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	<title>जीएसटी &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>Budget से पहले तगड़ा झटका : आज से सिगरेट-तंबाकू-पान मसाला पर नया टैक्स, कीमतें बढ़ेंगी&#8230;जेब पर पड़ेगा असर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Shanu]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 01 Feb 2026 01:35:17 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नई दिल्ली। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करने वाली हैं, लेकिन उससे ठीक पहले ही सरकार ने सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला इस्तेमाल करने वालों को बड़ा झटका दिया है। &#160;1 फरवरी से इन सभी हानिकारक उत्पादों पर नए टैक्स लागू हो जाएंगे, जिसके ... <a title="Budget से पहले तगड़ा झटका : आज से सिगरेट-तंबाकू-पान मसाला पर नया टैक्स, कीमतें बढ़ेंगी&#8230;जेब पर पड़ेगा असर" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/major-blow-before-the-budget-new-tax-on-cigarettes-tobacco-and-paan-masala-from-today-prices-will-increase-your-wallet-will-feel-the-pinch/" aria-label="Read more about Budget से पहले तगड़ा झटका : आज से सिगरेट-तंबाकू-पान मसाला पर नया टैक्स, कीमतें बढ़ेंगी&#8230;जेब पर पड़ेगा असर">Read more</a>]]></description>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="650" height="418" src="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/c0580d0b022da2366d15342dddbe9ffd_1449080328.jpg" alt="" class="wp-image-509899" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/c0580d0b022da2366d15342dddbe9ffd_1449080328.jpg 650w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2026/02/c0580d0b022da2366d15342dddbe9ffd_1449080328-300x193.jpg 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>नई दिल्ली।</strong> केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करने वाली हैं, लेकिन उससे ठीक पहले ही सरकार ने सिगरेट, तंबाकू और पान मसाला इस्तेमाल करने वालों को बड़ा झटका दिया है। &nbsp;1 फरवरी से इन सभी हानिकारक उत्पादों पर नए टैक्स लागू हो जाएंगे, जिसके बाद इनकी कीमतों में भारी उछाल आना तय है। &nbsp;सरकार का यह कदम स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और राजस्व बढ़ाने की दोहरी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>अब लगेगा भारी-भरकम स्वास्थ्य उपकर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के साथ-साथ पान मसाले पर एक नया &#8216;स्वास्थ्य उपकर&#8217; लगाने का फैसला किया है। यह नया टैक्स वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की সর্বোচ্চ 40 फीसदी की दर के ऊपर लगाया जाएगा। यह नई कर व्यवस्था 1 जुलाई 2017 से लागू 28 फीसदी जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर की जगह लेगी। &nbsp;दिसंबर में ही संसद ने इन नए टैक्सों को मंजूरी दे दी थी, जिन्हें अब 1 फरवरी से प्रभावी किया जा रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>MRP के आधार पर तय होगा नया टैक्स</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए भी कमर कस ली है। 1 फरवरी से चबाने वाले तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दा और गुटखा जैसे उत्पादों के लिए अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) पर आधारित मूल्यांकन की एक नई प्रणाली शुरू की जाएगी। इसके तहत, पैकेट पर लिखे गए खुदरा बिक्री मूल्य के आधार पर ही जीएसटी का निर्धारण होगा, जिससे निर्माता कंपनियों के लिए कर की चोरी करना मुश्किल हो जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>निर्माताओं पर नकेल, CCTV और रजिस्ट्रेशन अनिवार्य</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">नए नियमों के तहत पान मसाला बनाने वाली सभी कंपनियों को 1 फरवरी से स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत एक नया पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, निर्माताओं को अपनी सभी पैकिंग मशीनों को कवर करने वाले वर्किंग सीसीटीवी कैमरे लगाने होंगे और उसकी फुटेज को कम से कम 24 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा। उत्पाद शुल्क अधिकारियों को मशीनों की संख्या और उनकी उत्पादन क्षमता की पूरी जानकारी देनी होगी, जिससे किसी भी तरह की धांधली को रोका जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कुल मिलाकर, बजट से ठीक पहले सरकार का यह कदम तंबाकू उत्पादों के खिलाफ एक बड़ी मुहिम का हिस्सा है। जहां एक तरफ इससे सरकारी खजाने को फायदा होगा, वहीं दूसरी ओर बढ़ी हुई कीमतों के कारण लोग इन हानिकारक वस्तुओं के सेवन से हतोत्साहित हो सकते हैं।</p>
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		<title>जनवरी में जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ के पार, जानें देश को कितना हुआ फ़ायदा</title>
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		<pubDate>Sat, 02 Feb 2019 09:31:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली। जीएसटी संग्रह जनवरी 2019 में बढ़कर 1,02,503 करोड़ रुपये पर पहुँच गया जो पिछले वर्ष इसी महीने में संग्रहित राजस्व 89,825 करोड़ रुपये की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष दिसंबर में जीएसटी संग्रह 94,726 करोड़ रुपये, नवंबर 2018 में 97,637 करोड़ रुपये और अक्टूबर में 1,00,710 करोड़ रुपये रहा था। ... <a title="जनवरी में जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ के पार, जानें देश को कितना हुआ फ़ायदा" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/gst-collection-crosses-one-lakh-crores-in-january/" aria-label="Read more about जनवरी में जीएसटी कलेक्शन एक लाख करोड़ के पार, जानें देश को कितना हुआ फ़ायदा">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नयी दिल्ली। जीएसटी संग्रह जनवरी 2019 में बढ़कर 1,02,503 करोड़ रुपये पर पहुँच गया जो पिछले वर्ष इसी महीने में संग्रहित राजस्व 89,825 करोड़ रुपये की तुलना में 14 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष दिसंबर में जीएसटी संग्रह 94,726 करोड़ रुपये, नवंबर 2018 में 97,637 करोड़ रुपये और अक्टूबर में 1,00,710 करोड़ रुपये रहा था। वित्त मंत्रालय ने शनिवार को यहाँ जारी बयान के अनुसार, 31 जनवरी तक 73 लाख 30 हजार जीएसटीआर-3बी रिटर्न भरे गये। चालू वित्त वर्ष में तीसरी बार जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुँचा है। अप्रैल 2018 में जीएसटी संग्रह 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा था।</p>
<p><img decoding="async" class="" src="http://media.webdunia.com/_media/hi/img/article/2017-09/25/full/1506352791-4467.jpg" alt="Image result for à¤à¤¨à¤µà¤°à¥ à¤®à¥à¤ à¤à¥à¤à¤¸à¤à¥ à¤¸à¤à¤à¥à¤°à¤¹" width="685" height="387" /><br />
जनवरी 2019 में कुल 1,02,503 करोड़ रुपये के जीएसटी संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) की राशि 17,763 करोड़ रुपये रही। राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) की राशि 24,826 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) की 51,225 करोड़ रुपये रही। आईजीएसटी में 24,065 कराड़ रुपये आयात पर संग्रहित कर भी शामिल है। उपकर के रूप में 8,690 करोड़ रुपये का राजस्व मिला जिसमें आयात संग्रहित 902 करोड़ रुपये भी शामिल है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images1.livehindustan.com/uploadimage/library/2018/12/06/16_9/16_9_1/GST_1544077782.jpg" /><br />
सरकार ने जनवरी में आईजीएसटी से निपटान में 1,83,444 करोड़ रुपये सीजीएसटी के लिए और 14,677 करोड़ रुपये एसजीएसटी की मद में दिये हैं। नियमित निपटान के बाद केंद्र और राज्य सरकारों की कुल राजस्व प्राप्ति जनवरी में सीजीएसटी में 36,107 करोड़ रुपये और सीजीएसटी में 39,503 करोड़ रुपये थी।</p>
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		<item>
		<title>जनता को और बड़ी राहत देने की तैयारी: GST में 12 और 18 % का स्लैब खत्म कर बनेगा नया मानक दर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 24 Dec 2018 10:29:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली।  वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहले देश में 31 प्रतिशत अप्रत्यक्ष कर लगाने और अब जीएसटी दर में कमी की माँग को लेकर मोदी सरकार पर हमला करने के लिए कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुये सोमवार को कहा कि 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के स्लैबों का विलय कर एक मानक दर ... <a title="जनता को और बड़ी राहत देने की तैयारी: GST में 12 और 18 % का स्लैब खत्म कर बनेगा नया मानक दर" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/merger-of-12-and-18-percent-in-gst-will-soon-become-a-standard-rate-jaitley/" aria-label="Read more about जनता को और बड़ी राहत देने की तैयारी: GST में 12 और 18 % का स्लैब खत्म कर बनेगा नया मानक दर">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली। </strong> वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहले देश में 31 प्रतिशत अप्रत्यक्ष कर लगाने और अब जीएसटी दर में कमी की माँग को लेकर मोदी सरकार पर हमला करने के लिए कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुये सोमवार को कहा कि 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के स्लैबों का विलय कर एक मानक दर तय की जा सकती है। श्री जेटली ने कहा कि जो लोग जीएसटी दर घटाने की माँग करते हैं उनको आत्ममंथन करना चाहिये क्योंकि गैर-जिम्मेदार राजनीति और गैर-जिम्मेदार अर्थव्यवस्था सिर्फ देश को नीचे ले जायेगी।</p>
<p><img decoding="async" src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/indiatoday/images/story/201812/GST_1_0_0.jpeg?wLg59d2rUj3QfdhvYWjalNnjVWH_RjAv" alt="Image result for gst" /></p>
<p>जीएसटी से पहले पूरी दुनिया में भारत में सबसे खराब अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था होने का हवाला देते हुये उन्होंने कहा कि केन्द्र और राज्यों को कई तरह के कर लगाने के अधिकार थे। कुल 17 तरह का कर लगाता था। एक उद्यमी को इस तरह 17 इंस्पेक्टरों, 17 रिटर्न और 17 असेसमेंट का सामना करना पड़ता था। उन्होंने कहा कि जीएसटी से पहले देश में कर की दर बहुत अधिक थी। वैट की मानक दर और उत्पाद शुल्क क्रमश: 14.5 प्रतिशत और 12.5 प्रतिशत थी। इस पर केन्द्रीय विक्रय कर जोड़ा जाता था और इस तरह कर पर कर लगता था। अधिकांश वस्तुओं पर मानक दर 31 प्रतिशत होती थी। इसलिए, करदाताओं के पास सिर्फ दो ही विकल्प होते थे &#8211; अधिक कर चुकाये या कर चोरी करे। इसलिए कर चोरी अधिक होनी तय थी।</p>
<p><img decoding="async" class="" src="https://indiatribune.com/wp-content/uploads/2017/06/Jaitley-GST.png" width="972" height="669" /><br />
मंत्री ने कहा कि देश में कई बाजार हैं। प्रत्येक राज्य में अलग-अलग बाजार हैं क्योंकि कर की दर अलग-अलग हो सकती है। एक राज्य सें दूसरे राज्य में माल बेचना बहुत अधिक होता था क्योंकि राज्योें की सीमाओं पर ट्रकों को घंटों या एक-एक दिन तक रुकना पड़ता था। श्री जेटली ने कहा कि जीएसटी 01 जुलाई 2017 से लागू हुआ। इसने अप्रत्यक्ष कर को पूरी तरह से बदल दिया है।</p>
<p>जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने का पहला चरण लगभग पूरा होने वाला है। इसके लिए लग्जरी और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह पदार्थाें को छोड़कर 28 प्रतिशत की दर के स्लैब को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना है। अभी आम लोगों के उपयोग की सीमेंट ही एक ऐसी वस्तु है जिस पर 28 प्रतिशत कर है। अब अगली प्राथमिकता इस पर जीएसटी को कम करने की है।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images.financialexpress.com/2018/12/jaitley1.jpg" alt="Image result for gst à¤à¤à¤¡ à¤à¥à¤à¤²à¥" /><br />
उन्होंने कहा कि 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो मानक दरों का विलय कर एक दर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है। इन दोनों दरों के मध्य की दर तय की जा सकती है। इसके लिए कर राजस्व बढ़ने तक इंतजार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश में आगे शून्य, पाँच प्रतिशत और एक मानक दर तथा लक्जरी एवं स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह वस्तुओं के लिए अलग दर होनी चाहिए।</p>
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		<title>अभी भी व्यापारियों के गले नहीं उतर रहा जीएसटी, सुलगने लगी विरोध की चिंगारी</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/tragedy-in-traders-for-goods-and-service-tax/</link>
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		<pubDate>Fri, 29 Jun 2018 10:18:48 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[महोली-सीतापुर। केंद्र की मोदी सरकार जहां 1 वर्ष में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की सफलता का ढिंढोरा पीट रही है वही वास्तविक हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। प्रतिमाह 20 ता. को जमा किए जाने वाले रिटर्न की लेट फीस के नाम पर लाखों रुपए की कमाई वस्तु एवं सेवाकर विभाग के ... <a title="अभी भी व्यापारियों के गले नहीं उतर रहा जीएसटी, सुलगने लगी विरोध की चिंगारी" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/tragedy-in-traders-for-goods-and-service-tax/" aria-label="Read more about अभी भी व्यापारियों के गले नहीं उतर रहा जीएसटी, सुलगने लगी विरोध की चिंगारी">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>महोली-सीतापुर।</strong> केंद्र की मोदी सरकार जहां 1 वर्ष में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की सफलता का ढिंढोरा पीट रही है वही वास्तविक हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। प्रतिमाह 20 ता. को जमा किए जाने वाले रिटर्न की लेट फीस के नाम पर लाखों रुपए की कमाई वस्तु एवं सेवाकर विभाग के द्वारा की जा रही है।<br />
मोदी सरकार के द्वारा जोरों-शोरों से पारित कराया गया जीएसटी, गुड्स एंड सर्विस टैक्स, एक देश एक टैक्स की तर्ज पर आरोपित किया गया था। देश में वेट प्रणाली के अंतर्गत माह की 20 तारीख तक तिमाही नक्शे का दाखिला किया जाता था। जिसमें निल के नक्शे के दाखिले पर कोई भी लेट फीस या अन्य शुल्क टैक्स को छोड़कर अदा नहीं करना पड़ता था परंतु अब देश में एक टैक्स के स्थान पर सरकार द्वारा प्रतिमाह 10 तारीख तक जमा होने वाले जीएसटी वन तथा 20 तारीख को जमा होने वाला जीएसटी 3 बी तरह के दो टैक्स लगाए जा रहे हैं।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="alignnone  wp-image-1935" src="http://www.dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/06/gst-goods-and-service-2-300x187.jpg" alt="" width="1027" height="640" srcset="https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/06/gst-goods-and-service-2-300x187.jpg 300w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/06/gst-goods-and-service-2-600x374.jpg 600w, https://dainikbhaskarup.com/wp-content/uploads/2018/06/gst-goods-and-service-2.jpg 610w" sizes="auto, (max-width: 1027px) 100vw, 1027px" /></p>
<p><strong>रिर्टन में विलंब फीस की मनमानी से व्यापारी परेशान</strong></p>
<p>रजिस्टर्ड व्यापारी द्वारा प्रतिमाह नक्शा देने का प्रावधान कर दिया गया है। जिसमें एक भी दिन लेट होने पर 50 से लेकर 20 रूप्या तक का जुर्माना प्रतिदिन के हिसाब से लगाया जाता है और इस पर कोई भी सुनवाई नहीं की जा रही है।</p>
<p>सरकार की जीएसटी के माध्यम से सरलीकरण के बजाय व्यापारियों को दोहरी मार पड़ रही है। सूत्रों की माने तो जीएसटी की साइड 10 से 20 तारीख तक अक्सर बद हो जाया करती है। जिसकी शिकायत के लिए स्थापित कस्टमर केयर, उसमें बैठे लोगों से बात की जाती है तो जिम्मेदार लोग संतुष्टि पूर्वक बात नहीं करते और पूर्ण जानकारी के लिए जीएसटी काउंसिल दिल्ली से संपर्क कर समाधान कराने की बात बताते हैं।</p>
<p>ऐसे में किसी भी व्यक्ति व्यापारी के पास पूंजी है या नहीं विभाग के जिम्मेदारों से इसका कोई भी मतलब नहीं है। जीएसटी में विभाग की ऐसी कार्य शैली से व्यापारियों को खूब चूना लग रहा है। जिससे उनमें जीएसटी व सरकार के प्रति हताशा व निराशा पैदा होती जा रही है। इस मामले में व्यापार कर अधिकारी हरिलाल प्रजापति से बात की गई तो उन्होंने बताया यह मामला सॉफ्टवेयर से कनेक्टेड है बिना पूरा पैसा जमा हुए हमारे पास नहीं आता जो हम इसमें कोई फेरबदल कर सकें।</p>
<p><strong>जीएसटी की पुख्ता जानकारी से विभागीय अधिकारी भी अनभिज्ञ</strong><br />
गुड एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) में जमा की जाने वाली पेनाल्टी की पुख्ता जानकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को भी नहीं है। नक्शा जमा करने वाले व्यक्ति के द्वारा जमा की गई पेनाल्टी में यदि एक भी रूपया कम रह जाता है तो रिटर्न जमा नहीं होता है सिस्टम ही नहीं उठाता है।</p>
<p>पैसा जमा करने के बाद भी वह डिफाल्टर साबित हो रहा है एक तरफ सरकार इंस्पेक्टर राज को कम करने की बात कहती है और दूसरी तरफ हर विभाग में उनकी तैनाती बढाकर व्यापारियों तथा आम जनता को राहत के बजाय परेशानी में डाल रही है।</p>
<p>देखना यह है ऐसे में इस फ्लॉप या सफल जीएसटी टैक्स के नक्शे का दायरा सरकार तिमाही, छमाही, या सालाना कर पाएगी अथवा ऐसे ही व्यापारी बैंक और विभाग के चक्कर लगाकर पिसते रहेंगे। ऐसे में मोदी सरकार संज्ञान लेकर चुनावी वर्ष में व्यापारियों के लिए साल भर में एक या दों बार नक्शे का दाखिला करा कर व्यापारियों को कितनी राहत दे पायेगी यह एक यक्ष-प्रश्न बना हुआ है?</p>
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