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	<title>चंपत राय एसआईटी जांच &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>राम मंदिर चंदा विवाद के बीच चंपत राय पर एक और गंभीर आरोप: लगा करोड़ों के गबन और मंदिर पर कब्जे का इल्जाम, SIT से शिकायत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Jul 2026 07:52:20 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="0"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-520140" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/ram-temple-champat-rai.webp" alt="" width="1280" height="720" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/ram-temple-champat-rai.webp 1280w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/ram-temple-champat-rai-300x169.webp 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/ram-temple-champat-rai-1024x576.webp 1024w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/07/ram-temple-champat-rai-768x432.webp 768w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></p>
<p data-path-to-node="1"><b data-path-to-node="1" data-index-in-node="0">अयोध्या।</b> श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चढ़ावे में चोरी का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय एक और नए विवाद में घिर गए हैं। इस बार उन पर अयोध्या के ही एक स्थानीय निवासी ने करोड़ों रुपये के गबन, देवोत्तर जमीन के अवैध सौदे और एक ऐतिहासिक मंदिर पर जबरन कब्जा करने के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) को दी गई इस शिकायत के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।</p>
<h3 data-path-to-node="3"><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0">चंपत राय और सहयोगियों के खिलाफ SIT में शिकायत</b></h3>
<p data-path-to-node="4">अयोध्या के रहने वाले हरिशंकर सफरीवाला ने SIT को सौंपे अपने शिकायती पत्र में चंपत राय और उनके करीबियों पर कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि वह &#8216;श्री राम निवास मंदिर, बरहटा, रामकोट (अयोध्या)&#8217; की पंच समिति के प्रमुख हैं, और उन्हें 30 दिसंबर 1987 को तत्कालीन महंत रामगोपाल दास ने नियुक्त किया था। साल 2018 में इस मंदिर के प्रबंधन को विधिवत रजिस्टर्ड कराया गया, जिसके तहत वह मंदिर के मुख्य कार्यपालक और प्रशासनिक प्रमुख हैं।</p>
<p data-path-to-node="5">शिकायत में आरोप है कि चंपत राय और उनके सहयोगियों ने मिलकर मंदिर की संपत्तियों पर अवैध कब्जा किया, फर्जी दस्तावेज तैयार किए और दान में मिली भारी-भरकम राशि का दुरुपयोग किया।</p>
<h3 data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">5 करोड़ 80 लाख की देवोत्तर संपत्ति बेचने का सनसनीखेज आरोप</b></h3>
<p data-path-to-node="7">शिकायतकर्ता हरिशंकर के मुताबिक, उन्होंने 11 अगस्त 2021 को वीरेंद्र दास उर्फ वीरू को मंदिर का महंत नियुक्त किया था। नियुक्ति पत्र में साफ शर्त थी कि समिति की लिखित अनुमति के बिना मंदिर की कोई भी संपत्ति बेची नहीं जा सकती।</p>
<p data-path-to-node="8">आरोप है कि चंपत राय को यह भली-भांति पता था कि यह एक &#8216;देवोत्तर संपत्ति&#8217; (भगवान की संपत्ति) है, जिसे खरीदा या बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद, उन्होंने कथित तौर पर अन्य लोगों के साथ मिलकर इस जमीन का करीब 5 करोड़ 80 लाख रुपये में सौदा तय कर लिया। हरिशंकर का दावा है कि इस सौदे के लिए 70 लाख रुपये बतौर पेशगी (एडवांस) दिए गए और 22 दिसंबर 2022 को एक &#8216;बयानामा बिना कब्जा&#8217; का दस्तावेज भी रजिस्टर्ड कराया गया, जिसमें चंपत राय की तस्वीर लगी है। आरोप है कि यह 70 लाख रुपये की रकम मंदिर के आधिकारिक खाते में जमा ही नहीं हुई और इसका गबन कर लिया गया।</p>
<h3 data-path-to-node="9"><b data-path-to-node="9" data-index-in-node="0">भगवान के आभूषण, सोने का पलंग और कार्यालय पर कब्जे का दावा</b></h3>
<p data-path-to-node="10">शिकायत में केवल जमीन के सौदे का ही जिक्र नहीं है, बल्कि मंदिर पर जबरन नियंत्रण करने के भी गंभीर आरोप हैं। हरिशंकर सफरीवाला का कहना है कि:</p>
<ul data-path-to-node="11">
<li>
<p data-path-to-node="11,0,0">मंदिर परिसर में मूल पंचों और समिति के सदस्यों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="11,1,0">मंदिर के कार्यालय, अलमारी और फर्नीचर के साथ-साथ भगवान की प्राचीन मूर्तियां, उनके कीमती जेवर, सोने की परत चढ़ा पलंग और सोने-चांदी के बर्तनों को भी अपने कब्जे में ले लिया गया है।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="11,2,0">देवी-देवताओं के आभूषणों का कोई स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है, जिसके गायब होने की आशंका है।</p>
</li>
</ul>
<p data-path-to-node="12">शिकायतकर्ता ने बताया कि इस संबंध में 2 अगस्त 2024 को एक पंजीकृत नोटिस भी भेजा गया था, लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी कार्रवाई न होने पर अब SIT का दरवाजा खटखटाया गया है। इसके अलावा, मंदिर की दुकानों के किरायेदारों से खाली कराने के नाम पर भारी मात्रा में नकद राशि (कैश) वसूलने का भी आरोप लगाया गया है।</p>
<h3 data-path-to-node="14"><b data-path-to-node="14" data-index-in-node="0">SIT के सामने रखी गईं ये 6 प्रमुख मांगें</b></h3>
<ol start="1" data-path-to-node="15">
<li>
<p data-path-to-node="15,0,0"><b data-path-to-node="15,0,0" data-index-in-node="0">कब्जा वापस मिले:</b> श्री राम निवास मंदिर का पूरा नियंत्रण और कब्जा उसकी मूल प्रबंधन समिति (पंचायत समिति) को वापस दिलाया जाए।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="15,1,0"><b data-path-to-node="15,1,0" data-index-in-node="0">मूर्तियां और आभूषण सुरक्षित हों:</b> भगवान की सभी मूर्तियां और आभूषण सुरक्षित वापस कराए जाएं और उनकी गहनता से जांच हो।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="15,2,0"><b data-path-to-node="15,2,0" data-index-in-node="0">कार्यालय की बहाली:</b> मंदिर परिसर खाली कराकर पंचायत समिति को उसका कार्यालय, फर्नीचर और सारा सामान लौटाया जाए।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="15,3,0"><b data-path-to-node="15,3,0" data-index-in-node="0">70 लाख की रिकवरी:</b> फर्जी बयानामे के आधार पर दिए गए 70 लाख रुपये राम जन्मभूमि ट्रस्ट के खाते में वापस जमा कराए जाएं।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="15,4,0"><b data-path-to-node="15,4,0" data-index-in-node="0">गबन की विस्तृत जांच:</b> SIT यह जांच करे कि इस कथित घोटाले में ट्रस्ट के कौन-कौन से लोग शामिल हैं, कितनी संपत्ति बेची गई और कितने रुपयों की हेराफेरी हुई।</p>
</li>
<li>
<p data-path-to-node="15,5,0"><b data-path-to-node="15,5,0" data-index-in-node="0">5 करोड़ का मुआवजा:</b> मंदिर प्रबंधन समिति को हुए भारी नुकसान और मानसिक प्रताड़ना के एवज में कम से कम 5 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाया जाए।</p>
</li>
</ol>
<h3 data-path-to-node="17"><b> </b></h3>
<p data-path-to-node="18">
]]></content:encoded>
					
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		<title>राम मंदिर दान विवाद: करोड़ों के चढ़ावे में सेंधमारी, दान पेटी की चाबी से लेकर गबन के खेल तक: कौन हैं ये 8 किरदार? पढ़ें इनसाइड स्टोरी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 09:35:27 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p data-path-to-node="2"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-517404" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/06/ayodhya-ram-mandir-1767149067157-16_9-2.webp" alt="" width="730" height="411" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/06/ayodhya-ram-mandir-1767149067157-16_9-2.webp 730w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/06/ayodhya-ram-mandir-1767149067157-16_9-2-300x169.webp 300w" sizes="(max-width: 730px) 100vw, 730px" /></p>
<p data-path-to-node="3"><b data-path-to-node="3" data-index-in-node="0">अयोध्या।</b> अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए जा रहे दान को लेकर एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। राम मंदिर में चढ़ावे का यह मामला अब केवल धार्मिक या प्रशासनिक स्तर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि एक बेहद संवेदनशील और बड़े कानूनी मुकदमे का रूप ले चुका है। मंदिर की दान पेटियों से निकलने वाले करोड़ों रुपये के कैश और बेशकीमती आभूषणों की गिनती में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और गड़बड़ी के संगीन आरोप लगे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की तफ्तीश के बाद इस मामले में न केवल एफआईआर दर्ज हुई है, बल्कि एक साथ आठ लोगों की नाटकीय गिरफ्तारी ने राम मंदिर के सुरक्षा और प्रबंधन तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p data-path-to-node="4">इस पूरे घालमेल में जिन आठ लोगों को पुलिस ने धर-दबोचा है, वे सभी मंदिर के भीतर चढ़ावे के प्रबंधन और उसकी गिनती की बेहद गोपनीय प्रक्रिया से सीधे जुड़े हुए थे। इस सिंडिकेट का सबसे मुख्य और चर्चित चेहरा राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव है, जो कभी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का निजी ड्राइवर रह चुका था और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कारसेवकपुरम से गहराई से जुड़ा था। टिन्नू यादव के पास ही दान पेटियों की चाबियां रहती थीं और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से नजदीकी का फायदा उठाकर वह कथित तौर पर मनमानी करता था। वह इस पूरी काउंटिंग टीम का सुपरवाइजर था।</p>
<p data-path-to-node="5">टिन्नू यादव के अलावा, इस खेल में अनुकल्प मिश्रा भी शामिल है, जो कि इस केस के एक अन्य आरोपी रमाशंकर मिश्रा का बेटा होने के साथ-साथ ट्रस्टी अनिल मिश्रा का करीबी रिश्तेदार बताया जा रहा है। इसके अलावा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला (जिसके निजी बैंक खाते से एसआईटी को 5 लाख रुपये की संदिग्ध रकम बरामद हुई है), मनीष यादव (जो सुपरवाइजर टिन्नू यादव का सगा भतीजा है और जिसके घर से चोरी की गई नकदी बरामद हुई है), बैंक के पूर्व कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव (जो कैश गिनने वाले स्टाफ के इंचार्ज थे), करुणेश पांडेय और स्वयं रमाशंकर मिश्रा को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। रमाशंकर मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने एक सोची-समझी साजिश के तहत अपने बेटे और दामाद को भी पैसे गिनने के काम में घुसा रखा था ताकि इस सिंडिकेट को मजबूती दी जा सके।</p>
<p data-path-to-node="6"><b data-path-to-node="6" data-index-in-node="0">BNS की इन गंभीर धाराओं में जकड़े गए आरोपी: क्या मिलेगी जमानत?</b></p>
<p data-path-to-node="6">श्रीराम जन्मभूमि थाने में इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की बेहद सख्त और गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इन धाराओं में मालिक या नियोक्ता की संपत्ति की चोरी करने के आरोप में बीएनएस की धारा 306 लगाई गई है, जो सामान्य चोरी से कहीं अधिक गंभीर मानी जाती है क्योंकि यह भरोसे की हत्या है। इसके साथ ही, सौंपी गई संपत्ति के आपराधिक विश्वासघात और गबन के लिए धारा 316(5) लगाई गई है। गबन की गई इस अकूत संपत्ति और नकदी को बेईमानी से अपने पास छिपाकर रखने के लिए धारा 317(4) और धारा 317(5) के तहत कार्रवाई की गई है।</p>
<p data-path-to-node="7">पुलिस और एसआईटी का साफ मानना है कि यह किसी एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से रची गई एक सामूहिक साजिश थी, इसलिए इस पूरे सिंडिकेट पर आपराधिक साजिश रचने की धारा 61 और समान मंशा से सामूहिक अपराध को अंजाम देने की धारा 3(5) भी ठोंकी गई है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, दर्ज की गई इन छह धाराओं में से चार धाराएं पूरी तरह से गैर-जमानती (Non-Bailable) हैं और दो जमानती हैं। गैर-जमानती होने के कारण पुलिस इन्हें थाने के स्तर से रिहा नहीं कर सकती; अब इन आरोपियों का भविष्य पूरी तरह से अदालत के विवेक, सबूतों की गंभीरता और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।</p>
<p data-path-to-node="8"><b data-path-to-node="8" data-index-in-node="0">चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम FIR में क्यों नहीं? एसआईटी जांच की इनसाइड स्टोरी</b></p>
<p data-path-to-node="8">इस पूरे घटनाक्रम के बीच जो सबसे बड़ा और सुलगता हुआ सवाल हर किसी के जेहन में उठ रहा है, वह यह है कि आखिर राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे कद्दावर और वरिष्ठ पदाधिकारियों—महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम इस एफआईआर में क्यों शामिल नहीं है? एसआईटी ने उन्हें इस आपराधिक जांच के सीधे दायरे से बाहर क्यों रखा?</p>
<p data-path-to-node="9">एसआईटी की प्रारंभिक तफ्तीश और रिपोर्ट के मुताबिक, दान पेटियों की गिनती के डिजिटल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री, सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और वहां तैनात गवाहों व कर्मचारियों के बयानों को खंगालने पर चंपत राय या अनिल मिश्रा की इस वित्तीय हेराफेरी में कोई सीधी या प्रत्यक्ष आपराधिक संलिप्तता के ठोस सबूत नहीं मिले हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि आरोपियों ने इन पदाधिकारियों के नाम और रसूख का गलत इस्तेमाल अपनी व्यक्तिगत चोरियों को छिपाने के लिए किया। हालांकि, कानूनी चश्मे से देखा जाए तो एसआईटी की यह शुरुआती रिपोर्ट कोई अंतिम फैसला नहीं है। यदि अदालत में ट्रायल के दौरान या आगे की विस्तृत विवेचना में कोई नया दस्तावेजी या डिजिटल साक्ष्य सामने आता है, तो जांच की आंच बड़े चेहरों तक भी पहुंच सकती है। फिलहाल, सभी आठों आरोपी सलाखों के पीछे हैं और पुलिस के कड़े कानूनी शिकंजे में उनसे पूछताछ जारी है।</p>
<p data-path-to-node="10"><b> </b></p>
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		<title>Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की 15 पन्नों की रिपोर्ट से हड़कंप, रडार पर आए चंपत राय!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 01:36:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तरप्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित सनसनीखेज मामले ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है. पूरे 6 दिनों तक चौतरफा और गहन पड़ताल करने के बाद विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी 15 पन्नों की शुरुआती जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. हालांकि, इस संवेदनशील ... <a title="Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की 15 पन्नों की रिपोर्ट से हड़कंप, रडार पर आए चंपत राय!" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/ram-mandir-donation-row-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ae/" aria-label="Read more about Ram Mandir Donation Row: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की 15 पन्नों की रिपोर्ट से हड़कंप, रडार पर आए चंपत राय!">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div id="model-response-message-contentr_4385197b6ca9857d" class="markdown markdown-main-panel tutor-markdown-rendering enable-luminous-fast-follows enable-updated-hr-color" dir="ltr" aria-live="polite" aria-busy="false">
<h2 data-path-to-node="0"><img decoding="async" class="alignnone size-full wp-image-517404" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/06/ayodhya-ram-mandir-1767149067157-16_9-2.webp" alt="" width="730" height="411" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/06/ayodhya-ram-mandir-1767149067157-16_9-2.webp 730w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/06/ayodhya-ram-mandir-1767149067157-16_9-2-300x169.webp 300w" sizes="(max-width: 730px) 100vw, 730px" /></h2>
<p data-path-to-node="1">अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित सनसनीखेज मामले ने अब एक नया और बेहद गंभीर मोड़ ले लिया है. पूरे 6 दिनों तक चौतरफा और गहन पड़ताल करने के बाद विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी 15 पन्नों की शुरुआती जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है. हालांकि, इस संवेदनशील रिपोर्ट को शासन स्तर पर पूरी तरह से गोपनीय (कॉन्फिडेंशियल) रखा गया है और इसकी कोई भी आधिकारिक जानकारी अभी तक मीडिया के सामने नहीं लाई गई है, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से जो चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आ रही हैं, वे आने वाले दिनों में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और मंदिर प्रशासन में बड़ा हड़कंप मचा सकती हैं.</p>
<h3 data-path-to-node="2">कर्मचारियों की बैकग्राउंड जांच और नियुक्ति प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी का खुलासा</h3>
<p data-path-to-node="3">SIT की इस प्राथमिक रिपोर्ट के हवाले से सूत्रों ने जो सबसे बड़ा दावा किया है, उसके मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को इस पूरे मामले में संदिग्ध माना गया है. रिपोर्ट में इस बात का भी साफ तौर पर जिक्र है कि राम मंदिर परिसर में कर्मचारियों की नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया में गंभीर और नियम विरुद्ध गड़बड़ियां की गई हैं. जांच के दौरान कई ऐसे कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात मिले, जिनकी नियुक्ति का कोई लिखित और आधिकारिक आदेश (Appointment Letter) रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं था. यही नहीं, इन कर्मचारियों को रखने से पहले उनकी पृष्ठभूमि (Background Verification) की भी कोई पुख्ता जांच नहीं की गई थी. इसके अलावा, मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गिनती और उसकी चौबीसों घंटे निगरानी करने वाली सुरक्षा प्रणाली में भी भारी लापरवाही के संकेत मिले हैं, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है.</p>
<h3 data-path-to-node="4">भक्तों की संख्या बढ़ी पर चढ़ावा हुआ कम, बैंक स्टेटमेंट और आंकड़ों में भारी विसंगति</h3>
<p data-path-to-node="5">एसआईटी की तफ्तीश में यह तकनीकी पहलू भी सामने आया है कि पिछले कुछ समय में मंदिर में आने वाले चढ़ावे के ग्राफ में असामान्य रूप से उतार-चढ़ाव देखने को मिला. जब जांच टीम ने बैंक स्टेटमेंट और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की दैनिक संख्या के आंकड़ों का आपस में मिलान किया, तो कई बार ऐसी चौंकाने वाली स्थितियां पाई गईं जहां भक्तों की संख्या तो रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में बैंक में जमा कराई गई चढ़ावे की रकम बेहद कम दिखाई गई. इस भारी विसंगति को लेकर जब संबंधित प्रभारियों से पूछताछ की गई, तो उनकी तरफ से यह तर्क दिया गया कि उस विशेष समयावधि के दौरान नोटों की बजाय सिक्कों का चढ़ावा बहुत ज्यादा आया था. हालांकि, यह गोलमोल जवाब जांच एजेंसियों को संतुष्ट नहीं कर पाया है.</p>
<h3 data-path-to-node="6">कुछ कर्मचारियों की संपत्ति में 5 साल में बेतहाशा बढ़ोतरी, दान का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं</h3>
<p data-path-to-node="7">एसआईटी रिपोर्ट में मंदिर से जुड़े कुछ चुनिंदा कर्मचारियों की व्यक्तिगत संपत्ति में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई बेतहाशा और तेजी से बढ़ोतरी का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है, जिसने वित्तीय हेरफेर के संदेह को और ज्यादा गहरा कर दिया है. हालांकि, इस पूरी जांच में सबसे बड़ी पेचीदगी यह सामने आ रही है कि जांच एजेंसी अब तक यह स्पष्ट रूप से तय नहीं कर पाई है कि वास्तव में कुल कितना चढ़ावा आया था और उसमें से कुल कितनी रकम कथित रूप से गायब या चोरी हुई है. इसकी मुख्य वजह यह है कि मंदिर में हर एक श्रद्धालु द्वारा दिए जाने वाले गुप्त दान या खुले चढ़ावे का कोई व्यवस्थित और आधुनिक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला, जिससे सटीक आंकड़ा निकालना टेढ़ी खीर बन गया है.</p>
<p data-path-to-node="8">दूसरी ओर, चढ़ावे के इस कथित हिसाब-किताब को लेकर देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं का गुस्सा भी सोशल मीडिया और जमीन पर लगातार बढ़ता जा रहा है. कई भक्त अब खुलकर सामने आ रहे हैं और अपने द्वारा दिए गए दान की रसीद व हिसाब मांग रहे हैं. राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे ने जोर पकड़ लिया है; आम आदमी पार्टी (AAP) ने गंभीर आरोप लगाया है कि एक महिला श्रद्धालु से मंदिर में चांदी की एक बड़ी प्रतिमा जमा करवाई गई थी, लेकिन उसे आज तक न तो कोई आधिकारिक रसीद मिली और न ही उस प्रतिमा का कोई अता-पता दिया गया. इसी तरह, पूर्व में भी 200 किलो चांदी की ईंटों के कथित रूप से गायब होने का मामला चर्चा में आ चुका है, जिससे यह पूरा विवाद अब बेहद पेचीदा हो गया है.</p>
<h3 data-path-to-node="9">सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरा, विहिप ने की फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग</h3>
<p data-path-to-node="10">इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उबाल आ गया है. समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को सोशल मीडिया और बयानों के जरिए उठाकर योगी सरकार को चौतरफा घेरने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने इसे सीधे तौर पर करोड़ों सनातनी भाई-बहनों की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए आरोप लगाया है कि यह सिर्फ कोई आर्थिक या बजटीय गड़बड़ी नहीं है, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं के पवित्र विश्वास के साथ किया गया एक अक्षम्य धोखा है. वहीं, दूसरी ओर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस पूरे मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने, जांच की गति तेज करने और पूरे मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) में कराने की पुरजोर मांग की है.</p>
<p data-path-to-node="11">सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआती रिपोर्ट सौंपने के बाद अब एसआईटी (SIT) इस हाई-प्रोफाइल मामले में जांच का दूसरा चरण (Phase-2) शुरू करने की तैयारी में है, ताकि सभी तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों को और ज्यादा पुख्ता किया जा सके और दोषियों के खिलाफ ऐसी ठोस कानूनी कार्रवाई की जा सके जो कोर्ट में टिक सके. माना जा रहा है कि आने वाले कुछ ही दिनों में शासन स्तर से हरी झंडी मिलते ही इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और कई रसूखदार चेहरों पर कानूनी शिकंजा कस सकता है.</p>
<p data-path-to-node="12">इस पूरे सियासी और धार्मिक विवाद के बीच आज देश का सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अन्य बड़े पदाधिकारी इस कड़ी जांच में खुद को बेकसूर साबित कर पाएंगे या फिर वे भी कड़ी कार्रवाई की जद में आएंगे? यह मामला अब सिर्फ एक साधारण कथित चोरी का नहीं रह गया है, बल्कि प्रभु श्री राम के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और निष्ठा की साख का बन चुका है, जिसका स्पष्ट जवाब पूरा देश बेहद बेसब्री से तलाश रहा है.</p>
<p data-path-to-node="14"><b> </b></p>
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