोल-डीजल फ्री मिलता है इसलिए मुझे कोई परेशानी नहीं है।</p>
<h3 class="rtejustify">मीडिया से बात करते हुए अठावले ने कहा</h3>
<p class="rtejustify">&#8216;पेट्रोल-डीजल के भाव कम होना चाहिए और मेरी पार्टी की भूमिका भी यही है कि पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ रहे हैं और वो कम होने चाहिए। इसके लिए सरकार जरुर सोच रही है। धर्मेंद्र प्रधान जो पेट्रोलियम मंत्री हैं उनके उपर जिम्मेदारी सौंप दी गई है। मैं परेशान नहीं हूं.. क्योंकि मैं मंत्री हूं तो फोकट में डीजल मिलता है। अगर मेरा मंत्री पद जाएगा तो मैं परेशान हो जाऊंगा। समझ सकते हैं कि रेट बढ़ने से जनता परेशान है और रेट कम करने की कोशिश सरकार की है।&#8217;</p>
<p>यहीं नहीं अठावले ने कहा कि भाजपा को 2019 के चुनावों में अच्छी सफलता मिलेगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इन साढ़े चार वर्षों में खूब कार्य किया है और मुझे लगता है कि जब इसके 5 साल पूरे हो जाएंगे और 2019 का चुनाव आएगा तो बीजेपी को 300 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।</p>
<p>कुछ दिन पहले ही अठावले ने कहा था कि आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को भी 25 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार को सभी दलों को साथ लेकर आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 75 फीसदी करना होगा।</p>
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		<title>एससी-एसटी कानून : केंद्र सरकार से जवाब तलब&#8230;</title>
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		<pubDate>Fri, 07 Sep 2018 09:14:53 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[मोदी सर्कार]]></category>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई पर शुक्रवार को रजामंदी जता दी, हालांकि इसने फिलहाल कानून के अमल पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई ... <a title="एससी-एसटी कानून : केंद्र सरकार से जवाब तलब&#8230;" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/sc-st-law-calls-from-the-central-government-news/" aria-label="Read more about एससी-एसटी कानून : केंद्र सरकार से जवाब तलब&#8230;">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><span class="storydetails">नयी दिल्ली।  उच्चतम न्यायालय ने अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई पर शुक्रवार को रजामंदी जता दी, हालांकि इसने फिलहाल कानून के अमल पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया।<br />
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने वकील पृथ्वी राज चौहान और प्रिया शर्मा की याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार तो कर ली लेकिन संशोधन कानून के अमल पर स्थगनादेश जारी करने से इन्कार कर दिया।<br />
</span></p>
<h3><span class="storydetails">न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा</span></h3>
<p><span class="storydetails">“केंद्र सरकार का पक्ष जाने बिना कानून के अमल पर रोक लगाना मुनासिब नहीं होगा।” इसके साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके छह सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दायर करने को कहा है।<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने गत 20 मार्च को दिये गए फैसले में एससी-एसटी कानून के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए धारा 18 के उन प्रावधानों को निरस्त कर दिया था, जिसके तहत आरोपी को तुरंत गिरफ्तार करने, तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और अग्रिम जमानत न देने की व्यवस्था की गयी थी।<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">न्यायालय ने इन प्रावधानों को निरस्त करते हुए कहा था कि एससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून में शिकायत मिलने के बाद तुरंत मामला दर्ज नहीं होगा, पुलिस उपाधीक्षक या इस रैंक के अधिकारी पहले शिकायत की प्रारंभिक जांच करके पता लगाएगा कि मामला झूठा या दुर्भावना से प्रेरित तो नहीं है। इसके अलावा इस कानून में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अभियुक्त को तुरंत गिरफ्तार नहीं किया जायेगा। सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले सक्षम अधिकारी और सामान्य व्यक्ति की गिरफ्तारी से पहले एसएसपी की मंजूरी ली जायेगी। इतना ही नहीं न्यायालय ने अभियुक्त की अग्रिम जमानत का भी रास्ता खोल दिया था।<br />
</span></p>
<p><span class="storydetails">न्यायालय के इस फैसले का व्यापक राजनीतिक विरोध हुआ था और विभिन्न राजनीतिक दलों ने इससे कानून के कमजोर होने की बात कही थी। उसके बाद दो अप्रैल को देश भर में विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन हुए थे।<br />
केंद्र सरकार ने पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, जो अब भी न्यायालय में लंबित है, लेकिन बाद में भारी राजनीतिक दबाव के बीच सरकार ने मानसून सत्र के दौरान संसद में संशोधन विधेयक पेश किया और दोनों सदनों में यह पारित भी हो गया। राष्ट्रपति की मोहर के बाद इसे अधिसूचित भी कर दिया गया है।<br />
संशोधन कानून के तहत धारा 18ए जोड़कर न्यायालय द्वारा निरस्त किये गये प्रावधानों को फिर से बहाल करने की कवायद की गयी है ताकि कानून को मूल स्वरूप में लाया जा सके। इसी कवायद की वैधानिकता को याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी है।</span></p>
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		<title>दिल्ली का बॉस कौन? केजरीवाल या उपराज्यपाल, आज आ सकता है SC का फैसला</title>
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		<pubDate>Wed, 04 Jul 2018 03:15:38 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Chief Minister Arvind Kejriwal]]></category>
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		<category><![CDATA[नरेंद्र मोदी सरकार]]></category>
		<category><![CDATA[मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल]]></category>
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					<description><![CDATA[फैसले को चुनौती देने के बाद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने पिछले साल 2 नवंबर से सुनवाई शुरू की थी। महज 15 सुनवाई में पूरे मामले को सुनने के बाद 6 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा गया था। नई दिल्ली: केंद्र सरकार और दिल्ली की केजरीवाल सरकार के बीच ... <a title="दिल्ली का बॉस कौन? केजरीवाल या उपराज्यपाल, आज आ सकता है SC का फैसला" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/who-is-the-head-of-delhi-chief-minister-arvind-kejriwal-or-lt-governor-anil-baijal-supreme-court-to-decide-news/" aria-label="Read more about दिल्ली का बॉस कौन? केजरीवाल या उपराज्यपाल, आज आ सकता है SC का फैसला">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4 class="artdec">फैसले को चुनौती देने के बाद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने पिछले साल 2 नवंबर से सुनवाई शुरू की थी। महज 15 सुनवाई में पूरे मामले को सुनने के बाद 6 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा गया था।</h4>
<p class="artconfp"><strong>नई दिल्ली: </strong>केंद्र सरकार और दिल्ली की केजरीवाल सरकार के बीच जारी जंग आज खत्म हो सकती है। आज इस बात का फैसला हो सकता है कि दिल्ली का असली बॉस आखिर कौन है, दिल्ली की जनता के द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री या फिर लेफ्टिनेंट गवर्नर? केंद्र और दिल्ली सरकार के अधिकारों के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच आज फैसला सुना सकती है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक मुखिया हैं और कोई भी फैसला उनकी मंजूरी के बिना नहीं लिया जाए।</p>
<p>फैसले को चुनौती देने के बाद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने पिछले साल 2 नवंबर से सुनवाई शुरू की थी। महज 15 सुनवाई में पूरे मामले को सुनने के बाद 6 दिसंबर को फैसला सुरक्षित रखा गया था। आम आदमी पार्टी की सरकार की ओर से पी चिदंबरम, गोपाल सुब्रह्मण्यम, राजीव धवन और इंदिरा जयसिंह जैसे नामी वकीलों ने दलीलें पेश की थी।</p>
<div class="teads-inread">
<div>
<div id="teads0" class="teads-player">सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक बार कोर्ट ने कहा था कि पहली नज़र में उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रमुख नज़र आते हैं लेकिन रोज़ाना के कामकाज में उनकी दखलंदाज़ी से मुश्किल आ सकती है। दिल्ली के लोगों के हित मे राज्य सरकार और एलजी को मिल कर काम करना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि चुनी हुई सरकार के पास कुछ शक्तियां होनी चाहिए, नहीं तो वह काम नहीं कर पाएगी।</div>
</div>
</div>
<p><strong>संविधान के अनुच्छेद 239 AA के तहत दिल्ली में विधानसभा का प्रावधान किया है</strong></p>
<p>वहीं, इस पर केंद्र और उप-राज्यपाल की तरफ से ये दलील दी गई थी कि दिल्ली एक राज्य नहीं है, इसलिए उपराज्यपाल को यहां विशेष अधिकार मिले हैं। जबकि दिल्ली सरकार की दलील थी कि दिल्ली का दर्जा दूसरे केंद्रशासित क्षेत्रों से अलग है। संविधान के अनुच्छेद 239 AA के तहत दिल्ली में विधानसभा का प्रावधान किया है। यहां निर्वाचित प्रतिनिधियों के ज़रिए एक सरकार का गठन होता है। उसे फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। बता दें कि 2015 में दूसरी बार सत्ता में आने के बाद से ही केजरीवाल सरकार और उप-राज्यपाल के बीच अधिकारों की जंग चल रही है।</p>
<p><strong>एलजी नजीब जंग के साथ केजरीवाल सरकार का विवाद चला</strong></p>
<p>पहले तत्कालीन एलजी नजीब जंग के साथ केजरीवाल सरकार का विवाद चला, बाद में दिसंबर, 2016 में अनिल बैजल के एलजी बनने के बाद से दोबारा शुरू हुई ये जंग अब तक जारी है। विवादों की बात करें तो मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मारपीट के बाद अधिकारियों ने हड़ताल कर दी। घर-घर राशन वितरण की योजना को मंजूरी नहीं देने पर भी विवाद रहा। इसे लेकर पिछले दिनों केजरीवाल ने 3 मंत्रियों के साथ 9 दिन तक उपराज्यपाल सचिवालय में धरना और भूख हड़ताल भी की थी। हालांकि आज तीन साल से चल रही इस जंग का पटाक्षेप हो सकता है।</p>
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