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	<title>जॉर्ज फर्नांडीस &#8211; Dainik Bhaskar UP/UK</title>
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		<title>पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल में निधन, स्वाइन फ्लू से थे पीड़ित</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Jan 2019 10:04:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली।  पूर्व रक्षा मंत्री एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार को यहां निधन हो गया।  वह 88 वर्ष के थे। वह पिछले कुछ दिन ने स्वाइन फ्लू से जूझ रहे थे। श्री फर्नांडिस सबसे पहले 1967 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उन्होंने बिहार के मुजफ्फरपुर और नालंदा लोकसभा सीटों का ... <a title="पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल में निधन, स्वाइन फ्लू से थे पीड़ित" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/former-defense-minister-george-fernandes-died-in-88-years-suffering-from-swine-flu/" aria-label="Read more about पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 88 साल में निधन, स्वाइन फ्लू से थे पीड़ित">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>नयी दिल्ली।  पूर्व रक्षा मंत्री एवं वरिष्ठ समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार को यहां निधन हो गया।  वह 88 वर्ष के थे। वह पिछले कुछ दिन ने स्वाइन फ्लू से जूझ रहे थे।<br />
श्री फर्नांडिस सबसे पहले 1967 में लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उन्होंने बिहार के मुजफ्फरपुर और नालंदा लोकसभा सीटों का प्रतिनिधित्व किया। वह कई बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए। उन्होंने संचार, उद्योग, रेलवे और रक्षा मंत्री के तौर पर अपनी सेवाएं दी। जॉर्ज फर्नांडिस के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट किया, &#8216;जॉर्ज साहब ने भारत के राजनीतिक नेतृत्व का सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व किया। निडर, ईमानदार और दूरदर्शी। उन्होंने हमारे देश के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान दिया।</p>
<p><img decoding="async" src="https://images.jansatta.com/2019/01/George-Fernandes-Death-News-main-620x400.jpg?w=680" alt="Image result for à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸" /></p>
<p>वह गरीबों और हाशिए के अधिकारों के लिए सबसे प्रभावी आवाज़ों में से एक थे। उनके निधन से दुखी हूं।&#8217; बता दें कि जॉर्ज फर्नांडिस राज्यसभा और लोकसभा के सदस्य भी रह चुके थे। उन्होने समता पार्टी की स्थापना की थी। रक्षा मंत्री के अलावा वे संचार मंत्री, उद्योगमंत्री, रेलमंत्री आदि जैसे अहम मंत्रालयों का भी कार्यभार संभाल चुके थे। जॉर्ज फर्नांडिस चौदहवीं लोकसभा में मुजफ्फरपुर से जनता दल (यूनाइटेड) के टिकट पर सांसद चुने गए थे। वे 1998 से 2004 तक की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की केन्द्रीय सरकार में रक्षा मंत्री थे। वे 1967 से 2004 तक 9 लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने।</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="" src="https://encrypted-tbn0.gstatic.com/images?q=tbn:ANd9GcSuUyLe2RKKBlkCPzX3ww4xhCZjsQx-yYHaXdaoAiaIndD_HqC1fA" alt="Image result for à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸" width="549" height="440" /></p>
<p>ऑल इंडिया रेलवेमेन फेडरेशन के अध्यक्ष के पद पर रहते हुए उन्होंने 1974 में रेलवे में हड़ताल कराई। 1975 में इमरजेंसी के दौरान उस समय पीएम रहीं इंदिरा गांधी को चुनौती दी। इसके बाद 1976 में उन्हें बड़ौदा डायनामाइट केस में गिरफ्तार कर लिया गया। 1977 के लोकसभा चुनाव में जेल में रहते हुए ही उन्होंने बिहार से मुजफ्फरपुर सीट जीती और उन्हें केंद्रीय उद्योग मंत्री नियुक्त किया गया। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अमेरिकन कंपनी आईबीएम और कोका कोला को निवेश नियमों को उल्लंघन करने पर देश छोड़ के जाने के आदेश दिए थे।</p>
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		<title>गरीबों और वंचितों के मसीहा थे जॉर्ज फर्नांडिस, जानें कुछ अनकही बातें</title>
		<link>https://dainikbhaskarup.com/the-messiah-of-the-poor-and-the-deprived-was-george-fernandes/</link>
		
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		<pubDate>Tue, 29 Jan 2019 09:53:18 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[नयी दिल्ली. भारतीय राजनीति के महारथियों में से एक वरिष्ठ समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस जहां ताकतवर से ताकतवर नेताओं को झुकाने की क्षमता रखते थे वहीं वह गरीबों एवं वंचितों मसीहा भी थे। भारतीय राजनीति में एक अलग मुकाम रखने वाले जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म तीन जून 1930 को एक ईसाई परिवार में हुआ था। ... <a title="गरीबों और वंचितों के मसीहा थे जॉर्ज फर्नांडिस, जानें कुछ अनकही बातें" class="read-more" href="https://dainikbhaskarup.com/the-messiah-of-the-poor-and-the-deprived-was-george-fernandes/" aria-label="Read more about गरीबों और वंचितों के मसीहा थे जॉर्ज फर्नांडिस, जानें कुछ अनकही बातें">Read more</a>]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>नयी दिल्ली.</strong> भारतीय राजनीति के महारथियों में से एक वरिष्ठ समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस जहां ताकतवर से ताकतवर नेताओं को झुकाने की क्षमता रखते थे वहीं वह गरीबों एवं वंचितों मसीहा भी थे।<br />
भारतीय राजनीति में एक अलग मुकाम रखने वाले जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म तीन जून 1930 को एक ईसाई परिवार में हुआ था। वह अंग्रेजी सहित नौ अन्य भारतीय भाषाओं के जानकार थे। वह हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी में धारा प्रवाह बोलते एवं लिखते तो थे ही, साथ में तमिल, मराठी, कन्नड़, उर्दू, मलयाली, तेलुगू, कोंकणी और लैटिन भाषाओं का भी अच्छा ज्ञान रखते थे।</p>
<p><img decoding="async" src="https://punjabkesari.com/wp-content/uploads/2019/01/George-Fernandes4.jpg" /><br />
वर्ष 2002 में गोधरा दंगों के बाद श्री फर्नांडिस गुजरात की सरकार का बचाव करने वाले प्रमुख लोगों में शामिल थे। श्री नरेंद्र मोदी को जब गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटाने की मांग जोर-शोर से चल रही थी, तब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेताओं के एक समूह से कहा था कि यह व्यक्ति (श्री मोदी) हिंदुत्व की राजनीति को रोशनी दिखायेगा।  कर्नाटक में मेंगलोर के रहने वाले जॉर्ज फर्नांडिस जब 16 वर्ष के हुए तो उन्हें एक क्रिश्चियन मिशनरी में पादरी बनने की शिक्षा लेने भेज दिया गया हालांकि चर्च में होने वाले तमाम तरह के रीति रिवाजों को देखकर जल्द ही उनका उससे मोहभंग हो गया। आखिरकार 1949 में 18 साल की उम्र में उन्होंने चर्च छोड़ दिया और रोजगार की तलाश में मुंबई (तत्कालीन बंबई) चले गये।</p>
<p><img decoding="async" src="https://punjabkesari.com/wp-content/uploads/2019/01/George-Fernandes1-600x314.jpg" alt="George Fernandes" /><br />
मुंबई में वह सोशलिस्ट पार्टी और ट्रेड यूनियन आंदोलन के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने लगे जिसके कारण उनकी शुरुआती छवि विद्रोही नेता की बनी। श्री फर्नांडिस उस समय के सबसे मुखर वक्ता राम मनोहर लोहिया को अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। अपने विद्राही तेवर और नेतृत्व के गुण के चलते 1950 तक वह टैक्सी ड्राइवर यूनियन के बेताज बादशाह बन गये थे।  श्री फर्नांडिस बताया करते थे कि जब वह समाजवादी ब्रिगेड में शामिल हुए, उनके पिता ने कहा, “मैं चाहता था कि मेरा बेटा ईश्वर की सेवा करे लेकिन उसने इसकी बजाय शैतानों का साथ देना चुना।”</p>
<p><img decoding="async" src="https://punjabkesari.com/wp-content/uploads/2019/01/George-Fernandes3-600x314.jpg" alt="George Fernandes" /></p>
<p>श्री फर्नांडिस 1967 के लोकसभा चुनाव में बंबई दक्षिण से कद्दावर कांग्रेसी नेता एस. के. पाटिल के खिलाफ उतरे और उन्हें हरा दिया। वर्ष 1973 में वह ‘ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन’ के चेयरमैन चुने गए। भारतीय रेलवे में उस वक्त करीब 14 लाख लोग काम करते थे और सरकार रेलवे कामगारों की कई जरूरी मांगों को कई सालों से दरकिनार कर रही थी। ऐसे में श्री फर्नांडिस ने आठ मई 1974 को देशव्यापी रेल हड़ताल का आह्वान किया और रेल का चक्का जाम हो गया। कई दिनों तक रेल का संचालन ठप रहा।  इसके बाद हरकत में आई सरकार ने पूरी कड़ाई के साथ आंदोलन को कुचलते हुए 30 हजार लोगों को गिरफ्तार कर लिया और हजारों को नौकरी और रेलवे की सरकारी कॉलोनियों से बेदखल कर दिया गया।</p>
<p><img decoding="async" class="" src="https://insightonlinenews.in/wp-content/uploads/2019/01/Jorj-1-1-300x162.jpg" alt="à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸ âà¤à¥à¤°à¥à¤ à¤¦ à¤à¤¾à¤¯à¤à¤ à¤à¤¿à¤²à¤°â à¤«à¥à¤à¤ªà¤¾à¤¥ à¤¸à¥ à¤®à¤à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ à¤¤à¤ à¤à¤¾ à¤¸à¤«à¤°" width="1019" height="550" /></p>
<p>जॉर्ज फर्नांडिस ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा आपातकाल लगाये जाने का पुरजोर विरोध किया था। उन्हें आपातकाल लागू होने की सूचना उस समय मिली, जब वह ओडिशा में अपने परिवार के साथ थे। इसके बाद तत्काल खतरे को भांपकर वह अपनी पत्नी और बच्चे से अलग हो गये। वर्ष 1975 में वह भूमिगत हो गये और सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाने लगे। तमाम सुरक्षा एजेंसियों को धता बताकर वह अपने मिशन पर लगे रहे और गुप्त रूप से सक्रिय रहे। फर्नांडिस को जून 1976 में गिरफ्तार कर लिया गया और इसके बाद उनके सहित 25 लोगों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मामला दर्ज किया जिसे बड़ौदा डायनामाइट मामले के नाम से जाना जाता है। एक बार यह पूछे जाने पर कि क्या लोकतंत्र में ‘डायनामाइट’ जैसी हिंसक चीज के लिए कोई स्थान है, उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सबकुछ जायज है।<br />
<img decoding="async" class="" src="https://insightonlinenews.in/wp-content/uploads/2019/01/Jorj-3-300x148.jpg" alt="à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸ âà¤à¥à¤°à¥à¤ à¤¦ à¤à¤¾à¤¯à¤à¤ à¤à¤¿à¤²à¤°â à¤«à¥à¤à¤ªà¤¾à¤¥ à¤¸à¥ à¤®à¤à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ à¤¤à¤ à¤à¤¾ à¤¸à¤«à¤°" width="1245" height="614" /><br />
इंदिरा गांधी द्वारा चुनावों की घोषणा के साथ ही आपातकारल का अंत हो गया और फर्नांडिस ने 1977 का लोकसभा चुनाव जेल में रहते हुए ही मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से जीता। इसके बाद जनता पार्टी की सरकार में उन्हें उद्योग मंत्री बनाया गया। इसके कुछ ही समय बाद जनता पार्टी के टूटने के बाद फर्नांडिस ने समता पार्टी का गठन किया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन किया।<br />
<img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://insightonlinenews.in/wp-content/uploads/2019/01/Jorg-2-300x162.jpg" alt="à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸ âà¤à¥à¤°à¥à¤ à¤¦ à¤à¤¾à¤¯à¤à¤ à¤à¤¿à¤²à¤°â à¤«à¥à¤à¤ªà¤¾à¤¥ à¤¸à¥ à¤®à¤à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ à¤¤à¤ à¤à¤¾ à¤¸à¤«à¤°" width="1135" height="613" /><br />
फर्नांडिस ने अपने राजनीतिक जीवन में कई मंत्रालयों का कार्यभार संभाला, जिनमें संचार, उद्योग, रेल और रक्षा मंत्रालय शामिल है। रेल मंत्री रहते हुए कोंकण रेलवे परियोजना के विकास का श्रेय जहां उन्हें दिया जाता है वहीं उनके रक्षा मंत्री रहने के दौरान देश को पोखरण में परमाणु परीक्षण और कारगिल युद्ध में विजय जैसी उपलब्धियां हासिल हुई।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://insightonlinenews.in/wp-content/uploads/2019/01/Jorj-4-300x148.jpg" alt="à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸ âà¤à¥à¤°à¥à¤ à¤¦ à¤à¤¾à¤¯à¤à¤ à¤à¤¿à¤²à¤°â à¤«à¥à¤à¤ªà¤¾à¤¥ à¤¸à¥ à¤®à¤à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ à¤¤à¤ à¤à¤¾ à¤¸à¤«à¤°" width="653" height="322" /></p>
<p>रक्षा मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल हालांकि खासा विवादित भी रहा। ताबूत घोटाले और तहलका खुलासे में फर्नांडिस का नाम घसीटा गया। इसके कारण उन्होंने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया लेकिन बाद में अदालत से उन्हें क्लीन चिट मिल गयी।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://insightonlinenews.in/wp-content/uploads/2019/01/Jorj-5-300x148.jpg" alt="à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸ âà¤à¥à¤°à¥à¤ à¤¦ à¤à¤¾à¤¯à¤à¤ à¤à¤¿à¤²à¤°â à¤«à¥à¤à¤ªà¤¾à¤¥ à¤¸à¥ à¤®à¤à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ à¤¤à¤ à¤à¤¾ à¤¸à¤«à¤°" width="859" height="424" /><br />
कहा जाता है कि जॉर्ज फर्नांडिस भारत के एकमात्र रक्षामंत्री हैं, जिन्होंने 6600 मीटर ऊंचे सियाचिन ग्लेशियर का 18 बार दौरा किया था। वह रक्षामंत्री रहते हुए अपने बंगले के दरवाजे कभी बंद नहीं करते थे। वह किसी नौकर की सेवा भी नहीं लेते थे और अपने काम स्वयं किया करते थे।</p>
<p><img loading="lazy" decoding="async" class="" src="https://insightonlinenews.in/wp-content/uploads/2019/01/Jorj-300x148.jpg" alt="à¤à¥à¤°à¥à¤ à¤«à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤à¤¡à¤¿à¤¸ âà¤à¥à¤°à¥à¤ à¤¦ à¤à¤¾à¤¯à¤à¤ à¤à¤¿à¤²à¤°â à¤«à¥à¤à¤ªà¤¾à¤¥ à¤¸à¥ à¤®à¤à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ à¤¤à¤ à¤à¤¾ à¤¸à¤«à¤°" width="699" height="345" /><br />
फर्नांडिस का विवाह 22 जुलाई 1971 को पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं जाने माने शिक्षाविद् हुमायूं कबीर की बेटी लैला से हुई हालांकि बाद में नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता जया जेटली के साथ नजदीकियों के कारण लैला कबीर 1980 में जॉर्ज की जिंदगी से निकल गयीं। उनका बेटा सीन फर्नांडिस न्यूयार्क में इनवेस्टमेंट बैंकर है।</p>
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