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	<title>गंगा स्नान &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>माघ पूर्णिमा आज :  जानिए पूजा विधि और शुभ मुहर्त&#8230;</title>
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		<pubDate>Mon, 18 Feb 2019 21:01:06 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://www.newstracklive.com/uploads/other-news/astrology/Feb/18/big_thumb/maagh-purnima_5c6a77892773b.JPG" alt="Image result for à¤®à¤¾à¤ à¤ªà¥à¤°à¥à¤£à¤¿à¤®à¤¾ à¤à¤ :Â  à¤®à¤¾à¤ à¤à¤à¤à¤¾ à¤¸à¥à¤¨à¤¾à¤¨ à¤¸à¥ à¤®à¤¿à¤²à¥à¤à¤à¥ à¤¸à¤­à¥ à¤¤à¤°à¤¹ à¤à¥ à¤²à¤¾à¤­" /></p>
<p><strong>हिन्दू धर्म</strong> में माघी पूर्णिमा का बहुत महत्व है। जो कि इस वर्ष 19 फरवरी 2019 मंगलवार को है। हिंदू कैलेंडर के माघ महीने की पूर्णिमा तिथि को माघी पूर्णिमा कहते हैं। पंचांग हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष का अभिन्न अंग है और हिंदू धर्म के सभी धार्मिक कार्य पंचांग के अनुसार ही होते हैं। इस साल माघ पूर्णिमा 19 फरवरी को है। धार्मिक आस्था के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान और दान करने पर पापों से मुक्ति मिलती है।  ऐसी मान्यता है माघ पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु स्वयं गंगा नदी में स्नान करने आते हैं। इसलिए जो भी माघ पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान करता है उसको सभी तरह के पुण्य लाभ मिलते हैं। माघ पूर्णिमा में शुभ मुहूर्त में पूजन विधि अनुसार करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है।</p>
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<div id="div-ads-3">पुराण के अनुसार बाकी के महीनों में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं। माघ मास स्नान के आलावा दान का विशेष महत्व है। दान में तिल, गुड़ और कंबल का विशेष पुण्य है। इस बार माघ पूर्णिमा पर अर्ध्य कुम्भ का संयोग भी बना है। मघा नक्षत्र में माघ पूर्णिमा आई है।</div>
</div>
<p>इस दौरान गंगा स्नान करने से इसी जन्म में मुक्ति की प्राप्ति होती है। यही नहीं स्नान के जल में गंगा जल डालकर स्नान करना भी फलदायी होता है। माना जाता है कि माघ पूर्णिमा पर स्नान करने वाले लोगों पर श्री कृष्ण की विशेष कृपा होती है। साथ ही भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर व्यक्ति को धन-धान्य, सुख-समृद्धि और संतान के साथ मुक्ति का आर्शिवाद प्रदान करते हैं।</p>
<p><strong>ऐसे करें पूजा</strong><br />
1- गंगा स्नान के बाद भगवान शिव और विष्णु की पूजा करें।<br />
2- हवन या जाप करें।<br />
3- अनाज, वस्त्र, फल, बर्तन, घी, गुड़, जल से भरा घड़ा दान करें। ऐसा करने से सभी पापों से मुक्ति मिलेगी।<br />
4- पितरों का श्राद्ध करें। इससे उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी।</p>
<p><strong>कुम्भ में गंगा स्नान का शुभ मुहूर्त- </strong></p>
<p><strong>पूर्णिमा आरंभ:</strong> 18 फरवरी 2019, सोमवार रात 01:12 बजे।<br />
<strong>पूर्णिमा समाप्त:</strong> 19 फरवरी 2019, मंगलवार 09:24 बजे।</p>
<p>सुबह 4 बजकर 21 मिनट से स्नान शुरू होगा, लेकिन स्नान पूरे दिन चलेगा।<br />
कुम्भ स्नान करने से सारे कष्टों से मुक्ति मिलेगी।<br />
माघ पूर्णिमा स्नान से धन लाभ होगा।<br />
स्नान के बाद दान ध्यान और पूजा करें।</p>
<p><strong>भगवान् का कल्पवास खत्म होगा-</strong><br />
प्रयागराज में गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर कल्पवास की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है। तीर्थराज प्रयाग में संगम के निकट हिन्दू माघ महीने में कल्पवास करते हैं। पौष पूर्णिमा से कल्पवास आरंभ होता है और माघी पूर्णिमा के साथ संपन्न होता है। इस कल्पवास का भी माघ पूर्णिमा के दिन स्नान के साथ अंत हो जाता है। इस मास में देवी-देवताओं का संगम तट पर निवास करते हैं। इससे कल्पवास का महत्त्व बढ़ जाता है। मान्यता है कि माघ पूर्णिमा पर ब्रह्म मुहूर्त में नदी स्नान करने से शारीरिक समस्याएं दूर हो जाती हैं। इस दिन तिल और कंबल का दान करने से नरक लोक से मुक्ति मिलती है।</p>
<p><strong>गंगा जल से स्नान के बाद क्या करें- </strong></p>
<p>1- स्नान के बाद सूर्यदेव को प्रणाम करें।<br />
2- ॐ घृणि सूर्याय नमः मन्त्र का जाप करें।<br />
3- सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद माघ पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।<br />
4- भगवान विष्णु की पूजा करें।<br />
5- पूजा के बाद दान दक्षिणा करें और दान में विशेष रूप से काले तिल प्रयोग करें।<br />
6- काले तिल से ही हवन और पितरों का तर्पण करें।<br />
7- इस दिन झूठ बोलने से बचें।</p>
<p><strong>इस तरह मिलते हैं पुण्य</strong><br />
धार्मिक आस्था है कि माघ पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले गंगा में स्नान करने के बाद पूजन करना चाहिए और सूर्यदेव को अर्घ्य देना चाहिए। यदि गंगा स्नान के लिए जाना संभव न हो तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर भी कर सकते हैं। इसके बाद पूजा-पाठ कर साधु-संतों और जरूरमंतों को दान देना चाहिए। ऐसा करने से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। इससे हमारे भाग्य के द्वार खुलते हैं।</p>
<p><strong>क्यों करते हैं गंगा स्नान?</strong><br />
पौराणिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के अवसर स्वयं श्रीहरि भगवान विष्णु पृथ्वी पर आकर गंगा के निर्मल जल से स्नान करते हैं। हमारे देश में किसी भी दिन और तिथि में गंगा स्नान अति उत्तम और सुखदाई माना जाता है। लेकिन माघ पूर्णिमा पर जब स्वयं श्रीहरि इस पावन जल में स्नान करते हैं तो इस दिन का महत्व और अधिक बढ़ जाता है।</p>
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		<title>कार्तिक पूर्णिमा:  इस साल बन रहा है ये खास योग, इस विधि से करें पूजा, होंगे सभी दुःख दूर</title>
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		<pubDate>Wed, 21 Nov 2018 11:46:19 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><img decoding="async" src="https://static.hindi.firstpost.com/static-hindi-firstpost/uploads/886x498/jpg/2016/11/Ganga_aarti_with_resin_at_Dasaswamedh_Ghat_Varanasi_01.jpg" alt="Kartik Purnima 2018: à¤à¤¸ à¤¸à¤¾à¤² à¤¬à¤¨ à¤°à¤¹à¤¾ à¤¹à¥ à¤à¤¾à¤¸ à¤¸à¤®à¥à¤¦à¥à¤§à¤¿ à¤¯à¥à¤, à¤à¤¸ à¤µà¤¿à¤§à¤¿ à¤¸à¥ à¤à¤°à¥à¤ à¤ªà¥à¤à¤¾, à¤¹à¥à¤à¤à¥ à¤¸à¤­à¥ à¤¦à¥à¤· à¤¦à¥à¤°" /></p>
<p>हिंदु धर्म में कार्तिक पूर्णिमा भारत का  सबसे प्रमुख त्&#x200d;योहार माना जाता है इसे  देव दीपावली भी कहा जाता है, जो 23 नवंबर को है। इस दिन गंगा स्नान और दीपदान का बड़ा महत्व है। ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य ने इसे महापर्व माना है।</p>
<p><strong>क्या है महत्व?</strong></p>
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<div id="google_ads_iframe_/1039154/Hindi_FirstPost/Hindi_Firstpost_ROS/Hindi_Firstpost_ROS_OOP_2x2_0__container__">मान्यता है कि इस दिन भक्त सभी देवी देवताओं को एक साथ प्रसन्न कर सकते हैं. इस विशेष मौके पर विधि-विधान से पूजा अर्चना करना ना केवल पवित्र माना जाता है बल्कि इससे समृद्धि भी आती है. इसके साथ ही इससे सभी कष्ट दूर हो सकते हैं. इस दिन पूजा करने से कुंडली, धन और शनि दोनों के ही दोष दूर हो जाते हैं.</div>
<div></div>
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</div>
<p><strong>क्यों कहते हैं त्रिपुरी पूर्णिमा?</strong></p>
<p>मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासर का वध किया था. इसलिए इस तिथि को त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है. दरअसल मान्यता है कि त्रिपुर ने एक लाख वर्ष तक प्रयाग में भारी तपस्या कर ब्रह्मा जी से मनुष्य और देवताओं के हाथों ना मारे जाने का वरदान हासिल किया था. इसके बाद भगवान शिव ने ही उसका वध कर संसार को उससे मुक्ति दिलाई थी. इसेक अलावा इस तिथि को गंगा दशहरा के नाम से भी जाना जाता है.</p>
<p><strong>इस दिन क्या करें?</strong></p>
<p>मान्यता है कि इस दिन इस चावल दान करना बेहद शुभ होता है. दअसल चावल का संबंध च्रंद से है इसलिए कहते हैं कि ये शुभ फल देता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन घर को साफ रखना चाहिए. इसी के साथ ही घर के दरवाजे पर रंगोली बनाना भी बहुत शुभ माना जाता है. इस कार्तिक पूर्णिमा को विशेष समृद्धि योग बन रहा है, इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाना बहुत शुभ होगा. डल चढ़ाने के बाद 108 बार ओम नम: शिवाय का जाप भी करें.</p>
<p><img decoding="async" src="https://c1.staticflickr.com/5/4444/26460907139_db497c6cec_b.jpg" alt="Related image" /></p>
<p><strong>पूजा विधि</strong></p>
<p>1. आप प्रातः काल शीघ्र उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करें. जल में चावल और लाल फूल भी डालें.</p>
<p>2. सुबह स्नान के बाद घर के मुख्यद्वार पर अपने हाथों से आम के पत्तों का तोरण बनाकर बांधे.</p>
<p>3. सरसों का तेल, तिल, काले वस्त्र आदि किसी जरूरतमंद को दान करें.</p>
<p>4. सायं काल में तुलसी के पास दीपक जलाएं और उनकी परिक्रमा करें.</p>
<p>5. इस दिन ब्राह्मण के साथ ही अपनी बहन, बहन के लड़के, यानी भान्जे, बुआ के बेटे, मामा को भी दान स्वरूप कुछ देना चाहिए.</p>
<p>6. जब चंद्रोदय हो रहा हो, तो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी का आशीर्वाद मिलता है.</p>
<p><strong>कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और इतिहास</strong></p>
<p>अपने पहले अवतार में भगवान विष्णु ने मीन अर्थात मछली का रूप धारण किया था। भगवान को यह अवतार वेदों की रक्षा,प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों,अनाजों एवं राजा सत्यव्रत की रक्षा के लिए लेना पड़ा था। इसी से सृष्टि का निर्माण कार्य फिर से आसान हो सका था।</p>
<p>शिव भक्तों के अनुसार इसी दिन भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का संहार कर दिया, जिससे वह त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए। इससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और शिव जी इन्हें त्रिपुरारी नाम दे दिया, जिसके चलते इसे &#8216;त्रिपुरी पूर्णिमा&#8217; भी कहा जाता है।</p>
<p>वहीं इसी दिन सिख धर्म में कार्तिक पूर्णिमा को प्रकाशोत्सव के रूप में मनाया जाता है।, क्योंकि इसी दिन सिख सम्प्रदाय के संस्थापक गुरु नानक देव का जन्म हुआ था। इस दिन सिख सम्प्रदाय के अनुयाई सुबह स्नान कर गुरुद्वारों में जाकर गुरुवाणी सुनते हैं और नानक जी के बताए रास्ते पर चलने की सौगंध लेते हैं। इसे गुरु पर्व भी कहा जाता है।</p>
<p><strong>कार्तिक पूर्णिमा पर दान का महत्व</strong></p>
<p>इस तरह यह दिन एक नहीं बल्कि कई वजहों से खास है। इस दिन गंगा-स्नान,दीपदान,अन्य दानों आदि का विशेष महत्त्व है। इस दिन क्षीरसागर दान का अनंत महत्व है।क्षीरसागर का दान 24 अंगुल के बर्तन में दूध भरकर उसमें स्वर्ण या रजत की मछली छोड़कर किया जाता है। यह उत्सव दीपावली की भांति दीप जलाकर सायंकाल में मनाया जाता है।</p>
<p>हिंदू धर्म के अनुसार, माना जाता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छह कृतिकाओं का पूजन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा की छह कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त</p>
<p><strong>मन्त्रोजाप</strong></p>
<p>वसंतबान्धव विभो शीतांशो स्वस्ति नः कुरू&#8221; चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।</p>
<p>&nbsp;</p>
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