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	<title>चीन &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>पाकिस्तान के साथ खड़ा होना पड़ा भारी, चीन और तुर्की की डगमगाई आर्थिक सेहत&#8230;इस रिपोर्ट ने मचाया हाहाकार</title>
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		<pubDate>Sun, 18 May 2025 00:35:54 +0000</pubDate>
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&nbsp;

पाकिस्तान जैसे आतंक समर्थक देश का साथ देना अब चीन और तुर्की को बहुत महंगा पड़ रहा है। पाहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिन्दूर शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में मौजूद आतंकियों के ठिकानों को सटीकता से निशाना बनाया गया। जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और एयरबेस हमलों की कोशिश की, लेकिन वह चीन के हथियारों, फाइटर जेट्स और एयर डिफेंस सिस्टम्स पर निर्भर रहा और बुरी तरह असफल साबित हुआ। दूसरी तरफ भारत ने पूरी तरह से स्वदेशी रक्षा तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए जबरदस्त सटीकता के साथ पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं को पस्त किया।

अब यह लड़ाई सिर्फ सीमा तक सीमित नहीं रही। चीन और तुर्की ने जब भारत-विरोधी बयानबाज़ी करते हुए पाकिस्तान का खुला समर्थन किया, तो भारत ने कूटनीतिक जवाब से आगे बढ़कर सीधे आर्थिक ज़मीन पर करारा प्रहार किया। भारत में काम कर रही तुर्की की कंपनी सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज की सुरक्षा मंज़ूरी रद्द होते ही उसके शेयरों में शुक्रवार को 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, और केवल दो कारोबारी सत्रों में कंपनी के स्टॉक्स 20 प्रतिशत तक टूट गए।

इसी तरह चीन की स्थिति और भी शर्मनाक हो गई है। पाकिस्तान को हथियार देने वाली चीनी कंपनियों की तकनीक भारत के सामने पूरी तरह से विफल साबित हुई, जिससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा डगमगाया। परिणामस्वरूप, पिछले तीन कारोबारी सत्रों में चीन के रक्षा क्षेत्र के स्टॉक्स में भारी गिरावट देखने को मिली है। यह साफ संकेत है कि भारत अब केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि विश्वभर में रणनीतिक स्तर पर भी अपने विरोधियों को घेरने की नीति पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
<h3><strong>दो दिन में 20% धड़ाम हुआ सेलेबी का शेयर</strong></h3>
ऑपरेशन सोंदूर के दौरान जब भारत ने आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार किया, तो तुर्की ने एक बार फिर पाकिस्तान के साथ खड़े होकर भारत विरोधी रुख को खुलकर दर्शाया। लेकिन इस हमदर्दी की कीमत तुर्की को अब भारी आर्थिक झटके के रूप में चुकानी पड़ रही है। देशभर में तुर्की की कंपनियों के बहिष्कार की मांग तेज हो गई, और इसका सबसे सीधा असर पड़ा भारत में वर्षों से काम कर रही तुर्की की ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी Çelebi एयरपोर्ट सर्विसेज पर।

गुरुवार को नागर विमानन मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की सिक्योरिटी क्लियरेंस को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है।” इस आदेश के बाद नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के निर्देश पर दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर Çelebi के साथ ग्राउंड हैंडलिंग और कार्गो सेवाओं का अनुबंध रद्द कर दिया। इसके साथ ही अदाणी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने मुंबई और अहमदाबाद एयरपोर्ट पर भी Çelebi के साथ अपने अनुबंध को तुरंत समाप्त कर दिया।

इस फैसले का असर बाजार में तुरंत दिखाई दिया। शुक्रवार को ही Çelebi के शेयरों में 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और पिछले दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक्स लगभग 20 प्रतिशत तक टूट चुके हैं। यदि पिछले चार ट्रेडिंग दिनों को देखें, तो कंपनी के शेयरों में कुल 30 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। यह वही तुर्की-आधारित कंपनी है जो भारत के प्रमुख हवाई अड्डों पर वर्षों से ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं दे रही थी और अब भारत सरकार के सख्त निर्णय का सीधा नुकसान झेल रही है।

कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा है कि वह भारत सरकार के इस निर्णय को पलटने के लिए प्रशासनिक और कानूनी उपायों का सहारा लेगी। लेकिन बाजार का रुख साफ संकेत दे रहा है कि अब भारत में Çelebi के लिए कारोबारी ज़मीन तेजी से खिसक रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कंपनी की विश्वसनीयता को भी गहरा आघात पहुंचा है।

केवल कॉर्पोरेट क्षेत्र ही नहीं, बल्कि तुर्की का पर्यटन उद्योग भी भारतीय जनभावनाओं के प्रभाव से अछूता नहीं रहा। प्रमुख ट्रैवल प्लेटफॉर्म मेकमाईट्रिप के प्रवक्ता ने बताया कि पिछले हफ्ते भारतीय यात्रियों में इस विषय को लेकर तीव्र जागरूकता देखने को मिली है। अजरबैजान और तुर्की के लिए बुकिंग में 60 प्रतिशत तक की गिरावट आई है, वहीं रद्दीकरण में 250 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। प्रवक्ता ने कहा, “अपने देश के साथ एकजुटता और अपने सशस्त्र बलों के प्रति गहरे सम्मान के कारण, हम इस भावना का दृढ़ता से समर्थन करते हैं और सभी को अजरबैजान और तुर्की की सभी गैर-जरूरी यात्राओं के खिलाफ सलाह देते हैं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, “हमने इन दोनों डेस्टिनेशनों पर पर्यटकों को हतोत्साहित करने के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर सभी प्रचार और ऑफर पहले ही बंद कर दिए हैं।”

<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="en" dir="ltr">Indian travellers have expressed strong sentiments over the past week, with bookings for Azerbaijan and Turkey decreasing by 60%, while cancellations have surged by 250% during the same period. In solidarity with our nation and out of deep respect for our armed forces, we… <a href="https://t.co/VqIMn5MYa1">pic.twitter.com/VqIMn5MYa1</a></p>&mdash; ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1922621738698878986?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">May 14, 2025</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
<h3><strong>चीन के रक्षा शेयरों में भारी गिरावट</strong></h3>
भारत की सैन्य क्षमताओं और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली ने जहां ऑपरेशन सोंदूर के दौरान पूरी दुनिया को चौंका दिया, वहीं इसके असर से चीन का डिफेंस सेक्टर भी बुरी तरह हिल गया है। पाकिस्तान की ओर से भारतीय एयरबेस को नुकसान पहुंचाने के दावों को जब सैटेलाइट इमेजरी ने खारिज कर दिया और भारतीय वायुसेना की सर्जिकल सटीकता से की गई स्ट्राइक की पुष्टि हुई, तो चीन की डिफेंस कंपनियों पर निवेशकों का भरोसा ताश के पत्तों की तरह ढह गया।

शेन्ज़ेन में स्थित AVIC Chengdu Aircraft Co., जो पाकिस्तान के JF-17 फाइटर जेट्स का निर्माण करता है, उसके शेयरों में केवल तीन ट्रेडिंग सेशनों में 99 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यही नहीं, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल बनाने वाली Zhuzhou Hongda Electronics Corp के शेयर 10 प्रतिशत तक गिर गए। इसी तरह China Aerospace Times Electronics के स्टॉक्स दो दिनों में 7 प्रतिशत लुढ़क गए। इसके अलावा Bright Laser Technologies, North Industries Group, China Spacesat और AVIC Aircraft जैसी प्रमुख रक्षा कंपनियों में भी 5 से 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। यह न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य विफलता है, बल्कि चीनी हथियारों की तकनीकी कमजोरी और विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। भारत के विरुद्ध खड़े होने की रणनीति ने चीन को सिर्फ कूटनीतिक नहीं, अब आर्थिक मोर्चे पर भी झटका दिया है।

दूसरी ओर भारत का डिफेंस सेक्टर इन हालात में ताकत और भरोसे का प्रतीक बनकर उभरा है। ऑपरेशन सोंदूर के दौरान स्वदेशी तकनीक और हथियारों के प्रभावशाली प्रदर्शन ने घरेलू रक्षा कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी को जबरदस्त रूप से बढ़ा दिया है। Nifty India Defence Index ने मात्र तीन दिनों में 10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की है, जो दर्शाता है कि भारत का डिफेंस इकोसिस्टम अब वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनता जा रहा है। इस बीच IdeaForge, GRSE (Garden Reach Shipbuilders &amp; Engineers), Cochin Shipyard, और Bharat Dynamics जैसी कंपनियों के शेयरों में एक सप्ताह के भीतर 38 प्रतिशत तक की तेजी आई है। यह न सिर्फ निवेशकों के विश्वास का संकेत है, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की सफलता की सीधी तस्वीर भी पेश करता है।

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		<title>तीस्ता प्रोजेक्ट में ड्रैगन को शामिल करेगा बांग्लादेश? भारत के लिए होगा खतरा</title>
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		<pubDate>Thu, 13 Feb 2025 07:36:43 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[-भारत को बांग्लादेश पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की जरूरत ढाका, । बांग्लादेश की अंतरिम सरकार तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े बहुउद्देशीय परियोजना में चीन को शामिल करने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो यह भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता पैदा कर सकता है, क्योंकि यह इलाका ... <a title="तीस्ता प्रोजेक्ट में ड्रैगन को शामिल करेगा बांग्लादेश? भारत के लिए होगा खतरा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%9f-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%b0/" aria-label="Read more about तीस्ता प्रोजेक्ट में ड्रैगन को शामिल करेगा बांग्लादेश? भारत के लिए होगा खतरा">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1200" height="675" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/tista-river-project-1719391526.jpg" alt="" class="wp-image-482246" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/tista-river-project-1719391526.jpg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/tista-river-project-1719391526-300x169.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/tista-river-project-1719391526-768x432.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/02/tista-river-project-1719391526-150x84.jpg 150w" sizes="(max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">-भारत को बांग्लादेश पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की जरूरत</p>



<p class="wp-block-paragraph">ढाका, । बांग्लादेश की अंतरिम सरकार तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े बहुउद्देशीय परियोजना में चीन को शामिल करने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो यह भारत की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता पैदा कर सकता है, क्योंकि यह इलाका रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत पास है। अगर चीन इस परियोजना में शामिल हो जाता है, तो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा के लिए चुनौती पैदा हो सकती है।बांग्लादेश में तीस्ता नदी के संरक्षण और प्रबंधन के लिए एक बड़ी परियोजना प्रस्तावित है, जिसमें नदी का ड्रेजिंग और जलाशय निर्माण, जल निकासी प्रणाली का विकास, नदी के किनारों पर तटबंध और सैटेलाइट टाउनशिप का निर्माण, परियोजना की कुल लागत 1 अरब डॉलर, समाप्ति की समय सीमा दिसंबर 2025 तय किया गया है।<br>रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने इस प्रोजेक्ट के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करने के लिए दो साल का समय मांगा है, जिसे बांग्लादेश सरकार ने मंजूर कर लिया है।चिकन नेक कॉरिडोर से सिर्फ 100 किमी की दूरी पर यह प्रोजेक्ट तैयार होगा। भारतीय सैन्य अधिकारियों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर चीन तीस्ता प्रोजेक्ट में शामिल होता है, तो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। यह इलाका भारत के लिए बेहद संवेदनशील है क्योंकि यही मार्ग पूर्वोत्तर भारत को अन्य देश से जोड़ता है। 2011 से तीस्ता जल बंटवारे पर विवाद जारी है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने समझौते का विरोध किया था। भारत ने शेख हसीना सरकार से चीन को इस प्रोजेक्ट से दूर रखने का अनुरोध किया था। शेख हसीना ने भारत को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनकी सरकार गिर गई।बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अब चीन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अगर चीन को तीस्ता प्रोजेक्ट में शामिल किया जाता है, तो इससे भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है। भारत को बांग्लादेश पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की जरूरत है। चिकन नेक क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी मजबूत करनी होगी। पश्चिम बंगाल सरकार को भी इस मुद्दे पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी।भारत और बांग्लादेश के संबंधों के लिए यह प्रोजेक्ट नई चुनौती बन सकता है। भारत के लिए यह जरुरी हो गया है कि वह इस मुद्दे पर कूटनीतिक कदम उठाए और बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखे।</p>
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		<title>इंडोनेशिया के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि, क्या हैं इसके मायने?</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/president-of-indonesia-is-the-chief-guest-of-republic-day-celebrations-what-does-it-mean/</link>
		
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		<pubDate>Thu, 23 Jan 2025 08:50:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[26 जनवरी 2025 को भारत अपना 76वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। देश के संविधान को अपनाने के साथ भारत के गणतंत्र की यात्रा शुरू हुई थी और इस बार आयोजन के केंद्र में सैन्य क्षमताएं, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्य होंगे। 2025 के गणतंत्र दिवस का थीम ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ है, ... <a title="इंडोनेशिया के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि, क्या हैं इसके मायने?" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/president-of-indonesia-is-the-chief-guest-of-republic-day-celebrations-what-does-it-mean/" aria-label="Read more about इंडोनेशिया के राष्ट्रपति गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि, क्या हैं इसके मायने?">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="1140" height="570" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/OPERATION-GRAND-SLAM-14-1-1140x570-1.jpg" alt="" class="wp-image-480897" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/OPERATION-GRAND-SLAM-14-1-1140x570-1.jpg 1140w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/OPERATION-GRAND-SLAM-14-1-1140x570-1-300x150.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/OPERATION-GRAND-SLAM-14-1-1140x570-1-768x384.jpg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/OPERATION-GRAND-SLAM-14-1-1140x570-1-150x75.jpg 150w" sizes="(max-width: 1140px) 100vw, 1140px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">26 जनवरी 2025 को भारत अपना 76वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। देश के संविधान को अपनाने के साथ भारत के गणतंत्र की यात्रा शुरू हुई थी और इस बार आयोजन के केंद्र में सैन्य क्षमताएं, सांस्कृतिक विविधता और लोकतांत्रिक मूल्य होंगे। 2025 के गणतंत्र दिवस का थीम ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ है, जो भारत के आधुनिक बनने की यात्रा और इसकी ऐतिहासिक धरोहर को दर्शाता है। 2025 में भारत के 76वें गणतंत्र दिवस के मौके पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुबिआंतो 25-26 जनवरी के दौरान भारत की राजकीय यात्रा पर आएंगे और अक्टूबर 2024 में पद संभालने के बाद राष्ट्रपति के तौर पर यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। 26 जनवरी 1950 को जब देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने ध्वजारोहण कर भारत को पूर्ण गणतंत्र घोषित किया था तो इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो उस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। इंडोनेशिया, भारत की एक्ट ईस्ट नीति में एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और सुबिआंतो की इस यात्रा को रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>भारत-इंडोनेशिया संबंधों का विकास</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की विदेश नीति के लिए इंडोनेशिया एक महत्वपूर्ण देश है। इंडोनेशिया भारत के लिए एक महत्वपूर्ण देश है। दोनों देशों के बीच दो हज़ार साल से ज़्यादा पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और धार्मिक संबंध रहे है। हिंदू, बौद्ध और इस्लामी परंपराओं से प्रभावित इंडोनेशिया भी भारत की तरह ही एक बहु-जातीय समाज है। रामायण और महाभारत का भी इंडोनेशियाई लोकगीत, कला और रंगमंच पर प्रभाव रहा है जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध और मज़बूत हुए हैं। दोनों देशों के बीच संबंध मज़बूत भी होते जा रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुबिआंतो को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाया जाना ना केवल भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को दिए जा रहे महत्व को दिखाता है बल्कि इससे दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के साथ भी भारत के संबंध मज़बूत होने का आधार बनता है। इंडोनेशिया सांस्कृतिक संबंधों के अलावा भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार और आसियान क्षेत्र का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2023-24 के दौरान लगभग 26.69 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इंडोनेशिया से भारत कोयला, क्रूड पाम ऑयल, रबर और खनिज आयात करता है। वहीं, दूसरी ओर इंडोनेशिया रिफाइन पेट्रोलियम उत्पाद, कमर्शियल वाहन, दूरसंचार उपकरण, कृषि और इस्पात उत्पाद आयात करता है। इंडोनेशिया में अलग-अलग क्षेत्रों में 30 से अधिक संयुक्त उद्यम संचालित हो रहे हैं।</p>



<h3 class="wp-block-heading">रणनीतिक और रक्षा सहयोग</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक संबंध बहुत महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों का संयुक्त उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के रक्षा संबंधों में भी वृद्धि हुई है। 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जकार्ता दौरे के दौरान ‘सम्पूर्ण रणनीतिक साझेदारी’ और ‘साझा समुद्री सहयोग दृष्टिकोण’ पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस साझेदारी में रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर ज़ोर दिया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंडोनेशिया ने भारत से लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA), आकाश सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम और हेलीकॉप्टर जैसे रक्षा उपकरण खरीदने में भी रुचि दिखाई है। इससे पता चलता है कि भारत की रक्षा निर्यातक के रूप में भूमिका बढ़ रही है और दक्षिण पूर्व एशिया उसके रक्षा उत्पादों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है। वास्तव में, इंडोनेशिया ने भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकास ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल दिखाने में भी दिलचस्पी दिखाई है।&nbsp;सुबिआंतो जब इस वर्ष भारत के गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों में भाग लेंगे तो संभावना है कि वह भारत के साथ रक्षा संबंधों को बढ़ाने पर भी विचार करेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध</h3>



<p class="wp-block-paragraph">भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंध प्राचीन समय से जुड़े हुए हैं। दोनों देशों के बीच वित्त वर्ष 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 29.39 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया और इंडोनेशिया, भारत का तीसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। भारत ने वित्त वर्ष 2024 में इंडोनेशिया को 3,794 वस्तुएं निर्यात कीं, जिनमें इंजीनियरिंग सामान और पेट्रोलियम उत्पाद प्रमुख हैं, जबकि इंडोनेशिया से खनिज ईंधन और वनस्पति वसा जैसे उत्पाद आयात किए गए। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध निरंतर बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने व्यापार को 2025 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दुनिया में सबसे बड़ा मुस्लिम देश होने के बावजूद इंडोनेशिया के लोगों पर हिंदू संस्कृति का गहरा प्रभाव है। भारत के सौदागर व नाविक ईसा मसीह के जन्म से पहले से ही इंडोनेशिया की यात्रा करते रहे हैं। इसके चलते दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक समानताएं भी देखने को मिलती हैं। इंडोनेशिया में ना केवल हिंदू धर्म बल्कि बौद्ध धर्म का भी गहरा प्रभाव रहा है। इंडोनेशिया की भाषा, स्थापत्य और राजशाही पर भारत का प्रभाव स्पष्ट तौर पर नज़र आता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ना केवल खान-पान बल्कि इंडोनेशिया की भाषा पर संस्कृत का प्रभाव नज़र आता है। इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर प्रांबानन में हिंदू मंदिर और बोरोबोदूर में बौद्ध स्तूप बने हैं जो दोनों देशों के संबंधों की निकटता को दिखाते हैं। इंडोनेशिया में भारत के दूतावास द्वारा स्थापित जवाहरलाल नेहरू भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (JNICC) भारतीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मुख्य अतिथि: सिर्फ प्रतीक नहीं, कूटनीतिक महत्व</h3>



<p class="wp-block-paragraph">1950 में इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो भारत के गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित किए जाने वाले पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष थे। तब से भारत ने अपनी विदेश नीति और रणनीतिक हितों के मद्देनज़र इस कार्यक्रम के लिए कई विश्व नेताओं की मेज़बानी की है। यह भी अहम है कि इतने बड़े कार्यक्रम में मुख्य अतिथि का चयन केवल औपचारिकता नहीं है बल्कि यह भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं और वैश्विक दृष्टिकोण को दर्शाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि की भूमिका जहां एक और देशों के बीच दोस्ती का प्रतीक है तो वहीं यह रणनीतिक रूप से भी अहम है। परेड में आमंत्रित नेता आमतौर पर उन देशों से होते हैं जो सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ समान हित साझा करते हैं। राष्ट्रपति सुबिआंतो को निमंत्रण दक्षिण पूर्व एशिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर भारत के फोकस का एक स्पष्ट संकेत है वह भी ऐसे समय में जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाना चाहता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्ष 2025 में गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति सुबिआंतो की उपस्थिति न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी बल्कि इससे समुद्री सहयोग के बढ़ते महत्व का भी संदेश मिलेगा। भारत और इंडोनेशिया दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अहम देश हैं और दोनों की साझेदारी समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे वक्त में जब चीन अपने व्यापार के लिए अधिकाधिक निर्भर होता जा रहा है तो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपस्थिति भी दक्षिण चीन सागर में भारतीय प्रभुत्व स्थापित करने में रणनीतिक भूमिका निभाएगी।</p>



<h3 class="wp-block-heading">दक्षिण चीन सागर में भारत की भूमिका</h3>



<p class="wp-block-paragraph">दक्षिण चीन सागर के कारण भारत और इंडोनेशिया के बीच सामरिक सहयोग समुद्री क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। चीन दक्षिण चीन सागर को एक महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग के रूप में देखता है। हालांकि, भारत ने हमेशा इस मुद्दे पर हमेशा यही रुख रखा है कि ‘फ्रीडम ऑफ नैविगेशन’ का सम्मान किया जाना चाहिए। भारत और इंडोनेशिया के बीच साझेदारी से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी उपस्थिति और दक्षिण चीन सागर में उसके रणनीतिक हितों को मजबूत करने में भी मदद मिलेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंडोनेशिया दुनिया के प्रमुख समुद्री मार्गों के बीच में पड़ता है इसलिए समुद्री यातायात सुरक्षा को सुरक्षित करने में उसकी एक महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। भारत और इंडोनेशिया के बीच मजबूत होता समुद्री सहयोग यह साबित करेगा कि खुले समुद्री मार्ग वैश्विक व्यापार की आधारशिला हैं। भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग को दक्षिण चीन सागर में बढ़ती चीनी आक्रामकता के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंडोनेशिया के साथ अपने रक्षा और समुद्री संबंधों को बढ़ाते हुए भारत खुद को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख देश के तौर पर स्थापित कर रहा है। इंडोनेशिया भारत के बड़े रणनीतिक लक्ष्यों में योगदान देगा जिसमें क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना और व्यापार के लिए खुले समुद्री मार्ग सुनिश्चित करना जैसी चीज़ें शामिल हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुबिआंतो की इस यात्रा के माध्यम से भारत, इंडोनेशिया के साथ अपने जुड़ाव को गहरा करना चाहता है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को मजबूत करना चाहता है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी हिंद-प्रशांत के भविष्य को आकार देने के लिए ज़रूरी है। सुबिआंतो की यात्रा के साथ भारत न केवल अपनी लोकतांत्रिक विरासत का जश्न मना&nbsp;<a href="https://www.zeebiz.com/hindi/trending/republic-day-chief-guest-significance-history-who-was-the-first-chief-guest-of-independent-india-198857" target="_blank" rel="noreferrer noopener">रहा है</a>&nbsp;बल्कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए अपनी प्रतिबद्धता को भी मजबूत कर रहा है।</p>
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		<title>ट्रंप से डरा चीन! पहले ही दिन दे दी ड्रैगन को 4 तगड़ी चोट, जानें किन मुद्दों पर घेरा</title>
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		<pubDate>Tue, 21 Jan 2025 10:07:06 +0000</pubDate>
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<p class="wp-block-paragraph">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald) के बयानों में चीन के खिलाफ हमेशा से ही तीखे शब्द निकले हैं। शपथ लेने के बाद पहले ही दिन ट्रंप ने चीन को चार तगड़ी चोट दे दी। ट्रंप ने चीन पर कई आरोप लगाए और उसे ‘दुनिया का सबसे बड़ा खतरा’ करार दिया। सोमवार को पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका के बाहर निकलने के अपने फैसले का बचाव करते हुए ट्रंप ने चीन को जिम्मेदार ठहराया। इससे पहले उन्होंने पहले कार्यकाल 2017 में इसके लिए भारत को दोष दिया था। ट्रंप के अनुसार, चीन ने अमेरिकी आर्थिक व्यवस्था, व्यापार, और वैश्विक शक्ति को कमजोर करने की कोशिश की है।</p>



<h2 class="wp-block-heading">ट्रंप ने कई अहम मुद्दों पर चीन को घेरा</h2>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने अपने भाषण में चीन पर अमेरिका के व्यापार घाटे को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चीन ने अपनी नीतियों से अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचाया है और उनके उत्पादों को सस्ते में बेचा है, जिससे अमेरिका की उद्योगों को काफी नुकसान हुआ। ट्रंप का कहना था कि चीन ने अमेरिका के खिलाफ असमान व्यापारिक नीतियों को अपनाया है और इसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रंप ने चीन पर अमेरिकी बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि चीन अमेरिकी कंपनियों से तकनीकी जानकारी चुराता है और इसका फायदा अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ाने के लिए उठाता है। उन्होंने इसे “आर्थिक युद्ध” के रूप में देखा और इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की बात की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव और दक्षिण चीन सागर में उसके विस्तारवाद को लेकर भी ट्रंप ने आलोचना की। उन्होंने चीन के द्वारा क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा पैदा करने पर चिंता व्यक्त की। ट्रंप ने इसे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए एक गंभीर चुनौती बताया और कहा कि चीन को अपनी सैन्य गतिविधियों को नियंत्रित करना चाहिए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चीन की ह्यूमन राइट्स रिकॉर्ड को लेकर ट्रंप ने कड़ी आलोचना की। उन्होंने तिब्बत और शिनजियांग प्रांत में मानवाधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। विशेष रूप से उइगर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ चीन की कठोर नीतियों की उन्होंने निंदा की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका तिब्बत और अन्य मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर चीन के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>चीन में नौकरी के लिए निगलना पड़ता है &#8216;आग का गोला&#8217;: क्यों करा रहा खतरनाक ट्रेनिंग</title>
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		<pubDate>Thu, 09 Jan 2025 09:08:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चीन की एक कंपनी से जुड़ी खबर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार चीन की एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को आग खाने के लिए मजबूर किया। अजीबो गरीब ‘टीम-बिल्डिंग’ इवेंट में कर्मचारियों से जलती हुई रुई की कलियां मुंह में डालकर बुझाने के लिए कहा गया। जिसके बाद ... <a title="चीन में नौकरी के लिए निगलना पड़ता है &#8216;आग का गोला&#8217;: क्यों करा रहा खतरनाक ट्रेनिंग" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/china-worker-swallow-ball-of-fire-why-dangerous-training/" aria-label="Read more about चीन में नौकरी के लिए निगलना पड़ता है &#8216;आग का गोला&#8217;: क्यों करा रहा खतरनाक ट्रेनिंग">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1280" height="720" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-09-at-2.34.36-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-479579" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-09-at-2.34.36-PM.jpeg 1280w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-09-at-2.34.36-PM-300x169.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-09-at-2.34.36-PM-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-09-at-2.34.36-PM-150x84.jpeg 150w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">चीन की एक कंपनी से जुड़ी खबर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार चीन की एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को आग खाने के लिए मजबूर किया। अजीबो गरीब ‘टीम-बिल्डिंग’ इवेंट में कर्मचारियों से जलती हुई रुई की कलियां मुंह में डालकर बुझाने के लिए कहा गया। जिसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स कंपनी की इस हरकर की जमकर आलोचना कर रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">चीन से कई बार अजीबो गरीब खबरें सामने आती रहती हैं। वहीं अब एक बार फिर से सोशल मीडिया पर चीन की एक कंपनी को लेकर खबर सामने आ रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मिली जानकारी के अनुसार, चीन की एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को आग खाने के लिए मजबूर किया। अजीबो गरीब ‘टीम-बिल्डिंग’ इवेंट में कर्मचारियों से जलती हुई रुई की कलियां मुंह में डालकर बुझाने के लिए कहा गया। जिसके बाद अब कंपनी को अपनी इस हरकत के लिए सोशल मीडिया पर लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रोंगरोंग नामक एक सोशल मीडिया यूजर ने इस घटना का खुलासा किया। रोंगरोंग ने खुलासा किया कि वह आग खाने की गतिविधि में शामिल होने के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन उसे अपनी नौकरी खोने के डर से ऐसा करने के लिए दबाव महसूस कराया गया। करीब 60 कर्मचारियों ने इस इवेंट में भाग लिया था। जिन्हें 6 ग्रुप में बांटा गया था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जियाओक्सियांग मॉर्निंग न्यूज के अनुसार, यह कंपनी पूर्वोत्तर चीन के लियाओनिंग प्रांत में स्थित एक शिक्षा संगठन है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कंपनी ने कर्मचारियों से कहा कि इससे उन्हें डर पर काबू पाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसका उद्देश्य कंपनी के नेतृत्व को हमारा दृढ़ संकल्प दिखाना था. यह दिखाना था कि हम जीतना चाहते हैं और हम पैसा कमाना चाहते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रोंगरोंग ने कहा कि मुझे यह अपमानजनक लगा। इस कार्यक्रम ने श्रम कानूनों का उल्लंघन किया है और वे अधिकारियों के पास कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की योजना बना रही हैं। कंपनी ने अभी तक इस आरोप का जवाब नहीं दिया है।2016 में, पूर्वी चीन में नानजिंग स्थित एक कंपनी ने अपने कर्मचारियों को साहस बढ़ाने के लिए सार्वजनिक रूप से कूड़ेदान चूमने और अजनबियों को गले लगाने के लिए मजबूर किया था। </p>



<p class="wp-block-paragraph">एक यूजर ने खुलासा किया कि उनकी कंपनी ने आंखें बदकर ऊंचाई से गिरने को कहा ताकि सहकर्मी उन्हें पकड़ सकें। इसमें कई लड़कियों को चोट लग गई थी।चीन की कंपनी की इस घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों में काफी आक्रोश भर दिया है। कई लोगों ने कंपनी के इन खतरनाक तरीकों की निंदा की है।एक यूजर ने आग खाने वाली गतिविधि को &#8220;एक प्रच्छन्न आज्ञाकारिता परीक्षण&#8221; (a disguised obedience test) करार दिया, जिसका अर्थ था कि कंपनी अपने कर्मचारियों पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए इस अभ्यास का उपयोग कर रही थी। कई अन्य लोगों ने कंपनी की कार्रवाई को अधिकार का दुरुपयोग बताते हुए इसकी आलोचना की, तथा श्रम कानूनों के तहत श्रमिकों के लिए अधिक मजबूत सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।</p>
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		<title>चीन के HMPV से डरो मत! कानपुर के GSVM ने बताया &#8211; पुराना है वायरस</title>
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		<pubDate>Wed, 08 Jan 2025 13:05:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[चीन में फैले ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) की दहशत से कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉक्टर संजय काला ने बताया कि इस वायरस से डरने की जरूरत नहीं है। HMPV कोई नया वायरस नहीं है, यह वायरस पहली बार नीदरलैंड (यूरोप) में 28 छोटे बच्चों के रेस्पेटरी सीक्रेशन्स में सन 2001 में पहली बार डिटेक्ट ... <a title="चीन के HMPV से डरो मत! कानपुर के GSVM ने बताया &#8211; पुराना है वायरस" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/dont-be-afraid-of-china-hmpv-kanpur-gsvm-told-virus/" aria-label="Read more about चीन के HMPV से डरो मत! कानपुर के GSVM ने बताया &#8211; पुराना है वायरस">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="548" height="363" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-6.31.46-PM-1.jpeg" alt="" class="wp-image-479478" style="width:640px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-6.31.46-PM-1.jpeg 548w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-6.31.46-PM-1-300x199.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-08-at-6.31.46-PM-1-150x99.jpeg 150w" sizes="auto, (max-width: 548px) 100vw, 548px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">चीन में फैले ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) की दहशत से कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉक्टर संजय काला ने बताया कि इस वायरस से डरने की जरूरत नहीं है। HMPV कोई नया वायरस नहीं है, यह वायरस पहली बार नीदरलैंड (यूरोप) में 28 छोटे बच्चों के रेस्पेटरी सीक्रेशन्स में सन 2001 में पहली बार डिटेक्ट हुआ था।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वायरस एक नेगेटिव सेंस, सिंगल स्टैंडर्ड आरनए वायरस है ,जो कि फैमिली न्यूमोविरडी से संबंध रखता है, वर्ष 2022 के डेटा के अनुसार, यह दूसरा सबसे कॉमन वायरस है जो विंटर और स्प्रिंग सीजन में Acute Respiratory Tract Illness, Community में फैलाता है, मुख्यतः 5 वर्ष से छोटे बच्चों में, बुजुर्गों (65 वर्ष से ऊपर ) में, एवं इम्यूनिटी के कमजोर मरीज को ज्यादा इन्फेक्शन करता है।<br>ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस, कम्यूनिटी में मुख्यतः कामन कोल्ड (Upper Respiratory Tract Infection) करता है, किंतु प्रीमैच्योर नवजात बच्चों, 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों एवं इम्युनो कॉम्प्रोमाइज्ड व्यक्तियों में निमोनिया का रिस्क बढ़ जाता है, जिसकी वजह से इन लोगों को हॉस्पिटलाइजेशन की भी जरूरत पड़ सकती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस नाक एवं फेफड़ों के एपिथेलियल सेल्स को इन्फेक्ट करता है जिसकी वजह से श्वांस तंत्र में प्रियवैस्कुलर इनफील्ट्रेशन I इन्फ्लेमेशन करता है I<br>इंफेक्टेड मरीज के रेस्पिरेटरी सेक्रेशन के द्वारा, इस वायरस का संचार- एरोसॉल, ड्रॉपलेट एवं कॉन्टेक्ट ट्रांसमिशन के द्वारा होता है, जो कि मुख्यतः विंटर और स्प्रिंग सीजन में होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">HMPV के लक्षण<br>वायरस से सम्पर्क में आने के 3 से 6 दिन में होते है जिसमें मुख्यतः बुखार , खांसी, नाक बहना, गले में खराश, थकान, सिरदर्द, एवं मांसपेशियों में दर्द होता है, जबकि गंभीर मरीजों में घरघराहट, सांस लेने में तकलीफ एवं निमोनिया के लक्षण आते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">HMPV वायरस की रोकधाम के लिए निम्नलिखित सावधानियां बरते:-</p>



<ol class="wp-block-list">
<li>भीड़भाड़ वाली जगहों पर न जाएं I</li>



<li>पब्लिक प्लेसेस में मास्क पहन कर रखें I</li>



<li>खांसने अथवा छींकने वालें व्यक्तियों से उचित दूरी बना कर रखें I</li>



<li>अपने आंख, नाक, मुंह को बगैर हाथ धोए न छुएं I</li>



<li>अक्सर छुई जाने वाली सतहों को नियमित सेनेटाइज करें I</li>



<li>साबुन और पानी से नियमित हाथ धोएं I</li>



<li>अन्य साफ सफाई बरतें I</li>



<li>पौष्टिक आहार लें और बाहर की तथा ठंडी चीजों से परहेज करें I</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">इस वायरस का कोई स्पेसिफिक इलाज एवं बचाव हेतु वैक्सीन भी नहीं है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संक्रमित होने पर अपने आप को आइसोलेट करें एवं लक्षण अनुसार इलाज किसी रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर से ही कराए और अपने शरीर को हाइड्रेट रखें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्राचार्य डॉक्टर संजय काला ने बताया आम जनमानस से अनुरोध है कि घबराएं नहीं यह वायरस सीजनल फ्लू की तरह ही होता है और 9 से 10 दिनों में ज्यादातर मरीज अपने आप ठीक हो जाते है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस वायरस की डायग्नोसिस के लिये, श्वास तंत्र के सेक्रेशनको आरटीपीसी आर विधि से प्रमाणित किया जा सकता है एवम अन्य विधि जैसे:-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपिक इम्यूनो फ्लोरेंस, सेल कल्चर से इत्यादि से भी किया जा सकता है</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चीन के HMPV भारत में बेअसर! स्वास्थ्य सचिव का दावा- बीमारी में उछाल नहीं</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/china-hmpv-ineffective-india-health-secretary-claim/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jan 2025 06:52:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हेल्थ]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[DAINIK BHASKAR]]></category>
		<category><![CDATA[Hindi News]]></category>
		<category><![CDATA[HMPV]]></category>
		<category><![CDATA[चीन]]></category>
		<category><![CDATA[भारत में एचएमपीवी]]></category>
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					<description><![CDATA[केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने मंगलवार को वर्चुअल मोड में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें भारत में श्वांस संबंधी बीमारियों की समीक्षा की गई। बैठक में चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) मामलों में उछाल की मीडिया रिपोर्टों के बाद एचएमपीवी मामलों की स्थिति और उनके प्रबंधन ... <a title="चीन के HMPV भारत में बेअसर! स्वास्थ्य सचिव का दावा- बीमारी में उछाल नहीं" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/china-hmpv-ineffective-india-health-secretary-claim/" aria-label="Read more about चीन के HMPV भारत में बेअसर! स्वास्थ्य सचिव का दावा- बीमारी में उछाल नहीं">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1280" height="720" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-07-at-12.18.02-PM-3.jpeg" alt="" class="wp-image-479216" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-07-at-12.18.02-PM-3.jpeg 1280w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-07-at-12.18.02-PM-3-300x169.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-07-at-12.18.02-PM-3-768x432.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-07-at-12.18.02-PM-3-150x84.jpeg 150w" sizes="auto, (max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने मंगलवार को वर्चुअल मोड में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें भारत में श्वांस संबंधी बीमारियों की समीक्षा की गई। बैठक में चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) मामलों में उछाल की मीडिया रिपोर्टों के बाद एचएमपीवी मामलों की स्थिति और उनके प्रबंधन के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों की समीक्षा की गई। बैठक में डॉ. राजीव बहल, सचिव (डीएचआर); डॉ. (प्रो) अतुल गोयल, डीजीएचएस; राज्यों के स्वास्थ्य सचिव और अधिकारी, एनसीडीसी, आईडीएसपी, आईसीएमआर, एनआईवी और आईडीएसपी की राज्य निगरानी इकाइयों के विशेषज्ञ शामिल हुए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि एचएमपीवी से जनता के लिए चिंता का कोई कारण नहीं है। यह वायरस 2001 से वैश्विक स्तर पर मौजूद है। उन्होंने राज्यों को आईएलआई/एसएआरआई निगरानी को मजबूत करने और समीक्षा करने की सलाह दी। उन्होंने दोहराया कि आमतौर पर सर्दियों के महीनों में श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि देखी जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश श्वसन संबंधी बीमारी के मामलों में किसी भी संभावित उछाल के लिए अच्छी तरह से तैयार है। ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) कई श्वसन वायरस में से एक है जो सभी उम्र के लोगों में विशेष रूप से सर्दियों और शुरुआती वसंत के महीनों में संक्रमण का कारण बन सकता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) कई श्वसन वायरस में से एक है जो सभी उम्र के लोगों में विशेष रूप से सर्दियों और शुरुआती वसंत के महीनों के दौरान संक्रमण का कारण बन सकता है। वायरस का संक्रमण आमतौर पर हल्का और स्व-सीमित स्थिति होता है और अधिकांश मामले अपने आप ठीक हो जाते हैं। यह बताया गया कि आईसीएमआर-वीआरडीएल प्रयोगशालाओं के पास पर्याप्त नैदानिक ​​सुविधाएं उपलब्ध हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यों को वायरस के संचरण की रोकथाम के बारे में लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की सलाह दी गई। इसमें साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोना; बिना धुले हाथों से अपनी आँखें, नाक या मुँह को छूने से बचना; ऐसे लोगों के साथ निकट संपर्क से बचना जिनमें बीमारी के लक्षण दिख रहे हों; खाँसते और छींकते समय मुँह और नाक को ढकना आदि शामिल है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उल्लेखनीय है कि अबतक स्वास्थ्य मंत्रालय ने एचएमपीवी के दो मामलों की पुष्टि की ही। इसके साथ गुजरात से एक ओर तमिलनाडु से भी मामले मिले है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>चीन में नए वायरस की दस्तक : भारत की बढ़ी चिंताएं</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/knock-of-new-virus-in-china-india-concerns-increased/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Jan 2025 11:06:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[देश]]></category>
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		<category><![CDATA[China]]></category>
		<category><![CDATA[corona virus]]></category>
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		<category><![CDATA[चीन]]></category>
		<category><![CDATA[चीन में नए वायरस की दस्तक]]></category>
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					<description><![CDATA[Seema Pal विश्व भर में कोरोना वायरस ने मौतों का जो टांडव मचाया था वह कोई भी नहीं भुला सतका। साल 2020 में जनवरी में चीन से निकले कोरना ने एक-एक कर लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। अब जब नया साल 2025 लगा है तो एक बार फिर चीन में ... <a title="चीन में नए वायरस की दस्तक : भारत की बढ़ी चिंताएं" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/knock-of-new-virus-in-china-india-concerns-increased/" aria-label="Read more about चीन में नए वायरस की दस्तक : भारत की बढ़ी चिंताएं">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1200" height="900" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-03-at-4.28.14-PM.jpeg" alt="" class="wp-image-478756" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-03-at-4.28.14-PM.jpeg 1200w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-03-at-4.28.14-PM-300x225.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-03-at-4.28.14-PM-768x576.jpeg 768w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2025/01/WhatsApp-Image-2025-01-03-at-4.28.14-PM-150x113.jpeg 150w" sizes="auto, (max-width: 1200px) 100vw, 1200px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">Seema Pal </p>



<p class="wp-block-paragraph">विश्व भर में कोरोना वायरस ने मौतों का जो टांडव मचाया था वह कोई भी नहीं भुला सतका। साल 2020 में जनवरी में चीन से निकले कोरना ने एक-एक कर लगभग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। अब जब नया साल 2025 लगा है तो एक बार फिर चीन में एक और वायरस ने दस्तक दी है। चीन के नए  वायरस को लेकर अब भारत में चिंता बढ़ गई है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">चीन में HMPV वायरस के मामले सामने आए हैं। दावा किया जा रहा है कि चीन के एक अस्पताल में भारी संख्या में इस वायरस से ग्रसित मरीज भर्ती हो रहे हैं। जिसके बाद भारत में HMPV वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) देश में सांस संबंधी लक्षणों और इन्फ्लूएंजा के मामलों की बारीकी से निगरानी कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में है। इस वायरस की स्थिति पर जल्द ही अपडेट दिया जाएगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph">नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के एक अधिकारी ने बताया, &#8220;हम स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं। हम खबरों की जांच करेंगे और इसके हिसाब से अपडेट करेंगे।&#8221; वहीं सूत्रों ने WHO से जुड़ी एक एजेंसी से मिले अपडेट के बाद कहा, &#8220;16-22 दिसंबर के डेटा से पता चलता है कि चीन में मौसमी इन्फ्लूएंजा, राइनोवायरस, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) और ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) सहित तीव्र सांस से जुड़े संक्रमणों में वृद्धि हुई है।”</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एक Cold War&#8230;जो कभी भी बन सकता है तृतीय विश्व युद्ध !</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-cold-war-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Dec 2024 00:37:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दुनिया]]></category>
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		<category><![CDATA[पनामा]]></category>
		<category><![CDATA[पनामा नहर]]></category>
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					<description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रम्प जनवरी 2025 में दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति की शपथ लेने वाले हैं लेकिन इससे पहले ही वो एक्शन मोड में नज़र आ रहे हैं. राष्ट्रपति-निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप ने जहां बुधवार (18 दिसंबर, 2024) को कनाडा पर एक और हमला करते हुए 51वें राज्य के विवाद को फिर से उठाया वहीं रविवार (22 ... <a title="एक Cold War&#8230;जो कभी भी बन सकता है तृतीय विश्व युद्ध !" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-cold-war-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%a4%e0%a5%83%e0%a4%a4/" aria-label="Read more about एक Cold War&#8230;जो कभी भी बन सकता है तृतीय विश्व युद्ध !">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="570" height="436" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-23-at-15.45.02.jpeg" alt="" class="wp-image-477269" style="width:643px;height:auto" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-23-at-15.45.02.jpeg 570w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-23-at-15.45.02-300x229.jpeg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2024/12/WhatsApp-Image-2024-12-23-at-15.45.02-150x115.jpeg 150w" sizes="auto, (max-width: 570px) 100vw, 570px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">डोनाल्ड ट्रम्प जनवरी 2025 में दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति की शपथ लेने वाले हैं लेकिन इससे पहले ही वो एक्शन मोड में नज़र आ रहे हैं. राष्ट्रपति-निर्वाचित डोनाल्ड ट्रंप ने जहां बुधवार (18 दिसंबर, 2024) को कनाडा पर एक और हमला करते हुए 51वें राज्य के विवाद को फिर से उठाया वहीं रविवार (22 दिसंबर, 2024) को ट्रंप ने पनामा नहर पर कब्जा वापस लेने की धमकी दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका और पनामा के रिश्तों में बढ़ते तनाव को हवा देते हुए आरोप लगाया है कि पनामा अमेरिकी मालवाहक जहाज़ों से ज़्यादा मनमानी शुल्क वसूल रहा है। रविवार को एरिज़ोना में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “पनामा हमें मनमानी फीस वसूल रहा है—यह पूरी तरह से अनुचित है। यह हमारे लिए बहुत महंगा हो गया है, और हम इसे तुरंत रोकेंगे।”</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="http://voiceofindia.online/wp-content/uploads/2024/12/Canalslider1.jpg" alt="" class="wp-image-52293"/></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>पनामा नहर पर अमेरिका क्यों चाहता है नियंत्रण</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">रविवार को ट्रंप ने एरिज़ोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए नाम के एक कंजर्वेटिव ग्रुप को संबोधित करते हुए पनामा नहर पर कब्जा वापस लेने की धमकी थी। इसके जिसके उत्तर में बिना किसी देरी के ही पनामा के राष्ट्रपति होसे राउल मुनीलो ने ट्रंप को जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति मुनीलो ने कहा, ”पनामा नहर का हर वर्ग मीटर हमारा है और इसके चारों तरफ़ का इलाक़ा भी हमारा है. पनामा की संप्रभुत्ता और स्वतंत्रता पर कोई समझौता नहीं होगा.” दरअसल पनामा नहर, जो 82 किलोमीटर लंबी है, अटलांटिक और प्रशांत महासागरों को जोड़ती है। इसका निर्माण 1900 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ, और 1914 में इसे यातायात के लिए खोला गया। पहले इस पर अमेरिका का नियंत्रण था, लेकिन 1977 तक पनामा और अमेरिका का संयुक्त नियंत्रण था। 1999 में आते आते पनामा ने पूरी तरह से इस नहर पर अपना नियंत्रण प्राप्त कर लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह नहर, जो विश्व व्यापार का एक अहम हिस्सा है, हर साल लगभग 14,000 पोतों की आवाजाही का गवाह बनती है, जिनमें कार ले जाने वाले कंटेनर शिप, तेल, गैस और अन्य उत्पादों से भरे पोत शामिल हैं। यह नहर चीन और अमेरिका के बीच की व्यापारिक कड़ी बन चुकी है, खासकर तब से जब चीन ने वैश्विक व्यापार में अपनी ताकत बढ़ाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण पनामा की रणनीतिक अहमियत और भी बढ़ गई है, क्योंकि यह नहर चीन से अमेरिका के पूर्वी तट को जोड़ती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमेरिका की चिंता इस बात को लेकर है कि इस नहर से लगभग 75 प्रतिशत कार्गो अमेरिका की ओर जाता है या अमेरिका से आता है। पनामा नहर से होने वाला सालाना कारोबार करीब 270 अरब डॉलर यानी अमरीका के कुल&nbsp;<a href="https://www.bbc.com/hindi/articles/clyvdp1yppko" target="_blank" rel="noreferrer noopener">समुद्री व्यपार</a>&nbsp;का 14% का है। ऐसे में अमेरिका चाहता है कि इस अहम जलमार्ग पर किसी भी तीसरे देश का अप्रत्यक्ष नियंत्रण न हो, क्योंकि यह सीधे तौर पर अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ड्रैगन और ईगल की टक्कर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">2017 में पनामा ने चीन की ‘एक देश, एक नीति’ का समर्थन करते हुए ताइवान से अपने राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे, जिससे चीन के साथ इसके संबंध मजबूत हो गए। इस कदम को अमेरिका ने कड़ी आलोचना की और इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देखा।&nbsp;अमेरिका ने इसका विरोध करते हुए, लैटिन अमेरिका के देशों, खासकर कोलंबिया, के साथ अपने व्यापार और रिश्तों को बढ़ाना शुर कर दिया था। यही नहीं 2017 के बाद से ही अमरीका पनामा के रिश्तों में टकराव जैसी संभावनाएं बनने लगीं थी। इस बढ़ते तनाव के बीच पनामा का चीन के साथ सहयोग और अमेरिका से विवाद, अब एक नया मोड़ ले चुका है, जिसमें पनामा नहर जैसे रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण का सवाल खड़ा हो गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पनामा नहर, जो अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक मार्ग का एक महत्वपूर्ण बिंदु है, अब एक संघर्ष का केंद्र बन चुका है। ट्रंप ने इस नहर के संचालन में चीन के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई थी, जबकि पनामा के राष्ट्रपति ने इसका खंडन किया। लेकिन इस विवाद को केवल एक द्विपक्षीय मुद्दे तक सीमित नहीं रखा जा सकता। यह अमेरिका और चीन के बीच एक व्यापक कोल्ड वॉर का हिस्सा बन चुका है, जिसमें पनामा जैसी छोटी ताकतें भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस समय जब रूस-यूक्रेन युद्ध और इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष जैसे बड़े वैश्विक विवादों की धुरी बनी हुई है, क्या यह नहीं लगता कि हम विश्व युद्ध 3 की शुरुआत के कगार पर खड़े हैं? इन सभी संघर्षों और बढ़ते तनावों को देखते हुए, यह सवाल उठता है कि क्या हम एक नई वैश्विक लड़ाई की ओर बढ़ रहे हैं, जो किसी भी वक्त दुनिया को पूरी तरह से बदल सकती है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>रिलायंस ने शाहरुख़ खान को JIO से निकालकर इस एक्टर को बनाया ब्रांड एम्बेसडर, भाजपा नेता ने किया दावा&#8230;</title>
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		<pubDate>Mon, 22 Jun 2020 09:24:01 +0000</pubDate>
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<p class="wp-block-paragraph">एक बड़ी खबर देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी जिओ को लेकर आ रही है और वो ये की शाहरुख़ खान नाम के फिल्म एक्टर को निकाल कर उसकी जगह अक्षय कुमार को ब्रांड एम्बेसडर बना दिया गया है.&nbsp;जिओ भारत की सबसे बड़ी मोबाइल नेटवर्क कंपनी है और इस कंपनी के ब्रांड प्रमोशन के लिए शाहरुख़ खान को साइन किया गया था, शाहरुख़ खान इस कंपनी का प्रमोशन करता था और इसके बदले उसे एक मोटी फीस भी दी जाती थी.&nbsp; पर अब सोशल मीडिया से प्राप्त रिपोर्ट्स के अनुसार शाहरुख़ खान को निकालकर बाहर कर दिया गया है और उसकी जगह अक्षय कुमार को एम्बेसडर बनाया गया है.&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोशल मीडिया पर रिपोर्ट्स शुरुवाती दौर में है, देखिये</p>



<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">समाचार है कि रिलायंस ने शाहरुख खान को jio सिम के एड से निकाल दिया गया है, और उसकी जगह &quot;अक्षय कुमार&quot; को &quot;सेलेक्ट&quot; किया गया है- &#8211;<a href="https://twitter.com/hashtag/BoycottKhans?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#BoycottKhans</a></p>&mdash; Dr. Sarojini Agarwal (@BjpSarojini) <a href="https://twitter.com/BjpSarojini/status/1274742759522398208?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">June 21, 2020</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
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<figure class="wp-block-embed-twitter wp-block-embed is-type-rich is-provider-twitter"><div class="wp-block-embed__wrapper">
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true"><p lang="hi" dir="ltr">समाचार यह है कि रिलायंस जियो ने<br>शाहरुख खान को अपने एड से निकाल<br>दिया। <br>उसके जगह अक्षय कुमार सर को रखा गया है। <a href="https://twitter.com/hashtag/boycottkhans?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#boycottkhans</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/BoycottKaranJoharGang?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#BoycottKaranJoharGang</a> <a href="https://twitter.com/hashtag/NepotismBollywood?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">#NepotismBollywood</a> <a href="https://t.co/JQhsUkKCNV">pic.twitter.com/JQhsUkKCNV</a></p>&mdash; Amit Singh (@singh_amitspr) <a href="https://twitter.com/singh_amitspr/status/1274747299202134019?ref_src=twsrc%5Etfw" target="_blank" rel="noopener">June 21, 2020</a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script>
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<p class="wp-block-paragraph">बता दें की शाहरुख़ खान अब एक फ्लॉप एक्टर रह गया है, उसकी पिछली कई फिल्मे एकदम फ्लॉप हुई है और देश की जनता ने उसकी फिल्मो को फ्लॉप करवाकर साफ़ कर दिया है की शाहरुख़ खान न अब कोई फिल्म स्टार है और न ही इसकी कोई ब्रांड वैल्यू है</p>



<p class="wp-block-paragraph">दूसरी तरफ अक्षय कुमार की पिछली सभी फिल्मे हिट रही है, अक्षय कुमार सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले एक्टर है और देश की जनता उनकी फिल्मो को लगातार हिट करवाकर साफ़ कर रही है की वो एक फिल्म स्टार है और उनकी ब्रांड वैल्यू भी बहुत ज्यादा है</p>
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